‘अभिमन्यु’ गोयल कॉमिक्स प्रकाशन के सबसे लोकप्रिय और निडर पात्रों में से एक रहा है। “बम विस्फोट” कहानी सिर्फ एक एक्शन-एडवेंचर कॉमिक नहीं है, बल्कि उस दौर की सामाजिक और राजनीतिक परेशानियों—जैसे उग्रवाद और आतंकवाद—को भी एक काल्पनिक कहानी के ज़रिये सामने लाती है। यह कॉमिक पाठकों को मनोरंजन के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती है कि उस समय देश किन हालातों से गुजर रहा था।
कहानी का विस्तृत विवरण (Plot Summary)
कहानी की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली के मशहूर चाँदनी चौक इलाके से होती है। हमेशा चहल-पहल से भरे इस बाज़ार में अचानक एक जबरदस्त धमाका होता है, जिससे पूरी इमारत मलबे में बदल जाती है। लोग अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाते कि धमाकों का सिलसिला आगे भी जारी रहता है। एक आलीशान होटल में चल रही जन्मदिन की पार्टी के दौरान ‘गिफ्ट’ के नाम पर भेजे गए एक बॉक्स में विस्फोट हो जाता है, जिसमें कई बेगुनाह लोग मारे जाते हैं।

जल्द ही पता चलता है कि इन सभी धमाकों के पीछे ‘कोबरा इंटरनेशनल कमांडो ग्रुप’ (Cobra International Commando Group) का हाथ है। इस खतरनाक संगठन का ठिकाना बर्फ से ढकी पहाड़ियों में बसे ‘शांगरी-ला’ नाम की जगह पर है। इस ग्रुप का सरगना माइकल उर्फ कोबरा चीफ है, जो बेहद निर्दयी और सत्ता का भूखा इंसान है। उसका मकसद भारत में इतना डर फैलाना है कि सरकार उसके सामने झुकने पर मजबूर हो जाए।
कोबरा चीफ आतंक फैलाने के लिए ‘मानव बम’ की खौफनाक तकनीक अपनाता है। इसमें ऐसे लोगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो अपने शरीर पर बम बाँधकर या शरीर के अंदर बम फिट करवाकर खुद को उड़ा लेते हैं। हालात तब और भयानक हो जाते हैं जब एक मानव बम एक बड़े धार्मिक गुरु आचार्य जगदेश्वर की हत्या कर देता है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह परेशान हो जाती हैं, क्योंकि ये हमलावर आम लोगों की भीड़ में घुल-मिलकर अचानक धमाका कर देते हैं।
यहीं से कहानी में हमारे सुपरहीरो अभिमन्यु की एंट्री होती है। अभिमन्यु का असली नाम कृष्णा है, जो पेशे से एक मशहूर कार्टूनिस्ट है। लेकिन जब भी देश पर कोई बड़ा खतरा आता है, वही कृष्णा अभिमन्यु बनकर सामने आता है। अपनी जबरदस्त ताकत, तेज़ रफ्तार और दिव्य हथियारों (भाला और तीर) की मदद से वह अपराधियों के लिए काल बन जाता है।

अभिमन्यु समय रहते एक मानव बम को सचिवालय में घुसने से पहले ही पकड़ लेता है और बड़ी समझदारी से उसके शरीर से बम अलग कर देता है। पकड़े गए आतंकी से पूछताछ के बाद उसे कोबरा ग्रुप के मुख्य अड्डे का पता चल जाता है। बिना किसी मदद के अभिमन्यु अकेले ही शांगरी-ला की बर्फीली पहाड़ियों की ओर निकल पड़ता है। वहाँ उसे पता चलता है कि कोबरा चीफ ने और भी खतरनाक तरीका अपनाया है—लोगों के पेट का ऑपरेशन करके उनके शरीर के अंदर बम फिट करना।
आखिरकार एक ज़बरदस्त और जानलेवा मुकाबले के बाद अभिमन्यु कोबरा चीफ की सारी साजिशों को नाकाम कर देता है। वह न सिर्फ कोबरा कमांडो ग्रुप को खत्म करता है, बल्कि उन हज़ारों युवाओं को भी आज़ाद कराता है जिन्हें जबरन ‘मानव बम’ बनाने के लिए कैद किया गया था।
पात्र विश्लेषण (Character Analysis)

अभिमन्यु (सुपरहीरो):
अभिमन्यु का किरदार ताकत और इंसाफ का प्रतीक है। उसका कॉस्ट्यूम काफी आकर्षक है—पीले रंग का सूट, लाल केप और सीने पर ढाल जैसा खास निशान। वह सिर्फ अपनी ताकत पर भरोसा नहीं करता, बल्कि उसकी समझदारी और सूझ-बूझ भी उसे खास बनाती है। उसकी गुप्त पहचान—एक आम कार्टूनिस्ट कृष्णा—उसे आम लोगों के और करीब ले आती है।
कोबरा चीफ (खलनायक):
इस कॉमिक का विलेन माइकल एक ठेठ सत्ता-लोलुप अपराधी है। उसकी सोच और योजनाएँ अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं। वह गरीब और मजबूर युवाओं को पैसों का लालच देकर ‘मानव बम’ बनाता है, जो उसके बेहद घटिया और अमानवीय स्वभाव को साफ दिखाता है।
इंस्पेक्टर मगर (पुलिस):
इंस्पेक्टर मगर पुलिस सिस्टम की मजबूरी और ईमानदारी दोनों को दर्शाता है। वह जानता है कि हर लड़ाई सिर्फ कानून से नहीं जीती जा सकती। इसलिए वह अभिमन्यु का सम्मान करता है और मानता है कि कुछ हालातों में एक सुपरहीरो की ज़रूरत होती है।
थीम और सामाजिक संदेश (Themes and Social Message)

“बम विस्फोट” सिर्फ एक एक्शन से भरी कॉमिक्स नहीं है, बल्कि इसके अंदर कई गहरे सामाजिक संदेश भी छिपे हुए हैं। कहानी सार्वजनिक जगहों पर होने वाले धमाकों और मासूम लोगों की मौत को दिखाकर आतंकवाद के भयानक और अमानवीय चेहरे को साफ तौर पर सामने लाती है। यह कॉमिक्स यह भी दिखाती है कि आतंकवाद सिर्फ बंदूक और बम से नहीं फैलता, बल्कि इसके पीछे समाज की कुछ सच्ची और कड़वी हकीकतें भी होती हैं।
कहानी इस बात पर भी रोशनी डालती है कि कैसे गरीबी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर मजबूर और जरूरतमंद युवाओं को गलत रास्ते पर धकेल दिया जाता है। उन्हें पैसों और झूठे सपनों का लालच देकर आतंक की राह पर खड़ा कर दिया जाता है। इन सब अंधेरे हालातों के बीच, अभिमन्यु का यह संकल्प—
“जब-जब विश्व में आतंक ने सिर उठाया है… तब-तब अभिमन्यु आया है”—
पाठकों के मन में देशभक्ति, सुरक्षा और उम्मीद की मजबूत भावना पैदा करता है।
चित्रांकन और संवाद (Artwork and Dialogue)

जी.के. श्रेष्ठ का चित्रांकन अपने समय के हिसाब से काफी दमदार और प्रभावशाली है। प्राथमिक रंगों का खुलकर इस्तेमाल कॉमिक्स को बेहद चमकदार बनाता है, जो खास तौर पर बच्चों और किशोर पाठकों को आकर्षित करता है। धमाकों के सीन में इस्तेमाल हुए ‘धड़ाम’, ‘बर्रूम’ और ‘खटाक’ जैसे साउंड इफेक्ट्स पूरे एक्शन को और ज़िंदा कर देते हैं।
अभिमन्यु के उड़ने, लड़ने और दुश्मनों पर टूट पड़ने के दृश्य बहुत ही जोशीले ढंग से बनाए गए हैं। संवाद भी ज्यादा भारी-भरकम नहीं हैं, बल्कि सीधे और असरदार हैं। एक तरफ ‘मानव बम’ का यह कहना—
“अब न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी”
उसकी कट्टर सोच और नफरत को दिखाता है, वहीं दूसरी ओर अभिमन्यु के संवाद न्याय, साहस और इंसानियत की भावना से भरे हुए नजर आते हैं।
कलात्मक कमियाँ और सकारात्मक पक्ष (Pros and Cons)

सकारात्मक पक्ष:
कहानी की रफ्तार तेज़ है, जिससे यह कहीं भी बोर नहीं करती। शुरुआत से लेकर अंत तक पाठक कहानी से जुड़ा रहता है। आतंकवाद जैसे गंभीर विषय को बच्चों और आम पाठकों के लिए समझने लायक अंदाज में पेश करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही अभिमन्यु के सुपरहीरो व्यक्तित्व को भी बहुत प्रभावशाली और प्रेरणादायक रूप में दिखाया गया है।
कमियाँ:
कुछ दृश्यों में ‘मानव बम’ के फटने के बाद शरीर के टुकड़े उड़ते हुए दिखाए गए हैं, जो बहुत छोटे बच्चों के लिए थोड़ा डरावना या असहज हो सकता है। इसके अलावा, इतने बड़े और खतरनाक आतंकवादी संगठन का अंत थोड़ा जल्दी और आसान लगता है। अभिमन्यु बहुत आसानी से हेडक्वार्टर में घुसकर सबको हरा देता है, जबकि क्लाइमेक्स को थोड़ा और चुनौतीपूर्ण और रोमांचक बनाया जा सकता था।
निष्कर्ष (Conclusion)
गोयल कॉमिक्स की “बम विस्फोट” अपने समय की एक बेहतरीन और यादगार कॉमिक्स है। यह सिर्फ रोमांच और एक्शन नहीं देती, बल्कि आतंकवाद को लेकर समाज की चिंता और डर को भी साफ तौर पर सामने रखती है। अभिमन्यु ऐसा नायक है जिसमें आधुनिक हथियारों की ताकत और प्राचीन वीरता—दोनों का सुंदर मेल देखने को मिलता है।
आज के दौर में जब हम हॉलीवुड और मार्वल के सुपरहीरोज़ को देखते हैं, तब अभिमन्यु जैसे देसी सुपरहीरो हमें हमारे बचपन और अपनी संस्कृति से जुड़े नायकों की याद दिलाते हैं। जी.के. श्रेष्ठ की यह कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है, क्योंकि आतंकवाद का खतरा आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
अगर आप पुरानी कॉमिक्स के शौकीन हैं और भारतीय सुपरहीरो की दुनिया को फिर से महसूस करना चाहते हैं, तो “बम विस्फोट” जरूर पढ़नी चाहिए। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि चाहे अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, एक ‘अभिमन्यु’ हमेशा इंसाफ और उम्मीद की मशाल लेकर जरूर आएगा।
