मनोज कॉमिक्स ने अपने पाठकों को ‘विनाश’ जैसा एक ऐसा किरदार दिया, जो अपनी ताकत और अपने जन्म की कहानी (Origin) के मामले में बाकी भारतीय सुपरहीरोज़ से काफी अलग नजर आता है। ‘अल्फा का बेटा’ सीरीज का यह अंक विनाश की जिंदगी का एक बेहद अहम और भावनात्मक पड़ाव दिखाता है। लेखक महेन्द्र जैन और चित्रकार चन्दू की जोड़ी ने इस कॉमिक्स के जरिए एक बड़ी और शानदार अंतरिक्षीय दुनिया (Cosmic World) रची है।
कहानी का विस्तृत कथानक (Plot Analysis)
कहानी की शुरुआत सुदूर अंतरिक्ष की गहराइयों से होती है। विनाश, जो असल में अल्फा ग्रह का राजकुमार है, एक विशाल ‘आइस ग्लोब’ यानी बर्फ के गोले में कैद होकर अंतरिक्ष में भटक रहा है। उधर अल्फा ग्रह पर हालात बेहद खराब हैं। सम्राट अल्फा और गुरु गामा बेसब्री से विनाश की वापसी का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि वही अकेला योद्धा है जो उनके ग्रह को तबाही से बचा सकता है।

कहानी में एक नया मोड़ तब आता है जब सम्राट अल्फा अपनी बेटी पलक की शादी ‘अम्बरराज’ से तय करने का फैसला लेते हैं। यह शादी प्यार से ज्यादा राजनीति से जुड़ी है, ताकि बीटा ग्रह और खोखो ग्रह के हमलों से बचा जा सके। लेकिन खलनायक बीताराज और उसका सेनापति स्काईरोब इस शादी को किसी भी कीमत पर होने नहीं देना चाहते और अपनी साजिशें शुरू कर देते हैं।
इसी दौरान विनाश अपनी ‘अग्नि शक्ति’ (Fire Power) से उस बर्फ के कैदखाने को तोड़ देता है और अपनी बहन पलक को बचाने के लिए अल्फा ग्रह की ओर बढ़ता है। लेकिन वहां उसका सामना ‘जगुआर’ नाम के एक बेहद ताकतवर और बेरहम योद्धा से होता है। जगुआर को खोखो ग्रह के सम्राट ने अल्फा ग्रह पर तबाही मचाने के लिए भेजा है।
कहानी का सबसे दर्दनाक और भावुक पल तब आता है जब पलक, जगुआर के हमले का शिकार बन जाती है। विनाश अपनी बहन को बाहों में थामे रहता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। पलक की मौत विनाश के दिल में बदले की आग और तेज कर देती है। आखिर में एक खतरनाक युद्ध होता है, जहां विनाश जगुआर का अंत कर देता है, लेकिन खुद भी एक घातक चक्र (Disc) की चपेट में आ जाता है। कहानी एक सस्पेंस के साथ खत्म होती है, जहां गुरु गामा पृथ्वी पर ‘विजय’ के रूप में बिताए गए विनाश के समय को याद करते हैं।
पात्रों का चरित्र चित्रण (Character Sketches)

विनाश (नायक): विनाश एक तरह से ‘ट्रेजिक हीरो’ है। वह बेहद शक्तिशाली है, लेकिन अपने परिवार, खासकर बहन और माता-पिता के प्रति उसका प्रेम ही उसकी कमजोरी बन जाता है। इस अंक में उसकी बेबसी और दर्द को बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
गुरु गामा: वह विनाश के मार्गदर्शक और शिक्षक हैं। उनका किरदार काफी हद तक ‘स्टार वार्स’ के ओबी-वान केनोबी जैसा महसूस होता है, जो अपने शिष्य को सही रास्ता दिखाता है।
बीताराज और स्काईरोब: ये कहानी के मुख्य साजिशकर्ता हैं। बीताराज की क्रूर सोच और स्काईरोब की मशीनी ताकत मिलकर इन्हें एक खतरनाक विलेन बना देती है।
पलक: पलक का बलिदान पूरी कहानी का टर्निंग पॉइंट है। उसका किरदार पाठकों के दिल में गहरी सहानुभूति पैदा करता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration)

चित्रकार चन्दू ने इस कॉमिक्स में वाकई कमाल का काम किया है। 90 के दशक को ध्यान में रखें तो अंतरिक्ष यान (Spacecrafts), अलग-अलग ग्रहों के दृश्य और युद्ध के सीन काफी प्रभावशाली लगते हैं। विनाश का ‘अग्नि अवतार’ और जगुआर की विशाल काया दिखाने के लिए बनाए गए ‘लार्जर दैन लाइफ’ पैनल देखने लायक हैं। रंगों का चयन भी शानदार है, खासकर विनाश के लाल सूट और अंतरिक्ष की नीली-काली पृष्ठभूमि का कॉन्ट्रास्ट कहानी के मूड को और गहरा बना देता है।
विदेशी कॉमिक्स से प्रेरणा और तुलना (Influence of Foreign Comics)

भारतीय कॉमिक्स पर पश्चिमी कॉमिक्स का असर ‘विनाश’ में साफ दिखाई देता है। इसमें मार्वल और डीसी के कई मशहूर किरदारों की झलक मिलती है। विनाश की फ्लाइंग डिस्क और अंतरिक्ष यात्राएं सीधे तौर पर सिल्वर सर्फर की याद दिलाती हैं, जबकि उसका किसी दूसरे ग्रह का राजकुमार होना और पृथ्वी पर आना सुपरमैन के ओरिजिन से मिलता-जुलता लगता है। गुरु गामा के साथ उसका रिश्ता थॉर और ओडिन जैसी शाही गहराई दिखाता है, वहीं विनाश का गुस्सा और ताकत हल्क और ह्यूमन टॉर्च के मिश्रण जैसी महसूस होती है। इसके अलावा, अंतरिक्ष साम्राज्यों की राजनीति, लेजर गन और स्काईरोब जैसे रोबोटिक किरदार पूरी तरह से स्टार वार्स की ‘स्पेस ओपेरा’ और पश्चिमी ‘मेका’ संस्कृति की याद दिलाते हैं।
हालांकि, महेन्द्र जैन ने इन सभी विदेशी प्रेरणाओं को बड़ी समझदारी से भारतीय भावनाओं के साथ जोड़ा है। बहन का बलिदान और माता-पिता का आशीर्वाद जैसे तत्व इस कहानी को पूरी तरह देसी रंग दे देते हैं।
समीक्षात्मक टिप्पणी (Critical Commentary)

खूबियाँ:
‘विनाश’ सिर्फ एक एक्शन से भरी कॉमिक्स नहीं है, बल्कि अपनी भावनात्मक गहराई से पाठकों को अंदर तक छू जाती है। भाई-बहन का मजबूत रिश्ता और पलक की दर्दनाक मौत कहानी को बेहद भावुक मोड़ देती है। इसका वर्ल्ड बिल्डिंग भी काफी मजबूत है। अल्फा, बीटा और खोखो जैसे ग्रहों का अपना इतिहास और माहौल इस अंतरिक्षीय कहानी को किसी महाकाव्य जैसी भव्यता देता है। अंत में विनाश की कथित मौत और गुरु गामा द्वारा अतीत की यादें कहानी को ऐसा सस्पेंस देती हैं कि पाठक अगला अंक पढ़ने को मजबूर हो जाता है।
कमियाँ:
कुछ जगहों पर संवाद जरूरत से ज्यादा नाटकीय और लंबे लगते हैं, जिससे कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी हो जाती है। इसके अलावा, एक स्पेस फैंटेसी होने के बावजूद इसमें वैज्ञानिक तर्कों की कमी खलती है, जैसे अंतरिक्ष में बिना किसी सुरक्षा उपकरण के बातचीत करना, जो तर्क पसंद करने वाले पाठकों को थोड़ा अटपटा लग सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
‘विनाश – अल्फा का बेटा’ मनोज कॉमिक्स की एक यादगार और दमदार रचना है। यह साबित करती है कि भारतीय कॉमिक्स में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की कहानियाँ कहने की पूरी क्षमता थी। साहस, प्रेम और बलिदान की यह कहानी आज भी उतनी ही असरदार लगती है।
अगर आप नॉस्टैल्जिया में डूबना चाहते हैं और एक ताकतवर कॉस्मिक हीरो की कहानी पढ़ना चाहते हैं, तो यह कॉमिक्स आपके कलेक्शन में जरूर होनी चाहिए। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि यह भी बताती है कि बड़ी शक्ति के साथ बड़ी जिम्मेदारियाँ और बड़ी कुर्बानियाँ भी आती हैं।
रेटिंग: 4.5/5
