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Home » नागायण: हरण काण्ड – जब कानून बना रावण और प्रेम बना वनवास | Raj Comics Epic Review
Hindi Comics World Updated:3 January 2026

नागायण: हरण काण्ड – जब कानून बना रावण और प्रेम बना वनवास | Raj Comics Epic Review

रामायण की आत्मा, साइंस फिक्शन की तकनीक और सुपरहीरो ड्रामा का संगम – नागराज की सबसे भावनात्मक परीक्षा
ComicsBioBy ComicsBio1 January 2026Updated:3 January 202609 Mins Read
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नागायण: हरण काण्ड रिव्यू | Ramayan Meets Sci-Fi in Raj Comics’ Epic Saga
नागराज का वनवास, विसर्पी का हरण और कानून बनाम न्याय की लड़ाई – नागायण का सबसे भावुक अध्याय
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राज कॉमिक्स की ‘नागायण’ श्रृंखला सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय कॉमिक्स जगत का एक आधुनिक महाकाव्य है। संजय गुप्ता की परिकल्पना और अनुपम सिन्हा की लेखनी व कला से सजी यह श्रृंखला ‘रामायण’ के महान कथानक को भविष्य की दुनिया, विज्ञान (Science Fiction) और सुपरहीरो फैंटेसी के साथ जोड़ती है। ‘वरण काण्ड’ और ‘ग्रहण काण्ड’ के बाद अब श्रृंखला का तीसरा भाग ‘हरण काण्ड’ पाठकों के सामने आता है। जैसा कि नाम से ही समझ आता है, यह भाग रामायण के ‘अरण्य काण्ड’ की याद दिलाता है, जहाँ माता सीता का हरण हुआ था, लेकिन यहाँ हालात, तकनीक और चुनौतियाँ पूरी तरह आधुनिक और अलग हैं।

कथानक की विस्तृत रूपरेखा (Plot Summary)

‘हरण काण्ड’ की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहाँ ‘ग्रहण काण्ड’ खत्म हुआ था। इस कहानी को मुख्य रूप से तीन स्तरों पर देखा जा सकता है: कानूनी लड़ाई, वनवास का संघर्ष और अपहरण की साजिश।

कानूनी दांव–पेंच और सामाजिक बहिष्कार:

कहानी की शुरुआत एक चौंकाने वाले अदालत के फैसले से होती है। ‘एक विश्व एक कानून’ के तहत नागराज पर ‘द्विविवाह’ (Polygamy) का आरोप साबित हो जाता है। नगीना, जो वकील ‘गीना’ के नकाब में है, अपनी चालाकी से नागराज को महानगर (Underground City) से बाहर निकलवा देती है। कानून की रक्षा करने वाला नागराज खुद कानून के जाल में फँस जाता है। नागराज, जो हमेशा न्याय और नियमों का पालन करता आया है, अदालत के फैसले को स्वीकार करता है और विसर्पी के साथ महानगर छोड़कर ‘वनवास’ पर चला जाता है।

भारती और नताशा का आंतरिक संघर्ष:

महानगर के भीतर भारती (नागराज की पहली पत्नी) गहरी आत्मग्लानि और मजबूत संकल्प के बीच जूझ रही है। वह जानती है कि विसर्पी ही नागराज का सच्चा प्रेम है, फिर भी उसने सामाजिक सुरक्षा के कारण नागराज से विवाह किया था। दूसरी तरफ सुपर कमांडो ध्रुव की निजी ज़िंदगी भी टूटती दिखती है। नताशा (ध्रुव की पत्नी) अपने पिता ग्रैंड मास्टर रोबो के पास चली जाती है और ध्रुव से अपने बेटे ऋषि की कस्टडी जीत लेती है। यहाँ लेखक यह दिखाता है कि कितने भी शक्तिशाली सुपरहीरो क्यों न हों, निजी रिश्तों की उलझनों के सामने वे भी कमजोर पड़ सकते हैं।

वनवास और मायावी जंगल:

नागराज, विसर्पी और ध्रुव महानगर की सीमा से बाहर एक रहस्यमय और मायावी जंगल में शरण लेते हैं। यहाँ ध्रुव अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर एक दुर्घटनाग्रस्त यान को रहने लायक ‘महल’ में बदल देता है। लेकिन यह शांति ज्यादा देर टिकने वाली नहीं होती। नगीना और क्रूरपाशा (नागपाशा) अपनी काली शक्तियों के साथ पहले से ही घात लगाए बैठे हैं। जंगल में उन पर एक विशाल ‘ब्लैक पावर’ गोरिल्ला हमला कर देता है।

चरमोत्कर्ष: बाधाबंध और हरण:

कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब नागराज और ध्रुव एक अदृश्य दीवार, ‘बाधाबंध’, में फँस जाते हैं। यह कोई साधारण काली शक्ति नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच या तिलिस्म होता है। बाद में यह चौंकाने वाला सच सामने आता है कि यह तिलिस्म किसी दुश्मन ने नहीं, बल्कि भारती के दादा ‘वेदाचार्य’ ने लगाया था, ताकि नागराज और विसर्पी की ‘अशुभ’ छाया महानगर पर न पड़े। इसी भ्रम और तनाव का फायदा उठाकर क्रूरपाशा एक विशाल उड़ते हुए यान (गादड़ यान) के साथ आता है और विसर्पी का अपहरण, यानी हरण, कर लेता है।

पात्रों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Character Deep Dive)

नागराज: त्याग और कर्तव्य का प्रतीक
इस भाग में नागराज का चरित्र अपने ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ रूप के सबसे करीब दिखाई देता है। वह जानता है कि उसके साथ अन्याय हो रहा है, फिर भी वह समाज में अव्यवस्था नहीं फैलाना चाहता। जब महानगर की जनता उसके निष्कासन का विरोध करती है, तब नागराज उन्हें समझाता है कि “कानून सबके लिए समान है।” उसका यह धैर्य और संयम उसे बाकी सुपरहीरो से अलग बनाता है।

सुपर कमांडो ध्रुव: बुद्धि और विवशता
ध्रुव इस श्रृंखला में एक रणनीतिकार की भूमिका निभाता है। अपनी पत्नी नताशा को खोने के दर्द के बावजूद वह नागराज का साथ नहीं छोड़ता। ध्रुव का गोरिल्ला की भाषा समझना और उसे काबू में करना उसके पशु-प्रेम और कौशल को दर्शाता है। उसकी सबसे बड़ी विवशता तब सामने आती है, जब वह अपने बेटे ऋषि से दूर हो जाता है।

विसर्पी: प्रेम और बलिदान की प्रतिमूर्ति
‘हरण काण्ड’ में विसर्पी का चरित्र बेहद भावुक और मार्मिक बनकर सामने आता है। वह नागराज से प्रेम करती है, लेकिन भारती के प्रति उसका सम्मान उसे अंदर ही अंदर तोड़ता रहता है। वह खुद वनवास स्वीकार करती है ताकि नागराज और भारती के बीच कोई टकराव न हो। अपहरण के समय उसकी बेबसी पाठकों के दिल को छू जाती है।

भारती: एक आधुनिक महिला का संकल्प
भारती इस कहानी की एक ‘साइलेंट हीरो’ है। वह कानून की अच्छी जानकार है और नागराज को वापस लाने के लिए पूरी ताकत झोंक देती है। अपने दादा वेदाचार्य के खिलाफ खड़ा होना यह दिखाता है कि वह सिर्फ एक ‘समझौते की पत्नी’ नहीं, बल्कि अपनी सोच और फैसलों वाली एक मजबूत महिला है।

नगीना और क्रूरपाशा: बुराई का गठबंधन
इस भाग में नगीना की चालाकी अपने चरम पर पहुँच जाती है। वह केवल ताकत का इस्तेमाल नहीं करती, बल्कि कानूनी और मानसिक हमलों से वार करती है। वहीं क्रूरपाशा अब सिर्फ एक साधारण विलेन नहीं रह जाता, बल्कि ‘अंधेरी दुनिया का सम्राट’ बनने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई देता है।

कला और चित्रांकन (Artistic Brilliance)

अनुपम सिन्हा को भारतीय कॉमिक्स का ‘मास्टर’ यूँ ही नहीं कहा जाता, और ‘हरण काण्ड’ में उनका काम इस बात को पूरी तरह साबित करता है।

कॉमिक्स के शुरुआती पन्नों में अदालत का दृश्य और नगीना का ‘गीना’ के रूप में दिखना बेहद प्रभावशाली है। चश्मे के रिफ्लेक्शन में नागराज और विसर्पी को दिखाने का तरीका पूरे दृश्य को एक सिनेमाई अहसास देता है और पाठक को तुरंत कहानी से जोड़ देता है।

जंगल में नागराज और ध्रुव का गोरिल्ला के साथ मुकाबला बहुत तेज़ और दमदार है। ‘वैक्यूम शील्ड’ और ‘संपीड़न बाण’ जैसे वैज्ञानिक हथियारों को जिस तरह से दिखाया गया है, वह न सिर्फ रोमांचक है बल्कि देखने में भी बेहद शानदार लगता है।

सुनील पाण्डेय और उनकी टीम ने रंगों का चुनाव कहानी के मूड के अनुसार किया है। अदालत के ठंडे और सख्त रंगों से लेकर जंगल की हरियाली और लावा के नारंगी-लाल रंगों तक, हर पैनल जीवंत और प्रभावशाली दिखाई देता है।

विसर्पी का हरण और भारती का रोना, इन दृश्यों में भावनाएँ इतनी साफ दिखाई देती हैं कि कई जगह शब्दों की जरूरत ही महसूस नहीं होती। पात्रों के चेहरे के भाव सीधे दिल को छू जाते हैं।

तकनीकी और दार्शनिक पहलू (Tech & Philosophy)

‘नागायण’ श्रृंखला की सबसे बड़ी ताकत ‘मंत्र’ और ‘यंत्र’ का शानदार मेल है, जो इसे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की रचना बनाता है। एक ओर 2025 की दुनिया में ‘मैग्नेटिक हाईवे’, ‘अंडरग्राउंड मेगासिटी’ और ‘डाटा बैंक’ जैसी भविष्य की तकनीक दिखाई गई है, जो राज कॉमिक्स की दूरदर्शी सोच को दर्शाती है। वहीं दूसरी ओर यह कहानी ‘कानून बनाम न्याय’ जैसे गंभीर सामाजिक सवाल को भी सामने रखती है। नागराज जैसा नायक, जो हर तरह से सही है, उसे भी कानून के कारण सजा मिलती है। यह समाज की उस कड़वी सच्चाई को दिखाता है, जहाँ कई बार कानून न्याय के रास्ते में खड़ा हो जाता है।
इसी आधुनिक दुनिया के बीच कहानी का पौराणिक जुड़ाव इसे अपनी जड़ों से जोड़े रखता है। ‘हरण काण्ड’ का सीधा संबंध रामायण के ‘अरण्य काण्ड’ से दिखता है—यहाँ मायावी हिरण की जगह गोरिल्ला है, लक्ष्मण रेखा जैसी भूमिका निभाता है ‘बाधाबंध तिलिस्म’, और रावण के रूप में सामने आता है क्रूरपाशा। यह सब मिलकर पौराणिक कथा को एक नए और रोमांचक रूप में पेश करता है।

समीक्षा: सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष

सकारात्मक पक्ष (Strengths):
यह कहानी सिर्फ सुपरपावर की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति, कानून और पारिवारिक ड्रामा का शानदार मेल देखने को मिलता है। नागराज और ध्रुव की दोस्ती को पहले से ज्यादा गहराई के साथ दिखाया गया है। अंत में आने वाला मोड़ पाठक को अगले भाग ‘शरण काण्ड’ के लिए उत्सुक और बेचैन कर देता है। अनुपम सिन्हा का चित्रांकन इस कॉमिक को साधारण कॉमिक से ऊपर उठाकर एक ग्राफिक नॉवेल जैसा दर्जा देता है।

नकारात्मक पक्ष (Weaknesses):
जो पाठक इस श्रृंखला में नए हैं, उनके लिए ध्रुव, नताशा, भारती, नगीना और वेदाचार्य की अलग-अलग कहानियों को एक साथ समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। कुछ जगह संवाद थोड़े लंबे हो जाते हैं, जिससे कहानी की गति हल्की-सी धीमी पड़ती है।

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

‘हरण काण्ड’ यह संदेश देता है कि बुराई हमेशा खुले तौर पर नहीं आती, कई बार वह ‘कानून’ का रूप लेकर सामने आती है। यह कहानी सिखाती है कि न्याय के लिए कभी-कभी अपनों के खिलाफ भी खड़ा होना पड़ता है, जैसा भारती ने अपने दादा वेदाचार्य के मामले में किया। यह कॉमिक नारी शक्ति को भी सम्मान देती है—चाहे वह भारती की कानूनी लड़ाई हो या नताशा का अपने अधिकारों के लिए डटकर खड़ा होना।

निष्कर्ष और रेटिंग

‘नागायण: हरण काण्ड’ सिर्फ एक कॉमिक बुक नहीं, बल्कि एक पूरा अनुभव है। यह हमें हमारे पौराणिक गौरव की याद दिलाती है और साथ ही भविष्य की एक आधुनिक दुनिया की झलक भी दिखाती है। संजय गुप्ता और अनुपम सिन्हा की जोड़ी ने भारतीय कॉमिक्स को उस स्तर तक पहुँचा दिया है, जहाँ इसकी तुलना मार्वल और डीसी की बेहतरीन रचनाओं से की जा सकती है।
यह श्रृंखला का सबसे भावनात्मक हिस्सा है। विसर्पी का हरण होना सिर्फ एक पात्र का अपहरण नहीं, बल्कि नागराज की उस ‘मर्यादा’ की परीक्षा है, जिसके लिए वह हमेशा खड़ा रहा है।

अंतिम रेटिंग: 4.9/5

पाठकों के लिए संदेश:
अगर आपने ‘नागायण’ की पहली दो कड़ियाँ पढ़ी हैं, तो ‘हरण काण्ड’ आपको पूरी तरह बाँध लेगी। और अगर आप भारतीय कॉमिक्स में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह श्रृंखला आपके कलेक्शन में जरूर होनी चाहिए। यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि विसर्पी का हरण हो चुका है और अब शुरू होगा—‘शरण काण्ड’।

and the moral dilemma of law versus justice through Nagraj deep emotional drama Nagayan Haran Kand review in Hindi explores how Raj Comics blends Ramayan symbolism with futuristic science fiction powerful female characters
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