90 के दशक में राधा कॉमिक्स ने कई ऐसी कहानियाँ दीं, जिन्होंने बच्चों और किशोरों की सोच और कल्पना को एक नई उड़ान दी। “यंत्र दानव का आतंक” भी इसी कड़ी की एक अहम कॉमिक्स है। यह कहानी सिर्फ किसी सुपरहीरो के जन्म (Origin Story) की नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि जब विज्ञान का गलत इस्तेमाल होता है, तो उसके खिलाफ इंसानी हिम्मत कैसे खड़ी होती है। वत्सुल कौशिक द्वारा लिखी गई और द्रोणा फीचर्स के शानदार चित्रों से सजी यह ३३ पृष्ठों की कॉमिक्स आज भी पाठकों के लिए गहरी नॉस्टैल्जिया (Nostalgia) से जुड़ी हुई है।
कथानक का संक्षिप्त विवरण (Plot Summary)

कहानी की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से होती है, जहाँ अचानक चारों तरफ अफरा-तफरी मच जाती है। एक विशाल और बेहद ताकतवर रोबोट, जिसे ‘यंत्र दानव’ कहा जाता है, शहर की सड़कों पर भारी तबाही मचाने लगता है। उसके पास आधुनिक हथियार होते हैं और वह कुछ ही पलों में सैकड़ों लोगों की जान ले लेता है। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह बेबस नज़र आते हैं, क्योंकि साधारण गोलियाँ और हथियार उस लोहे के राक्षस पर कोई असर नहीं डाल पाते।
इस पूरी तबाही के पीछे दिमाग है एक पागल लेकिन बेहद चालाक वैज्ञानिक — डॉक्टर एक्सेल। एक्सेल अपनी वैज्ञानिक समझ का इस्तेमाल दुनिया पर राज करने के लिए करना चाहता है। वह एक टेलीविजन स्टेशन पर कब्जा कर लेता है और देश के प्रधानमंत्री को ३६ घंटे का अल्टीमेटम देता है। उसकी शर्त साफ होती है—या तो प्रधानमंत्री इस्तीफा दें और देश की सत्ता उसे सौंप दें, वरना वह पूरे देश को तबाही में झोंक देगा।
इस गंभीर हालात से निपटने के लिए सरकार नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉक्टर पद्मनाभन की मदद लेती है। पद्मनाभन बताते हैं कि यंत्र दानव को हराने का सिर्फ एक ही रास्ता है—एक ऐसा योद्धा बनाना जो आधा इंसान और आधा मशीन हो, यानी एक साइबॉर्ग। उसमें मशीन की ताकत होगी, लेकिन इंसान का दिमाग और विवेक रहेगा। इसी दौरान विक्रम नाम का एक देशभक्त अधिकारी आगे आता है और अपने देश के लिए अपना जीवन दांव पर लगाने को तैयार हो जाता है। डॉक्टर पद्मनाभन विक्रम को बदलकर ‘शक्ति पुत्र’ बना देते हैं।
कहानी के आखिरी हिस्से में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। भारतीय सेना और संयुक्त राष्ट्र द्वारा भेजे गए सुपर कंप्यूटर तक यंत्र दानव के सामने बेकार साबित होते हैं। आखिरकार शक्ति पुत्र खुद मैदान में उतरता है। दोनों के बीच एक भयंकर युद्ध होता है, जिसमें शक्ति पुत्र अपनी ताकत के साथ-साथ अपनी समझ और रणनीति का भी इस्तेमाल करता है और यंत्र दानव के कंट्रोल बॉक्स को नष्ट कर देता है। लेकिन इस जीत की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। डॉक्टर पद्मनाभन को डॉक्टर एक्सेल के गुंडे मार देते हैं। कहानी का अंत डॉक्टर एक्सेल के भाग जाने और शक्ति पुत्र द्वारा अपने नए मिशन की कसम खाने के साथ होता है।
पात्रों का विश्लेषण (Character Analysis)
शक्ति पुत्र (विक्रम):
शक्ति पुत्र इस कॉमिक्स का मुख्य नायक है। उसका चरित्र कहीं-न-कहीं ‘कैप्टन अमेरिका’ और ‘रोबोकॉप’ की याद दिलाता है, लेकिन भारतीय संदर्भ में ढला हुआ लगता है। वह एक निडर और ईमानदार अधिकारी है, जो देश की रक्षा के लिए अपनी पहचान और अपना सामान्य जीवन तक त्यागने को तैयार हो जाता है। उसके पास एक खास ढाल है, जो उसे यंत्र दानव के खतरनाक हमलों से बचाती है। लेकिन जो बात उसे एक साधारण मशीन से अलग बनाती है, वह है उसका साहस, उसका विवेक और उसका इंसानी जज्बा।

डॉक्टर पद्मनाभन:
डॉक्टर पद्मनाभन इस कहानी के असली मार्गदर्शक यानी ‘मेंटर’ हैं। उनका चरित्र यह साफ दिखाता है कि जब विज्ञान नैतिकता के साथ जुड़ता है, तो वह विनाश नहीं बल्कि सुरक्षा का माध्यम बनता है। वे ज्ञान, जिम्मेदारी और बलिदान का प्रतीक हैं। उनकी शहादत कहानी में भावनात्मक गहराई लाती है और शक्ति पुत्र को आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है।
डॉक्टर एक्सेल:
डॉक्टर एक्सेल एक क्लासिक ‘मैड साइंटिस्ट’ विलेन है। उसका घमंड और तकनीक के प्रति जुनून उसे बेहद खतरनाक बना देता है। वह केवल सत्ता चाहता है और अपने लक्ष्य को पाने के लिए निर्दोष लोगों की जान लेने से भी पीछे नहीं हटता। उसका चरित्र यह दिखाता है कि जब बुद्धि अहंकार में बदल जाती है, तो वह समाज के लिए विनाशकारी बन जाती है।
चित्रांकन और कला (Art and Presentation)
द्रोणा फीचर्स द्वारा किया गया चित्रांकन उस समय के लिहाज़ से काफी प्रभावशाली कहा जा सकता है। यंत्र दानव का डिज़ाइन बेहद भव्य और डर पैदा करने वाला है। उसके शरीर पर लगे हथियार, आँखों से निकलती रोशनी और उसका विशाल आकार चित्रों के ज़रिए बहुत अच्छे से सामने आता है।
रंगों का चुनाव भी काफी जीवंत है। युद्ध के दृश्यों में ‘धायं’, ‘कड़क’, ‘वहाम’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल एक्शन को और ज़्यादा असरदार बना देता है। दिल्ली की सड़कों, टेलीविजन सेंटर और वैज्ञानिक प्रयोगशाला के दृश्य कहानी के माहौल को गंभीर और विश्वसनीय बनाते हैं।
प्रमुख विषय और संदेश (Major Themes)

यह विश्लेषण इस कॉमिक्स को सिर्फ एक रोमांचक कहानी से ऊपर उठाकर एक सार्थक विमर्श बना देता है। यहाँ विज्ञान के दो अलग-अलग चेहरों के बीच टकराव साफ दिखाई देता है—एक तरफ डॉक्टर एक्सेल का विनाशकारी अहंकार है, और दूसरी तरफ डॉक्टर पद्मनाभन की रचनात्मक और रक्षक सोच। यह साफ संदेश देता है कि तकनीक खुद न अच्छी होती है, न बुरी; उसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसे इस्तेमाल करने वाला इंसान कैसा है।
विक्रम का शक्ति पुत्र बनना किसी निजी महत्वाकांक्षा का नतीजा नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक है। यही बात उसके चरित्र को एक खास गरिमा देती है। संकट के समय भारत और संयुक्त राष्ट्र का साथ आना कहानी में वैश्विक सहयोग का एक समझदार और परिपक्व पहलू जोड़ता है, जो पाठकों को अंतरराष्ट्रीय एकता का महत्व समझाता है।
समीक्षात्मक दृष्टि (Critical Perspective)

कहानी अपनी निरंतर गति और रोमांचक यात्रा के कारण पाठकों की उत्सुकता को अंत तक बनाए रखने में सफल होती है, जहाँ डॉक्टर एक्सेल की चालें और शक्तिपुत्र की तैयारी के साथ-साथ जनरल रत्नाकर के युद्ध दृश्यों का विस्तार इसे प्रभावशाली बनाता है। हालाँकि, शक्तिपुत्र की ढाल का ‘कैप्टन अमेरिका’ से प्रेरित लगना और डॉक्टर एक्सेल का आसानी से भाग जाना कहानी की मौलिकता और तर्क पर थोड़े सवाल खड़े करता है, साथ ही कुछ स्थानों पर संवादों का अत्यधिक नाटकीय होना 90 के दशक की फिल्मों की याद दिलाता है जो आधुनिक पाठकों को खटक सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ (Historical Context)

1991 के आसपास प्रकाशित यह कॉमिक्स उस दौर के भारत की बदलती सोच को भी दर्शाती है। उस समय कंप्यूटर और रोबोटिक्स आम लोगों के लिए किसी जादू से कम नहीं थे। इस कहानी ने बच्चों के मन में विज्ञान और तकनीक को लेकर जिज्ञासा पैदा की। राधा कॉमिक्स ने इसके ज़रिए भारतीय सुपरहीरो शैली को एक नया और आधुनिक रूप दिया।
निष्कर्ष (Conclusion)
कुल मिलाकर, “यंत्र दानव का आतंक” एक क्लासिक भारतीय कॉमिक्स है। यह सिर्फ मार-धाड़ और एक्शन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अच्छाई और बुराई के संघर्ष को एक आधुनिक वैज्ञानिक रूपक के रूप में पेश करती है। शक्ति पुत्र का जन्म एक दुखद घटना—डॉक्टर पद्मनाभन की मृत्यु—के साथ होता है, जो उसे एक गंभीर और उद्देश्यपूर्ण नायक बना देता है।
अगर आप 90 के दशक की कॉमिक्स संस्कृति को समझना चाहते हैं या एक दमदार साइंस-फिक्शन एक्शन कॉमिक्स पढ़ना चाहते हैं, तो यह कॉमिक्स ज़रूर पढ़नी चाहिए। यह हमें याद दिलाती है कि चाहे मशीन कितनी भी ताकतवर क्यों न हो जाए, आखिरकार इंसान का जज्बा और उसकी समझ ही जीत दिलाती है।
रेटिंग: ४.५/५
