भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में जब भी “महासंग्राम” या “क्रॉसओवर” का नाम आता है, तो पाठकों का उत्साह अपने आप बढ़ जाता है। “सर्पद्वन्द्व” सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं है, बल्कि यह दो अलग-अलग कॉमिक्स यूनिवर्स के सबसे ताकतवर योद्धाओं—नागराज और तौसी—के बीच होने वाली ज़बरदस्त भिड़ंत की कहानी है। अनुपम सिन्हा जी ने जिस तरह इन दोनों किरदारों को एक ही मंच पर उतारा है, वह न केवल देखने में शानदार है, बल्कि भावनाओं के स्तर पर भी गहरा असर छोड़ता है।
कहानी की पृष्ठभूमि और कथानक (Plot Summary)
कहानी की शुरुआत ही भारी तनाव के साथ होती है। नागराज, जो महानगर का रक्षक है, एक बेहद खतरनाक “पाताल विष” से संक्रमित हो चुका है। यह ज़हर उसे धीरे-धीरे मौत की तरफ़ ले जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, पाताल लोक के सम्राट और इच्छाधारी सर्प तौसी अपनी साम्राज्ञी अप्सरा (श्री) के अचानक गायब हो जाने से बेहद गुस्से और दुख में है।

तौसी को खबर मिलती है कि उसकी अप्सरा को महानगर में नागराज और उसके साथियों के साथ देखा गया है। हालात और गलतफहमियाँ कुछ ऐसी बन जाती हैं कि तौसी को लगने लगता है कि नागराज उसकी पत्नी को उससे दूर रख रहा है। तौसी, जो स्वभाव से ही उग्र है और अपनी ताकत पर पूरा भरोसा रखता है, नागराज को सबक सिखाने के लिए सतह यानी पृथ्वी पर आ जाता है।
इसी बीच महानगर में एक कानूनी ड्रामा भी चल रहा है। एडवोकेट तिरुमला “नागराज बनाम स्टेट” का केस लड़ रही हैं। राजकुमारी विसर्पी को शक होता है कि तिरुमला ही असल में अप्सरा है, जो या तो अपनी याददाश्त खो चुकी है या किसी गहरे राज़ की वजह से छिपी हुई है। जब विसर्पी “राजदंड” की शक्ति से तिरुमला का असली रूप सामने लाने की कोशिश करती है, तो कहानी और भी उलझ जाती है।

कहानी का सबसे बड़ा आकर्षण वह पल है, जब नागराज और तौसी आमने-सामने होते हैं। एक तरफ़ अनुभव और संयम वाला नागराज है, तो दूसरी तरफ़ गुस्से और अपार शक्ति से भरा तौसी। यह टकराव सिर्फ़ ताकत का नहीं, बल्कि सोच, मर्यादा और सिद्धांतों का भी है।
चरित्र चित्रण (Character Analysis)

नागराज: इस कॉमिक्स में नागराज को बीमारी की वजह से एक कमजोर हालत में दिखाया गया है, जो उसे और ज़्यादा इंसानी बना देता है। वह लड़ाई नहीं चाहता, लेकिन आत्मरक्षा और सच्चाई के लिए उसे मजबूर होना पड़ता है। उसकी यह मजबूरी पाठकों को उसके और करीब ले आती है।
तौसी: तौसी को यहाँ एक क्लासिक “एंटी-हीरो” की तरह पेश किया गया है। उसका प्रेम ही उसका गुस्सा बन जाता है। उसकी उड़ान, उसके पंख और हाथों की ताकत उसे नागराज के बराबर का खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बनाती है। अनुपम सिन्हा ने तौसी के उस उग्र स्वभाव को बखूबी दिखाया है, जो कभी “तुलसी कॉमिक्स” की पहचान रहा है।
विसर्पी: विसर्पी इस कहानी में एक समझदार रणनीतिकार और मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरती है। जब नागराज कमजोर पड़ता है, तब वही मोर्चा संभालती है। “राजदंड” के प्रति उसका सम्मान और उसका सही इस्तेमाल कहानी को अहम मोड़ देता है।
जी-18 (G-18): तौसी का दोस्त और ताकतवर रोबोट योद्धा, जो इस लड़ाई में तौसी का साथ देता है। उसका सामना नागराज के साथियों, यानी पंचनागों से होना, कहानी के रोमांच को और बढ़ा देता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration)

अनुपम सिन्हा को “भारतीय कॉमिक्स का गॉडफादर” क्यों कहा जाता है, यह बात “सर्पद्वन्द्व” के हर पन्ने में साफ दिखाई देती है। एक्शन सीन के दौरान पैनल्स की बनावट इतनी तेज़ और जीवंत है कि पढ़ते समय किसी फिल्म के चलने जैसा एहसास होता है। खास तौर पर मेट्रो ट्रेन के ऊपर होने वाला युद्ध दृश्य कला का शानदार उदाहरण है। तौसी के पंखों की डिजाइन, नागराज के शरीर के स्केल्स और पाताल लोक के अलग-अलग स्तर—अतल, वितल और सुतल—का बारीकी से किया गया चित्रण अनुपम सिन्हा की डिटेलिंग के प्रति लगन को दिखाता है। साथ ही, भक्त रंजन और प्रदीप सहरावत का रंग संयोजन कॉमिक्स को आधुनिक और जीवंत रूप देता है, जहाँ गहरे रंगों का सही इस्तेमाल कहानी के तनाव और माहौल को और असरदार बना देता है।
संवाद और पटकथा (Script and Dialogue)

संवादों में वही भारीपन है जो पौराणिक और सुपरहीरो कॉमिक्स में चाहिए होता है। “अतुल! वितल! सुतल!…” जैसे शब्द पाताल लोक की गहराई और रहस्यमय माहौल को बखूबी पेश करते हैं। नागराज और तौसी के बीच होने वाली बहस सिर्फ़ गाली-गलौज नहीं है, बल्कि उनके गौरव और एक-दूसरे के प्रति छुपे हुए सम्मान को भी दिखाती है। लेखक ने कहानी में सस्पेंस बनाए रखा है, जिससे पाठक अगले भाग “सर्पयज्ञ” के लिए उत्सुक हो जाता है।
समीक्षा के मुख्य बिंदु: क्यों पढ़ें?

‘सर्पद्वन्द्व’ 90 के दशक के पाठकों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। यहाँ तौसी और नागराज दो अलग-अलग युगों के महानायक एक साथ दिखाई देते हैं, जो जबरदस्त नॉस्टेल्जिया पैदा करता है। कॉमिक्स का कथानक केवल एक्शन तक सीमित नहीं है—यह जासूसी, तिरुमला के रहस्य, तौसी के विलाप और नागद्वीप के राजनीतिक संकट का सुंदर मिश्रण पेश करता है।
मेट्रो की पटरियों पर होने वाला युद्ध भारतीय कॉमिक्स इतिहास के सबसे बेहतरीन दृश्यों में से एक है, जिसमें “चुम्बकध्वज” और “अदृश्य ध्वज” जैसी नई शक्तियों का परिचय रोमांच को चरम पर ले जाता है। कहानी की सबसे बड़ी ताकत इसकी भावनात्मक गहराई है; जहाँ एक ओर अपनी पत्नी के लिए तौसी की तड़प पाठक को भावुक करती है, वहीं नागराज का मृत्यु के करीब होकर भी दूसरों की रक्षा करना इसे केवल फंतासी से ऊपर उठाकर एक जीवंत अनुभव बना देता है।
कुछ कमियाँ (Minor Flaws)
हालांकि यह कॉमिक्स शानदार है, लेकिन कुछ नए पाठकों के लिए जिन्होंने ‘सर्पसत्र’ का पिछला भाग नहीं पढ़ा है, कहानी को तुरंत समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। साथ ही, कुछ जगहों पर संवाद बहुत लंबे हैं, जिससे एक्शन की गति थोड़ी धीमी पड़ जाती है। लेकिन ये कमियाँ पूरे अनुभव के सामने नगण्य हैं।
निष्कर्ष
‘सर्पद्वन्द्व’ भारतीय कॉमिक्स उद्योग के पुनर्जागरण का बेहतरीन उदाहरण है। यह अनुपम सिन्हा की कल्पनाशीलता और मनोज गुप्ता के जुनून का संगम है। यह कॉमिक्स हमें दिखाती है कि महान शक्तियों के टकराने पर विनाश तो निश्चित है, लेकिन सत्य की राह हमेशा कठिन होती है।
यदि आप नागराज के फैन हैं, तो यह कॉमिक्स आपके संग्रह में अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। और अगर आप तौसी को जानते हैं, तो उसे इस नए अवतार में देखकर आप दंग रह जाएंगे। यह केवल दो सांपों की लड़ाई नहीं है, बल्कि दो संस्कृतियों, दो यादों और दो महान नायकों का “द्वंद्व” है।
अंतिम निर्णय: 5 में से 4.8 सितारे। यह कॉमिक्स हर उस व्यक्ति को पढ़नी चाहिए जो भारतीय सुपरहीरोज़ से प्यार करता है। कहानी अब ‘सर्पयज्ञ’ की ओर बढ़ रही है, जहाँ आग और प्रतिशोध की लपटें और भी ऊँची उठेंगी।
