कहानी वहीं से रफ्तार पकड़ती है जहाँ ‘काली मौत‘ का अंत हुआ था। नागराज अपनी मित्र भारती को बचाने की धुन में पूरी दुनिया छान रहा है। अफगानिस्तान में उसने आतंकवादियों के छक्के छुड़ा दिए, अफ्रीका में ‘थोडंगा‘ और ‘काली मौत‘ जैसे शैतानों को धूल चटा दी, लेकिन भारती हर बार उससे एक कदम दूर रह गई। अब भारती के जीपीएस सिग्नल उसे अमेरिका ले आए हैं। यह कॉमिक्स नागराज को ऐसे माहौल में डालती है जहाँ की तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था दुनिया में सबसे उन्नत है, लेकिन आतंकवाद की जड़ें वहाँ भी गहरी धँसी हुई हैं।
‘उड़ाका‘ का हवाई हमला: जब बादलों के बीच फँस गई नागराज की जान!

अमेरिका पहुँचते ही नागराज का सामना ‘उड़ाका‘ से होता है, जो एक पंख वाला हाइब्रिड शिकारी है जिसके पास बाज जैसी फुर्ती और राक्षसी ताकत है। कॉमिक्स के शुरुआती पन्नों में ही एक रोमांचक हवाई पीछा (Aerial Chase) दिखाया गया है जहाँ नागराज हेलीकॉप्टर में है और उड़ाका एक गरम हवा के गुब्बारे (Hot Air Balloon) में भारती को ले जा रहा है। इस हवाई एक्शन में चूंकि नागराज उड़ नहीं सकता, इसलिए बादलों के बीच उसकी लड़ाई काफी मुश्किल दिखाई गई है; साथ ही जब उड़ाका के वार भारी पड़ने लगते हैं, तब नागराज अपनी ‘शीत नाग‘ शक्तियों का इस्तेमाल कर उसके पंखों को बर्फ से जाम कर देता है और यह दृश्य अनुपम सिन्हा की कल्पनाशीलता का शानदार नमूना है।
वर्ल्ड ट्रेड टावर और 9/11 का वह भयावह संदर्भ: जब नागराज ने रोका ‘मौत का विमान‘!

इस कॉमिक्स का सबसे चौंकाने वाला और साहसी हिस्सा वह है जहाँ आतंकवादियों ने एक पैसेंजर विमान को हाईजैक कर लिया है। उनका मकसद विमान को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड टावर (WTC) से टकराना है। 2000 के दशक की शुरुआत में लिखी गई इस कहानी में असली दुनिया की त्रासदी 9/11 की झलक मिलती है।
नागराज विमान के अंदर घुसता है और अपनी ‘सम्मोहन शक्ति‘ (Hypnosis) का इस्तेमाल कर आतंकियों को भ्रमित कर देता है। वह दृश्य जहाँ पायलटों को लगता है कि विमान टकरा गया है, जबकि असल में नागराज ने उन्हें सम्मोहित कर रखा था, रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यह हिस्सा नागराज को एक वैश्विक रक्षक के रूप में स्थापित करता है।
‘जोंक–सर्प‘ का खूनी खेल: वह दानव जो नागराज की नसों से ज़हर खींच लेता है!

आतंकवादियों का गुप्त अड्डा ग्रैंड कैनियन की पहाड़ियों में स्थित है, जहाँ नागराज का सामना ‘जोंक–सर्प‘ जैसे एक वीभत्स जीव से होता है। इस जीव की सबसे बड़ी खासियत इसके माथे पर लगी वह मणि है जो किसी भी विषैले रक्त को शुद्ध करने की क्षमता रखती है। यहाँ नागराज की बेबसी साफ दिखाई देती है क्योंकि उसकी सबसे बड़ी ताकत उसका ‘विष‘ है, लेकिन जोंक-सर्प उसके शरीर से सारा खून और ज़हर चूसने लगता है; साथ ही जोंक-सर्प का डरावना डिजाइन, उसकी कई भुजाएँ और भयानक चेहरा पाठकों के मन में किसी हॉरर फिल्म के मॉन्स्टर जैसा खौफ पैदा करता है।
स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी बना कुरुक्षेत्र: आज़ादी की मशाल में छिपी है मौत!

कहानी का अंतिम और सबसे बड़ा टकराव न्यूयॉर्क की विश्व प्रसिद्ध ‘स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी‘ के अंदर होता है। नागराज को पता चलता है कि आतंकवादियों का ‘मास्टर कंट्रोल रूम‘ इस प्रतिमा की मशाल के अंदर छिपा है।
एक भारतीय सुपरहीरो को अमेरिकी प्रतीक के अंदर लड़ते हुए देखना भारतीय पाठकों के लिए एक अनोखा अनुभव था। यहाँ की सुरक्षा लेजर किरणों और हाई-टेक सेंसर से भरी है, जिसे पार करना लगभग नामुमकिन जैसा है। नागराज अपनी सर्प-रस्सियों और समझदारी से इन बाधाओं को पार करता है, जो उसके जासूसी कौशल (Espionage Skills) को दिखाता है।
द मास्टर: कौन है वह साया जिसने नागराज को चुनौती दी?

प्रतिमा के गुप्त कक्ष में नागराज का सामना ‘मास्टर‘ से होता है, जो एक साइबोर्ग जैसा विलेन है जिसका आधा शरीर मशीन और आधा मांस है। मास्टर की खासियत यह है कि वह नागराज की हर चाल को पहले से ही भांप लेता है। इस भिड़ंत के दौरान हड्डियों का चटकना साफ महसूस होता है, क्योंकि दोनों के बीच की शारीरिक लड़ाई इतनी हिंसक है कि मास्टर नागराज की पसलियाँ तक तोड़ देता है; साथ ही यह केवल शारीरिक नहीं बल्कि एक बौद्धिक युद्ध भी है जहाँ मास्टर नागराज को मानसिक रूप से थकाने के लिए यह खुलासा करता है कि वह जिसे बचाने आया है, वह कभी भारती थी ही नहीं।
डॉ. पोल्का की गद्दारी: राज कॉमिक्स के इतिहास का सबसे बड़ा ‘धोखा‘!

पूरी श्रृंखला (अफगानिस्तान से अमेरिका तक) में डॉ. पोल्का नागराज की एक विश्वसनीय साथी के रूप में दिखाई गई थी। पाठकों को लगता था कि पोल्का का हृदय परिवर्तन हो चुका है। लेकिन क्लाइमेक्स में जो खुलासा होता है, वह पैरों तले ज़मीन खिसका देने वाला है।
डॉ. पोल्का वास्तव में ‘सुप्रीम हेड‘ की डिप्टी जनरल है! उसने नागराज का विश्वास सिर्फ इसलिए जीता ताकि वह उसे सीधे मास्टर के चंगुल में ला सके। यह ‘बैकस्टैबिंग’ दृश्य इतना प्रभावी है कि पाठक भी ठगा हुआ महसूस करता है।
नागराज का ‘रीसेट‘: जब सुपरहीरो फिर से बन गया ‘आतंकवादी‘!

कॉमिक्स का अंत राज कॉमिक्स के इतिहास के सबसे बड़े ‘क्लिफहैंगर‘ (Cliffhanger) पर होता है। डॉ. पोल्का और मास्टर मिलकर नागराज के दिमाग की मेमोरी साफ कर देते हैं।
याद रहे, 1986 में नागराज की शुरुआत एक ऐसे विलेन के रूप में हुई थी जिसे प्रोफेसर नागमणि ने दुनिया को तबाह करने के लिए बनाया था। डॉ. पोल्का नागराज को फिर उसी ‘इविल स्टेट‘ (Evil State) में ले आती है।
अंतिम पन्ना: नागराज की आँखों में वही पुराना शैतानी लाल रंग वापस आ जाता है, वह चश्मा पहनता है और हाथ में मशीनगन लेकर खड़ा होता है। शीर्षक आता है—“आतंकवादी नागराज“।
अनुपम सिन्हा का आर्टवर्क: एक दृश्य महाकाव्य!

इस कॉमिक्स की सफलता का एक बड़ा कारण अनुपम सिन्हा का शानदार आर्ट है; न्यूयॉर्क की ऊंची इमारतों, वर्ल्ड ट्रेड टावर के अंदरूनी दृश्यों और स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी की बनावट में जो ‘ग्लोबल टच‘ और बारीकी दिखाई गई है, वह अद्भुत है। पात्रों के चित्रण में घायल नागराज की लाचारी और पोल्का के चेहरे पर छिपी कुटिलता को बहुत गहराई से उकेरा गया है। साथ ही, सुनील पांडेय का रंग संयोजन दृश्यों में तनाव (Tension) और नाटकीयता (Drama) पैदा करता है।
फाइनल वर्डिक्ट: क्यों ‘नागराज अमेरिका में‘ एक अनिवार्य कॉमिक्स है?
यह कॉमिक्स सिर्फ एक एडवेंचर नहीं है, यह एक नायक के पतन की कहानी है। यह हमें सिखाती है कि अति-विश्वास कभी-कभी आत्मघाती हो सकता है।
“नागराज अमेरिका में“ राज कॉमिक्स के स्वर्ण काल की ऐसी कृति है जो आज भी उतनी ही रोमांचक लगती है। डॉ. पोल्का की गद्दारी और नागराज का ‘आतंकवादी’ बनना पाठकों को गहरा सदमा देता है और उन्हें अगली कॉमिक्स ‘आतंकवादी नागराज‘ पढ़ने के लिए बेताब कर देता है।
