राज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ‘अश्वराज’ श्रृंखला भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में एक खास मुकाम रखती है। इस श्रृंखला का पाँचवाँ भाग, “फिर आया अश्वराज”, सिर्फ एक साहसिक कहानी नहीं है, बल्कि इसमें कल्पना, वीरता, धोखा और पुनर्जन्म जैसे रहस्यों का ऐसा मिश्रण है कि पाठक कहानी के अंत तक बंधा रहता है। इस कॉमिक की सफलता के पीछे एक बहुत अनुभवी टीम है। लेखिका मीनू वाही और पटकथा लेखक तरुण कुमार वाही ने मिलकर एक ऐसी कहानी बनाई है जो पौराणिक और काल्पनिक दुनिया के बीच का पुल है। संपादक मनीष गुप्ता ने कहानी के प्रवाह को कहीं धीमा नहीं होने दिया।
सबसे खास चीज इसकी चित्रकारी है। महान प्रताप मुळीक के निर्देशन में चंदू ने जो चित्र बनाए हैं, वह कमाल के हैं। ९० के दशक की कॉमिक्स में प्रताप मुळीक की अलग पहचान थी—पात्रों की मांसपेशियाँ, चेहरों पर क्रोध और वीरता के भाव, और ऐक्शन सीन का शानदार चित्रण। इस अंक में अश्वराज के अलग रूप और युद्ध के दृश्य इतने जीवंत बनाए गए हैं कि आज भी ये प्रभावित करते हैं।
कहानी का विस्तार और संघर्ष (Plot Summary and Conflict)

कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ पिछला अंक खत्म हुआ था। अश्वराज अपनी यात्रा पर है और महर्षि फूक-मसान के शिष्य उसके रास्ते में खड़े हैं। इस बार उसका सामना वृश्चिक (बिच्छू-मानव) और धनु (धनुर्धर अश्व-मानव) से होता है।
युद्ध का यह हिस्सा बहुत रोमांचक है। यहाँ अश्वराज के पाँच खास घोड़े बहुत महत्वपूर्ण हैं। जब वृश्चिक अपना ज़हरीला वार करता है, नीलकंठ (अश्वराज का एक खास घोड़ा) उसे पी जाता है, क्योंकि उसके पास विष सोखने की ताकत है। अश्वराज अपनी इच्छाधारी शक्तियों का इस्तेमाल करके वृश्चिक का रूप लेता है और उसे उसी की शैली में हरा देता है। यही इच्छाधारी शक्ति उसे बाकी सुपरहीरोज़ से अलग बनाती है।
पुनर्जन्म का रहस्य और भावनात्मक गहराई (The Mystery of Rebirth)
कॉमिक का एक बड़ा हिस्सा अश्वराज के पुनर्जन्म की कहानी को दिखाता है। महर्षि फूक-मसान, राजा चिंतित सिंह को बताते हैं कि अश्वराज ने सूर्यवंशी सम्राट तारपीड़ो के घर दोबारा जन्म लिया। रानी मकई को दिए गए वरदान के अनुसार, अश्वराज सात जन्म तक उन्हीं की कोख से जन्म लेगा।

यहाँ कहानी की भावनाएँ और गहराई दिखती है। माता (रानी मकई) और पिता (सम्राट तारपीड़ो) का अपने पुत्र के प्रति प्यार, और पाँच वफादार घोड़े—रक्ताम्बर, कालाखोर, अश्ववट, नीलकंठ और श्रव्यशक्ति—का अपने मालिक के लिए समर्पण भावुक कर देता है। ये घोड़े नन्हे अश्वराज को पहचान लेते हैं और अपनी वफादारी दिखाते हैं। यह दृश्य दिखाता है कि सच्ची वफादारी की कोई सीमा नहीं होती।
प्रशिक्षण और महाबली का उदय (Training and Rise of the Hero)
अश्वराज का बचपन और प्रशिक्षण ऋषि दीभ और प्रशिक्षक अश्वकाठ के मार्गदर्शन में दिखाया गया है। नन्हा अश्वराज तलवारबाजी, तीरंदाजी और मल्ल युद्ध में जिस तरह निपुण होता है, वह उसकी खासियत दिखाता है। एक दृश्य में वह अपने प्रशिक्षक अश्वकाठ को भी अपनी कला से चौंका देता है। यह हिस्सा पाठक को अश्वराज के प्रति और भी सम्मान और उत्साह से भर देता है।
राजकुमारी कुदुमचुम्मी और अश्वराज का मिलन (Encounter with Kudumchummi)
कहानी में नया मोड़ तब आता है जब चिंतापोकली नगर की राजकुमारी कुदुमचुम्मी का रथ एक बड़ी चट्टान के कारण रुक जाता है। उसके सभी सैनिक उस चट्टान को हिला नहीं पाते। तभी एक परदेसी युवक (अश्वराज) वहां आता है और एक ही मुक्के से उस विशाल चट्टान को चकनाचूर कर देता है।

चट्टान तोड़ते समय अश्वराज का हाथ कट जाता है और रक्त बहने लगता है, जिससे राजकुमारी थोड़ी हैरान हो जाती है। यह संकेत देता है कि अश्वराज और कुदुमचुम्मी के बीच कोई पुराना या गहरा नाता है। राजकुमारी उसे ‘अश्व मैराथन’ में भाग लेने के लिए आमंत्रित करती है। अश्वराज, जो अभी अपनी असली पहचान छुपाए हुए है, इस चुनौती को स्वीकार करता है। यह हिस्सा कहानी को श्रृंखला के पहले भाग से जोड़ता है और एक चक्र पूरा करता है।
विलेन का पक्ष और सस्पेंस (Antagonist and Cliffhanger)
दूसरी तरफ, शैतान तूताबूता अपने जादुई दर्पण से सब कुछ देख रहा है। वह अश्वराज को खत्म करने और कारूं के खजाने को पाने की योजना बना रहा है। लेकिन कहानी का अंत एक जबरदस्त क्लिफहैंगर पर होता है—तूताबूता पर अचानक एक नकाबपोश हमला करता है और उसे खंजर मार देता है।

यह नकाबपोश कौन है? क्या यह अश्वराज का मित्र है या कोई नया दुश्मन? कॉमिक के अंत में अगले अंक ‘प्रलयंकारी अश्वराज’ का विज्ञापन पाठक की उत्सुकता बढ़ा देता है।
पात्रों का विश्लेषण (Character Analysis)
अश्वराज: न्याय का रक्षक और अदम्य साहसी। उसकी शक्ति सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और जादुई भी है। वह विनम्र है लेकिन शत्रुओं के लिए बेहद खतरनाक है।
सम्राट तारपीड़ो: एक न्यायप्रिय राजा और प्यारे पिता। अपने पुत्र के प्रति प्यार और अपने शत्रु अश्वान्तक के प्रति व्यवहार से उनके व्यक्तित्व के अलग पहलू दिखते हैं।

अश्वकीर्ति: इस अंक में वह तिलिस्म में कैद है, लेकिन उसकी मक्कारी और विश्वासघात की यादें कहानी के तनाव को बनाए रखती हैं।
घोड़े: मूक होते हुए भी सबसे अहम पात्र। उनकी इंद्रियां अश्वराज के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं।
लेखन शैली और संवाद (Writing Style and Dialogues)
मीनू और तरुण कुमार वाही ने संवादों को सरल और प्रभावशाली रखा है। पौराणिक शब्द कहानी के माहौल को और गरिमामयी बनाते हैं। जैसे “हौनी बलवान है,” “इच्छाधारी अश्वमानव,” पाठक को काल्पनिक दुनिया में ले जाते हैं। पात्रों के संवाद उनके स्वभाव को साफ दिखाते हैं।
चित्रकला का तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis of Art)

चंदू के चित्रों में छाया और प्रकाश का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया गया है, जिससे दृश्य और जीवंत बनते हैं। खासकर लड़ाई के दृश्य—धूल के बादल, पसीने की बूंदें, हथियारों की चमक—सब बहुत बारीकी से दिखाए गए हैं। रंगों का चयन (संजय विस्पुते) संतुलित है, न ज्यादा चमकीले न ज्यादा फीके, जो पुराने कॉमिक्स की क्लासिक फील बनाए रखते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
“फिर आया अश्वराज” सिर्फ एक कॉमिक बुक नहीं है, बल्कि उस समय की रचनात्मकता का सबूत है, जब कहानियाँ पाठकों में नायकों के प्रति गहरा विश्वास पैदा करती थीं। यह अंक श्रृंखला के पुराने रहस्यों को खोलता है और नए रोमांच की नींव रखता है।
समीक्षा रेटिंग:
यदि आप राज कॉमिक्स के प्रशंसक हैं या एडवेंचर-फैंटेसी कहानियों के शौकीन हैं, तो यह कॉमिक आपके संग्रह में जरूर होनी चाहिए। यह याद दिलाती है कि अश्वराज राज कॉमिक्स के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी नायकों में से क्यों माना जाता है। इसे पढ़ने के बाद अगले भाग का इंतजार होना स्वाभाविक है।

1 Comment
Struggling to find the right link? I found a reliable link at linkv9bet. Hope it helps some of you out there!