राज कॉमिक्स के बड़े से ब्रह्मांड में ‘गोजो’ (Gojo) एक ऐसा नायक रहा है, जिसकी सोच और कॉन्सेप्ट अपने आप में काफी अलग और थोड़ा जटिल था। जहाँ ज़्यादातर नायक सिर्फ़ अपनी ताक़त या हथियारों के दम पर लड़ते थे, वहीं गोजो के अंदर सात अलग-अलग दिव्य शक्तियाँ थीं। ये शक्तियाँ ज़रूरत पड़ने पर उसके शरीर से बाहर निकलकर खुद अलग-अलग लड़ सकती थीं।
तरुण कुमार वाही द्वारा लिखी गई और गोपाल नांदुरकर द्वारा चित्रित कॉमिक्स ‘गोजो को खोजो’ इसी सीरीज़ की एक बेहद अहम कड़ी है। यह कहानी सिर्फ़ एक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सस्पेंस और हल्का-सा हॉरर का तड़का भी है, जो इसे बच्चों और किशोरों के बीच खासा लोकप्रिय बनाता है।
शीर्षक की सार्थकता (Significance of the Title)

कॉमिक्स का शीर्षक ‘गोजो को खोजो’ सीधे-सीधे कहानी के सबसे बड़े मोड़ की तरफ इशारा करता है। कहानी के बीच में गोजो रहस्यमयी तरीके से गायब होने लगता है—उसके शरीर के अंग एक-एक करके दिखना बंद हो जाते हैं। यह हालात सिर्फ़ गोजो के लिए ही नहीं, बल्कि उसके वफादार वाहन ‘मंकोट’ और उसकी सातों शक्तियों के लिए भी बहुत बड़ी चुनौती बन जाते हैं। पूरे साम्राज्य में यही सवाल गूंजने लगता है कि गोजो आखिर गया कहाँ और उसे वापस कैसे लाया जाए। यही रहस्य इस शीर्षक को पूरी तरह सही और सार्थक बना देता है।
कथावस्तु का विस्तृत विश्लेषण (Detailed Plot Analysis)
चुड़ैलबच्ची का आतंक:
कहानी की शुरुआत काफी डरावने और हिंसक अंदाज़ में होती है। ‘चुड़ैलबच्ची’ नाम की एक पंखों वाली राक्षसी, जिसके नाखून बेहद लंबे और ज़हरीले हैं, बेगुनाह इंसानों और सैनिकों को अपना शिकार बना रही होती है। वह सिर्फ़ उन्हें मारती ही नहीं, बल्कि उनके शरीर के अंग निकालकर खाने में भी उसे कोई झिझक नहीं होती। उस दौर की कॉमिक्स के हिसाब से यह सब काफ़ी डार्क और चौंकाने वाला था। इमली नगर के राजकुमार बालूशाही जब इस राक्षसी से भिड़ने निकलते हैं, तो वे खुद बड़ी मुसीबत में फँस जाते हैं।
गोजो का हस्तक्षेप:
ठीक समय पर गोजो अपने वाहन मंकोट पर सवार होकर वहाँ पहुँचता है। यहाँ वह अपनी दो शक्तियों— ‘संहारक’ (अद्भुत ताक़त) और ‘बिल्लौरिया’ (तेंदुए जैसी फुर्ती और आक्रामकता) का इस्तेमाल करता है। गोजो चुड़ैलबच्ची को बुरी तरह हरा देता है और सज़ा के तौर पर उसकी नाक काट देता है। यह अपमान चुड़ैलबच्ची के दिल में बदले की आग भर देता है।
राक्षस बड़ा और गोजो का ‘गायब’ होना:
हारने के बाद चुड़ैलबच्ची अपने बड़े भाई ‘राक्षस बड़ा’ के पास पहुँचती है, जो एक विशालकाय हरा राक्षस है। राक्षस बड़ा अपनी तिलिस्मी शक्तियों से गोजो पर मायावी हमला करता है, जिसकी वजह से गोजो का शरीर धीरे-धीरे अदृश्य होने लगता है। पेज 13 से 15 के बीच का हिस्सा बेहद रोमांचक है, जहाँ गोजो अपने गायब होते हाथ-पैर देखकर खुद भी घबरा जाता है। उसे समझ आ जाता है कि कोई बहुत बड़ा खतरा आने वाला है, इसलिए वह अपनी सातों शक्तियों को शरीर से बाहर निकालकर मंकोट के नेतृत्व में छोड़ देता है और खुद पूरी तरह गायब हो जाता है।

‘पेदू’ का हमला और शक्तियों का समन्वय:
गोजो के गायब होते ही राक्षस बड़ा ‘पेदू’ नाम के एक विशाल, कई मुँह वाले कीड़े को शहर में तबाही मचाने भेज देता है। यहाँ कहानी का फोकस पूरी तरह गोजो की शक्तियों पर आ जाता है। संहारक, गुरुघंटाल, बिजलिका, शाकाल, बिल्लौरिया, जुडोका और तीसरी आँख मिलकर पेदू का सामना करते हैं। यह हिस्सा दिखाता है कि गोजो के बिना भी उसकी शक्तियाँ कितनी संगठित और एक-दूसरे पर भरोसा करने वाली हैं। खास तौर पर तीसरी आँख की आग और गुरुघंटाल की चालाकी से आखिरकार पेदू का अंत हो जाता है।
क्लाइमेक्स: विवाह का जाल और गोजो की चतुराई:
राक्षस बड़ा गोजो के शरीर के गायब हुए अंगों को अपने महल में कैद कर लेता है। वह गोजो के सामने शर्त रखता है कि अगर वह उसकी बहन चुड़ैलबच्ची से शादी कर ले, तो वह उसका शरीर वापस कर देगा। अपनी शक्तियों के बिना कमजोर पड़ा गोजो ताक़त नहीं, बल्कि दिमाग का इस्तेमाल करता है और शादी के लिए हाँ कर देता है। जैसे ही राक्षस बड़ा मंत्रों के ज़रिये गोजो का शरीर वापस लाता है, उसी पल गोजो की शक्तियाँ—जो शाकाल के नेतृत्व में महल ढूँढ चुकी थीं—उस पर हमला कर देती हैं।
अंतिम लड़ाई में गोजो एक दर्पण का इस्तेमाल करता है और राक्षस बड़ा की आँखों से निकलने वाली विनाशकारी आग को उसी पर लौटा देता है, जिससे गलती से चुड़ैलबच्ची मारी जाती है। आखिरकार गोजो राक्षस बड़ा को नुकीले खंभों पर पटककर खत्म कर देता है और बुराई का अंत हो जाता है।
पात्र चित्रण (Character Analysis)
गोजो:
इस कॉमिक्स में गोजो का एक अलग ही रूप सामने आता है—उसकी बेबसी। जब वह धीरे-धीरे गायब हो रहा होता है, तो उसकी घबराहट उसे ज्यादा मानवीय बना देती है। लेकिन क्लाइमेक्स में दर्पण का इस्तेमाल करके वह साबित करता है कि वह सिर्फ़ ताक़तवर ही नहीं, बल्कि बहुत समझदार योद्धा भी है।
मंकोट:
गोजो का वाहन और सच्चा दोस्त। मंकोट सिर्फ़ एक मशीन नहीं है, बल्कि शक्तियों के बीच एक लीडर और जोड़ने वाली कड़ी की तरह काम करता है।

चुड़ैलबच्ची:
यह किरदार पूरी तरह नफरत जगाने के लिए बनाया गया है। उसका डरावना रूप और इंसानों को खाने जैसी आदतें उसे एक यादगार खलनायक बना देती हैं।
राक्षस बड़ा:
वह ताक़त और जादू का खतरनाक मेल है। अपनी बहन के लिए उसका लगाव और गोजो के लिए उसकी नफरत कहानी को आगे बढ़ाती है।
सातों शक्तियाँ:
हर शक्ति का अपना अलग स्वभाव है। तीसरी आँख की गंभीरता और संहारक का जोश पाठकों पर गहरी छाप छोड़ता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration)
गोपाल नांदुरकर का चित्रांकन इस कॉमिक्स की असली जान है। चुड़ैलबच्ची द्वारा इंसानों को मारने के दृश्य बेहद डरावने और असरदार लगते हैं। ‘पेदू’ जैसे विशाल कीड़े का डिज़ाइन—जिसके शरीर पर कई आँखें और मुँह बने हैं—बहुत ही क्रिएटिव है। एक्शन सीन में जब शक्तियाँ पेदू से लड़ती हैं, तो पैनल्स इतने डिटेल्ड और जीवंत लगते हैं कि नज़र हटाना मुश्किल हो जाता है। जादुई आग के लिए लाल-पीले रंगों का इस्तेमाल और राक्षस के महल की तिलिस्मी पृष्ठभूमि पर प्रताप मुलिक के निर्देशन की साफ झलक मिलती है।
समीक्षात्मक टिप्पणी (Critical Commentary)

तरुण कुमार वाही ने पूरी कहानी में सस्पेंस को मजबूती से थामे रखा है। गोजो का गायब होना ऐसा ट्विस्ट है, जो पाठक को आख़िरी पेज तक बाँधे रखता है। कहानी की रफ्तार तेज़ है और कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती। संवादों में वीरता और राक्षसी घमंड का सही बैलेंस देखने को मिलता है।
इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताक़त है टीम वर्क। आमतौर पर नायक ही सब कुछ करता है, लेकिन यहाँ गोजो की सातों शक्तियों को अलग-अलग चमकने का मौका दिया गया है। यह आइडिया कि नायक की शक्तियाँ उसके बिना भी लड़ सकती हैं, राज कॉमिक्स को उस दौर की बाकी कॉमिक्स से अलग और आगे ले जाता है।
कहानी साफ संदेश देती है कि सिर्फ़ शारीरिक ताक़त ही सब कुछ नहीं होती। मुश्किल हालात में समझदारी और धैर्य—जैसा कि गोजो ने शादी की शर्त मानकर दिखाया—ही असली हथियार होते हैं। साथ ही, यह अहंकार के टूटने की एक क्लासिक कहानी भी है।
कुछ रोचक तथ्य

यह कॉमिक्स गोजो की शुरुआती कहानियों में से एक है, जिसने उसकी शक्तियों के वर्गीकरण को पाठकों के दिमाग में साफ-साफ बैठा दिया।
पेज 17 पर शाकाल का गोजो को ढूँढने के लिए आसमान में उड़ना उस समय के सबसे यादगार दृश्यों में गिना जाता है।
कॉमिक्स के विज्ञापन और इसका नंबर 461 बताते हैं कि यह राज कॉमिक्स के सबसे व्यस्त और सफल दौर में प्रकाशित हुई थी।
निष्कर्ष
‘गोजो को खोजो’ राज कॉमिक्स के खज़ाने का एक अनमोल रत्न है। यह सिर्फ़ एक सुपरहीरो की कहानी नहीं, बल्कि जादुई फैंटेसी, सस्पेंस और जबरदस्त एक्शन का शानदार मेल है। जो भी पाठक गोजो के किरदार को सही मायनों में समझना चाहता है, उसके लिए यह कॉमिक्स ज़रूर पढ़ने लायक है।
अंतिम पैनल में जब मंकोट और सातों शक्तियाँ वापस गोजो के भीतर समा जाती हैं और वे इमली नगर की ओर उड़ते हैं, तो पाठक के मन में एक अजीब-सी संतुष्टि भर जाती है। यह कॉमिक्स आज भी उतनी ही रोमांचक लगती है, जितनी करीब तीन दशक पहले लगती थी।
