दुर्गा कॉमिक्स के सबसे लोकप्रिय किरदारों में से एक ‘टोरा-टोरा’ रहा है। प्रस्तुत कॉमिक्स “नीली मौत” (Neeli Maut) टोरा-टोरा सीरीज़ की एक ऐसी कहानी है जो सिर्फ साइंस-फिक्शन और पौराणिक कल्पना को मिलाकर ही नहीं बनी, बल्कि उस दौर की सोच और कल्पनाशीलता को भी खूबसूरती से दिखाती है। 32 पन्नों की यह कॉमिक्स पाठक को समुद्र की गहराइयों से लेकर आसमान की ऊँचाइयों तक ले जाती है, जहाँ हर कदम पर खतरा और रोमांच मौजूद है।
कथानक का विस्तृत विश्लेषण:
कहानी की शुरुआत एक बहुत बड़े वैश्विक संकट से होती है। ‘नीली मौत’ नाम का एक विशाल और डरावना ड्रैगन अचानक दुनिया के लिए तबाही का संकेत बन जाता है। कॉमिक्स के शुरुआती पन्नों में ही टोरा-टोरा और इस ड्रैगन के बीच बनने वाले टकराव का माहौल खड़ा कर दिया जाता है। लेखक आबिद रिज़वी शुरू से ही एक तरह का ‘डूम्सडे’ यानी प्रलय जैसा माहौल बना देते हैं, जिससे पाठक तुरंत कहानी में खिंच जाता है।

इस कहानी का हीरो टोरा-टोरा है, जो अपनी जबरदस्त शारीरिक ताकत और बिजली जैसी शक्तियों के लिए जाना जाता है। वह इस ‘नीली मौत’ को रोकने के मिशन पर निकल पड़ता है। कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आता है जब टोरा-टोरा समुद्र के अंदर एक खास मिशन पर जाता है। यहाँ उसका सामना एक बेहद विशाल मगरमच्छ से होता है। यह सीन टोरा-टोरा की ताकत को शानदार तरीके से दिखाता है। वह अपनी समझदारी और ताकत दोनों का इस्तेमाल करके मगरमच्छ का जबड़ा फाड़ देता है और समुद्र के भीतर छुपी एक रहस्यमयी गुफा में पहुँच जाता है।
गुफा के अंदर का माहौल किसी हॉरर फिल्म जैसा लगता है। यहाँ टोरा-टोरा ‘मकड़जाल की दुनिया’ में पहुँचता है, जहाँ कई इंसानों को जाल में फँसाकर रखा गया है। इसी जगह उसका सामना एक ‘मानव भक्षी मकड़ी’ से होता है। इस कॉमिक्स की खास बात यह है कि इसमें विज्ञान और तकनीक को भी अच्छे से जोड़ा गया है। एक तरफ टोरा-टोरा खतरों से लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ‘केन्द्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान शाला’ में प्रोफेसर तनेजा और प्रोफेसर राघव कंप्यूटर के ज़रिए उसकी हर हरकत पर नज़र रखे हुए हैं। उस समय की कॉमिक्स के हिसाब से यह सोच काफ़ी आधुनिक थी।
कहानी में एक और अहम किरदार है ‘मैडम मैरीना’, जो शुरुआत में एक विलेन की तरह सामने आती है। वह समुद्र की गहराई में बनी अपनी प्रयोगशाला से ‘वृक्षावतार’ नाम के एक पेड़ जैसे दानव को टोरा-टोरा से लड़ने भेजती है। टोरा-टोरा अपनी इलेक्ट्रिक शॉक वाली शक्तियों का इस्तेमाल करके इस दानव को पूरी तरह खत्म कर देता है।
कहानी का सबसे रहस्यमय और दिलचस्प किरदार है ‘योगीराज गुंजारा’। वह एक शक्तिशाली योगी है, जिसके पास दिव्य दृष्टि और सम्मोहन जैसी शक्तियाँ हैं। हार मानने के बाद मैडम मैरीना योगीराज की शरण में जाती है। योगीराज अपनी शक्तियों से टोरा-टोरा को सम्मोहित कर लेते हैं। यहीं कहानी में एक ग्रे एरिया बनता है—क्या योगीराज सच में बुरे हैं या उनका कोई और बड़ा मकसद है? वह टोरा-टोरा को अपना गुलाम बना लेते हैं ताकि उससे मुख्य विलेन नटांजा के दुर्ग पर हमला कराया जा सके।

इसके बाद कहानी में ‘जैकल वॉरियर’ यानी सियार योद्धा की एंट्री होती है, जो आधा इंसान और आधी मशीन जैसा साइबोर्ग दिखता है। योगीराज, टोरा-टोरा और मैडम मैरीना को नटांजा के किले की ओर भेजते हैं। रास्ते में एक बार फिर ‘नीली मौत’ यानी ड्रैगन सामने आ जाता है। यही इस कॉमिक्स का सबसे ज़्यादा रोमांचक हिस्सा है, जहाँ आसमान में जबरदस्त युद्ध होता है। टोरा-टोरा अपने हाथों और जांघों से निकलने वाली बिजली की ताकत से ड्रैगन को हराने की कोशिश करता है।
नटांजा, जो एक हाई-टेक विलेन है, अपने चार सबसे ताकतवर योद्धाओं—स्टीलो, क्लोबो, काली और रोडियारा—को मैदान में उतार देता है। ये चारों तकनीक और मार्शल आर्ट्स में माहिर हैं। कॉमिक्स के आख़िरी हिस्से में टोरा-टोरा और इन योद्धाओं के बीच ज़बरदस्त लड़ाई देखने को मिलती है। अंत में नटांजा का दुर्ग तबाह हो जाता है और टोरा-टोरा सम्मोहन से आज़ाद हो जाता है।
पात्र चित्रण (Character Sketches):
टोरा-टोरा इस कॉमिक्स का असली केंद्र है। उसका लुक सुपरमैन और देसी पहलवानों का मिक्स लगता है। उसके शरीर पर बनी बिजली जैसी धारियाँ उसकी शक्तियों को साफ़ दिखाती हैं। वह सिर्फ एक फाइटर नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों से जुड़ा हुआ एक तरह का ‘सुपर सोल्जर’ भी लगता है।

योगीराज गुंजारा भारतीय ऋषियों और आधुनिक फैंटेसी के जादूगरों का मेल है। वह हवा में उड़ सकता है और लोगों के दिमाग को कंट्रोल कर सकता है। उसका किरदार कहानी को और गहराई देता है।
मैडम मैरीना एक मज़बूत महिला किरदार है, जो विज्ञान और तकनीक का प्रतिनिधित्व करती है। बाद में उसका दिल बदलना और नायकों के साथ मिलकर लड़ना कहानी को भावनात्मक टच देता है।
नटांजा एक टेक्नोलॉजी-लवर विलेन है, जो अपने दुर्ग से पूरी दुनिया पर राज करना चाहता है। वह सीधे लड़ने के बजाय अपने रोबोटिक योद्धाओं और हथियारों पर ज़्यादा भरोसा करता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration):
‘मैग आर्ट्स’ द्वारा किया गया आर्टवर्क उस समय के हिसाब से काफी दमदार है। पहले पन्ने का कवर, जिसमें टोरा-टोरा के पीछे विशाल ड्रैगन दिखाया गया है, तुरंत ध्यान खींच लेता है। लाल, नीले और पीले जैसे चटख रंग एक्शन सीन को और ज़िंदा बना देते हैं।

जब टोरा-टोरा मुक्का मारता है या बिजली छोड़ता है, तो ‘धड़’, ‘थक’, ‘ची-ई-ई-स’ जैसे साउंड इफेक्ट्स कॉमिक्स को और मज़ेदार बना देते हैं। समुद्र के नीचे की गुफाएँ, वैज्ञानिकों की लैब और नटांजा का उड़ता हुआ दुर्ग काफ़ी कल्पनाशील तरीके से दिखाए गए हैं।
संवाद और भाषा:
कॉमिक्स की भाषा ज़्यादातर शुद्ध हिंदी में है, जिसमें संस्कृत से आए शब्द भी मिलते हैं जैसे ‘प्रलय’, ‘अभेद्य’, ‘सम्मोहन’ और ‘विनाशक’। संवाद छोटे हैं लेकिन असरदार हैं। वैज्ञानिकों की बातचीत में ‘ट्रांसमिट’, ‘कंप्यूटर सिस्टम’ और ‘इलेक्ट्रिक शॉक’ जैसे अंग्रेज़ी शब्द इसे एक टेक्नोलॉजी-आधारित कॉमिक्स का फील देते हैं।
समीक्षात्मक टिप्पणी (Critical Review):
“नीली मौत” की सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ्तार है। कहानी कहीं भी धीमी नहीं पड़ती। लगभग हर दूसरे पन्ने पर नया खतरा और नया दुश्मन सामने आ जाता है। हालाँकि, कुछ जगहों पर लॉजिक थोड़ा ढीला लगता है, जैसे योगीराज का अचानक टोरा-टोरा को सम्मोहित करना और फिर उसे नटांजा के खिलाफ इस्तेमाल करना। लेकिन बच्चों और फैंटेसी कॉमिक्स के लिहाज़ से यह बात ज़्यादा खटकती नहीं है।

यह कॉमिक्स उस समय की सोच को भी दिखाती है, जहाँ एक तरफ योग और साधना पर भरोसा है और दूसरी तरफ विज्ञान और भविष्य की तकनीक को अपनाने का जज़्बा भी है।
निष्कर्ष:
“नीली मौत” सिर्फ एक साधारण कॉमिक्स नहीं है, बल्कि यह 90 के दशक के बच्चों की यादों का अहम हिस्सा है। दुर्गा कॉमिक्स ने टोरा-टोरा के रूप में एक ऐसा हीरो दिया था जो ताकतवर, बहादुर और अपने मिशन के लिए पूरी तरह समर्पित था।
अगर आप पुरानी यादों में लौटना चाहते हैं या यह देखना चाहते हैं कि भारतीय कॉमिक्स में सुपरहीरो को किस तरह पेश किया जाता था, तो “नीली मौत” ज़रूर पढ़ने लायक कॉमिक्स है। इसका अंत सस्पेंस के साथ होता है और अगले अंक ‘जंजाजू’ की झलक पाठक की उत्सुकता बनाए रखती है।
यह कॉमिक्स हमें याद दिलाती है कि अच्छाई की जीत के लिए कभी-कभी विज्ञान और आध्यात्म—दोनों को साथ आना पड़ता है। आज के डिजिटल ज़माने में भी, इस पुरानी कॉमिक्स का रोमांच और उसकी खुशबू अब भी ज़िंदा है।
