80 और 90 के दशक में जिस तरह नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव और डोगा जैसे नायकों ने बच्चों और युवाओं के दिलों पर राज किया, वह बात आज भी मिसाल मानी जाती है। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला और कॉमिक्स का स्वर्ण युग थोड़ा धीमा पड़ा, वैसे-वैसे पाठकों को एक ऐसी बड़ी और दमदार ‘महागाथा’ (Saga) की ज़रूरत महसूस होने लगी, जो पुरानी यादों को फिर से ताज़ा कर दे और साथ ही आधुनिक कहानी कहने के अंदाज़ से भी जुड़ी हो।
मनोज गुप्ता द्वारा प्रस्तुत और अनुपम सिन्हा द्वारा लिखी गई “सर्पसत्र” इसी सोच का नतीजा है। यह कॉमिक्स सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि दो अलग-अलग ब्रह्मांडों (नागराज यूनिवर्स और तौसी यूनिवर्स) का जबरदस्त टकराव है। ‘सर्पसत्र’ शब्द का मतलब होता है—सांपों का यज्ञ या विनाश का अनुष्ठान। इसका शीर्षक ही साफ इशारा कर देता है कि इस कॉमिक्स में कुछ बहुत बड़ा, खतरनाक और डरावना होने वाला है।
कथानक का विस्तार (Plot Analysis)
कॉमिक्स की शुरुआत एक रहस्यमयी और पौराणिक माहौल से होती है, जहाँ प्राचीन समय की एक नौका और एक भयानक प्रलय का दृश्य दिखाया गया है। यह हिस्सा पाठकों को पहले ही बता देता है कि वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है, उसकी जड़ें बहुत पुराने समय से जुड़ी हुई हैं।

इसके बाद कहानी वर्तमान में आती है, जहाँ ‘महानगर’ (नागराज का शहर) के मेट्रो स्टेशन पर अजीब-सी शांति छाई हुई है। यहीं हमारी मुलाकात एक महिला से होती है—एडवोकेट तिरुमला, जो महानगर में सांपों के खिलाफ एक कानूनी लड़ाई लड़ रही है। तभी अचानक ‘सर्पट’ नाम का एक डरावना और अजीब इच्छाधारी सांप उस पर हमला कर देता है। इसी मौके पर नागराज की एंट्री होती है। लेकिन यह नागराज वह नहीं है जिसे हम आमतौर पर देखते आए हैं। यहाँ वह कुछ कमजोर दिखता है और किसी अनजान संक्रमण से जूझ रहा है।
लड़ाई आगे बढ़ती है और इसी दौरान ‘गर्ला’ और ‘त्रिमुंड’ जैसे ताकतवर योद्धाओं का परिचय होता है। ये साधारण विलेन नहीं हैं, बल्कि इनके पास दिव्य अस्त्र और खास नाग-शक्तियाँ हैं। जब नागराज इनसे टकराता है, तो उसे महसूस होता है कि उसके सूक्ष्म सर्प और उसकी शक्तियाँ पहले जैसी काम नहीं कर रही हैं। कहानी यहीं एक बड़ा मोड़ लेती है, जब ‘तौसी’ का प्रवेश होता है। तौसी खुद एक बेहद शक्तिशाली नाग-मानव है, जो अपनी खोई हुई अर्धांगिनी ‘श्री’ की तलाश में पृथ्वी पर तबाही मचाने को तैयार है। उसे पूरा यकीन है कि पृथ्वीवासियों ने उसकी श्री का अपहरण किया है।

पूरी कॉमिक्स में सस्पेंस इस बात को लेकर बना रहता है कि आखिर ये नए नाग-योद्धा आए कहाँ से हैं? तौसी और नागराज के बीच का टकराव कैसे पूरे महानगर को विनाश की तरफ धकेल रहा है? और वह रहस्यमयी महिला आखिर कौन है, जिसे नागराज हर हाल में बचाने की कोशिश कर रहा है?
पात्र चित्रण (Characterization)
नागराज (The World Protector):
इस कॉमिक्स में नागराज को एक बिल्कुल अलग और भावनात्मक रूप में दिखाया गया है। वह अपनी पूरी ताकत में नहीं है। ‘गर्ला’ के विष के कारण वह संक्रमित हो चुका है, जिससे उसके शरीर के अंदर मौजूद सूक्ष्म सर्प धीरे-धीरे मर रहे हैं। अनुपम सिन्हा ने नागराज के अंदर चल रहे संघर्ष को बहुत अच्छे ढंग से दिखाया है—एक तरफ महानगर की रक्षा करने की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ उसकी बिगड़ती सेहत और विसर्पी के प्रति उसका गहरा प्रेम।

तौसी (The Mighty Emperor):
तौसी का किरदार इस पूरी कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताकत है। वह एक तरह का ‘एंटी-हीरो’ है। उसका गुस्सा, उसकी अपार शक्ति और अपनी प्रेमिका के लिए उसका पागलपन उसे एक बेहद खतरनाक योद्धा बना देता है। जब वह पृथ्वी के ‘स्नायु स्तंभ’ (Earth’s Nervous System) पर हमला करता है, तो पाठक उसकी ताकत और तबाही को साफ महसूस कर सकते हैं।
विसर्पी और भारती:
इन दोनों महिला पात्रों की मौजूदगी कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ती है। भारती जहाँ महानगर की सुरक्षा और मीडिया से जुड़े मोर्चे को संभालती है, वहीं विसर्पी नागराज की शक्ति और उसकी सबसे बड़ी प्रेरणा बनी हुई है। विसर्पी का रहस्यमयी रवैया और नागराज के लिए उसकी चिंता कहानी में एक अलग ही भावनात्मक धारा जोड़ देती है।
विलेन (गर्ला, त्रिमुंड और नागमणि):
गर्ला और त्रिमुंड जैसे विलेन को बेहद डरावना और ताकतवर दिखाया गया है। ये सिर्फ शारीरिक बल पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि ‘सर्प-तंत्र’ जैसी खतरनाक शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं। वहीं बैकग्राउंड में ‘नागमणि’ की मौजूदगी कहानी में पुरानी दुश्मनी और बीते हुए संघर्षों की याद दिलाती रहती है।
कला और चित्रण (Art and Illustration Analysis)

अनुपम सिन्हा, जिन्हें भारतीय कॉमिक्स का ‘किंग’ कहा जाता है, उन्होंने “सर्पसत्र” में अपने आधुनिक और दमदार आर्टवर्क से एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित की है। इस कॉमिक्स के एक्शन सीक्वेंस—चाहे वह पम्पिंग स्टेशन में नागराज और त्रिमुंड के बीच की जबरदस्त भिड़ंत हो या झील के अंदर शीतनाग कुमार और सौडांगी की लड़ाई—हर जगह डिटेल्स से भरपूर नज़र आते हैं। खासतौर पर पानी के नीचे के दृश्यों में रंगों और ‘बबल्स’ का इस्तेमाल इतना शानदार है कि वह सीन आंखों में बस जाता है।
कैरेक्टर डिजाइन की बात करें तो तौसी के दिव्य अस्त्र, नागराज की बारीक और विस्तृत वेशभूषा, और ‘गर्ला’ के पिघलती धातु जैसे डरावने हाथों को बेहद बारीकी से उकेरा गया है। साथ ही, इस कॉमिक्स की कलरिंग कहानी के मूड के साथ बदलती रहती है। जहाँ महानगर की रात नीले और काले शेड्स में गहराई और रहस्य पैदा करती है, वहीं तौसी का गुस्सा लाल और सुनहरे रंगों के ज़रिये पैनल पर जलता हुआ सा महसूस होता है।
संवाद और पटकथा (Dialogues and Screenplay)

नितिश शर्मा द्वारा लिखे गए संवाद और अनुपम सिन्हा की पटकथा काफी तेज़ और असरदार है। कॉमिक्स में शब्दों का चुनाव बहुत सोच-समझकर किया गया है। ‘सर्प-संकेत’, ‘तिलिस्मी जाल’, ‘स्नायु केंद्र’ जैसे शब्द कहानी को एक साइंस और पौराणिक फैंटेसी (Sci-Fi/Fantasy) का बेहतरीन मिश्रण बना देते हैं। तौसी और नागराज के बीच होने वाले संवादों में एक अलग ही गरिमा दिखाई देती है, भले ही वे एक-दूसरे के दुश्मन के रूप में आमने-सामने हों।
थीम और गहरे अर्थ (Themes and Underlying Messages)

“सर्पसत्र” सिर्फ सांपों की आपसी लड़ाई की कहानी नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर और गहरे विषयों को भी छूती है। पृथ्वी के आधार स्तंभ को नष्ट करने की साजिश दरअसल इंसान द्वारा प्रकृति के साथ की जा रही लगातार छेड़छाड़ और उसके खतरनाक नतीजों का एक मजबूत प्रतीक बनकर सामने आती है। यह कहानी यह भी दिखाती है कि गलतफहमी कितनी विनाशकारी हो सकती है, जैसा कि तौसी के गुस्से में साफ दिखाई देता है—जहाँ बिना सच्चाई जाने उठाया गया एक कदम कई निर्दोष लोगों के लिए मौत का कारण बन सकता है। अंत में, नागराज का खुद मौत के बेहद करीब पहुँचकर भी महानगर को बचाने के लिए डटे रहना सच्चे ‘हीरोइज्म’ और आत्म-बलिदान की भावना को पूरी ताकत के साथ सामने रखता है।
समीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा: कमियां और खूबियां

खूबियां:
“सर्पसत्र” नागराज की पुरानी कहानियों, जैसे नगीना और विशाखा, के संदर्भों को बहुत समझदारी से जोड़ते हुए कहानी की निरंतरता (Continuity) बनाए रखती है। इसकी पेसिंग इतनी सटीक है कि कहानी कहीं भी धीमी नहीं पड़ती और लगभग हर पेज पर या तो कोई नया रहस्य सामने आता है या फिर जबरदस्त एक्शन देखने को मिलता है। इसके साथ ही, राज कॉमिक्स ने इसकी छपाई और कागज की गुणवत्ता पर जो खास ध्यान दिया है, वह इसे देखने और रखने में शानदार बनाता है और इसे एक बेहतरीन ‘कलेक्टर्स आइटम’ का दर्जा देता है।
कमियां:
जो पाठक नागराज या तौसी के पुराने इतिहास से परिचित नहीं हैं, उनके लिए यह कहानी थोड़ी जटिल लग सकती है। इतने सारे पात्रों—शीतनाग कुमार, सौडांगी, विसर्पी, भारती, तौसी और गर्ला—के बीच मुख्य कहानी कभी-कभी थोड़ी भटकी हुई महसूस होती है।
इसके अलावा, कहानी का अंत एक बड़े ‘क्लिफहैंगर’ (Cliffhanger) पर होता है, जिससे कुछ पाठकों को निराशा हो सकती है क्योंकि अब उन्हें अगले भाग ‘सर्पदंड’ के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ेगा।
निष्कर्ष (Final Verdict)
“सर्पसत्र” राज कॉमिक्स के इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। यह मनोज गुप्ता की दूरदर्शी सोच और अनुपम सिन्हा की शानदार कला का बेहतरीन संगम है। यह कॉमिक्स एक बार फिर याद दिलाती है कि भारतीय सुपरहीरो कहानियों में हॉलीवुड के मार्वल या डीसी यूनिवर्स के बराबर खड़े होने की पूरी क्षमता है।
अगर आप नागराज के प्रशंसक हैं, तो यह आपके लिए एकदम ‘मस्ट रीड’ (Must Read) है। और अगर आपको तौसी पसंद है, तो उसका यह नया और ताकतवर अवतार आपको पूरी तरह रोमांचित कर देगा। यह कॉमिक्स सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय कॉमिक्स संस्कृति के नए जन्म जैसा एहसास कराती है।
रेटिंग: 4.5/5
