भारतीय कॉमिक्स के इतिहास में ‘दुर्गा कॉमिक्स’ एक ऐसा नाम रहा है जिसने अपनी दमदार कहानियों और अलग-अलग तरह के किरदारों के दम पर पाठकों के दिलों में खास जगह बनाई। इस प्रकाशन का सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला किरदार रहा है ‘महाबली लंगूरा’। पिछले अंक ‘महाबली लंगूरा–1’ में हमने देखा था कि कैसे लंगूरा ने खूंखार राक्षस कटीला का अंत कर आदिवासी कबीलों को उसके आतंक से आज़ादी दिलाई थी। उसी कहानी को आगे बढ़ाते हुए यह समीक्षा श्रृंखला के दूसरे अंक ‘महाबली लंगूरा और पिशाचनी डायन’ पर आधारित है, जो बदले की आग, जादू-टोना और एक बड़े महायुद्ध की रोमांचक कहानी पेश करती है।
कथानक का विस्तार और प्रतिशोध की ज्वाला
इस अंक की कहानी ठीक वहीं से शुरू होती है जहाँ पहला अंक खत्म हुआ था। कटीला की मौत उसकी बहन ‘पिशाचनी डायन’ को अंदर तक हिला देती है। वह गुस्से और बदले की आग में जल रही है और अपनी गुफा में अपनी बेटी ‘जहरीली’ के साथ बैठकर लंगूरा को खत्म करने की साजिश रचती है। लेखक डी.डी. पोखरियाल ने डायन के इस किरदार को बेहद खतरनाक और जिद्दी रूप में पेश किया है। वह कसम खाती है कि जब तक वह लंगूरा का खून नहीं पी लेगी, तब तक पानी की एक बूंद भी नहीं छुएगी।

कहानी में एक नया मोड़ तब आता है जब डायन अपने जादुई शीशे (Magic Mirror) की मदद से लंगूरा की हालत देखती है। उसे दिखाई देता है कि लंगूरा आदिवासियों के साथ कटीला की मौत का जश्न मना रहा है। आदिवासियों के नगाड़े, उनका नाच और ‘हैय्या हो’ के नारे डायन की जलन को और बढ़ा देते हैं। गुस्से में वह अपनी काली शक्तियों का इस्तेमाल कर ‘कालिया मसान’ नाम के एक बेहद डरावने प्रेत-पिशाच को जगा देती है।
कालिया मसान बनाम महाबली लंगूरा: एक ज़बरदस्त युद्ध
कालिया मसान का किरदार इस अंक का सबसे बड़ा आकर्षण है। हरे रंग का झुर्रियों भरा शरीर, तेज़ फुर्ती और खौफनाक शक्ल—सब कुछ उसे बेहद डरावना बनाता है। डायन उसे आदेश देती है कि वह लंगूरा को ज़िंदा पकड़कर उसके सामने लाए। कालिया मसान आदिवासियों की बस्ती में पहुंचते ही तबाही मचा देता है। वह अपनी मायावी ताकत से भयानक तूफान खड़ा कर देता है और आकाश से आग के गोलों की बारिश यानी Fire Rain शुरू कर देता है।
यहीं पर लंगूरा की योगशक्ति और ईश्वर भक्ति सामने आती है। जब वह देखता है कि आग की बारिश से जंगल और मासूम आदिवासी जल रहे हैं, तो वह पूरी श्रद्धा से वन देवी से प्रार्थना करता है। वन देवी प्रकट होकर उसे एक दिव्य धनुष और बाण देती हैं। जैसे ही लंगूरा उस बाण को आकाश में छोड़ता है, ज़ोरदार बारिश शुरू हो जाती है और आग शांत हो जाती है। यह दृश्य बहुत ही खूबसूरती से यह दिखाता है कि अच्छाई और प्रकृति की ताकत बुराई पर हमेशा भारी पड़ती है।

इसके बाद लंगूरा और कालिया मसान के बीच ज़बरदस्त मल्लयुद्ध होता है। कालिया मसान एक जादुई रस्सी (Magic Rope) फेंकता है, जो लंगूरा को कसकर जकड़ लेती है। लेकिन लंगूरा अपनी अपार ताकत और वेग (Momentum) से उस रस्सी को ही तोड़ डालता है। आखिरकार, वन देवी द्वारा दी गई तलवार से वह कालिया मसान का सिर धड़ से अलग कर देता है।
रहस्य और रणनीति: कटा हुआ सिर
यहीं से कहानी में पल्प-हॉरर का मज़ेदार ट्विस्ट आता है। सिर कटने के बाद भी कालिया मसान मरता नहीं है, बल्कि उसका सिर फिर से अपने धड़ से जुड़ जाता है। वह ज़ोर-ज़ोर से हंसते हुए कहता है कि उसे कोई मार नहीं सकता। इस मौके पर लंगूरा सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि अपनी समझदारी दिखाता है। वह समझ जाता है कि यह एक ‘सिद्ध पिशाच’ है जिसे साधारण तरीके से नहीं मारा जा सकता।

लंगूरा दोबारा उसका सिर काटता है और इस बार सिर को धड़ से जुड़ने का मौका ही नहीं देता। वह सिर को लेकर आकाश में उड़ जाता है और दूर पहाड़ों की चोटी पर जाकर उसे एक गहरे गड्ढे में दबा देता है, ऊपर से एक भारी चट्टान रख देता है। सिर के बिना कालिया मसान का धड़ बिल्कुल निष्क्रिय हो जाता है। यह रणनीति पाठकों को हैरान कर देती है और यह साबित करती है कि लंगूरा सिर्फ ताकतवर ही नहीं, दिमाग से भी बेहद तेज़ है।
पिशाचनी डायन का विशाल रूप और चरमोत्कर्ष (Climax)
जब डायन को पता चलता है कि उसका सबसे ताकतवर योद्धा भी हार चुका है, तो वह खुद युद्ध के मैदान में उतर आती है। वह अपना विशाल रूप (Giant Form) धारण कर लेती है और एक आंख वाली पहाड़ जितनी ऊँची राक्षसी यानी Cyclops बन जाती है।

अंतिम लड़ाई के पल बेहद रोमांच से भरे हुए हैं। डायन अपने अग्नि चक्र और कंकाल सेना छोड़ती है, जिन्हें लंगूरा अपने अग्नि बाणों से भस्म कर देता है। इसके बाद वह आकाश से वज्र बिजली (Lightning Bolt) चलाती है। लंगूरा चालाकी से उस बिजली को अपने पीछे लगाता है और समुद्र में छलांग लगा देता है, जिससे बिजली पानी में गिरकर बेअसर हो जाती है।
जब डायन का आतंक और बढ़ने लगता है, तो लंगूरा पास के एक शिव मंदिर में पहुंचता है। वहां भगवान शिव का त्रिशूल देखकर उसे एहसास होता है कि यही वह अस्त्र है जो इस राक्षसी का अंत कर सकता है। वह त्रिशूल लेकर उड़ता है और सीधे विशालकाय डायन के सीने में भोंक देता है। डायन का अंत हो जाता है और उसका शरीर समुद्र की लहरों में समा जाता है।
पात्रों का सूक्ष्म विश्लेषण
महाबली लंगूरा इस अंक में सिर्फ एक योद्धा नहीं, बल्कि एक सच्चे रक्षक और देवदूत की तरह उभरता है। उसकी ताकत का असली स्रोत उसकी विनम्रता और ईश्वर पर अटूट विश्वास है। वह कभी अपनी शक्ति पर घमंड नहीं करता और हर जीत का श्रेय वन देवी और महादेव को देता है।

पिशाचनी डायन नफरत और बदले की जीती-जागती मिसाल है। उसकी सारी शक्तियां काली विद्या पर टिकी हैं। उसकी हार यह साफ संदेश देती है कि अधर्म और तंत्र-मंत्र की ताकत आखिरकार दिव्य शक्ति के सामने टिक नहीं पाती।
डायन की बेटी जहरीली का किरदार एक रहस्य की तरह सामने आता है। मां की मौत के बाद उसका विलाप और बदले की कसम अगले अंक के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है।
चित्रांकन और कला पक्ष (Art Review)

हरविन्द्र मांकड़ का शानदार चित्रांकन इस कॉमिक्स की असली जान है। 90 के दशक की सीमित प्रिंटिंग तकनीक के बावजूद रंगों का जबरदस्त तालमेल देखने को मिलता है—लंगूरा का नीला शरीर और डायन का हरा विशाल रूप आंखों को तुरंत आकर्षित करता है। एक्शन सीन खास तौर पर प्रभावशाली हैं, चाहे वह पेज 18 पर सिर काटने वाला दृश्य हो या पेज 30 पर डायन का विशालकाय रूप। ‘खचाक’ और ‘धड़ाम’ जैसे साउंड इफेक्ट्स दृश्यों में जान डाल देते हैं। कवर आर्ट भी शुरुआत से ही रोमांच पैदा करता है, जहाँ विशाल राक्षस के सामने छोटे से लंगूरा को दिखाकर बिल्कुल ‘डेविड बनाम गोलियथ’ वाला अहसास मिलता है।
लेखन और संपादन
डी.डी. पोखरियाल की लेखन शैली सीधी-सादी होते हुए भी असरदार है। पौराणिक फंतासी और सुपरहीरो तत्वों को उन्होंने बड़ी आसानी से जोड़ा है। वन देवी और शिव त्रिशूल का इस्तेमाल कहानी को भारतीय जड़ों से मजबूती से जोड़ता है। संपादक दीपक जैन ने कहानी की रफ्तार को कहीं भी धीमा नहीं होने दिया और हर पन्ने पर सस्पेंस बनाए रखा है।
समीक्षात्मक विश्लेषण: खूबियाँ और कमियाँ

कहानी की तेज़ रफ्तार इसे बेहद मज़ेदार बनाती है, जहाँ एक भी पन्ना बेकार नहीं लगता। लंगूरा की जीत सिर्फ ताकत से नहीं बल्कि उसकी समझदारी से होती है, जो इसे आम कहानियों से अलग बनाती है। जंगल, गुफा, पहाड़, आकाश और समुद्र जैसे अलग-अलग माहौल कहानी को एक शानदार एडवेंचर का रूप देते हैं।
कमियों की बात करें तो कहानी का अंत थोड़ा जल्दबाज़ी वाला लगता है। शिव त्रिशूल का मिलना और डायन का तुरंत मारा जाना थोड़ा जल्दी निपटाया गया लगता है। अगर आखिरी लड़ाई को कुछ और पन्ने मिलते, तो क्लाइमैक्स और भी दमदार हो सकता था। साथ ही, कुछ जगहों पर तर्क की कमी दिखती है, लेकिन एक फैंटेसी कॉमिक्स होने के नाते इसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
‘महाबली लंगूरा’ जैसे किरदार उस दौर की याद दिलाते हैं जब मोबाइल और इंटरनेट नहीं हुआ करते थे। ये कॉमिक्स बच्चों को बहादुरी, नैतिकता और अपनी संस्कृति से जुड़ी कहानियाँ सिखाती थीं। लंगूरा में हनुमान जी की शक्ति और आधुनिक सुपरहीरो दोनों का शानदार मेल दिखाई देता है, जो भारतीय बच्चों के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा है।
निष्कर्ष
‘महाबली लंगूरा और पिशाचनी डायन’ (अंक-2) एक पूरी तरह मनोरंजन से भरपूर कॉमिक्स है। यह साहस, भक्ति और बुद्धि की अहमियत को खूबसूरती से सामने रखती है। कहानी का अंत ‘जहरीली’ के रूप में एक नए खतरे का संकेत देकर पाठकों को अगले अंक के लिए उत्साहित कर देता है। यह दुर्गा कॉमिक्स के बेहतरीन अंकों में से एक है और हर कॉमिक्स प्रेमी को इसे जरूर पढ़ना चाहिए।
यह अंक सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसी कलाकृति है जो यह सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, सत्य और विश्वास के सामने उसका अंत तय है।
