भारतीय कॉमिक्स के स्वर्ण युग में ‘तुलसी कॉमिक्स’ ने अपनी एक खास और अलग पहचान बनाई थी। राज कॉमिक्स के ‘नागराज’ और ‘डोगा’ जैसे बड़े और मशहूर किरदारों के बीच ‘योशो’ एक ऐसा नायक था, जिसने विज्ञान-फंतासी (Sci-Fi Fantasy) और पौराणिक शक्तियों के अनोखे मेल से पाठकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। ‘योशो की जंग’ इसकी पहली कॉमिक्स ‘प्रलयंकारी योशो’ का सीधा और बेहद रोमांचक सीक्वल है। जहाँ पहली कॉमिक्स योशो के जन्म और उसके प्रशिक्षण की कहानी बताती है, वहीं ‘योशो की जंग’ बदले, राजनीति और एक टूटे हुए साम्राज्य को फिर से हासिल करने की बड़ी और गंभीर कहानी पेश करती है। ४६ पन्नों की यह कॉमिक्स सिर्फ एक्शन से भरा एडवेंचर नहीं है, बल्कि गद्दारी और न्याय के बीच चल रहे टकराव को भी बहुत प्रभावशाली ढंग से दिखाती है।
कथानक का विस्तार और विश्लेषण:

कहानी की शुरुआत अमेरिका के एक अंतरिक्ष केंद्र (Space Center) से होती है, जहाँ सर जॉनसन और माइकल आपस में बातचीत कर रहे हैं। यह सीन कहानी को ज़मीन से जोड़ता है और इसमें थोड़ा यथार्थ का एहसास भी भरता है। यहीं हमें योशो के पिता ‘योधराज’ के बारे में जानकारी मिलती है, जो पृथ्वी के पहले नागरिक थे जिन्होंने सूर्यग्रह की यात्रा की थी। यह बात साफ कर देती है कि योशो सिर्फ कोई काल्पनिक योद्धा नहीं है, बल्कि उसकी रगों में धरती का खून भी दौड़ता है। योधराज का रहस्यमय तरीके से गायब होना और फिर भारत में आकर उतरना कहानी में ऐसा सस्पेंस पैदा करता है, जो अंत तक बना रहता है।
गद्दारी का काला इतिहास
कहानी आगे फ्लैशबैक और रिकॉर्डिंग्स के ज़रिये आगे बढ़ती है। योशो अपनी माँ ‘शौर्या’ के साथ राजगुरु के गुप्त मठ में पहुँचता है। यहाँ एक आधुनिक प्रोजेक्टर के ज़रिये सूर्यग्रह पर हुई गद्दारी की पूरी कहानी दिखाई जाती है। सेनापति नैन्जा और तामा ग्रह के सम्राट की मिलीभगत को विस्तार से दिखाया गया है, जिससे साफ समझ आता है कि यह सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं थी, बल्कि पूरी तरह से रची गई एक खतरनाक साजिश थी।

नैन्जा का किरदार यहाँ एक बेहद चालाक और सत्ता का भूखा खलनायक बनकर सामने आता है। उसका मकसद सिर्फ राजा त्रिभुज की हत्या करना नहीं था, बल्कि जनता का समर्थन भी अपने पक्ष में करना था। राजा त्रिभुज द्वारा बनाया गया ‘आपातकालीन कक्ष’ (Emergency Chamber) विज्ञान का एक अनोखा नमूना है, जहाँ किसी भी आधुनिक हथियार का असर नहीं होता। नैन्जा का इस कक्ष में घुसकर राजा त्रिभुज को आत्महत्या के लिए मजबूर करना और फिर उनकी हत्या कर देना कहानी का सबसे दुखद और अहम मोड़ बन जाता है।
योशो का संकल्प और दिव्य शक्तियाँ
अपने नाना राजा त्रिभुज की हत्या का दृश्य देखकर योशो का गुस्सा अपने चरम पर पहुँच जाता है। यहाँ उसका एक संवाद बहुत गहरी छाप छोड़ता है—
“जिसने तुम्हें धोखा दिया, वह मेरा भी दुश्मन है।”
योशो यह समझ जाता है कि नैन्जा के पास एक विशाल सेना और आधुनिक हथियार हैं, इसलिए उसे खुद को पहले से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली बनाना होगा।

वह एक बार फिर अग्नि देवता की शरण में जाता है। पृष्ठ २० और २१ पर दिखाया गया ‘अग्नि तप’ का दृश्य चित्रांकन के लिहाज़ से बेहद शानदार है। आग के ऊपर उल्टा लटककर तप करना योशो के मजबूत इरादों को साफ-साफ दिखाता है। इसी तप के ज़रिये उसे अग्नि प्रहार की शक्ति मिलती है, जो उसे चलता-फिरता ह्यूमन फ्लेम बना देती है। इसके साथ ही उसकी आँखों से निकलने वाली गोलियाँ (Eye Bullets) उसकी सबसे खतरनाक वैज्ञानिक ताकत बनी रहती हैं।
कारागार का ध्वंस और न्याय
जेल के अंदर का माहौल किसी नरक से कम नहीं दिखाया गया है। योशो अपनी अग्नि शक्ति से जेल का गेट पिघला देता है। यहाँ ‘तड़-तड़’, ‘बड़ाक’ जैसे शब्द एक्शन को और ज़्यादा ज़िंदा बना देते हैं। राजगुरु को बेड़ियों से आज़ाद करना और फिर एक मरे हुए संतरी की वर्दी पहनाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना एक बेहद समझदारी भरी योजना लगती है। इस पूरे सीन में योशो सिर्फ एक सुपरहीरो नहीं, बल्कि एक गुरिल्ला वारफेयर एक्सपर्ट के रूप में भी उभरकर सामने आता है।
अंतिम युद्ध: नैन्जा का पतन

जब नैन्जा को समझ आता है कि जनता और सेना दोनों अब उसके खिलाफ हो चुके हैं, तो वह डरकर भागने की कोशिश करता है। योशो और नैन्जा के बीच होने वाला हवाई युद्ध (Aerial Battle) इस कॉमिक्स का चरम बिंदु है। योशो हवा में उड़ते हुए विमानों को अपनी अग्नि शक्ति से तबाह कर देता है।
भागते-भागते नैन्जा उसी जगह पहुँच जाता है, जहाँ राजकुमारी शौर्या छिपी हुई होती है। यह मानो किस्मत का इंसाफ था। योशो का अंतिम वार और नैन्जा का सिर कलम होना बुराई पर अच्छाई की पूरी जीत को दिखाता है। योशो का यह संवाद—
“माँ, यह है वह गद्दार, देख मैं इसके सिर को तेरे कदमों में काट कर फेंकता हूँ”—
वीर रस की चरम सीमा को छू जाता है।
पात्रों का गहरा विश्लेषण:
योशो: इस कॉमिक्स में योशो का किरदार पहले से कहीं ज़्यादा परिपक्व दिखाई देता है। वह अब सिर्फ एक राजकुमार नहीं, बल्कि एक विजेता और क्रांतिकारी के रूप में सामने आता है। उसकी शक्तियों का मेल—अग्नि देवता का आशीर्वाद और राजा त्रिभुज का विज्ञान—उसे भारतीय कॉमिक्स के सबसे अलग और खास पात्रों में शामिल कर देता है। उसका स्वभाव शांत है, लेकिन उसके फैसले बेहद मजबूत और अडिग हैं, जो उसे एक सच्चा नायक बनाते हैं।
नैन्जा: नैन्जा एक बेहद असरदार और यादगार खलनायक है। उसकी गद्दारी किसी अचानक लिए गए फैसले का नतीजा नहीं थी, बल्कि उसके पीछे पूरी योजना और चालाकी थी, जो उसे और भी खतरनाक बना देती है। उसका अंत भी बिल्कुल उसके स्वभाव के अनुसार होता है—कायरता और धोखेबाज़ी के साथ।
शौर्या: योशो की माँ शौर्या का किरदार पूरी कहानी में एक प्रेरणा की तरह मौजूद रहता है। वह अपने पिता की मौत का गहरा दुख सहती है, लेकिन इसके बावजूद अपने बेटे को टूटने नहीं देती। उसकी मजबूती और धैर्य योशो के चरित्र को और गहराई देता है।
राजगुरु: राजगुरु ज्ञान और अनुभव के प्रतीक हैं। योशो का उनके प्रति सम्मान भारतीय संस्कारों और गुरु-शिष्य परंपरा को बहुत खूबसूरती से दर्शाता है।
चित्रांकन और कला (Art and Graphics):

संजय शिरोडकर और रोहित का चित्रांकन इस कॉमिक्स को सच में एक ‘विजुअल ट्रीट’ बना देता है। लड़ाई के दृश्यों में गति और तेज़ी दिखाने के लिए ‘स्पीड लाइन्स’ का शानदार इस्तेमाल किया गया है, जिससे एक्शन सीन बेहद जीवंत लगते हैं। कलाकारों ने पात्रों के चेहरे के भावों पर खास ध्यान दिया है, जिससे गुस्सा, डर और गद्दारी जैसे भाव साफ दिखाई देते हैं। खासतौर पर नैन्जा के चेहरे पर गद्दारी की चालाकी और अंत में मौत का डर बहुत बारीकी से दिखाया गया है। इसके अलावा अंतरिक्ष यान, हवाई कारें और आपातकालीन कक्ष में दिखाए गए वैज्ञानिक उपकरणों का डिजाइन काफी फ्यूचरिस्टिक लगता है। गहरे रंगों का इस्तेमाल कहानी की गंभीरता और तनाव को और बढ़ा देता है। अग्नि से जुड़े दृश्यों में लाल और पीले रंगों का प्रभावशाली प्रयोग न सिर्फ उन्हें वास्तविक बनाता है, बल्कि पाठकों को शानदार दृश्य अनुभव भी देता है।
सामाजिक और नैतिक संदेश:
‘योशो की जंग’ सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके भीतर कई गहरे सामाजिक और नैतिक संदेश भी छुपे हुए हैं। कहानी ‘देशभक्ति बनाम गद्दारी’ के टकराव को बहुत प्रभावी तरीके से सामने रखती है। नैन्जा जैसे पात्र यह साफ संदेश देते हैं कि अधर्म और गद्दारी का अंजाम हमेशा बुरा होता है, चाहे गद्दार कितनी ही ताकत क्यों न इकट्ठा कर ले। साथ ही यह कहानी ‘सत्य की विजय’ के उस पुराने लेकिन सच्चे सिद्धांत को मज़बूती देती है कि जीत आखिरकार सच्चाई की ही होती है, बस ज़रूरत होती है योशो जैसे निडर और अडिग योद्धा की। सबसे अहम संदेश ‘जनशक्ति’ का है, जो यह याद दिलाता है कि तानाशाही तभी तक चलती है जब तक जनता चुप रहती है; जैसे ही लोगों को सच्चाई समझ आती है, सबसे मजबूत सिंहासन भी हिलने लगते हैं।
निष्कर्ष:
‘योशो की जंग’ तुलसी कॉमिक्स के इतिहास का एक गर्व से भरा अध्याय है। यह ४६ पन्नों की कॉमिक्स पाठक को ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहाँ रॉकेट और जादुई शक्तियाँ एक साथ मौजूद हैं। कहानी की पकड़ इतनी मजबूत है कि एक भी पृष्ठ फालतू नहीं लगता।
योशो का सूर्यग्रह का राजा बनना कहानी का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का संकेत है। जैसा कि अंतिम पृष्ठ पर योशो कहता है—
“मैं तब तक चैन से नहीं बैठूँगा जब तक तामा ज़िंदा है और पिता योधराज का पता नहीं चल जाता।”
यह संवाद पाठकों के मन में अगली कॉमिक्स के लिए उत्सुकता जगा देता है।
अगर आप ऐसी कॉमिक्स पढ़ना चाहते हैं, जिसमें ज़बरदस्त मार-धाड़ के साथ दमदार कहानी, गहरे जज़्बात और शानदार कल्पनाशीलता हो, तो ‘योशो की जंग’ ज़रूर आपके कलेक्शन में होनी चाहिए। यह भारतीय कॉमिक्स जगत की उन चुनिंदा कहानियों में से है, जो समय के साथ और भी बेहतर लगने लगती हैं।
कुल रेटिंग: ४.८/५
