राज कॉमिक्स की ‘खजाना’ श्रृंखला के तीन अंकों – ‘मृत्युदंड’ (#202), ‘नागद्वीप’ (#206), और ‘त्रिफना’ (#211) – के बाद ‘महायुद्ध’ (#213) इस पूरी महागाथा का आख़िरी और सबसे अहम हिस्सा है। ‘त्रिफना’ के अंत में नागराज को, नागपाशा द्वारा बनाए गए त्रिफना ने त्रिकाल मणियों की शक्ति का इस्तेमाल करके बूढ़ी और कमज़ोर हालत में एक ऐसे भविष्य में फेंक दिया था जहाँ परमाणु युद्ध के बाद का विनाश फैला हुआ था। इस अंक की कहानी वहीं से शुरू होती है। यहाँ नागराज को एक तरफ अपने बढ़ती उम्र वाले शरीर और कमज़ोरी से लड़ना है, और दूसरी तरफ भविष्य के हाई-टेक हथियारों से लैस दुश्मनों और समय के संतुलन को बिगाड़ चुके त्रिफना से भी भिड़ना है।
लेखक जॉली सिन्हा ने इस क्लाइमेक्स को सबसे ऊँचे दाँव पर रखा है। यह कॉमिक सिर्फ नागराज की शारीरिक लड़ाई नहीं है, बल्कि समय की यात्रा, पौराणिक तत्वों, तंत्र-विद्या और विज्ञान के बीच होने वाला एक जबरदस्त टकराव है। अनुपम सिन्हा का चित्रांकन यहाँ एक नया ही स्तर छू लेता है। वह पौराणिक ‘मृत्युलोक’ और एक बर्बाद ‘भविष्य’—दो बिल्कुल अलग दुनिया—को कमाल की भव्यता और बारीकी के साथ दिखाते हैं। यह अंक भारतीय कॉमिक जगत में इसलिए भी यादगार है क्योंकि यहाँ एक सुपरहीरो अपनी बस शक्ति पर नहीं, बल्कि अपनी समझदारी, बुद्धि और बलिदान से जीतता है।
भविष्य का विनाश और बूढ़े नागराज का मानसिक संघर्ष
महायुद्ध की शुरुआत एक टूटे हुए, विकिरण से बर्बाद हो चुके भविष्य के संसार में होती है। नागराज, अपनी उम्र और लगभग खत्म हो चुकी शक्तियों के साथ, हाई-टेक हथियार लिए दुश्मनों से घिरा हुआ है। वह समझ जाता है कि वह उन्हें ताकत से नहीं हरा सकता, इसलिए दिमाग का इस्तेमाल करता है।

हथियारों की समझ: दुश्मनों की ‘कटिंग-बीम’ (Cutting Beam) को वह उनके ही खिलाफ मोड़ देता है, और उनके हथियारों के ‘ब्लास्ट-प्रूफ’ न होने का फायदा उठाता है ताकि वे खुद ही अपनी मार खा जाएँ।
मशरेला की दहशत: नागराज को पता चलता है कि यह भविष्य का विश्व ‘मशरेला’ नाम के एक विकिरण से पैदा हुए दैत्य से आतंकित है। लोग रोज़ इस दैत्य को शांत करने के लिए खुद को बलि चढ़ा देते हैं। नागराज ठान लेता है कि वह मशरेला का खात्मा करेगा, चाहे इसमें उसकी जान ही क्यों न चली जाए।

कण-शक्ति का इस्तेमाल: नागराज मशरेला को अपनी सामान्य सर्प शक्तियों से नहीं मार सकता। इसलिए वह अपनी इच्छाधारी शक्ति का आख़िरी बार इस्तेमाल करके खुद को कणों में बदल लेता है और मशरेला के शरीर के अंदर पहुँच जाता है। वहाँ उसे पता चलता है कि मशरेला की रक्त कोशिकाओं में नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) भरी है, जो उसके कणों को धीरे-धीरे जला रही है।
मशरेला का अंत: विज्ञान और बलिदान की जीत
मशरेला के शरीर के अंदर फँसकर भी नागराज हार नहीं मानता। वह दैत्य को भ्रमित करता है और अपने नागफनी सर्प (Naagphani Sarpa) के ज़रिए उसके दिल पर सीधा और अंतिम वार करता है। बस उसी पल मशरेला खत्म हो जाता है। उसके मरते ही भविष्य के लोग नागराज को ‘अवतार’ मानकर उसकी पूजा करने लगते हैं।

लेकिन नागराज की यह जीत ज़्यादा देर टिक नहीं पाती। गुरुदेव और नागपाशा द्वारा अंतरिक्ष में भेजी गई ‘न्यूट्रॉन बम वाली मिसाइल’ वापस लौट आती हैं और अब उनका निशाना इसी भविष्य की बची-खुची सभ्यता है। नागराज अपनी अशक्त अवस्था के कारण उन्हें रोक नहीं पाता।
नागपाशा की चाल और त्रिफ़ना का संतुलन
कहानी की मुख्य जड़ त्रिफ़ना के संतुलन को ठीक करना है, जिसे नागपाशा (जो अब तीनों कालों का सम्राट बन चुका है) ने अपनी महत्वाकांक्षाओं के कारण बिगाड़ दिया है। नागपाशा की योजना है कि वह त्रिफ़ना को नियंत्रित करके देवताओं की सत्ता पर कब्ज़ा कर ले (पृष्ठ 49)।
त्रिफ़ना (समय की शक्ति), नागपाशा और कालदूत (जो अब नागपाशा के नियंत्रण में है) से जुड़ी हुई है। नागराज को अपने गुरुदेव से पता चलता है कि त्रिफ़ना को सिर्फ ‘भविष्य-मणि’ ही काट सकती है, जो ‘होनी सर्पिणी’ के मस्तक पर स्थापित है (पृष्ठ 54)।
होनी सर्पिणी और समय की यात्रा:
नागराज, होनी सर्पिणी की मदद से मृत्युलोक की यात्रा करता है, जहाँ उसे समय के नियम—भूतकाल, वर्तमान और भविष्य—से आगे बढ़कर काम करना है (पृष्ठ 38)। मृत्युलोक में उसका सामना ‘मृत्यु’ से होता है, जो भूखी आत्माओं को निगल जाती है। होनी सर्पिणी के मार्गदर्शन के सहारे नागराज मृत्युपाश को काबू में कर लेता है।

नागराज की इस यात्रा का सबसे बड़ा रहस्य तब सामने आता है जब उसे पता चलता है कि त्रिफ़ना का संतुलन तभी वापस लाया जा सकता है जब भविष्य-मणि और भूतकाल-मणि आपस में टकराएँ (पृष्ठ 57)। ये दोनों मणियाँ त्रिफ़ना के मस्तक पर ही लगी हैं। नागराज अपनी इच्छाधारी शक्ति का उपयोग करता है और दोनों मणियों को आपस में टकरा देता है। इससे एक तरह का ‘शॉर्ट सर्किट’ होता है और त्रिफ़ना (यानी समय का प्रवाह) का फ्यूज़ उड़ जाता है।
अंतिम परिणाम और पुनर्स्थापन:
त्रिफ़ना के निष्क्रिय होते ही नागराज और मिसाइलें समय-धारा में समा जाती हैं और फिर वर्तमान में वापस लौट आती हैं (पृष्ठ 37)। नागपाशा की पूरी योजना ध्वस्त हो जाती है और उसे मजबूर होकर नागराज के सामने हथियार डालने पड़ते हैं।
कहानी का अंत एक शांत लेकिन गहरी सीख के साथ होता है:
नागराज अपने ‘वृद्ध’ रूप को भविष्य की चेतावनी के रूप में स्वीकार करता है।
वह समझता है कि असली शक्ति साहस और बुद्धि में है, जो उसे ‘त्रिफ़ना’ यानी समय के जाल से बाहर निकालती है।
नागराज ‘समय के परे’ हो जाता है, जिसका मतलब है कि त्रिफ़ना के सक्रिय रहने तक वह समय के नियमों से बंधा नहीं है (पृष्ठ 49)।
पात्रों और विषयों का महत्व
त्रिफ़ना (समय):
त्रिफ़ना यहाँ सिर्फ एक वस्तु नहीं है, बल्कि समय की शक्ति और उसके बेहद नाज़ुक संतुलन का प्रतीक है। नागपाशा के गलत इस्तेमाल के कारण पूरी सृष्टि खतरे में पड़ गई थी।

मशरेला (अमरता/विज्ञान का विनाश):
मशरेला न्यूक्लियर ऊर्जा और अनियंत्रित विज्ञान का प्रतीक है, जो आखिरकार मानवता के लिए विनाश लेकर आता है। नागराज की उस पर जीत दिखाती है कि प्राचीन ज्ञान और अनुशासन, अनियंत्रित विज्ञान पर भी विजय पा सकते हैं।
नागपाशा (अहंकार और सत्ता का लालच):
नागपाशा अहंकार और सत्ता की भूख का प्रतीक है, जो समय को काबू में करके देवताओं पर भी राज करना चाहता है। उसका पतन ये सिखाता है कि अत्यधिक लालच हमेशा विनाश की ओर ले जाता है।
होनी सर्पिणी और मृत्यु:
होनी सर्पिणी (भविष्य का प्रतीक) नागराज को मृत्युलोक की यात्रा कराती है, जहाँ वह अस्तित्व की नश्वरता को समझता है। मृत्यु को मात देने के बाद ही वह समय के पार जाने की क्षमता हासिल करता है।
चित्रांकन और दृश्य परिकल्पना (Artwork and Visualization)
अनुपम सिन्हा भारतीय कॉमिक्स दुनिया के सबसे बड़े कलाकारों में गिने जाते हैं, और ‘महायुद्ध’ में उनका काम सच में कमाल का है।
भविष्य का चित्रण: भविष्य के शहर को जिस तरह उन्होंने दिखाया है, वह डर पैदा करता है और साथ ही बहुत असली सा लगता है। टूटी हुई ऊँची इमारतें, उड़ने वाले जहाज़, लेज़र गन वाले सैनिक—ये सब मिलकर एक तरह का ‘साइबरपंक’ माहौल बनाते हैं। रंगों का मेल (जो सुनील पांडे ने किया है) इन दृश्यों को और ताकत देता है। भविष्य के फ्रेम में ठंडे, फीके रंग (Grey, Blue) ज्यादा हैं, जो उस दुनिया की उदासी और बर्बादी को दिखाते हैं।
एक्शन दृश्य: नागराज का उड़ते यानों पर कूदना, हवा में घूमकर वार करना और विस्फोटों के बीच से बचकर निकलना—इन सबमें इतनी गति है कि हर फ्रेम चलता हुआ महसूस होता है। पैनल का लेआउट भी ऐसा है कि एक दृश्य से दूसरे दृश्य तक नज़र बिना अटके चली जाती है।

वृद्ध नागराज का लुक: नागराज के बालों में सफ़ेदी, चेहरे पर झुर्रियाँ और फिर भी आँखों की वही पुरानी चमक—अनुपम जी ने उसे उम्रदराज़ दिखाया है लेकिन कमज़ोर नहीं। उसकी बॉडी लैंग्वेज में थकान तो है, मगर हार का कोई भाव नहीं।
कथानक और संवाद (Script and Dialogue)
जॉली सिन्हा की स्क्रिप्ट बहुत पकड़ रखने वाली है। कहानी इतनी तेज़ गति से चलती है कि पाठक को रुकने का मौका ही नहीं मिलता। एक पल हम नागद्वीप की राजनीति देख रहे होते हैं, अगले पल भविष्य के विनाशकारी युद्ध के बीच पहुँच जाते हैं।
संवादों में गहराई: संवाद सिर्फ जानकारी देने भर के नहीं हैं, बल्कि पात्रों की भावनाएँ और मन की स्थिति भी बताते हैं।
नागराज का संवाद: “नागपाशा ने मुझे मेरे ही भविष्य में भेज दिया है… अब मेरे पीछे सैकड़ों दुश्मन हैं… कैसे जीतूंगा मैं ये महायुद्ध?”—ये लाइन तुरंत रोमांच और डर दोनों पैदा करती है।
नागपाशा का संवाद: “अब नागराज मरेगा गुरुदेव!”—उसके घमंड और आत्मविश्वास को दिखाता है।
वैज्ञानिक और तांत्रिक मिश्रण: कहानी में ‘कटिंग बीम’, ‘बीम-प्रूफ सूट’ जैसे वैज्ञानिक पहलू भी हैं और ‘त्रिफ़ना’, ‘भस्म’, ‘कालदूत’ जैसे तांत्रिक और पौराणिक तत्व भी। जॉली सिन्हा ने दोनों दुनियाओं को बिना टकराव के बहुत खूबसूरती से मिला दिया है।
विषयगत विश्लेषण (Thematic Analysis)
‘महायुद्ध’ सिर्फ मनोरंजन नहीं, कई गंभीर बातें भी कहता है।
पर्यावरण और भविष्य की चेतावनी: कॉमिक्स में भविष्य की दुनिया हरियाली के बिना दिखाई गई है। साँप सिर्फ चिड़ियाघर में बचे हैं। ये साफ चेतावनी है कि अगर हमने प्रकृति और परमाणु शक्ति का गलत इस्तेमाल जारी रखा तो हमारा भविष्य भी ऐसा ही हो सकता है।
शक्ति का असली स्रोत: जब नागराज की शारीरिक शक्तियाँ लगभग खत्म होती दिखती हैं, तब वह अपनी बुद्धि और इच्छा-शक्ति का इस्तेमाल करता है। संदेश साफ है—असल ताकत दिमाग में होती है, सिर्फ शरीर में नहीं।
कर्म और नियति: नागपाशा समय को जीतकर खुद को भगवान बनाने का सपना देखता है, लेकिन कहानी बताती है कि नियति और कर्म को कोई नहीं बदल सकता। उसके पतन का कारण भी वही बनता है जिसके खिलाफ वह लड़ रहा था—नागराज।
आलोचनात्मक दृष्टिकोण (Critical Perspective)
हालाँकि ‘महायुद्ध’ एक बेहद शानदार कॉमिक्स है, फिर भी एक समीक्षक की नजर से कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
जटिलता (Complexity):
कहानी में टाइम ट्रेवल (Time Travel) और फ्लैशबैक का इस्तेमाल काफी ज्यादा हुआ है। जिन नए पाठकों ने ‘त्रिफ़ना श्रृंखला’ की पिछली कॉमिक्स नहीं पढ़ी हैं, उनके लिए इसे समझना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई घटनाओं और पात्रों को समझने के लिए पहले के संदर्भ जानना जरूरी है।
तकनीकी स्पष्टीकरण:
भविष्य के हथियारों और नागराज के बचने के तरीकों में कभी-कभी ‘कॉमिक बुक लॉजिक’ (Comic Book Logic) का असर ज्यादा महसूस होता है। जैसे—इतने अत्याधुनिक हथियारों से लैस सेना का एक बूढ़े, लगभग निहत्थे (भले ही वह सुपरहीरो हो) आदमी को तुरंत न मार पाना थोड़ा अविश्वसनीय लगता है। लेकिन सुपरहीरो जॉनर में ऐसी चीजें आम हैं और पाठक इन्हें कहानी के रोमांच का हिस्सा मानकर स्वीकार भी करते हैं।

अंत का पूर्वाभास:
चूँकि यह एक विशेषांक है और एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा भी है, इसलिए पाठक को कहीं न कहीं पहले से अंदाज़ा होता है कि नागराज अंत में जीत जाएगा या कम से कम बच तो जरूर जाएगा। यहाँ मज़ा इस बात में है कि वह कैसे इस स्थिति से निकलता है, न कि इस बात में कि क्या वह बचेगा। कहानी का रोमांच उसके सफ़र में है।
निष्कर्ष: एक Daring Sci-Fi Puranic Epic
“महायुद्ध” विशेषांक राज कॉमिक्स की एक ऐसी दलेरी भरी Sci-Fi Puranic Epic है, जिसने नागराज के सफ़र को एक नए और गहरे स्तर पर पहुंचाया। लेखक ने पौराणिक तत्वों (जैसे होनी सर्पिणी, कालदूत) को साइंस फिक्शन की अवधारणाओं (जैसे नाभिकीय ऊर्जा, समय-धारा) के साथ बहुत ही खूबसूरती से जोड़ा है। यह कहानी सिर्फ नागराज की जीत की नहीं है, बल्कि उसके आत्म-ज्ञान और आत्म-विश्वास की जागृति की भी है—जहाँ वह अपने ही भविष्य के वृद्ध रूप से यह सीखता है कि उसकी असली शक्ति उसके अनुभवों, सोच और दृढ़ संकल्प में छिपी है।
त्रिफ़ना का संतुलन वापस लाकर, नागराज ने सिर्फ समय को ही नहीं, बल्कि मानवता को भी एक भयानक और अनियंत्रित भविष्य से बचाया। इसी वजह से “महायुद्ध” राज कॉमिक्स के सबसे यादगार, सोचने पर मजबूर करने वाले और क्लासिक विशेषांकों में से एक माना जाता है।
