‘जटायु’ मनोज कॉमिक्स प्रकाशन का एक ऐसा नायक था, जिसे उसकी अलौकिक शक्तियों और कभी न हार मानने वाले साहस के लिए जाना जाता था। आज हम जिस कॉमिक्स की समीक्षा कर रहे हैं, उसका नाम है ‘जादूगर हुड़दंगा’। यह कहानी सिर्फ एक साधारण फैंटेसी नहीं है, बल्कि इसमें अच्छाई और बुराई की टक्कर, दैवीय वरदान के गलत इस्तेमाल और सच्ची वीरता का शानदार मेल देखने को मिलता है। लेखक पपिन्दर जुनेजा और चित्रकार ए.एम.जी. (A.M.G.) की इस रचना ने पाठकों को कल्पना की एक बिल्कुल नई दुनिया से रूबरू कराया है।
कहानी का आरंभ और वरदान का अहंकार:

कहानी की शुरुआत एक बेहद प्रभावशाली और पारंपरिक ढंग से होती है। जादूगर हुड़दंगा सालों तक कठोर तपस्या करता है, ताकि वह अपराजेय बन सके। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेवी उसे दर्शन देती हैं। हुड़दंगा उनसे ऐसी शक्ति की मांग करता है, जिसके सामने दुनिया की हर ताकत बेकार साबित हो जाए। देवी उसे एक ‘महाशक्ति’ यानी एक जादुई गदा प्रदान करती हैं, लेकिन इसके साथ एक सख्त शर्त भी रखती हैं। देवी साफ चेतावनी देती हैं कि अगर इस शक्ति का इस्तेमाल किसी निर्दोष या मजबूर इंसान पर किया गया, तो यह गदा किसी काम की नहीं रह जाएगी।
यहीं से कहानी में एक अहम मोड़ आता है। यह शर्त बिल्कुल ‘चेखव की बंदूक’ की तरह काम करती है, जो पाठक के मन में सवाल छोड़ देती है कि आखिर हुड़दंगा कब और कैसे अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करेगा। हुड़दंगा मन ही मन पूरी दुनिया पर राज करने के सपने देखने लगता है, और यही घमंड उसके पतन की पहली सीढ़ी बन जाता है।

अहंकार और साम्राज्य विस्तार:
हुड़दंगा की ताकत का पहला बड़ा प्रदर्शन तब देखने को मिलता है, जब शमशेरगढ़ का राजा भानुप्रताप शिकार के दौरान एक स्वर्ण महल पर अधिकार जताने की कोशिश करता है, जो असल में हुड़दंगा का होता है। यहाँ लेखक बहुत खूबसूरती से दिखाते हैं कि सत्ता और लालच कैसे इंसान को अंधा बना देते हैं। हुड़दंगा राजा को अपमानित करके भगा देता है। लेकिन जब राजा अपनी पूरी सेना लेकर वापस लौटता है, तो हुड़दंगा अपनी ‘महाशक्ति’ गदा के एक ही प्रहार से पूरी सेना को धूल चटा देता है। वह न सिर्फ राजा को बंदी बना लेता है, बल्कि उसके पूरे राज्य शमशेरगढ़ पर भी कब्जा कर लेता है। यह दृश्य हुड़दंगा की क्रूरता और उसके बढ़ते घमंड को साफ-साफ दिखाता है।
नायक ‘जटायु’ का प्रवेश:
जैसे-जैसे हुड़दंगा का आतंक बढ़ता जाता है और वह हृदयगढ़ की राजकुमारी पल्लवी का अपहरण करने की कोशिश करता है, तभी कहानी में हमारे नायक ‘जटायु’ की एंट्री होती है। जटायु को एक शांत, संयमी लेकिन बेहद शक्तिशाली योद्धा के रूप में दिखाया गया है। वह एक पेड़ के नीचे विश्राम कर रहा होता है, तभी उसे पक्षियों की आपसी बातचीत से हुड़दंगा के अत्याचारों की जानकारी मिलती है। यहीं पर जटायु की एक खास शक्ति सामने आती है—वह पक्षियों की भाषा समझ सकता है। यही गुण उसे आम नायकों से अलग और खास बना देता है।
महासंग्राम और दैवीय हस्तक्षेप:
जटायु और हुड़दंगा के बीच पहला मुकाबला बेहद रोमांचक और भव्य है। जटायु अपनी ‘समय शक्ति’ वाली तलवार का इस्तेमाल करता है, जबकि हुड़दंगा अपनी जादुई गदा से वार करता है। इन दोनों महाशक्तियों के टकराने से सिर्फ धरती ही नहीं, बल्कि देवलोक तक कांप उठता है। स्वर्ग में इंद्र देव का सिंहासन तक हिलने लगता है। यह दृश्य कहानी के पैमाने को और बड़ा कर देता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए महादेवी स्वयं हस्तक्षेप करती हैं और जटायु को देवलोक बुलाया जाता है। वहाँ इंद्र देव उसे बताते हैं कि हुड़दंगा को हराने के लिए ‘सुचंग मणि’ की जरूरत होगी। यहीं से कहानी को एक नया लक्ष्य और नई दिशा मिलती है, जो आगे चलकर इसे और भी रोमांचक बना देती है।
हुड़दंगा की भूल और पतन का प्रारंभ:
कहानी का सबसे बड़ा और अहम मोड़ तब आता है, जब हुड़दंगा राजकुमारी नेहा को अपनी चाल में फँसाने की कोशिश करता है। अपने घमंड और वासना के वश में आकर वह नेहा पर प्रहार करने का प्रयास करता है। ठीक वैसा ही होता है, जैसी चेतावनी महादेवी ने पहले दी थी। जैसे ही हुड़दंगा एक निर्दोष स्त्री पर वार करता है, उसकी ‘महाशक्ति’ उसी पल नष्ट हो जाती है। यह बात भारतीय पौराणिक कथाओं की उस मूल सीख को दोहराती है कि शक्ति का गलत इस्तेमाल ही अंततः विनाश का कारण बनता है।

विचित्र दानव और अंतिम युद्ध:
अपनी जादुई गदा की शक्ति खोने के बाद हुड़दंगा तंत्र-मंत्र का सहारा लेता है और ‘विचित्र’ नाम के एक भयानक, आठ हाथों वाले दानव को जगा देता है। यह दानव मकड़ी की तरह जाल फैलाकर पूरी सेना को जकड़ लेता है। अंतिम युद्ध के दृश्य बहुत प्रभावशाली ढंग से दिखाए गए हैं। जटायु वापस लौटता है और अपनी ‘समय शक्ति’ का उपयोग करके विचित्र दानव के अंगों को एक-एक करके काट देता है।
इसके बाद भी हुड़दंगा हार मानने को तैयार नहीं होता। वह अपनी जादुई विद्या से चींटियों को विशालकाय बना देता है और पक्षियों को राक्षसों में बदल देता है। इस हालात में जटायु खुद को मुश्किल में पाता है, लेकिन तभी सुचंग ऋषि प्रकट होते हैं। वे जटायु को एक चमत्कारी गेंद देते हैं, जिसकी शक्ति से चींटियों और पक्षियों पर से जादू का असर खत्म हो जाता है।
क्लाइमेक्स और एक अनपेक्षित अंत:

अंततः जटायु अपनी तलवार से हुड़दंगा का वध कर देता है। लेकिन यहीं कहानी एक ज़बरदस्त मोड़ लेती है। मरने से पहले हुड़दंगा अपनी आत्मा को जटायु के शरीर में प्रवेश करा देता है। अब हुड़दंगा के वश में आया जटायु अपने ही साथियों पर हमला करने लगता है। यह दृश्य पाठकों के लिए किसी झटके से कम नहीं होता। आखिरकार सुचंग ऋषि एक जादुई माला की मदद से हुड़दंगा की आत्मा को जटायु के शरीर से बाहर निकाल देते हैं। हुड़दंगा की आत्मा वहाँ से भाग निकलती है और यह कहते हुए चली जाती है कि वह फिर लौटेगा। यह ‘समाप्त’ के बजाय ‘क्रमशः’ जैसा अंत पाठकों को अगली कड़ी के लिए उत्सुक छोड़ देता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration):
ए.एम.जी. का चित्रांकन काबिले-तारीफ है। 90 के दशक की कॉमिक्स को देखते हुए रंगों का चुनाव बेहद जीवंत लगता है। हुड़दंगा का रूप—पीला शरीर, नुकीले कान और लाल टीका—उसे एक डरावना और यादगार खलनायक बना देता है। युद्ध के दृश्यों में ‘धड़ाक’, ‘खचाक’ और ‘कड़ाक’ जैसे शब्द एक्शन को और भी ज़िंदा कर देते हैं। विशालकाय चींटियों और दानव विचित्र के चित्र बच्चों की कल्पना को उड़ान देने वाले हैं।
संवाद और पटकथा:

पपिन्दर जुनेजा की पटकथा तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ती है। कहानी कहीं भी सुस्त नहीं पड़ती। संवाद सरल हैं, लेकिन असरदार हैं। हुड़दंगा के अट्टहास और जटायु की गंभीरता के बीच का फर्क साफ महसूस होता है। पक्षियों के ज़रिये सूचनाएँ मिलना और देवलोक के दृश्य कहानी को पौराणिकता और फैंटेसी का खूबसूरत मेल बना देते हैं।
समीक्षात्मक विश्लेषण:
‘जादूगर हुड़दंगा’ सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई गहरे नैतिक संदेश भी देती है। कहानी यह सिखाती है कि शक्ति तभी तक सही है, जब तक वह मर्यादा में रहे, क्योंकि वरदान का घमंड ही आगे चलकर अभिशाप बन जाता है। जटायु की जीत यह दिखाती है कि वीरता केवल तलवार के बल पर नहीं, बल्कि ऋषियों के मार्गदर्शन और सही समय पर सही निर्णय लेने से मिलती है। साथ ही, कहानी का अंत यह संकेत देता है कि बुराई पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि रूप बदलकर फिर लौट सकती है, इसलिए हमेशा सतर्क रहना ज़रूरी है।

हाँ, कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी पूर्वानुमानित लग सकती है, जैसे नायक का ठीक समय पर पहुँच जाना या ऋषि का अचानक प्रकट होना। लेकिन कॉमिक्स की दुनिया में इस तरह के ‘डिअस एक्स माकिना’ को आमतौर पर स्वीकार किया जाता है।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर ‘जादूगर हुड़दंगा’ मनोज कॉमिक्स की एक बेहतरीन कृति है। यह जटायु की वीरता और हुड़दंगा की चालाकी के बीच एक यादगार और महाकाव्यात्मक संघर्ष पेश करती है। 32 पन्नों की यह यात्रा पाठक को एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। अगर आप अपनी पुरानी यादें ताज़ा करना चाहते हैं या भारतीय कॉमिक्स की जड़ों को समझना चाहते हैं, तो यह कॉमिक्स आपके संग्रह में ज़रूर होनी चाहिए। यह हमें याद दिलाती है कि क्यों एक दौर में बच्चे इन रंगीन पन्नों के दीवाने हुआ करते थे।
रेटिंग: 4.5/5
