सीरीज के इस अंतिम भाग का शीर्षक ‘W.W.W.’ बहुत ही चतुराई से रखा गया है। एक तरफ यह इंटरनेट की दुनिया (World Wide Web) की ओर इशारा करता है, वहीं कहानी के हिसाब से इसका मतलब है—एक ऐसा जाल जो पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए तैयार है। कैम्ब्रिज, जो कभी पढ़ाई-लिखाई का बड़ा केंद्र था, अब एक खतरनाक लैब बन चुका है जहाँ ‘स्पाइडर’ अपनी म्यूटेंट सेना तैयार कर रहा है। यह अंक सिर्फ एक सुपरहीरो और विलेन की लड़ाई भर नहीं है, बल्कि समय के खिलाफ एक खतरनाक दौड़ है, जहाँ दांव पर पूरी इंसानियत की सुरक्षा लगी हुई है।
पिछले अंकों की कड़ियाँ: एक उलझा हुआ अतीत

समीक्षा के इस मोड़ पर पिछले दो भागों (‘स्पाइडर’ और ‘वेबसाइट’) को याद करना जरूरी हो जाता है। कहानी की शुरुआत हुई थी डिन से—एक कमजोर छात्र, जो सुपरहीरो बनने की चाह में खुद ही राक्षस बन बैठा। लेकिन जैसे-जैसे हम तीसरे भाग ‘W.W.W.’ में आगे बढ़ते हैं, पाठक को महसूस होता है कि जो कुछ अब तक दिखाया गया था, वह पूरा सच नहीं था। पिछले दो अंकों में जो रहस्य बुना गया था, उसकी परतें इस अंतिम भाग में धीरे-धीरे खुलती हैं। यह हिस्सा ध्रुव की जासूसी समझ और पाठकों के धैर्य—दोनों की अच्छी परीक्षा लेता है।
नकाब के पीछे का असली चेहरा: कॉमिक्स जगत का सबसे बड़ा ‘ट्विस्ट’

इस अंक की सबसे बड़ी ताकत इसका क्लाइमेक्स ट्विस्ट है। पूरी सीरीज के दौरान पाठकों को यही यकीन दिलाया गया कि चश्मा पहनने वाला कमजोर डिन ही ‘स्पाइडर’ है। लेकिन ध्रुव अपनी तेज बुद्धि से उस सच्चाई को सामने लाता है, जिसे कोई पकड़ नहीं पाया था। असली विलेन डिन नहीं, बल्कि फिट्ज़ (Fitz) निकलता है! फिट्ज़ ने न सिर्फ शक्तियाँ हासिल कीं, बल्कि बड़ी चालाकी से मेकअप और एक्टिंग का सहारा लेकर डिन को फँसा दिया, ताकि पुलिस और ध्रुव का ध्यान असली अपराधी से हट जाए। यह खुलासा पाठकों के लिए सचमुच बिजली गिरने जैसा था, और यही मोड़ इस सीरीज को एक यादगार ‘कल्ट क्लासिक’ बना देता है।
श्वेता का रूपांतरण: एक भाई की सबसे कठिन अग्निपरीक्षा

ध्रुव की बहन श्वेता, जो खुद एक बहादुर फाइटर और होनहार साइंस स्टूडेंट है, इस अंक में एक डरावने मोड़ पर खड़ी नजर आती है। स्पाइडर उसे भी अपने जैसा म्यूटेंट बना देता है (या कम से कम ऐसा दिखाया जाता है)। ध्रुव के लिए यह लड़ाई अब सिर्फ अपराधियों को पकड़ने की नहीं रह जाती, बल्कि अपनी बहन की जान बचाने और उसकी इंसानियत वापस लाने की बन जाती है। एक भाई और बहन के बीच का यह शारीरिक और मानसिक टकराव दिल को झकझोर देता है। श्वेता का वह ‘स्पाइडर लुक’ अनुपम सिन्हा की शानदार कलाकारी का बेहतरीन नमूना है, जहाँ मासूमियत और खतरनाक रूप—दोनों एक ही चेहरे पर दिखाई देते हैं।
ध्रुव की ‘जासूसी’ बनाम स्पाइडर की ‘अटोमिक फायर’

इस अंक में स्पाइडर की ताकतें अपने पूरे उफान पर दिखती हैं। अब वह सिर्फ जाले फेंकने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके शरीर के अंदर ‘अटोमिक फायर’ यानी परमाणु ऊर्जा की आग जल रही है। यहाँ ध्रुव एक बार फिर साबित करता है कि वह सुपर कमांडो क्यों कहलाता है। बिना किसी सुपरपावर के, वह सिर्फ अपने बेल्ट में मौजूद गैजेट्स और कॉमन सेंस के दम पर मुकाबला करता है। स्पाइडर की दीवारों से चिपकने की ताकत को खत्म करने के लिए ‘ग्रीस पेंट’ का इस्तेमाल और उसकी आग को काबू में करने के लिए विज्ञान का सहारा लेना—ये सब ध्रुव के किरदार की असली खूबी दिखाते हैं।
जायंट व्हील पर तांडव: विज्ञान और साहस का संगम

कहानी का आखिरी मुकाबला एक मेले के ‘जायंट व्हील’ (Giant Wheel) पर होता है, और यह दृश्य पूरी तरह फिल्मी एहसास देता है। ध्रुव समझ चुका होता है कि स्पाइडर के शरीर के अंदर का रेडिएशन उसे एक चलता-फिरता बम बना चुका है। ऐसे में ध्रुव एक जबरदस्त वैज्ञानिक प्लान बनाता है। वह हवा की दिशा बदलने के लिए जायंट व्हील की प्लेट्स मोड़ देता है और आग के भयंकर गोलों के बीच से एंटी-सीरम स्पाइडर तक पहुँचा देता है। यह पूरा सीन इतना रोमांचक है कि पाठक सचमुच सांस रोककर पन्ने पलटने पर मजबूर हो जाता है।
अनुपम सिन्हा की तूलिका: दृश्यों में छिपी जीवंतता

अनुपम सिन्हा के बारे में जितना कहा जाए, उतना कम ही लगता है। ‘W.W.W.’ में उन्होंने म्यूटेंट मकड़ियों की पूरी फौज जिस तरह दिखाई है, वह देखते ही बनती है। शहर में मची तबाही, जलती हुई इमारतें और खास तौर पर स्पाइडर का अंतिम रूप—जहाँ उसका शरीर रेडिएशन के दबाव से फटने को होता है—सब कुछ बेहद बारीकी से उकेरा गया है। रंगों का चुनाव (खासकर गहरा हरा और नारंगी) परमाणु खतरे और जहरीले माहौल को पूरी तरह महसूस करा देता है। सच कहें तो हर पैनल अपने आप में एक अलग कहानी सुनाता है।
पिता का दुख और पुत्र का अहंकार: रघुपति और फिट्ज़
कहानी में ध्रुव के ताऊजी (रघुपति) का किरदार दिल को छू लेने वाला है। जब उन्हें पता चलता है कि जिस राक्षस को खत्म करने के लिए वे हथियार उठाए खड़े हैं, वह उनका अपना बेटा फिट्ज़ ही है, तो कहानी अचानक गहरे भावनात्मक मोड़ पर पहुंच जाती है। यह हिस्सा साफ दिखाता है कि गलत संगत और बेवजह का अहंकार सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को तोड़ देता है। फिट्ज़ का अंत एक दुखभरी चेतावनी जैसा लगता है—कि ताकत का गलत इस्तेमाल आखिर में खुद के विनाश का कारण बनता है।
‘एटॉमिक प्रेशर’ और विलेन का अंत: एक बुराई का खात्मा

स्पाइडर (फिट्ज़) का अंत काफी डरावना और प्रतीकात्मक है। उसके शरीर के अंदर बढ़ चुका ‘एटॉमिक प्रेशर’ इतना ज्यादा हो जाता है कि वह उसे संभाल नहीं पाता। ध्रुव उसे बचाने की कोशिश जरूर करता है, लेकिन फिट्ज़ का अहंकार उसे मदद स्वीकार नहीं करने देता। आखिरकार उसका विस्फोट के साथ खत्म होना इस बात का संकेत है कि नफरत और बदले की आग अंत में इंसान को खुद ही राख बना देती है।
सीरीज का संदेश: सुपरहीरो वह नहीं जिसके पास ताकत है
पूरी ‘मकड़जाल’ सीरीज का असली संदेश बहुत साफ है—सुपरहीरो बनने के लिए किसी रेडियोधर्मी मकड़ी के काटने या लैब में रेडिएशन लेने की जरूरत नहीं होती। असली हीरो वही है जो मुश्किल हालात में भी सही रास्ता और सच्चाई का साथ न छोड़े। डिन और फिट्ज़ ने शक्तियाँ तो हासिल कर लीं, लेकिन वे हीरो नहीं बन पाए। वहीं ध्रुव ने अपनी सामान्य मानवीय सीमाओं में रहकर भी वह कर दिखाया, जो कोई म्यूटेंट नहीं कर सका।
निष्कर्ष: एक अमर गाथा का गौरवशाली समापन
‘W.W.W.’ राज कॉमिक्स की उन कहानियों में से है, जिसे आप बार-बार पढ़ना चाहेंगे। यह सिर्फ ध्रुव की बहादुरी की कहानी नहीं है, बल्कि इंसानी स्वभाव, धोखे, विज्ञान और न्याय की एक उलझी लेकिन बेहद रोचक दास्तान है। इस त्रयी ने साबित कर दिया कि भारतीय लेखकों और कलाकारों की कल्पनाशक्ति दुनिया के किसी भी बड़े कॉमिक्स पब्लिशर (जैसे मार्वल या डीसी) से कम नहीं है।
अगर आप एक पूरा कॉमिक्स अनुभव चाहते हैं—जिसमें थ्रिल, इमोशन और टॉप-क्लास आर्टवर्क तीनों का दमदार मेल हो—तो ‘मकड़जाल’ सीरीज का यह समापन आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं है। ध्रुव का कैम्ब्रिज मिशन कॉमिक्स प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए दर्ज हो चुका है।
