राज कॉमिक्स की ‘आखिरी’ श्रृंखला भारतीय कॉमिक्स के इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे महत्वाकांक्षी कोशिशों में से एक मानी जाती है। इस श्रृंखला के पहले दो भाग—‘आखिरी रक्षक’ और ‘परकालों की धरती’—ने जिस रहस्य और रोमांच की नींव रखी थी, ‘ब्रह्मांड योद्धा’ उसे कई कदम आगे ले जाता है। जहाँ पहले दो हिस्सों में नायक हालात को समझने और जोड़ने की कोशिश कर रहे थे, वहीं इस भाग में वे सीधे एक अंतर-आकाशगंगा (Inter-galactic) युद्ध के बीचों-बीच पहुँच जाते हैं। इस कहानी में केवल सुपर कमांडो ध्रुव और परमाणु ही नहीं, बल्कि डोगा, इंस्पेक्टर स्टील, गगन और विनाशदूत जैसे दिग्गज नायकों की मौजूदगी इसे सच मायनों में ‘ब्रह्मांडीय’ बना देती है।
कथानक का सारांश: उलझते धागे और उभरते खतरे

कहानी ठीक वहीं से आगे बढ़ती है, जहाँ पिछला भाग खत्म हुआ था। मेक्सिको के रहस्यमयी स्थल ‘चिचेन इत्जा’ में ध्रुव और परमाणु, कारा (Kara) नाम की एक रहस्यमयी परग्रही स्त्री के साथ मौजूद हैं। कारा उन्हें बताती है कि पूरे ब्रह्मांड में ‘कॉस्मिक इम्बैलेंस’ (Cosmic Imbalance) पैदा हो गया है, जिसकी वजह से ‘ट्रांसफ्यूजन’ (Transfusion) नाम की एक खतरनाक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस प्रक्रिया में एक ग्रह के जीव अचानक दूसरे ग्रह पर पहुँच रहे हैं, बिना यह समझे कि वे क्यों और कैसे वहाँ आ गए।
मैक्ट्रियाम ग्रह का संघर्ष: डोगा और स्टील
कहानी का एक अहम हिस्सा ‘मैक्ट्रियाम’ (Mactriam) ग्रह पर घटता है। यहाँ राजनगर के दो सबसे सख्त और निडर रक्षक—डोगा और इंस्पेक्टर स्टील—मैक्रोबोट्स (Macrobots) की कैद में हैं। इस हिस्से में नितिन मिश्रा का लेखन पात्रों की सोच और स्वभाव को बहुत अच्छे से सामने लाता है। डोगा, जिसे गुस्से और सीधे “खत्म कर देने” वाले रवैये के लिए जाना जाता है, तुरंत लड़ाई पर उतरना चाहता है। दूसरी तरफ इंस्पेक्टर स्टील एक जिम्मेदार पुलिस अफसर की तरह हालात को समझकर और बातचीत से हल निकालने की कोशिश करता है।
धीरे-धीरे यह साफ होता है कि मैक्ट्रियाम के निवासी असल में दुश्मन नहीं हैं, बल्कि वे खुद डरे हुए हैं। उन्हें लगता है कि पृथ्वीवासी उनके ग्रह पर जबरन आ गए हैं। यहाँ यह बात उभरकर सामने आती है कि ‘ट्रांसफ्यूजन’ की वजह से पूरे ब्रह्मांड में डर, गलतफहमी और असुरक्षा फैल चुकी है।
केप टाउन: मासूमियत और नफरत के बीच

इसके बाद ध्रुव, परमाणु और कारा दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन पहुँचते हैं। वहाँ वे एक घर में ‘इओध्रान’ (Idhodhan) ग्रह के एक परग्रही परिवार को छिपा हुआ पाते हैं। यह सीन बेहद भावुक है। यह दिखाता है कि इस संकट में सिर्फ पृथ्वीवासी ही नहीं, बल्कि निर्दोष परग्रही भी अपने घर से दूर, एक अनजान दुनिया में डर के साये में जी रहे हैं। ध्रुव, जो हमेशा मानवता और करुणा का प्रतीक रहा है, उन्हें सुरक्षा का भरोसा देता है।
लेकिन यह शांति ज्यादा देर नहीं रहती। मैक्ट्रियाम के हमलावर मैक्रोबोट्स वहाँ पहुँच जाते हैं। यहीं पर ध्रुव की रणनीतिक समझ (Strategic Intelligence) फिर से सामने आती है। वह परमाणु और कारा को इओध्रान परिवार को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी देता है और खुद उन विशाल मशीनों को केप टाउन के ‘टेबल माउंटेन’ (Table Mountain) की संकरी घाटियों में फँसा देता है। यह ध्रुव की पहचान है—ताकत का जवाब हमेशा दिमाग से देना।
हेज्ट्रो ग्रह का मोर्चा: गगन और विनाशदूत

कहानी का एक और सिरा ‘हेज्ट्रो’ (Heztro) ग्रह पर खुलता है। यहाँ पृथ्वी का नायक गगन और परग्रही योद्धा विनाशदूत (Vinashdoot) हजारों बंधक बनाए गए पृथ्वीवासियों को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हेज्ट्रो के शासकों को बेहद क्रूर और निर्दयी दिखाया गया है। वे अपनी हालत के लिए पृथ्वीवासियों को दोषी मानते हैं और बदले की भावना में एक हत्यारी टुकड़ी को पृथ्वी भेजते हैं, ताकि ‘उत्तरजीवियों’—यानी ध्रुव और परमाणु—को खत्म किया जा सके।
पात्र विश्लेषण: नायक और उनकी चुनौतियाँ
सुपर कमांडो ध्रुव: इस भाग में ध्रुव सिर्फ एक योद्धा नहीं, बल्कि एक कमांडर के रूप में सामने आता है। वह अलग-अलग ग्रहों, संस्कृतियों और भाषाओं के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश करता है और हालात को बिगड़ने से रोकने का भार अपने कंधों पर लेता है।

परमाणु: परमाणु की स्थिति सबसे ज्यादा जटिल है। उसकी बढ़ती शक्तियाँ अब उसके अपने शरीर के लिए दर्द और खतरे का कारण बन रही हैं। वह एक ऐसे ‘टिक-टिक करते बम’ की तरह है, जो कभी भी फट सकता है।
कारा: इस भाग में कारा का किरदार और मजबूत होकर उभरता है। वह सिर्फ रास्ता दिखाने वाली नहीं है, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा को नियंत्रित करने की ताकत भी रखती है। मुश्किल वक्त में वह नायकों के लिए एक ढाल की तरह खड़ी रहती है।
डोगा और स्टील: इन दोनों के बीच की नोकझोंक, सोच का टकराव और अजीब सी दोस्ती कहानी में हल्का हास्य भी लाती है और तनाव भी बनाए रखती है।
चित्रांकन और तकनीकी पक्ष (Art & Visuals)
धीरज वर्मा का चित्रांकन इस कॉमिक्स में अपने पूरे शिखर पर नजर आता है। ‘ब्रह्मांड योद्धा’ के विजुअल्स किसी भव्य साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा अनुभव देते हैं। मैक्रोबोट्स और परग्रही अंतरिक्ष यानों को उन्होंने इतनी बारीकी और डिटेल के साथ बनाया है कि वे एक साथ डरावने भी लगते हैं और पूरी तरह आधुनिक भी। हेज्ट्रो और मैक्ट्रियाम जैसे दूर-दराज़ ग्रहों को अलग-अलग रंगों और खास टेक्सचर के साथ दिखाना उनकी कलात्मक समझ को साफ दर्शाता है। टेबल माउंटेन पर ध्रुव का पीछा करती मशीनें हों या हेज्ट्रो ग्रह पर गगन के ज़बरदस्त मुकाबले—ये सभी एक्शन सीक्वेंस बेहद जीवंत और तेज़ रफ्तार (Dynamic) महसूस होते हैं।
इसके साथ ही भक्त रंजन का रंग-संयोजन कहानी के गंभीर और रोमांचक माहौल को पूरी तरह पकड़ लेता है। अंतरिक्ष की गहरी नीली छाया और विनाशकारी विस्फोटों की नारंगी चमक के बीच का कंट्रास्ट दृश्यों को और ज़्यादा प्रभावशाली बना देता है।
वैज्ञानिक और दार्शनिक पहलू

नितिन मिश्रा ने इस कहानी को सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके ज़रिये कुछ गहरे सवाल भी खड़े किए हैं। ‘ट्रांसफ्यूजन’ की अवधारणा साफ तौर पर शरणार्थी संकट (Refugee Crisis) का एक रूपक लगती है। जब एक ग्रह के लोग मजबूरी में दूसरे ग्रह पर पहुँचते हैं, तो संसाधनों की कमी और डर की वजह से टकराव और युद्ध शुरू हो जाता है। यह कॉमिक्स बहुत सरल तरीके से यह दिखाती है कि असल में ‘अज्ञानता’ ही युद्ध की सबसे बड़ी जड़ होती है।
चरमोत्कर्ष (Climax) और नागराज का प्रवेश
कहानी का क्लाइमेक्स दिल्ली के ‘साटी’ (S.A.T.I) संस्थान के खंडहरों में पहुँचकर सामने आता है। ध्रुव, परमाणु और कारा उस मशीन तक पहुँच जाते हैं, जो इस पूरे विनाश की असली वजह है। जैसे ही परमाणु उस मशीन के संपर्क में आता है, वह असहनीय पीड़ा से चीख उठता है। उसी वक्त अलग-अलग ग्रहों की संयुक्त सेनाएं (Combined Forces) आसमान से उतरती हैं, जिनका मकसद नायकों को पूरी तरह खत्म करना होता है।

जब हालात पूरी तरह हाथ से निकलते हुए दिखते हैं और कारा अपना आखिरी सुरक्षा कवच भी खोने लगती है, तभी एक चौंकाने वाला मोड़ आता है। आसमान से एक ‘नागरस्सी’ (Snake-rope) नीचे उतरती है और हमलावरों के एक यान को पल भर में तबाह कर देती है। यह पल राज कॉमिक्स के सबसे बड़े नायक ‘नागराज’ (Nagraj) के आगमन का संकेत होता है। यह क्लिफहेंजर इतना दमदार है कि पाठक अगला भाग ‘विश्व रक्षक’ पढ़ने के लिए बेचैन हो जाता है।
समीक्षात्मक मूल्यांकन: शक्ति और सीमाएँ
सकारात्मक पक्ष:
यह श्रृंखला राज कॉमिक्स की अब तक की सबसे भव्य और महत्वाकांक्षी कहानियों में से एक है। इसका विशाल कैनवास और महाकाव्य जैसा विस्तार पाठक को पूरी तरह अपनी दुनिया में खींच लेता है। इतने सारे बड़े नायकों को एक ही कहानी में लाकर भी हर पात्र को सही महत्व और पर्याप्त ‘स्क्रीन टाइम’ देना लेखक की काबिल-ए-तारीफ उपलब्धि है। इसके साथ ही सस्पेंस को जिस तरह हर भाग में धीरे-धीरे और गहरा किया गया है, वह पाठक की उत्सुकता को अंत तक बनाए रखता है।
नकारात्मक पक्ष:
इतनी खूबियों के बावजूद कहानी की कुछ सीमाएँ भी हैं। इसकी विज्ञान और फैंटेसी से भरी शब्दावली कई बार छोटी उम्र के पाठकों के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है। साथ ही घटनाएँ इतनी तेज़ी से और एक साथ अलग-अलग जगहों पर घटती हैं कि सभी कड़ियों को जोड़कर समझने में कभी-कभी अतिरिक्त ध्यान लगाना पड़ता है। यह जटिलता कहानी को गहराई तो देती है, लेकिन इसके प्रवाह को समझने के लिए पाठक से ज़्यादा एकाग्रता की माँग भी करती है।
निष्कर्ष: राज कॉमिक्स का एक मास्टरपीस
‘ब्रह्मांड योद्धा’ सिर्फ एक मनोरंजक कॉमिक्स नहीं है, बल्कि यह भारतीय कॉमिक्स उद्योग की बढ़ती परिपक्वता का साफ सबूत है। यह दिखाती है कि हमारे नायक सिर्फ सड़कों के अपराधियों से नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड को बचाने की ताकत भी रखते हैं।
नितिन मिश्रा का संतुलित लेखन और धीरज वर्मा की शानदार कला मिलकर इस कॉमिक्स को एक संग्रहणीय (Collectible) कृति बना देते हैं। अगर आप ‘सर्वनायक’ श्रृंखला के प्रशंसक हैं, तो यह भाग आपके लिए बिल्कुल अनिवार्य है। यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि एकता ही वह शक्ति है, जो ब्रह्मांड के सबसे बड़े खतरे को भी रोक सकती है।
अंतिम रेटिंग: 4.9/5
नागराज के प्रवेश ने इस श्रृंखला को उस मुकाम पर पहुँचा दिया है, जहाँ से आगे की कहानी सिर्फ और सिर्फ महाकाव्यात्मक (Epic) होने वाली है।
