पहली कहानी: प्रलय का आतंक (Mandrake and the Terror of Doomsday)
कथानक का संक्षिप्त विवरण:
कहानी की शुरुआत एक मशहूर वैज्ञानिक डॉ. एंड्रयू क्रेन के अचानक गायब हो जाने से होती है। डॉ. क्रेन एक बेहद खतरनाक हथियार पर काम कर रहे थे, जिसे ‘प्रोटॉन बम’ कहा गया है। इस बम की सबसे डरावनी बात यह थी कि यह इमारतों या चीज़ों को नुकसान पहुँचाए बिना सिर्फ जीवित प्राणियों को खत्म कर सकता था। ब्रिटिश खुफिया विभाग को इस बात की गहरी चिंता होती है कि अगर यह तकनीक गलत लोगों के हाथ लग गई, तो पूरी दुनिया के लिए तबाही तय है।
इसी मिशन में मण्ड्रैक और उसका वफादार साथी लोथार भी शामिल होते हैं। मण्ड्रैक अपनी खास सम्मोहिनी (Hypnotism) कला का इस्तेमाल करके डॉ. क्रेन के सहायक लार्किन के अवचेतन मन में छिपी यादों को बाहर निकालता है। इससे पता चलता है कि डॉ. क्रेन को विदेशी जासूसों ने अगवा कर लिया है और उन्हें एक पुरानी जलचक्की के पास बने गुप्त ठिकाने में कैद करके रखा गया है।

रोमांच और जादू:
कहानी का सबसे मज़ेदार और रोमांचक हिस्सा वह है, जहाँ मण्ड्रैक अपने जादू से दुश्मनों के दिमाग में डर और भ्रम पैदा करता है। वह झील से एक विशाल समुद्री दैत्य (Sea Monster) का भ्रम रच देता है और घास से भरी गाड़ी को एक भयानक राक्षस का रूप दे देता है, जिससे जासूस बुरी तरह डर जाते हैं। मण्ड्रैक की यही खासियत उसे बाकी सुपरहीरो से अलग बनाती है—वह ताकत या हथियारों से नहीं, बल्कि दिमाग और मन के खेल से जंग जीतता है।
निष्कर्ष:
कहानी के अंत में जब डॉ. क्रेन को आज़ाद करा लिया जाता है, तब पता चलता है कि यातनाओं और मानसिक दबाव के कारण वे प्रोटॉन बम बनाने की पूरी विधि भूल चुके हैं। मण्ड्रैक इसे दुनिया के लिए एक वरदान मानता है, क्योंकि वह जानता है कि इतनी खतरनाक और विनाशकारी शक्ति किसी के भी हाथ में नहीं होनी चाहिए।
दूसरी कहानी: वेताल – हाथीदाँत के पिंजरे में (The Phantom – The Ivory Cage)
यह एक छोटी लेकिन असरदार कहानी है, जिसमें डेंकाली के जंगल पर कब्जा जमाने की चाह रखने वाला एक खलनायक ‘सम्बानी’, वेताल को पकड़ने की साज़िश रचता है। वह हाथीदाँत से बना एक खास पिंजरा (कटघरा) तैयार करता है और डोल (N Drums) की आवाज़ के ज़रिये वेताल को धोखे से अपनी ओर बुला लेता है।
वेताल को कैद कर लिया जाता है, लेकिन उसकी समझदारी और उसके वफादार साथी ‘डार्डी’ (Guran का संदर्भ) की मदद से वह न सिर्फ आज़ाद हो जाता है, बल्कि दुश्मनों को अपनी ताकत का एहसास भी करा देता है। कहानी भले ही छोटी हो, लेकिन यह वेताल के अजेय होने की छवि और उसके मिथक को और मजबूत कर देती है।
तीसरी कहानी: रेगिस्तान का प्रेत (Mandrake and the Ghost of the Desert)

कथानक और परिवेश:
यह कहानी मण्ड्रैक को एक बिल्कुल नए माहौल में ले जाती है—अमेरिकी रेगिस्तान और काउबॉय संस्कृति के बीच। ‘टैको’ नाम के एक छोटे से शहर में एक रहस्यमय ‘प्रेत’ का आतंक फैला हुआ है। कहा जाता है कि पांचो वाल्डे (Pancho Walde) नाम का एक डाकू करीब 80 साल पहले मारा गया था, लेकिन अब वह अचानक वापस आ गया है और शहर में लूटपाट मचा रहा है।
रहस्य का उद्घाटन:
इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि शुरू में मण्ड्रैक का जादू उस प्रेत पर असर ही नहीं करता। पाठक भी सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि कहीं वह सच में कोई आत्मा तो नहीं है। यहां तक कि लोथार भी डर जाता है। लेकिन मण्ड्रैक अपनी समझ और तर्क से काम लेता है। वह समझ जाता है कि उस ‘प्रेत’ ने एक खास तरह का रंगीन चश्मा पहन रखा है, जो मण्ड्रैक की आँखों से निकलने वाली सम्मोहक तरंगों को रोक देता है। साथ ही उसने बुलेटप्रूफ जैकेट (कवच) भी पहन रखी होती है, जिससे गोलियाँ उस पर असर नहीं करतीं।
क्लाइमेक्स:
आखिरकार मण्ड्रैक अपनी सम्मोहिनी शक्ति को और ज़्यादा बढ़ाता है और एक विशाल अग्नि उगलने वाले ड्रैगन का भयानक भ्रम पैदा करता है। इस बार अपराधी का चश्मा भी उसे नहीं बचा पाता और वह पकड़ा जाता है। यह कहानी साफ संदेश देती है कि अंधविश्वास के पीछे अक्सर कोई चालाक और शातिर दिमाग छिपा होता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration)

इंद्रजाल कॉमिक्स का आर्टवर्क सादगी और असर का बहुत बढ़िया मेल दिखाता है। उस दौर की प्रिंटिंग को ध्यान में रखते हुए लाल, पीले और नीले जैसे प्राथमिक रंगों का जमकर इस्तेमाल किया गया है, जो पन्नों को ज़्यादा ज़िंदा बना देते हैं। मण्ड्रैक का लाल और काला कोट और लोथार की चीते की खाल वाली शर्ट उन्हें एक क्लासिक और यादगार लुक देती है। पात्रों के हाव-भाव भी काफी प्रभावशाली हैं—मण्ड्रैक के चेहरे पर हमेशा एक शांत आत्मविश्वास दिखता है, जबकि खलनायकों के चेहरों पर डर और हैरानी के भाव साफ नज़र आते हैं।
चूँकि मण्ड्रैक का किरदार ज़्यादा शारीरिक लड़ाई पर नहीं, बल्कि इल्यूजन यानी भ्रम पर आधारित है, इसलिए चित्रों में जादू का असर दिखाने के लिए ‘धुएँ’ और ‘लहरों’ का इस्तेमाल बहुत शानदार तरीके से किया गया है, जो कहानी के रहस्य को और गहरा बना देता है।
भाषा और संवाद

इस कॉमिक्स का हिन्दी अनुवाद काफ़ी शुद्ध और साहित्यिक है, लेकिन फिर भी कहानी से जुड़ा हुआ लगता है। “सम्मोहिनी विद्या”, “अचेतन मन”, “प्रलय का आतंक” जैसे शब्द कहानी में एक गंभीर और रहस्यमयी माहौल बना देते हैं। संवाद ज़्यादा लंबे नहीं हैं, लेकिन उनका असर सीधा और मजबूत है। खास तौर पर मण्ड्रैक का यह वाक्य—
“मण्ड्रैक ने केवल एक संकेत किया और जासूसों के सामने एक भयानक दृश्य उभर आया”—
पाठक की कल्पना को खुलकर उड़ान भरने का मौका देता है।
पात्र विश्लेषण
मण्ड्रैक:
मण्ड्रैक एक जेंटलमैन सुपरहीरो है। वह बिना वजह हिंसा नहीं करता और हर समस्या को दिमाग से सुलझाने की कोशिश करता है। उसका किरदार धैर्य, समझदारी और मानसिक शक्ति का प्रतीक है।
लोथार:
लोथार दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी होने के बावजूद मण्ड्रैक का बेहद वफादार साथी है। वह शारीरिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, ठीक वैसे ही जैसे मण्ड्रैक मानसिक शक्ति का।
खलनायक:
इस अंक के खलनायक सिर्फ आम अपराधी नहीं हैं, बल्कि सोच और विचार के स्तर पर भी खतरनाक हैं, जैसे वे जासूस जो प्रोटॉन बम जैसी विनाशकारी ताकत अपने हाथ में लेना चाहते हैं।
सांस्कृतिक और नैतिक महत्व

यह कॉमिक्स सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कुछ ज़रूरी नैतिक सवाल भी उठाती है। “प्रलय का आतंक” कहानी में विज्ञान के गलत इस्तेमाल को लेकर गहरी चिंता दिखाई देती है। यह उस परमाणु युग के डर को सामने लाती है, जब लोगों को लगता था कि एक बटन दबते ही पूरी दुनिया खत्म हो सकती है। मण्ड्रैक का वैज्ञानिक की याददाश्त मिट जाने को सही ठहराना यह साफ दिखाता है कि उसके लिए शांति और मानवता, किसी भी वैज्ञानिक प्रगति से ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
वहीं “रेगिस्तान का प्रेत” कहानी अंधविश्वास और डर के सामने तर्क और समझ की जीत को दिखाती है। यह पाठकों को यह सिखाती है कि जो चीज़ें हमें डरावनी या अलौकिक लगती हैं, उनके पीछे अक्सर कोई चालाक इंसानी दिमाग छिपा होता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, “मण्ड्रैक और प्रलय का आतंक“ इंद्रजाल कॉमिक्स का एक बेहद शानदार और यादगार अंक है। यह ली फॉक की बेहतरीन लेखन शैली और उस दौर के दमदार चित्रांकन का एक बढ़िया उदाहरण है। मण्ड्रैक और वेताल जैसे किरदार हमें यह याद दिलाते हैं कि असली नायक वही होता है जो सिर्फ लड़ना ही नहीं जानता, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर समाज को विनाश से बचाने का रास्ता भी दिखाता है।
आज की डिजिटल दुनिया में, जहाँ हाई-ग्राफिक्स और तेज़-तर्रार कॉमिक्स की भरमार है, ऐसी पुरानी कॉमिक्स पढ़ना एक अलग ही सुकून देता है। यह पुरानी पीढ़ी के लिए यादों का खजाना है और नई पीढ़ी के लिए भारतीय कॉमिक्स के स्वर्ण युग को समझने का एक बेहतरीन ज़रिया। अगर आप सस्पेंस, साइंटिफिक थ्रिलर और क्लासिक जादू के शौकीन हैं, तो यह अंक आपके कलेक्शन में ज़रूर होना चाहिए।
