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Home » शक्ति – बॉर्डर कॉमिक्स रिव्यू: जब देशभक्ति, इंसानियत और धर्मनिरपेक्षता एक ही कहानी में मिलते हैं
Hindi Comics World Updated:26 January 2026

शक्ति – बॉर्डर कॉमिक्स रिव्यू: जब देशभक्ति, इंसानियत और धर्मनिरपेक्षता एक ही कहानी में मिलते हैं

राज कॉमिक्स की “बॉर्डर” में शक्ति का ऐसा रूप, जो युद्ध, सेवा, सद्भाव और महिला शक्ति—सबको एक साथ बयान करता है
ComicsBioBy ComicsBio26 January 2026Updated:26 January 202608 Mins Read
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शक्ति – बॉर्डर कॉमिक्स रिव्यू | देशभक्ति और इंसानियत की दमदार कहानी
शक्ति “बॉर्डर” में सिर्फ दुश्मनों से नहीं लड़ती, बल्कि युद्ध के दर्द, डर और नफरत के खिलाफ भी खड़ी होती है
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शक्ति को देवी चंडी का अंश माना जाता है, जो अन्याय और बुराई को खत्म करने के लिए धरती पर अवतरित हुई हैं। कॉमिक्स ‘बॉर्डर’ (अंक संख्या 988) उस दौर की कहानी है जब सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। यह कहानी सिर्फ एक सुपरहीरो ‘शक्ति’ की लड़ाई नहीं है, बल्कि उन डॉक्टरों, सैनिकों और मासूम आम लोगों की भी कहानी है, जो जंग की आग में बिना गलती के झुलस जाते हैं।

कहानी का विस्तृत विवरण (Plot Summary)

कहानी की शुरुआत एक टीवी न्यूज़ बुलेटिन से होती है। खबर में दिखाया जाता है कि सीमा से लगे ‘चीमा’ गाँव पर दुश्मन की तरफ से जबरदस्त गोलाबारी हो रही है। इस हमले में एक बेगुनाह किसान को चार गोलियां लग चुकी हैं और उसकी हालत बहुत गंभीर है। गाँव में इलाज की कोई सही व्यवस्था नहीं है और नज़दीकी शहर का अस्पताल वहाँ से करीब बीस मील दूर है।

इसके बाद दृश्य दिल्ली के एक अस्पताल के कॉन्फ्रेंस रूम में बदलता है, जहाँ सैन्य कमांड मुख्यालय की तरफ से डॉक्टरों की एक टीम को सीमा क्षेत्र में भेजने का अनुरोध किया गया है। अस्पताल के अधिकारी डॉक्टरों से पूछते हैं कि कौन इस खतरनाक मिशन पर जाने के लिए तैयार है, लेकिन मौत के डर से कोई भी हाथ उठाने की हिम्मत नहीं करता। ठीक उसी वक्त अस्पताल की लिफ्ट में तकनीकी खराबी आ जाती है और वह तेज़ी से नीचे गिरने लगती है। लिफ्ट के अंदर मौजूद लोग अपनी मौत को सामने देख रहे होते हैं, तभी शक्ति वहाँ प्रकट होती है।

शक्ति अपनी अद्भुत ताकत से गिरती हुई लिफ्ट को थाम लेती है और उसमें मौजूद सभी लोगों की जान बचा लेती है। वह डॉक्टरों को समझाती है कि डर लगना इंसानी फितरत है, लेकिन अपने कर्तव्य से पीछे हट जाना कायरता है। वह कहती है, “मौत कहीं भी आ सकती है, चाहे वो लिफ्ट का गिरना हो या सीमा पर चलती गोली।” शक्ति की बातों से प्रभावित होकर डॉक्टर अतुल और उनकी पूरी टीम सीमा पर जाने के लिए तैयार हो जाती है।

दूसरी ओर, सीमा के उस पार जनरल बशीरा और उसका एजेंट ‘खान’ एक बेहद खतरनाक साजिश रच रहे हैं। वे सिर्फ गोलाबारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसी गोलाबारी की आड़ में अपने 2000 प्रशिक्षित घुसपैठियों को भारतीय सीमा में घुसाने की योजना बना रहे हैं। जनरल बशीरा को पूरा भरोसा है कि लगातार हो रही गोलाबारी से भारतीय सेना का ध्यान भटक जाएगा और उनके लोग आसानी से सीमा पार कर लेंगे।

चीमा गाँव में गोलाबारी के बीच एक छोटी बच्ची ‘चीना’ (कुछ संवादों में संगमा) अपने घायल पिता को लेकर बेहद परेशान है। वह गाँव के मंदिर में जाकर भगवान से प्रार्थना करती है। उसी दौरान दुश्मन एक अहम पुल को बम से उड़ा देता है, जिससे गाँव का संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। ऊपर आसमान में दुश्मन के लड़ाकू विमान बम बरसाने लगते हैं। एयर फील्ड कमांडर मुश्ताक को सख्त आदेश मिलता है कि जो भी दिखाई दे, उसे तबाह कर दिया जाए।

इसी बीच एक मिसाइल (हत्फ-0) सीधे उस मासूम बच्ची की ओर दागी जाती है। तभी शक्ति वहाँ पहुँचती है और अपनी दिव्य शक्तियों से उस मिसाइल की दिशा मोड़ देती है। मिसाइल पलटकर दुश्मन के विमान से टकराती है और उसे पूरी तरह नष्ट कर देती है। शक्ति बच्ची को सुरक्षित जगह पर पहुँचाती है और उसे हिम्मत बंधाती है।

गाँव के एक कच्चे मकान में डॉक्टर घायल किसान का ऑपरेशन करने की कोशिश कर रहे होते हैं, लेकिन लगातार हो रही बमबारी की वजह से बिजली चली जाती है। बिना रोशनी के ऑपरेशन करना नामुमकिन है। तभी शक्ति वहाँ पहुँचती है और अपने शरीर से तेज़ प्रकाश फैलाती है, जो नियोन लाइट्स जैसा लगता है। उसी अलौकिक रोशनी में डॉक्टर सफलतापूर्वक ऑपरेशन करते हैं और किसान की जान बच जाती है।

अंतिम संघर्ष:

भारतीय वायुसेना के मिग-28 विमान भी जवाबी कार्रवाई के लिए उड़ान भरते हैं, लेकिन उन्हें जल्द ही पता चलता है कि दुश्मन के कई विमान पहले ही ‘अज्ञात कारणों’ से नष्ट हो चुके हैं, जबकि असल में इसके पीछे शक्ति होती है। अब शक्ति सीधे दुश्मन के बेस कैंप पर हमला करती है। वह दुश्मन की भारी तोपों को पिघला देती है और उनकी मशीनगनों को पूरी तरह बेकार कर देती है।

जनरल बशीरा घबराकर रॉकेट लॉन्चर और टैंकों का सहारा लेता है, लेकिन शक्ति की शक्तियों के सामने सब कुछ नाकाम साबित होता है। वह टैंक की नली को इस तरह वेल्ड कर देती है कि गोला अंदर ही फट जाता है। आखिर में बशीरा एक लड़ाकू हेलीकॉप्टर से भागने की कोशिश करता है और शक्ति पर मिसाइलें दागता है। शक्ति उन मिसाइलों को हवा में पकड़कर वापस हेलीकॉप्टर की ओर मोड़ देती है, जिससे जनरल बशीरा का अंत हो जाता है।

कहानी के अंत में भारतीय सेना उन 2000 घुसपैठियों को या तो मार गिराती है या गिरफ्तार कर लेती है। सीमा पर फिर से शांति लौट आती है। घायल किसान को होश आता है और शक्ति उसे भरोसा दिलाती है कि अब उसके खेतों में दोबारा हल चलेगा और ज़िंदगी फिर से पटरी पर आएगी।

चरित्र चित्रण (Character Analysis)

शक्ति: इस कॉमिक्स में शक्ति को सिर्फ एक योद्धा के रूप में नहीं, बल्कि एक सच्चे मार्गदर्शक और रक्षक के तौर पर दिखाया गया है। उसकी ताकत का असली स्रोत करुणा और न्याय है। वह केवल दुश्मनों का विनाश नहीं करती, बल्कि डॉक्टरों को हिम्मत देकर उनके मन से डर भी निकालती है। यही बात उसे एक आम सुपरहीरो से अलग बनाती है।

जनरल बशीरा: वह एक ठेठ ‘विलेन’ है, जिसे सत्ता और तबाही का नशा है। उसकी सोच बेहद क्रूर है, जहाँ मासूम लोगों की जान उसके लिए सिर्फ एक ‘मोहरा’ भर है। उसका अंत इस बात का प्रतीक है कि घमंड और हथियारों की ताकत आखिरकार इंसानियत के सामने हार जाती है।

चीना (बच्ची): यह किरदार युद्ध के मानवीय पहलू को सामने लाता है। उसकी मासूम प्रार्थना और डर पाठक को यह एहसास कराते हैं कि जंग में सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों का होता है, जिनका इस लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं होता।

डॉक्टर अतुल: डॉक्टर अतुल एक आम इंसान के साहस का प्रतीक हैं। वे दिखाते हैं कि सही प्रेरणा मिलने पर इंसान अपने सबसे बड़े डर को भी मात दे सकता है। शक्ति की मौजूदगी उन्हें अपने कर्तव्य के लिए खड़े होने की ताकत देती है।

कला और चित्रांकन (Art and Illustration)

इस कॉमिक्स में 90 के दशक की राज कॉमिक्स की पहचान वाली कला शैली साफ नजर आती है, जहाँ चित्रों में गहरी डिटेलिंग देखने को मिलती है। शक्ति के उड़ने, मिसाइलों को पकड़ने और लड़ाकू विमानों के टकराने जैसे दृश्य बेहद प्रभावशाली बन पड़े हैं। शक्ति की नीली त्वचा और उसके शरीर से निकलने वाला पीला प्रकाश रंगों का ऐसा मेल बनाता है, जो पूरी कहानी को एक अलौकिक एहसास देता है। साथ ही, पात्रों के चेहरों पर डर, गुस्सा और दृढ़ संकल्प के साफ भाव और युद्ध के दृश्यों में धुएँ व तबाही का चित्रण कहानी की गंभीरता को और मजबूत करता है।

सामाजिक और नैतिक संदेश (Themes and Messages)

यह कॉमिक्स कर्तव्य को सबसे ऊपर रखने का एक मजबूत संदेश देती है। पेशा चाहे जो भी हो, मानवता और देश सेवा सर्वोपरि है—इस बात को डॉक्टरों का अपने डर पर काबू पाना खूबसूरती से दिखाता है। कहानी युद्ध की बेकारपन को भी उजागर करती है, जहाँ यह सिर्फ सीमाओं का टकराव नहीं रहता, बल्कि घर उजड़ते हैं और बच्चों के मन में डर बैठ जाता है।
शक्ति का किरदार यह भी साबित करता है कि एक महिला रक्षक और विनाशक—दोनों रूपों में देश की ढाल बन सकती है। एक ही पैनल में मंदिर और मस्जिद का दिखना धार्मिक सद्भाव और प्रेम की छतरी तानने का गहरा संदेश देता है, जो कहानी को और भी असरदार बना देता है।

समीक्षात्मक निष्कर्ष (Conclusion)

“बॉर्डर” सिर्फ एक सुपरहीरो फैंटेसी नहीं है, बल्कि देशभक्ति की भावना से भरी एक भावुक और असरदार कहानी है। लेखक ने बड़ी समझदारी से एक जादुई किरदार—शक्ति—को असली दुनिया की समस्याओं, जैसे युद्ध और इलाज की कमी, के साथ जोड़ा है।

शक्ति का यह अंक बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए प्रेरणा देने वाला है। एक तरफ इसमें जबरदस्त एक्शन और रोमांच है, तो दूसरी तरफ यह हमें हमारे सैनिकों और डॉक्टरों के सम्मान का महत्व भी समझाता है। राज कॉमिक्स ने इस कहानी के जरिए यह साफ संदेश दिया है कि जब अन्याय अपनी सीमा पार कर जाता है, तब ‘शक्ति’ का उदय होना तय है।

यह कॉमिक्स आज भी उतनी ही असरदार और प्रासंगिक लगती है, जितनी अपने समय में थी। अगर आप भारतीय कॉमिक्स के शौकीन हैं और ऐसी कहानी पढ़ना चाहते हैं जो रोंगटे खड़े कर दे और दिल को छू जाए, तो “बॉर्डर” एक ज़रूर पढ़ी जाने वाली कॉमिक्स है।

रेटिंग: 4.5/5 ⭐⭐⭐⭐½

डॉक्टरों की निस्वार्थ सेवा महिला शक्ति और धार्मिक सद्भाव जैसे गहरे सामाजिक संदेशों को बेहद भावुक तरीके से पेश करती है मानवता युद्ध की त्रासदी राज कॉमिक्स की शक्ति “बॉर्डर” एक ऐसी सुपरहीरो कॉमिक्स है जो देशभक्ति
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