‘मरकरी मैन’ मनोज कॉमिक्स की दुनिया की एक ऐसी धमाकेदार और रोमांचक कड़ी है, जिसमें भविष्य की कल्पना, रोबोटिक्स और सुपरहीरो तूफान का बेखौफ साहस एक साथ देखने को मिलता है। इस कॉमिक्स का कवर पेज ही पाठकों को कहानी में खींच लेने के लिए काफी है। पारे जैसी चमक वाला एक धात्विक इंसान (Mercury Man) तबाही मचाते हुए भाग रहा है और उसके पीछे तूफान अपनी हाई-टेक सुपरबाइक पर उसका पीछा कर रहा है। सिर्फ कवर देखकर ही अंदाजा लग जाता है कि आगे कुछ बड़ा और खतरनाक होने वाला है।
भविष्य से आया संकट
कहानी की शुरुआत बिल्कुल किसी हॉलीवुड साइंस-फिक्शन फिल्म की तरह होती है, खासकर ‘टर्मिनेटर 2’ की याद दिलाने वाले अंदाज़ में। रात का सन्नाटा है, अचानक बिजली कड़कती है और उसी चमक के बीच एक अजीब सी आकृति प्रकट होती है। यह है ‘मरकरी मैन’—भविष्य से आया एक बेहद उन्नत और खतरनाक रोबोट। उसका शरीर पारे (Mercury) जैसा तरल और चमकदार है। उस पर गोलियों का कोई असर नहीं होता और अगर उसका शरीर टुकड़ों में कट भी जाए, तो वह दोबारा खुद को जोड़ लेता है।

मरकरी मैन का मिशन एकदम साफ है—‘संदीप शर्मा’ नाम के एक बच्चे को ढूंढकर उसकी हत्या करना। वह पुलिस इंस्पेक्टर का भेस बनाकर शहर में घूमता है, टेलीफोन डायरेक्टरी खंगालता है और ‘संदीप शर्मा’ नाम वाले हर इंसान को मारना शुरू कर देता है। इससे शहर में दहशत फैल जाती है और कोई समझ नहीं पाता कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है।
इसी बीच कहानी में एक और रहस्यमयी किरदार की एंट्री होती है। यह है ‘रोबोट मैन’। वह भी भविष्य से ही आया है, लेकिन उसका मकसद मरकरी मैन से बिल्कुल उल्टा है। रोबोट मैन का लक्ष्य मरकरी मैन को रोकना और संदीप शर्मा की रक्षा करना है। यानी भविष्य से आए दो रोबोट, लेकिन दोनों अलग-अलग मकसद लेकर।
शहर में हो रही इन रहस्यमयी हत्याओं के बाद हमारे नायक तूफान का प्रवेश होता है। तूफान, जो अपनी तेज़ बुद्धि, एडवांस गैजेट्स, सुपरबाइक और जादुई बेल्ट के लिए जाना जाता है, इस पूरे मामले की जांच शुरू करता है। जांच करते-करते वह असली संदीप शर्मा तक पहुँचता है, ठीक उसी वक्त जब मरकरी मैन एक वीडियो गेम पार्लर में उस पर हमला करने वाला होता है। इस दौरान एक मासूम बच्चा अजय, संदीप को बचाने की कोशिश करता है और उसकी जान चली जाती है। यह दृश्य कहानी को और भी भावनात्मक और गंभीर बना देता है।
इसके बाद तूफान और मरकरी मैन के बीच ज़बरदस्त टक्कर होती है। लेकिन बहुत जल्द तूफान को एहसास हो जाता है कि यह दुश्मन उसकी सोच से कहीं ज़्यादा ताकतवर है। उसकी विनाशकारी किरणें भी मरकरी मैन का कुछ नहीं बिगाड़ पातीं। यहीं से शुरू होता है एक जबरदस्त और तेज़ रफ्तार पीछा, जिसमें पेट्रोल टैंकरों के धमाके होते हैं और रोबोट मैन अपने मिशन को पूरा करने के लिए बलिदान दे देता है।

अंत में कहानी प्रोफेसर भास्कर की प्रयोगशाला में एक बड़े रहस्य से पर्दा उठाती है। पता चलता है कि साल 2040 में रोबोटों ने इंसानों के खिलाफ विद्रोह कर दिया है और वे पूरी मानव जाति को खत्म करना चाहते हैं। संदीप शर्मा भविष्य का वही महान योद्धा है, जो इस रोबोट सेना का अंत करेगा। इसी वजह से भविष्य की मशीनों ने मरकरी मैन को समय में पीछे भेजा है, ताकि संदीप को उसके बचपन में ही मार दिया जाए।
कहानी का चरमोत्कर्ष बेहद रोमांचक है। तूफान अपनी समझ और विज्ञान का इस्तेमाल करते हुए ‘तरल नाइट्रोजन’ (Liquid Nitrogen) का सहारा लेता है। वह मरकरी मैन को पूरी तरह जमा देता है और फिर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर हमेशा के लिए शांत कर देता है। इस तरह भविष्य से आया यह खौफनाक खतरा खत्म होता है और कहानी एक दमदार और यादगार अंत तक पहुँचती है।
पात्र चित्रण (Character Analysis)

तूफान (Toofan):
इस कॉमिक्स में तूफान पूरी तरह एक रक्षक की भूमिका में नज़र आता है। वह सिर्फ ताकत के दम पर लड़ने वाला सुपरहीरो नहीं है, बल्कि हर स्थिति को समझकर फैसला लेने वाला समझदार नायक है। उसका वैज्ञानिक नजरिया कहानी में बार-बार सामने आता है। उसकी सुपरबाइक और बेल्ट से निकलने वाली किरणें उसे एक सच्चा ‘हाई-टेक’ सुपरहीरो बनाती हैं। तूफान यहाँ यह दिखाता है कि असली ताकत सिर्फ मसल्स में नहीं, बल्कि दिमाग में भी होती है।
मरकरी मैन (Antagonist):
मरकरी मैन इस कहानी का सबसे बड़ा आकर्षण है। उसका किरदार साफ तौर पर हॉलीवुड के टी-1000 से प्रेरित लगता है, लेकिन भारतीय माहौल में उसे देखना अपने आप में काफी रोमांचक अनुभव है। उसकी निर्दयता, बिना किसी भावना के लोगों को मार देना और जरूरत पड़ने पर अपना रूप बदल लेना उसे बेहद डरावना विलेन बना देता है। वह ऐसा दुश्मन है जिससे लड़ते समय सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि समझदारी भी चाहिए।
रोबोट मैन (Cyborg Protector):
रोबोट मैन को सही मायनों में एक ‘दुखद नायक’ कहा जा सकता है। वह खुद आधा मशीन है, लेकिन उसके अंदर इंसानी भावनाएं अभी भी ज़िंदा हैं। वह जानता है कि उसका अंत तय है, फिर भी वह संदीप को बचाने और मरकरी मैन को रोकने के लिए अपनी जान कुर्बान कर देता है। उसका बलिदान कहानी को भावनात्मक गहराई देता है और पाठक के मन पर गहरा असर छोड़ता है।
प्रोफेसर भास्कर और संदीप शर्मा:
ये दोनों पात्र कहानी को आगे बढ़ाने का आधार हैं। प्रोफेसर भास्कर विज्ञान और तर्क का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि संदीप शर्मा उस उम्मीद का प्रतीक है, जिसके लिए पूरी लड़ाई लड़ी जा रही है। संदीप सिर्फ एक बच्चा नहीं, बल्कि भविष्य की मानवता की आखिरी उम्मीद है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration)

इस कॉमिक्स का चित्रांकन दिलीप कदम और बसंत ने किया है। 90 के दशक के हिसाब से चित्र काफी जीवंत, साफ और बारीकियों से भरे हुए हैं। मरकरी मैन के शरीर की पारे जैसी चमक और उसके रूप बदलने वाले दृश्य बहुत ही प्रभावशाली लगते हैं। एक्शन सीन, खासकर बाइक चेस और हेलीकॉप्टर से जुड़े दृश्य, पाठकों को कहानी से जोड़े रखते हैं। रंगों का चुनाव भी उस दौर की शैली के मुताबिक चटकीला और असरदार है, जो हर पन्ने में जान डाल देता है।
पटकथा और संवाद (Script and Dialogues)
नाजरा खान की लिखी पटकथा तेज़ रफ्तार है और कहानी कहीं भी ढीली नहीं पड़ती। हर सीन अगले सीन से जुड़ा हुआ महसूस होता है। संवाद आसान भाषा में हैं, लेकिन उनका असर गहरा है। मरकरी मैन का बिना ज्यादा बोले खामोशी से हत्याएं करना और तूफान का दृढ़ संकल्प संवादों के ज़रिए साफ झलकता है। ‘लिक्विड नाइट्रोजन’, ‘ट्रांसमिट’ और ‘रोबोटिक रिवॉल्ट’ जैसे वैज्ञानिक शब्द कहानी को एक परिपक्व और गंभीर साइ-फाई रूप देते हैं।
तकनीकी पक्ष और थीम
यह कॉमिक्स “मानव बनाम मशीन” के पुराने लेकिन हमेशा प्रासंगिक संघर्ष को दिखाती है। यह साफ संदेश देती है कि अगर तकनीक गलत हाथों में चली जाए या खुद ही विवेकहीन हो जाए, तो वह मानवता के लिए खतरा बन सकती है। भविष्य से वर्तमान में आकर इतिहास बदलने की थीम उस समय भारतीय कॉमिक्स में काफी नई और रोमांचक मानी जाती थी, और यहाँ इसे अच्छे तरीके से पेश किया गया है।
कमियां और आलोचनात्मक दृष्टिकोण

हालाँकि “मरकरी मैन” एक शानदार कॉमिक्स है, लेकिन इसकी तुलना हॉलीवुड फिल्म ‘टर्मिनेटर’ से होना लगभग तय है। कहानी का मूल ढांचा—भविष्य से दो रोबोटों का आना, एक का मारने के लिए और दूसरे का बचाने के लिए, और एक बच्चे का लक्ष्य होना—फिल्म से काफी मिलता-जुलता है। मौलिकता के स्तर पर यह थोड़ी कमी महसूस कराती है, लेकिन जिस तरह से इस कॉन्सेप्ट को ‘तूफान’ की दुनिया में ढाला गया है, वह काबिले-तारीफ है।
निष्कर्ष: क्यों पढ़ें?
“मरकरी मैन” सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं है, बल्कि उस दौर की सोच और साहस का प्रतीक है, जब भारतीय कॉमिक्स लेखक और कलाकार दुनिया-स्तरीय साइ-फाई कल्पनाओं को देसी पाठकों तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे थे। यह कहानी साहस, बलिदान और विज्ञान का बेहतरीन मेल है, जो आज भी उतनी ही असरदार लगती है।
अंतिम निर्णय:
अगर आप पुराने ज़माने की कॉमिक्स के शौकीन हैं या तूफान के फैन हैं, तो यह कॉमिक्स आपके कलेक्शन में जरूर होनी चाहिए। यह याद दिलाती है कि सुपरहीरो सिर्फ उड़ने या ताकत दिखाने के लिए नहीं होते, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेकर दुनिया को बचाने के लिए होते हैं। रोबोट मैन का बलिदान अंत में पाठक के दिल में एक हल्की-सी टीस छोड़ जाता है, और यही एक अच्छी कहानी की सबसे बड़ी पहचान है।
