राज कॉमिक्स की ‘आखिरी’ श्रृंखला अब उस मोड़ पर आ चुकी है, जहाँ पाठकों के मन में उठ रहे कई सवालों के जवाब धीरे-धीरे सामने आने लगते हैं। पिछले चार भाग—‘आखिरी रक्षक’, ‘परकालों की धरती’, ‘ब्रह्मांड योद्धा’ और ‘विश्व रक्षक’—हमें एक ऐसी उजड़ी हुई दुनिया तक ले आए थे, जहाँ सिर्फ सुपर कमांडो ध्रुव और परमाणु ही जीवित बचे थे। लेकिन ‘अदृश्य षड्यंत्र’ वही कड़ी है, जो पर्दे के पीछे चल रही पूरी साजिश को हमारे सामने खोलकर रख देती है। यह कॉमिक सिर्फ एक्शन से भरी कहानी नहीं है, बल्कि पूरी श्रृंखला की असली रीढ़ (Backbone) है, क्योंकि यहीं से हमें उस ‘बिग बैंग’ जैसे विनाशकारी विस्फोट तक पहुँचने का रास्ता मिलता है, जिसने पूरी मानव सभ्यता को खत्म कर दिया था।
कथानक का विश्लेषण: दो समानांतर धाराएँ
इस कॉमिक की कहानी एक साथ दो अलग-अलग स्तरों पर आगे बढ़ती है।
अन्य ग्रहों पर संघर्ष: भेड़िया और शक्ति
कहानी की शुरुआत एक दूसरे ग्रह पर होती है, जहाँ राजनगर के रक्षक भेड़िया और शक्ति हजारों निर्दोष पृथ्वीवासियों की रक्षा में जुटे हुए हैं। यहाँ उनका सामना विशालकाय, आदिमानव जैसे जीवों से होता है, जो शारीरिक रूप से बेहद ताकतवर हैं।

नितिन मिश्रा ने इस हिस्से में भेड़िया के चरित्र को उसकी असली पहचान के साथ दिखाया है—युद्ध के लिए उसका जुनून और गदा के वार पर उसका पूरा भरोसा। वहीं देवी शक्ति यहाँ सिर्फ ताकतवर नहीं, बल्कि एक समझदार रणनीतिकार (Strategist) के रूप में सामने आती हैं। वह भेड़िया को समझाती हैं कि हर लड़ाई सिर्फ ताकत के दम पर नहीं जीती जा सकती। शक्ति ग्रह के वातावरण का वैज्ञानिक विश्लेषण करती हैं—ठोस ऑक्सीजन की चट्टानें और खनिजों से भरी हवा। वह अपनी ज्वाला शक्ति को ऑक्सीजन की चट्टानों के साथ मिलाकर जबरदस्त धमाका करती हैं, जिससे वे दानव पराजित हो जाते हैं। यह पूरा हिस्सा दिखाता है कि कैसे विज्ञान और फैंटेसी का मेल कहानी को और ज्यादा रोचक बना देता है।
अतीत का अनावरण: नागराज की यादें
कॉमिक का मुख्य हिस्सा दिल्ली स्थित ‘साटी’ (S.A.T.I) मुख्यालय में घटित होता है, जहाँ नागराज, परमाणु और कारा मौजूद हैं। नागराज अपनी टूटी-फूटी यादों के सहारे उस ‘अदृश्य षड्यंत्र’ की परतें खोलना शुरू करता है।

यह फ्लैशबैक हमें उस दौर में ले जाता है, जब प्रोफेसर इब्रित विकराल ने ‘ब्रह्म-कण’ (Divine Particle) की खोज की थी। नागराज और प्रोफेसर के बीच होने वाले संवाद काफी गंभीर और दार्शनिक हैं। नागराज साफ चेतावनी देता है कि जिस शक्ति से ब्रह्मांड बना है, यानी God Particle, उसे काबू में करना इंसान की क्षमता से बाहर है। लेकिन प्रोफेसर विकराल इसे एक ‘रिसेप्टर डिवाइस’ के ज़रिए मानवता की भलाई के लिए इस्तेमाल करना चाहते थे—एक ऐसा उपकरण जो दुनिया भर में होने वाले अपराधों और नकारात्मक भावनाओं को पहले ही पहचान सके।
खलनायक का उदय: ‘सी-थ्रू’ (See-Thru) का पुनर्जन्म
इस कॉमिक का सबसे बड़ा सरप्राइज़ एक पुराने खलनायक ‘सी-थ्रू’ की वापसी है। जो पाठक राज कॉमिक्स के पुराने इतिहास से परिचित हैं, वे जानते हैं कि सी-थ्रू (पूर्व वैज्ञानिक सी.टी.आर.) नागराज का पुराना दुश्मन था, जो अदृश्य होने की शक्ति रखता था और जिसे ‘इच्छाधारी चोर’ वाली कहानी में मरा हुआ मान लिया गया था।

यहाँ सी-थ्रू सिर्फ एक आम अपराधी नहीं रहता, बल्कि वह एक ब्रह्मांडीय दानव के रूप में सामने आता है। वह अदृश्य रहते हुए ब्रह्म-कण की ऊर्जा को सोख लेता है। यह ऊर्जा उसकी इच्छाधारी शक्ति के साथ मिलकर उसे एक ऐसा अजेय और पागल देवता बना देती है, जिसे रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है। वह प्रोफेसर विकराल के शरीर पर कब्जा कर लेता है। सी-थ्रू का नया रूप बेहद डरावना है—एक कंकाल जैसा शरीर, जो असीम ऊर्जा से भरा हुआ है।
चरमोत्कर्ष (Climax): वह भयानक विस्फोट
कहानी का अंत उसी पल पर होता है, जिसका इंतजार पाठक इस श्रृंखला की शुरुआत से कर रहे थे। सी-थ्रू, प्रोफेसर विकराल के ज़रिए ब्रह्म-कण की पूरी ऊर्जा को मुक्त कर देता है। नागराज उसे रोकने की हर संभव कोशिश करता है, लेकिन सी-थ्रू की नई शक्तियाँ नागराज की मानसिक ऊर्जा को ही सोख लेती हैं।
यही वह पल होता है, जब ‘साटी’ की प्रयोगशाला में एक भयानक विस्फोट होता है। इसी विस्फोट की वजह से ध्रुव और परमाणु की याददाश्त चली जाती है और पृथ्वी के सभी जीव ट्रांसफ्यूज होकर अलग-अलग ग्रहों पर पहुँच जाते हैं। कॉमिक का आखिरी पन्ना दिल दहला देने वाला है—नागराज को कण-कण में बिखरते हुए दिखाया गया है। यह दृश्य पाठकों के मन में एक डरावना सवाल छोड़ जाता है कि क्या ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली नायक सच में खत्म हो चुका है?
पात्र विश्लेषण: नायक और खलनायक
नागराज:
यहाँ नागराज सिर्फ एक सुपरहीरो नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी ऋषि जैसा दिखाई देता है। वह विज्ञान की ताकत को समझता है, लेकिन उसकी सीमाओं को भी पहचानता है। अपनी ऊर्जा लगातार खत्म होते जाने के बावजूद सी-थ्रू से लड़ते रहना और अंत तक हार न मानना उसके त्याग और महानता को साफ दिखाता है।

भेड़िया और शक्ति:
इन दोनों का साथ मिलकर काम करना ‘शक्ति और बुद्धि’ के बेहतरीन संतुलन का उदाहरण है। भेड़िया की जिद और आक्रामक स्वभाव के सामने शक्ति का धैर्य और समझदारी कहानी को संतुलित बनाए रखती है, जिससे उनका हिस्सा प्रभावशाली बन जाता है।
सी-थ्रू:
सी-थ्रू अब तक की इस श्रृंखला का सबसे प्रभावशाली खलनायक बनकर उभरता है। उसकी पागलपन की हद (Madness) और असीम ऊर्जा पाने की भूख उसे बेहद डरावना बनाती है। वह सिर्फ ताकतवर नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी खतरनाक है।
प्रोफेसर विकराल:
प्रोफेसर विकराल उस दुखद वैज्ञानिक का प्रतीक हैं, जिसकी नीयत गलत नहीं थी, लेकिन जिसकी खोज ने अनजाने में विनाश का रास्ता खोल दिया। उनका चरित्र यह दिखाता है कि अच्छी सोच भी कभी-कभी भयानक परिणाम ला सकती है।
चित्रांकन और कलात्मक पक्ष (Art Review)
इस भाग में चित्रांकन की जिम्मेदारी हेमंत कुमार और तादम ग्यादु ने निभाई है। उनके आर्टवर्क में पिछले भागों में धीरज वर्मा की शैली की तुलना में एक साफ बदलाव दिखाई देता है, लेकिन साथ ही राज कॉमिक्स की क्लासिक फील भी बनी रहती है। हेमंत कुमार ने पात्रों के चेहरे और मांसपेशियों को बहुत स्पष्ट और बोल्ड तरीके से उकेरा है। वहीं ब्रह्म-कण की किरणों और सी-थ्रू के अदृश्य से दृश्य बनने वाले बारीक प्रभावों को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।
‘का-बूम’ वाले पन्ने पर रंगों का सटीक इस्तेमाल विनाश की भयावहता को जीवंत कर देता है। इसमें भक्त रंजन की रंग-सज्जा का बड़ा योगदान है, खासकर नागराज के शरीर के चारों ओर पीली बिजली का असर और सी-थ्रू के कंकाल रूप की नीली व धूसर रंगत के बीच का कंट्रास्ट पूरे दृश्य को और ज्यादा प्रभावशाली बना देता है।
लेखन और पटकथा (Script Review)

नितिन मिश्रा ने इस भाग में कहानी की रफ्तार को बहुत संतुलित रखा है। अतीत और वर्तमान के बीच होने वाला स्विचिंग (Switching) बिल्कुल सहज लगता है और कहानी को तोड़ता नहीं। वैज्ञानिक शब्दों जैसे एब्रेजन ऑर्बिट, कोलाइडर और प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कहानी को भारी नहीं बनाता, बल्कि उसे एक तरह की प्रमाणिकता (Authenticity) देता है। नागराज के संवादों में मौजूद गंभीरता साफ दिखाती है कि लेखक को इस चरित्र की गहरी समझ है।
समीक्षात्मक मूल्यांकन: खूबियाँ और कमियाँ
सकारात्मक पक्ष (Pros):
यह भाग पूरी श्रृंखला के सबसे बड़े रहस्य को खोलता है, जो पाठकों को संतोष देता है। सी-थ्रू जैसे पुराने विलेन को इतने बड़े और खतरनाक रूप में वापस लाना एक मास्टरस्ट्रोक साबित होता है। अंत में नागराज का कण-कण में बिखर जाना पाठकों को भावनात्मक रूप से झकझोर देता है।

नकारात्मक पक्ष (Cons):
आर्टवर्क में बदलाव के कारण, धीरज वर्मा की रियलिस्टिक स्टाइल के बाद हेमंत कुमार की शैली कुछ पाठकों को थोड़ी अलग लग सकती है, भले ही वह अपने आप में शानदार हो। वहीं कहानी के मुख्य रहस्य के बीच भेड़िया और शक्ति वाला हिस्सा कुछ लोगों को थोड़ा ‘फिलर’ जैसा लग सकता है, हालांकि अन्य ग्रहों की स्थिति समझाने के लिए वह जरूरी था।
निष्कर्ष: ‘अदृश्य षड्यंत्र’ – विनाश की पहली किरण
‘अदृश्य षड्यंत्र’ आखिरी श्रृंखला का वह निर्णायक अध्याय है, जहाँ सस्पेंस खुलकर एक्शन में बदल जाता है। यह कहानी हमें यह भी बताती है कि कभी-कभी हमारा सबसे बड़ा रक्षक, यानी नागराज, अपनी ही पहचानी हुई या बनाई गई गलतियों—खासतौर पर विज्ञान के खतरनाक प्रयोगों—का शिकार बन सकता है।
यह कॉमिक एक बेहद भारी और गंभीर नोट पर खत्म होती है। नागराज का बिखर जाना और सी-थ्रू का एक ‘ब्रह्मांडीय ईश्वर’ के रूप में उभरना पाठकों को अगले भाग ‘ब्रह्मांड विखंडन’ (Universal Fragmentation) के लिए बेहद उत्सुक कर देता है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि ध्रुव और परमाणु आखिर अकेले क्यों बच गए थे और वह रहस्यमयी रोशनी असल में क्या थी, तो यह कॉमिक आपके लिए पढ़ना लगभग अनिवार्य है। यहाँ राज कॉमिक्स यह साबित कर देती है कि वे सिर्फ सुपरहीरो कहानियाँ ही नहीं, बल्कि जटिल कॉस्मिक हॉरर और साइ-फाई थ्रिलर भी शानदार तरीके से रच सकते हैं।
अंतिम रेटिंग: 4.7/5
