‘ऐलान-ए-जंग’ उसी रोमांचक मोड़ से शुरू होती है जहाँ पिछली कॉमिक्स ‘कुंडली’ खत्म हुई थी। अब नागराज के सामने सिर्फ अपराधी नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन खड़ा है। भारती का अपहरण हो चुका है और वेदाचार्य (भारती के दादाजी) मानसिक रूप से टूट चुके हैं। यह कहानी नागराज के व्यक्तिगत प्रतिशोध और देशभक्ति के मेल को दिखाती है। पाठक का पहला सवाल यही उठता है—क्या एक सुपरहीरो उस कठिन पहाड़ी इलाके में सफल हो पाएगा जहाँ आधुनिक सेना भी हार मान जाती है?
‘सिनेमाटो‘ का कहर: वह दुश्मन जो हर चीज़ को ‘नेगेटिव‘ बना देता है!

महानगर में एक नया और अनोखा खतरा आता है—सिनेमाटो। राज कॉमिक्स की खासियत रही है कि वे खलनायकों को बहुत ही अलग और क्रिएटिव शक्तियां देते थे। सिनेमाटो के पास ‘नेगेटिव एनर्जी’ है। वह जिस भी चीज़ को छूता है, वह फोटो की तरह काली और बर्बाद हो जाती है। नागराज और सिनेमाटो की लड़ाई के दृश्य शानदार हैं। जब नागराज की सर्प-रस्सी (Snake Rope) भी नेगेटिव होकर टूटने लगती है, तो पाठक की धड़कनें तेज हो जाती हैं। यह हिस्सा कॉमिक्स में ‘हाई-टेक एक्शन’ का मज़ेदार तड़का लगाता है।
डॉ. पोल्का का हृदय परिवर्तन: दोस्त या आस्तीन का सांप?

पिछली कहानी का विलेन डॉ. पोल्का इस बार नागराज के साथ है। वह कहती है कि वह अपनी लैब वापस चाहती है और मफ़तून शाह पठान से बदला लेना चाहती है। लेकिन क्या उस पर भरोसा किया जा सकता है? पूरी कहानी में पोल्का का किरदार सस्पेंस बनाए रखता है। नागराज के साथ उसका अफगानिस्तान जाना और तकनीकी मदद देना कहानी को ‘मिशन इम्पॉसिबल’ जैसा फील देता है।
अफगानिस्तान मिशन: कंधार की पहाड़ियों में ‘डेथ मैच‘!

जब नागराज और पोल्का अफगानिस्तान के कंधार पहुँचते हैं, तो कहानी का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। महानगर की ऊँची इमारतों की जगह अब सूखे पहाड़ और तंग गुफाएं हैं। यहाँ नागराज का सामना मफ़तून शाह पठान से होता है। मफ़तून सिर्फ आतंकवादी नहीं, उसके पास ‘शैतानी आँख’ (Evil Eye) जैसी जादुई शक्तियां भी हैं। यह हिस्सा भारतीय सुपरहीरो कहानियों में ‘इंटरनेशनल थ्रिलर’ का बेहतरीन उदाहरण है।
‘बुज़कशी‘ का खूनी खेल: जब नागराज को बना दिया गया शिकार!

इस कॉमिक्स का सबसे दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला हिस्सा ‘बुज़कशी’ (Buzkashi) खेल है। अफगानिस्तान के इस खेल में घोड़े पर सवार खिलाड़ी मरी हुई भेड़ को छीनते हैं, लेकिन मफ़तून शाह नागराज को ‘भेड़’ बना देता है। नागराज के गले में ‘टाइटेनियम कॉलर’ बांधकर उसकी शक्तियां छीन ली जाती हैं और उसे घोड़ों के पैरों तले कुचला जाता है। यह दृश्य पाठक के मन में आतंकवादियों के प्रति गहरी नफरत और नागराज के प्रति सहानुभूति पैदा करता है। अनुपम सिन्हा ने इन दृश्यों में हिंसा और नायक की दृढ़ता बहुत अच्छे से दिखायी है।
मुर्दा सैनिकों का उदय: जब मफ़तून ने कब्रों से बुलाए ‘ज़ोंबी‘!

मफ़तून शाह अपनी ‘शैतानी आँख’ से उन मृत अमेरिकी सैनिकों को कब्रों से बाहर निकालता है जिन्हें उसने पहले मारा था। इन ‘मुर्दा सैनिकों’ या ज़ोंबियों के खिलाफ नागराज की लड़ाई बहुत ही डरावनी है। नागराज को समझ आता है कि शारीरिक ताकत इन पर असर नहीं करेगी। उसकी गुफा के अंदर ज़ोंबियों को दफ़न करना और पहाड़ों को गिराना नागराज की ‘विशालकाय’ (Giant) शक्ति का चरम प्रदर्शन है।
पत्थर के रक्षक और प्राचीन मूर्तियां: नागराज बनाम बेजान पत्थर!

कहानी के अंत में नागराज एक प्राचीन मंदिर या पूजास्थल पहुंचता है जहाँ उसे पहाड़ी जैसी विशालकाय पत्थर की मूर्तियों से सामना करना पड़ता है। ये मूर्तियां मफ़तून की शक्ति से जीवित हो जाती हैं। यहाँ नागराज की समझदारी काम आती है। वह इन मूर्तियों को आपस में टकराकर नष्ट कर देता है। यह हिस्सा फैंटेसी और एडवेंचर का शानदार मिश्रण है, जो हॉलीवुड की ‘मम्मी’ (The Mummy) फिल्मों की याद दिलाता है।
अनुपम सिन्हा का आर्ट: हर पन्ने पर एक सिनेमाई अनुभव!

अनुपम सिन्हा ने इस कॉमिक्स में अपनी कला का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अफगानिस्तान के धूल भरे रेगिस्तान और ऊँचे पहाड़ इतने असली लगते हैं कि आप वहाँ की गर्मी महसूस कर सकते हैं। जब नागराज अपने विशाल रूप में आता है, तो उसकी मांसपेशियों और डिटेलिंग का चित्रण लाजवाब है। भारती के लिए उसकी बेचैनी और आतंकवादियों की क्रूरता उसके चेहरे और हाव-भाव में साफ दिखती है।
सौडांगी और नकली भारती का सस्पेंस: एक और गहरा धोखा!

कहानी के अंत में एक बड़ा ट्विस्ट आता है। जिस भारती को बचाने के लिए नागराज ने अपनी जान दांव पर लगाई, वह असली भारती नहीं थी! वह सौडांगी थी, जो बहुरूपिया बनकर नागराज को फंसाने आई थी। यह मोड़ पाठक को चौंका देता है। असली भारती अभी भी ‘सुप्रीम हेड’ के पास कैद है। यह एंडिंग पाठक को अगली कॉमिक्स पढ़ने के लिए मजबूर कर देती है।
आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: एक सामाजिक संदेश!

हालांकि यह एक सुपरहीरो कॉमिक्स है, लेकिन इसमें आतंकवाद की भयावहता और मासूम लोगों पर इसके असर को बहुत गंभीरता से दिखाया गया है। नागराज का मिशन सिर्फ एक व्यक्ति को बचाने का नहीं, बल्कि मानवता के दुश्मनों को खत्म करने का ‘ऐलान-ए-जंग’ है। यह कॉमिक्स वीरता, त्याग और कभी न खत्म होने वाली उम्मीद की कहानी है।
निष्कर्ष: क्यों ‘ऐलान–ए–जंग‘ एक कल्ट क्लासिक है?
‘ऐलान-ए-जंग’ सिर्फ एक सीक्वल नहीं है, यह नागराज के चरित्र विकास का एक अहम पड़ाव है। यह हमें एक ऐसे नायक से मिलवाती है जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानता। अगर आप थ्रिलर, एक्शन और सस्पेंस के शौकीन हैं, तो यह कॉमिक्स आपके लिए एक मास्टरपीस है।
