भारतीय कॉमिक्स के सुनहरे दौर में ‘तुलसी कॉमिक्स’ की एक अलग ही पहचान थी। उस समय तौसी, यानी एक इच्छाधारी सांप का किरदार, बच्चों से लेकर किशोरों तक के बीच खूब पसंद किया जाता था। तौसी की खास बात उसकी अनोखी शक्तियां थीं, उसका सही-गलत को समझने वाला स्वभाव और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग रूप धारण कर लेने की क्षमता। “तौसी और तांत्रिक” इसी श्रृंखला की एक ऐसी कहानी है, जो शुरुआत से लेकर आखिरी पन्ने तक पाठक को अपने साथ बांधे रखती है।
षड्यंत्र और वीरता की गाथा
कहानी की शुरुआत सारगढ़ के बहादुर और प्रतापी राजा जयसार और उनकी बेटी राजकुमारी नगीना से होती है। राजकुमारी नगीना के 21वें जन्मदिन पर राजा अपने पूर्वजों के बनाए हुए शिव मंदिर में पूजा करने का फैसला करते हैं। यहीं से कहानी में रोमांच और खतरे का माहौल बनना शुरू हो जाता है। राजा के सेनापति होगह के मन में बुरी नीयत है। वह राजा को मारकर राजगद्दी हथियाना चाहता है और साथ ही राजकुमारी नगीना से शादी करने का सपना भी देख रहा है।

जब राजा मंदिर की ओर जा रहे होते हैं, तभी उन पर हमला किया जाता है। लेकिन राजा पहले से ही सावधान थे और उन्होंने अपने कपड़ों के नीचे लोहे का कवच पहन रखा था, जिससे उनकी जान बच जाती है। इसी मंदिर में तौसी एक मूर्ति के पास सांप के रूप में मौजूद होता है। अपनी दिव्य दृष्टि से वह आने वाले खतरे को पहले ही भांप लेता है।
पहली चाल नाकाम होने के बाद होगह दूसरी साजिश रचता है। वह राजा के दूध में जहर मिला देता है। तौसी, जो अदृश्य रूप में सब कुछ देख रहा था, अपनी नागमणि की शक्तिशाली किरणों से उस जहर को बेअसर कर देता है। जब राजा दूध पीते हैं, तो उन्हें बस थोड़ा-सा चक्कर आता है और वे गहरी नींद में चले जाते हैं। यह दृश्य साफ तौर पर दिखाता है कि तौसी केवल हमला करने वाला ही नहीं, बल्कि रक्षक भी है।
अगले दिन राजदरबार में तौसी इंसानी रूप में सामने आता है और होगह की सारी साजिश का पर्दाफाश कर देता है। जब होगह को वही दूध पीने के लिए मजबूर किया जाता है, तो वह अपनी हार समझकर वहां से भाग निकलता है। लेकिन होगह सिर्फ एक सैनिक नहीं था, वह एक खतरनाक तांत्रिक भी था। वह श्मशान पहुंचकर काली देवी की भयानक साधना करता है और एक मरे हुए शरीर में जान डालकर ‘द्रोकी’ नाम का राक्षस पैदा करता है।

द्रोकी एक बेहद डरावना राक्षस है, जो इंसानों का खून पीकर जिंदा रहता है। वह मंदिर पर हमला करता है और वहां मौजूद पवित्र संत काली पंडित को बेरहमी से मार डालता है। तौसी उसे रोकने की कोशिश करता है, लेकिन द्रोकी की ताकत इतनी ज्यादा होती है कि तौसी को पीछे हटना पड़ता है। कहानी एक जबरदस्त रोमांचक मोड़ यानी क्लिफहैंगर पर खत्म होती है, जहां होगह राजकुमारी नगीना को पकड़ लेता है और द्रोकी राजा जयसार को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। ऐसे में पाठक अगले अंक “तौसी और द्रोकी” का बेसब्री से इंतजार करने लगते हैं।
पात्र चित्रण (Character Analysis)
तौसी: वह इस कहानी का नायक है। तौसी का किरदार भारतीय पौराणिक कथाओं में मिलने वाले ‘इच्छाधारी नाग’ की छवि को आधुनिक कॉमिक्स के अंदाज़ में पेश करता है। वह स्वभाव से शांत है, लेकिन जब बात अन्याय की आती है तो बिल्कुल सख्त हो जाता है। इस कॉमिक्स में तौसी एक सच्चे रक्षक की भूमिका निभाता है। उसकी समझदारी उस समय साफ दिखाई देती है, जब वह सीधे लड़ाई में कूदने के बजाय पहले नागमणि की शक्ति से राजा की जान बचाता है।

सेनापति होगह (खलनायक): होगह एक ऐसा खलनायक है जो सिर्फ ताकतवर ही नहीं, बल्कि दिमाग से भी बहुत चालाक है। वह तंत्र विद्या का जानकार है और अपनी असीम महत्वाकांक्षा के कारण अपनों से भी गद्दारी करने से नहीं हिचकता। उसका श्मशान जाकर साधना करना और द्रोकी जैसे राक्षस को पैदा करना, कहानी में डर और रहस्य का माहौल बना देता है।
द्रोकी: द्रोकी का किरदार पाठकों के मन में डर बैठा देता है। उसे एक विशालकाय, बेहद खौफनाक और भावनाओं से पूरी तरह खाली राक्षस के रूप में दिखाया गया है। वह बिना सोचे-समझे सिर्फ अपने मालिक के आदेशों का पालन करता है, जिससे वह और भी डरावना लगने लगता है।
राजा जयसार और नगीना: ये दोनों पात्र कहानी में नैतिकता और मजबूरी का प्रतीक हैं। इनके जरिए यह दिखाया गया है कि सत्ता के शिखर पर बैठे लोग भी अपनों के विश्वासघात के सामने कितने असहाय हो सकते हैं।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration)

मिसेज रंजीता का चित्रांकन और बी.के. स्टूडियो की कला इस कॉमिक्स को सचमुच जीवंत बना देती है। उस दौर की छपाई की सीमाओं के बावजूद रंगों का बहुत ही प्रभावशाली इस्तेमाल किया गया है। खासतौर पर श्मशान के दृश्यों में गहरे बैंगनी और काले रंग एक रहस्यमयी और डरावना माहौल रचते हैं। पात्रों के भावों को दिखाने में भी कलाकारों ने शानदार काम किया है। होगह का गुस्सा हो या काली पंडित की मृत्यु के समय का दर्द, हर भाव पाठक को अंदर तक छूता है। वहीं द्रोकी का विशाल शरीर और उसके नुकीले, खूंखार दांत डर पैदा करने के लिए काफी हैं। एक्शन दृश्यों में भी जबरदस्त ऊर्जा दिखती है, खासकर वह पैनल जहाँ तौसी सांप के रूप में द्रोकी पर हमला करता है, जो रोमांच को चरम पर पहुंचा देता है।
थीम और संदेश (Themes and Message)

“तौसी और तांत्रिक” की कहानी कई गहरे विषयों को बड़े सहज ढंग से सामने लाती है। यह सिर्फ अच्छाई और बुराई की सीधी लड़ाई नहीं है, बल्कि तौसी और होगह की खतरनाक तंत्र विद्या के बीच एक जटिल संघर्ष को दिखाती है। कहानी का मूल संदेश सत्ता के लालच और विश्वासघात पर टिका है, जो इंसान को अंधा कर देता है। यह बात सेनापति होगह के धोखे में साफ दिखाई देती है। इसके साथ ही, काली पंडित की सात्विक पूजा और होगह के श्मशान वाले काले जादू के बीच का टकराव आध्यात्मिकता और तंत्र-मंत्र के द्वंद्व को सामने लाता है। यह सब भारतीय लोक कथाओं और समाज में फैली पुरानी मान्यताओं को एक रोमांचक रूप में पेश करता है।
समीक्षात्मक विश्लेषण (Critical Analysis)
सकारात्मक पक्ष:
इस कॉमिक्स की कहानी की रफ्तार काफी तेज है। हर 4-5 पन्नों में कोई न कोई नया मोड़ आता है, जिससे पाठक आखिरी तक बंधा रहता है और कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती। सस्पेंस इतना गहरा है कि अंत में नायक को हार के करीब खड़ा दिखाकर यह अगले अंक के लिए जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर देता है। संवाद छोटे होने के बावजूद काफी असरदार हैं। तांत्रिक मंत्रों का इस्तेमाल, जैसे “ॐ ह्रीं नमः…”, कहानी के रहस्यमय माहौल के साथ पूरी तरह मेल खाता है।
नकारात्मक पक्ष:
कुछ जगहों पर घटनाएं बहुत तेजी से आगे बढ़ जाती हैं। जैसे होगह का दरबार से भागना और तुरंत श्मशान जाकर द्रोकी को पैदा कर लेना थोड़ा जल्दबाज़ी भरा लगता है।
काली पंडित जैसे प्रभावशाली पात्र की इतनी जल्दी मृत्यु कुछ पाठकों को दुखी कर सकती है, हालांकि कहानी में खतरे की गंभीरता दिखाने के लिए यह जरूरी भी था।
निष्कर्ष (Conclusion)
कुल मिलाकर, “तौसी और तांत्रिक” तुलसी कॉमिक्स के खजाने की एक बेहद कीमती रचना है। यह सिर्फ एक कल्पनात्मक कहानी नहीं, बल्कि उस दौर के कॉमिक्स लेखन की रचनात्मक सोच का शानदार उदाहरण है। ‘ऋतुराज’ ने एक ऐसी दुनिया रची है, जहाँ सांप बोलते हैं, लाशों में जान आ जाती है और नागमणि से चमत्कार होते हैं।
अगर आप पुरानी यादों की दुनिया में खोना चाहते हैं या भारतीय कॉमिक्स की क्लासिक कहानियों को करीब से समझना चाहते हैं, तो यह कॉमिक्स जरूर पढ़नी चाहिए। यह याद दिलाती है कि कॉमिक्स सिर्फ मनोरंजन नहीं थीं, बल्कि हमारी कल्पना को उड़ान देने का जरिया भी थीं।
रेटिंग: 4.5/5
आज के डिजिटल दौर में भी यह कॉमिक्स उतनी ही मजेदार और असरदार लगती है, जितनी दशकों पहले थी। इसका अगला भाग “तौसी और द्रोकी” और भी ज्यादा रोमांचक होने का वादा करता है, जिसे पढ़ने की उत्सुकता यह अंक पूरी तरह जगा देता है।

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