यह समीक्षा मनोज कॉमिक्स (Manoj Comics) द्वारा प्रकाशित और ‘तूफान’ (Toofan) सीरीज़ की एक बेहद दमदार और रोमांच से भरी कॉमिक्स “भस्माकंट” (Bhasmakant) पर आधारित है। 90 के दशक में मनोज कॉमिक्स ने भारतीय पाठकों को ‘तूफान’ जैसे किरदार के ज़रिए विज्ञान, एक्शन और साहस का ऐसा मेल दिखाया था जो उस समय काफी नया और अलग लगता था। “भस्माकंट” इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। यह कॉमिक्स सिर्फ तेज़-तर्रार एक्शन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें एक ऐसे विलेन की कहानी भी दिखाई गई है जिसकी पृष्ठभूमि भावनात्मक है और जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर देती है।
आग और आतंक का मेल

कॉमिक्स की शुरुआत एक बेहद डरावने और तनाव से भरे दृश्य से होती है। एक ऊँची इमारत धू-धू कर जल रही है और आग इतनी भयानक है कि बुझने का नाम ही नहीं ले रही। बाहर खड़े लोग, दमकलकर्मी और बचाव दल सभी परेशान हैं, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि यह आग साधारण क्यों नहीं लग रही। इसी अफरा-तफरी के बीच लोगों के मन में यह डर बैठ जाता है कि शायद उनका पसंदीदा नायक ‘तूफान’ इस आग में फँसकर ज़िंदा नहीं बच पाया होगा। लेकिन तूफान ऐसा नायक नहीं है जो इतनी आसानी से हार मान ले। उसका यही जबरदस्त प्रवेश पाठकों के दिलों में सिहरन पैदा करता है और कहानी के प्रति जिज्ञासा और भी बढ़ा देता है।
प्रतिशोध की दहकती ज्वाला
कहानी आगे बढ़ते ही तूफान के जीवन और मौत की जंग सामने आती है। वह जलती हुई इमारत के मलबे में दबा हुआ है, चारों तरफ आग और धुआँ है। यहाँ तूफान का असली जज़्बा दिखाई देता है—उसका ‘सरवाइवल इंस्टिंक्ट’, यानी किसी भी हाल में ज़िंदा रहने की इच्छा। अपनी ताकत और पास पड़े एक लोहे के पाइप की मदद से वह भारी मलबा हटाता है, शीशा तोड़ता है और किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब हो जाता है।

इसके बाद कहानी में एंट्री होती है मुख्य विलेन ‘भस्माकंट’ की। भस्माकंट कोई साधारण अपराधी नहीं है। उसके हाथों से भयानक आग की लपटें निकलती हैं, और जहाँ भी वह जाता है, तबाही मच जाती है। शहर में हर तरफ दहशत फैल जाती है और उसका मकसद साफ है—सिर्फ और सिर्फ विनाश। तूफान और भस्माकंट की पहली टक्कर बेहद खतरनाक साबित होती है। इस भिड़ंत में तूफान को जल्दी ही समझ आ जाता है कि भस्माकंट की आग उसकी बेल्ट से निकलने वाली किरणों से भी कहीं ज़्यादा ताकतवर है। लड़ाई के दौरान तूफान मुश्किल से अपनी जान बचा पाता है, लेकिन उसके कपड़े आग में जल जाते हैं और उसे मजबूरन प्रोफेसर भास्कर की मदद लेनी पड़ती है।

कहानी का सबसे भावुक और असरदार हिस्सा भस्माकंट का फ्लैशबैक है। यहाँ पता चलता है कि भस्माकंट असल में कोई राक्षस नहीं, बल्कि एक समय पर एक इंसान था—वैज्ञानिक डॉ. रामानंद रेड्डी। वह एक ऐसी रासायनिक आग (Chemical Fire) पर रिसर्च कर रहा था जिसे पानी से भी बुझाया नहीं जा सकता। दुर्भाग्य से, एक प्रयोगशाला हादसे में वह बुरी तरह जल जाता है। लेकिन सबसे बड़ा सदमा उसे तब लगता है जब उसका साथी ‘गुप्ता’ उसे बचाने की बजाय आग में मरने के लिए छोड़ देता है। आग ने उसका चेहरा बुरी तरह बिगाड़ दिया, लेकिन उसी आग ने उसके शरीर को एक खौफनाक शक्ति भी दे दी—आग उगलने की शक्ति। यहीं से डॉ. रामानंद रेड्डी खत्म हो जाता है और जन्म लेता है ‘भस्माकंट’। अब वह अपने साथ हुए धोखे और अन्याय का बदला सिर्फ एक इंसान से नहीं, बल्कि पूरे शहर को जलाकर लेना चाहता है।
कहानी का चरमोत्कर्ष (Climax) नेशनल फायर म्यूज़ियम के उद्घाटन समारोह में देखने को मिलता है। यह एक प्रतीकात्मक जगह है, जहाँ आग से जुड़ी चीज़ों का जश्न मनाया जा रहा है, और वहीं भस्माकंट तबाही मचाने पहुँच जाता है। तूफान अपनी सुपरबाइक, मिसाइलों और अपनी तेज़ बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए उसका पीछा करता है। अंत में कहानी एक बारूद के गोदाम तक पहुँचती है, जहाँ भस्माकंट की अपनी ही भयानक आग उसके विनाश का कारण बन जाती है। इस तरह कहानी एक ज़बरदस्त और यादगार अंत के साथ खत्म होती है, जो पाठकों के दिमाग में लंबे समय तक बना रहता है।
पात्र विश्लेषण (Character Study)

तूफान (Toofan):
इस कॉमिक्स में तूफान को किसी ऐसे सुपरहीरो की तरह नहीं दिखाया गया है जो हर हाल में अजेय हो। यहाँ वह ज़्यादा एक समझदार और सोचने-समझने वाला रणनीतिकार लगता है। जब वह देखता है कि पानी से आग बुझ ही नहीं रही, तो वह घबराता नहीं है और न ही हार मानता है। बल्कि वह यह जानने की कोशिश करता है कि आग के पीछे का विज्ञान क्या है, उसका केमिकल कंपोज़िशन क्या हो सकता है। उसकी यही सोच, उसकी बहादुरी और वैज्ञानिक नजरिया उसे बाकी सुपरहीरो से अलग बनाता है और उसका किरदार और भी मज़बूत हो जाता है।
भस्माकंट (Bhasmakant – The Tragic Villain):
भस्माकंट मनोज कॉमिक्स के सबसे यादगार और दमदार विलेन में से एक है। वह सिर्फ इसलिए बुरा नहीं है क्योंकि कहानी को एक विलेन चाहिए, बल्कि वह हालात और धोखे का शिकार है। उसका चेहरा आग में जल चुका है और उसी तरह उसकी आत्मा भी बदले की आग में जल रही है। पाठक उसके किए कामों से डरते भी हैं, लेकिन उसके अतीत को जानने के बाद उसके लिए थोड़ी सहानुभूति भी महसूस करते हैं। यही बात उसके किरदार को साधारण विलेन से कहीं ज़्यादा गहरा बना देती है।
प्रोफेसर भास्कर:
प्रोफेसर भास्कर तूफान के मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। उनका किरदार कहानी में विज्ञान और तर्क का आधार तैयार करता है। जब भी तूफान मुश्किल में पड़ता है, प्रोफेसर भास्कर की समझ और ज्ञान कहानी को सही दिशा देने में मदद करता है।
चित्रांकन और कला (Art and Graphics)

दिलीप कदम और बसवराज वाकड़े का चित्रांकन इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताकत है। 90 के दशक की प्रिंटिंग तकनीक होने के बावजूद, आग की लपटों का असरदार चित्रण, भस्माकंट का डर पैदा करने वाला चेहरा और तूफान की सुपरबाइक के एक्शन सीन बेहद शानदार लगते हैं। खास तौर पर रंगों का इस्तेमाल ध्यान खींचता है। आग के लिए गहरे पीले और नारंगी रंग पन्नों पर एक अलग ही गर्माहट और तनाव पैदा करते हैं। एक्शन सीन में ‘धड़ाक’, ‘धूम’ और ‘बड़ाम’ जैसे ध्वनि शब्द कॉमिक्स को और ज़्यादा जीवंत बना देते हैं।
लेखन और पटकथा (Script and Writing)
नाजरा खान की पटकथा कसी हुई और सटीक है। कहानी कहीं भी बेवजह नहीं भटकती। एक तरफ वर्तमान में चल रहा संघर्ष है, तो दूसरी तरफ फ्लैशबैक के ज़रिए विलेन के अतीत को दिखाया गया है, जिससे उसके इरादे साफ समझ में आते हैं। संवाद छोटे लेकिन असरदार हैं। भस्माकंट का यह कहना कि, “आज इस म्यूजियम का उद्घाटन नहीं, तुम सबकी मौत का उद्घाटन होगा,” उसके गुस्से और पागलपन को बहुत अच्छी तरह सामने रखता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Theme)

मनोज कॉमिक्स की खास बात हमेशा से यही रही है कि वे मनोरंजन के साथ-साथ बच्चों और पाठकों को विज्ञान की छोटी-छोटी बातें भी सिखाती थीं। इस कॉमिक्स में ‘सोडियम नाइट्रेट’ और ‘केमिकल फायर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे साफ पता चलता है कि लेखक ने कहानी पर रिसर्च किया था। यह दिखाया गया है कि रासायनिक आग को पानी से नहीं बुझाया जा सकता, जो उस समय के पाठकों के लिए नया और काफी दिलचस्प तथ्य रहा होगा।
भावनात्मक गहराई (Emotional Depth)
“भस्माकंट” सिर्फ एक सुपरहीरो की जीत की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस इंसान की कहानी भी है जिसके अंदर का राक्षस हालात ने जगा दिया। रामानंद रेड्डी एक अच्छा इंसान था, लेकिन परिस्थितियों और अपने ही दोस्त के धोखे ने उसे भस्माकंट बना दिया। कहानी का अंत भी अपने आप में विडंबनापूर्ण है। भस्माकंट उसी बारूद के ढेर में मारा जाता है, जिसे उसकी अपनी ही आग ने सुलगाया था।
निष्कर्ष: एक कालजयी रचना

“भस्माकंट” मनोज कॉमिक्स के स्वर्ण युग की एक प्रतिनिधि और यादगार कॉमिक्स है। यह हमें यह याद दिलाती है कि अच्छी कॉमिक्स बनाने के लिए सिर्फ एक्शन काफी नहीं होता, बल्कि एक मज़बूत विलेन और ठोस कहानी भी उतनी ही ज़रूरी होती है। तूफान का किरदार आज भी उतना ही प्रेरणादायक और प्रासंगिक लगता है।
समीक्षा के मुख्य बिंदु:
सकारात्मक पक्ष यह है कि इसमें विलेन की ओरिजिन स्टोरी बेहद मजबूत है, एक्शन जबरदस्त है और कहानी का वैज्ञानिक आधार इसे अलग पहचान देता है।
नकारात्मक पक्ष यह है कि कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी तेज़ी से आगे बढ़ती है, जिससे कुछ भावनात्मक दृश्यों को और विस्तार मिल सकता था।
अंतिम निर्णय:
अगर आप पुरानी भारतीय कॉमिक्स के प्रशंसक हैं, तो “भस्माकंट” एक ऐसी कॉमिक्स है जिसे ज़रूर पढ़ना चाहिए। यह सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करती, बल्कि यह भी सिखाती है कि बदले की आग आखिरकार उसी इंसान को जला देती है जो उसे जलाता है।
