रात का सन्नाटा, राजनगर की शांत गलियाँ और अचानक एक चीख! लेकिन यह चीख किसी साधारण लूटपाट की नहीं थी। जब पुलिस महान अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमृत राणा के कमरे में दाखिल हुई, तो उनके होश उड़ गए। मेज पर लाश पड़ी थी, लेकिन शरीर पर कोई घाव नहीं था। गायब था तो बस प्रोफेसर का ‘दिमाग’—जिसे बड़ी सफाई से खोपड़ी काटकर निकाल लिया गया था।
क्या कोई इंसान इतना क्रूर हो सकता है? या फिर राजनगर की धरती पर किसी ऐसी शक्ति ने कदम रखा है, जिसका मकसद सोना-चाँदी नहीं बल्कि इंसानी बुद्धि को लूटना है? यहीं से शुरू होता है ‘शह और मात’ का वह खौफनाक खेल, जहाँ हर चाल के पीछे एक मौत छिपी हुई है।
राजनगर में रत्नों की डकैती और ध्रुव की चाल
कहानी की शुरुआत राजनगर के मुख्य व्यापारिक केंद्र ‘कंचनजंगा बिल्डिंग’ से होती है। यहाँ ‘स्पार्कलिंग जेम एक्सपोर्टर’ नाम के ऑफिस में करोड़ों रुपये के रत्नों का एक शिपमेंट आता है, जिसे कुछ हथियारबंद लुटेरे लूट लेते हैं।

• पुलिस को चकमा: लुटेरे सुरक्षा अलार्म बजते ही लिफ्ट का फर्श काटकर नीचे पार्किंग की तरफ भागते हैं, ताकि पुलिस का पूरा ध्यान ऊपर लिफ्ट और छत पर खड़े उनके ‘सूक’ हेलीकॉप्टर पर ही बना रहे।
• ध्रुव का जाल: जब लुटेरे पार्किंग से कार लेकर भागने की कोशिश करते हैं, तो सामने सुपर कमांडो ध्रुव खड़ा मिलता है। लुटेरे हैरान रह जाते हैं कि ध्रुव को उनके कार से भागने की योजना का कैसे पता चला।
• ध्रुव की समझदारी: ध्रुव बताता है कि उसने छत पर जाकर उनके हेलीकॉप्टर के फ्यूल टैंक की सुई देखी थी। उसमें सिर्फ 5 किलोमीटर तक का ईंधन था। इसका साफ मतलब था कि हेलीकॉप्टर सिर्फ पुलिस को गुमराह करने के लिए था और असली भागने का रास्ता कार ही थी।
• डकैतों का अंत: लुटेरे ध्रुव पर कार चढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ध्रुव अपनी फुर्ती से कार का टायर पंचर कर देता है। इसके बाद वह कार के टूटे दरवाजे को ढाल बनाकर और अपने ‘रोलर स्केट्स’ की मदद से कारों के नीचे से फिसलते हुए चारों लुटेरों (कृष्णा, भीरवू, पटाया और उनके बॉस) को धूल चटा देता है। यह पूरा घटनाक्रम ‘भारती न्यूज’ की एंकर मीना कपूर टीवी पर लाइव दिखा रही होती हैं।
प्रोफेसर अमृत राणा की वीभत्स हत्या और उड़नतश्तरी
इस लाइव प्रसारण को टीवी पर देख रहा एक रहस्यमय बख्तरबंद (धातु के मुखौटे वाला) विलेन ध्रुव के “व्हाट ए ब्रेन” (कमाल का दिमाग) वाले कमेंट पर ध्यान देता है। वह इंटरनेट पर ‘ध्रुव फैन क्लब’ साइट से ध्रुव का पूरा इतिहास खंगालता है। वहाँ उसे पता चलता है कि ध्रुव के पास न कोई बारूदी हथियार है और न कोई सुपरपावर, फिर भी वह सिर्फ अपने दिमाग और ‘स्टार ब्लेड्स’ की मदद से ग्रैंडमास्टर रोबो, चूँबा, ध्वनिराज और चंडकाल जैसे खतरनाक दुश्मनों को हरा चुका है।

इसी बीच, राजनगर के पुलिस कमिश्नर राजन (ध्रुव के पिता) ध्रुव को पुलिस अस्पताल के मुर्दाघर में बुलाते हैं। वहाँ मुंबई से आए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमृत राणा की लाश मिलती है, जिनका सेमिनार के बहाने अपहरण कर उनकी खोपड़ी काटकर दिमाग निकाल लिया गया था। तभी सिपाही रामफल खिड़की के बाहर आसमान में एक ‘उड़नतश्तरी’ (UFO) दिखाता है, जो कुछ ही पलों में पुलिस हेलीकॉप्टर के पहुँचने से पहले ही राडार से गायब हो जाती है।
मनोवैज्ञानिक नटालिया और परग्रही का ड्रामा
अगले दिन अखबारों में इस हत्या और उड़नतश्तरी की खबरें छपती हैं। राजनगर के होटल हिल्टन में ठहरी मशहूर मनोवैज्ञानिक मैडम नटालिया (जो खुद इसी सेमिनार के लिए आई थीं) यह खबर पढ़कर घबरा जाती हैं।
शाम को जब वे एक शोफर (ड्राइवर) की कार में बैठती हैं, तो कार शहर से बाहर सुनसान रास्ते पर जाने लगती है। नटालिया जब ड्राइवर पर गोली चलाती हैं, तो उसका कोई असर नहीं होता, क्योंकि वह एक रोबोट था। नटालिया तुरंत कार से कूद जाती हैं और कुछ ही पल बाद कार जोरदार धमाके के साथ उड़ जाती है।

जंगल में नटालिया का सामना उसी अंतरिक्षीय परग्रही विलेन (शतबुद्धि) और उसके दो अजीब और डरावने गुलामों—चतुर्भुज और गुलाम—से होता है। शतबुद्धि नटालिया से उसका असाधारण मनोवैज्ञानिक दिमाग ‘दान’ करने को कहता है। जब नटालिया विरोध करती हैं, तो वह अपनी उंगली से एक ऐसी किरण छोड़ता है, जो उन्हें पूरी तरह जड़ कर देती है और वे हिलने-डुलने में असमर्थ हो जाती हैं।
ध्रुव का आगमन और रोबोटिक ट्विस्ट
तभी अचानक ध्रुव वहाँ नटालिया को बचाने पहुँच जाता है। वह बताता है कि वह होटल हिल्टन से ही नटालिया की कार का पीछा कर रहा था। शतबुद्धि अपने गुलाम ‘चतुर्भुज’ को ध्रुव से लड़ने के लिए छोड़ देता है और खुद नटालिया को लेकर उड़नतश्तरी की तरफ बढ़ जाता है।
• चतुर्भुज से मुकाबला: चतुर्भुज अपने हाथों से विनाशकारी ब्लास्ट करता है और ध्रुव को एक केबिन में धकेल देता है। ध्रुव केबिन के अंदर रखे एक जनरेटर के पेट्रोल का इस्तेमाल करके चतुर्भुज को आग की लपटों में झोंक देता है। आग लगने से चतुर्भुज के सर्किट शॉर्ट हो जाते हैं। इसके बाद ध्रुव ‘स्टार ब्लेड्स’ से पेड़ की एक डाल काटकर उसे नीचे गिरा देता है और चतुर्भुज का सिर धड़ से अलग हो जाता है। तब ध्रुव को पता चलता है कि चतुर्भुज असल में एक रोबोट था।
• ध्रुव की सुरक्षा घड़ी: नटालिया सुरक्षित ध्रुव के पास आ जाती हैं और ध्रुव उन्हें सुरक्षा के लिए एक खास घड़ी देता है। उस घड़ी की चाबी घुमाते ही ध्रुव को खतरे का सिग्नल मिल जाएगा।
असली मास्टरमाइंड का पर्दाफाश: ‘शह और मात’

ध्रुव इस रोबोट के मलबे को लेकर प्रोफेसर बख्शी के पास जांच के लिए जाता है, जहाँ पता चलता है कि इस रोबोट में कुछ ऐसे पुर्जे लगे हैं जो पृथ्वी के तत्वों से नहीं बने हैं। इसी बीच ध्रुव को घर से खबर मिलती है कि उसकी बहन श्वेता को तेज ब्रेन फीवर (मेनिन्जाइटिस) हो गया है। डॉक्टर उसका ब्लड सैंपल लेते हैं। ध्रुव ट्रैफिक जाम से बचने के लिए वह ब्लड सैंपल खुद लैब ले जाने की तैयारी करता है, तभी उसकी घड़ी पर नटालिया का डेंजर सिग्नल बज उठता है, जो ‘हाइलैंड रिसोर्ट’ से आ रहा था।
फर्ज की पुकार सुनकर ध्रुव हाइलैंड रिसोर्ट पहुँचता है, जहाँ नटालिया को शतबुद्धि का दूसरा गुलाम अपने शिकंजे में जकड़े हुए था। वह गुलाम नाइलो-स्टील की डोरियों से ध्रुव को भयानक इलेक्ट्रिक शॉक देता है। ध्रुव बड़ी समझदारी से एक भारी पत्थर को स्टार-लाइन से बाँधकर ढलान पर लुढ़का देता है, जिससे उस गुलाम का जमीन से संपर्क टूट जाता है और शॉक खत्म हो जाता है। इसके बाद ध्रुव उसे पेड़ से टकराकर बेहोश कर देता है।
लेकिन जैसे ही ध्रुव उड़नतश्तरी के अंदर नटालिया को बचाने जाता है, शतबुद्धि और दोबारा सक्रिय हुआ चतुर्भुज उसे चारों तरफ से घेरकर एक ऑपरेशन टेबल पर बाँध देते हैं। शतबुद्धि आरी चलाकर ध्रुव का दिमाग निकालने ही वाला होता है कि अचानक बड़ा खुलासा होता है। आरी ध्रुव के सिर में धंसते ही पुर्जे और प्लास्टिक की खाल बाहर आने लगती है।
“यह ध्रुव नहीं, बल्कि ध्रुव का हमशक्ल रोबोट था!”
क्लाइमेक्स: ‘ब्रेन सिस्टम’ का अंत

असली ध्रुव अचानक पीछे से सामने आ जाता है। यह देखकर नटालिया हँसने लगती है और अपनी असलियत सबके सामने खोल देती है। असल में इस पूरे खेल की मास्टरमाइंड कोई परग्रही नहीं, बल्कि खुद मैडम नटालिया थी।
• नटालिया का असली प्लान: शतबुद्धि कोई एलियन नहीं था, बल्कि नटालिया का ‘स्पेशल इफेक्ट स्पेशलिस्ट’ था। चतुर्भुज और गुलाम दो जन्मजात विकृत (म्यूटेंट) बच्चे थे, जिन्हें नटालिया ने पाला था। उड़नतश्तरी सिर्फ प्लाइवुड से बना एक मॉडल थी, जिसे हेलीकॉप्टर की मदद से उड़ाया गया था। रोबोट में लगे अंतरिक्षीय तत्व भी असल में पृथ्वी पर गिरे उल्कापिंडों से लिए गए थे। नटालिया का मकसद दुनिया के सबसे तेज दिमागों को जोड़कर एक ‘ब्रेन सिस्टम’ नाम का विनाशकारी हथियार बनाना था, जिसमें वह ध्रुव का ‘A-Grade’ दिमाग फिट करना चाहती थी।
• ध्रुव की पहले से तैयारी: ध्रुव बताता है कि जब वह पहली बार जंगल में चतुर्भुज से लड़ा था, तब आग में झुलसने के बाद भी चतुर्भुज का शरीर ठंडा था। इसी बात से उसे शक हो गया था कि यहाँ कोई रोबोटिक खेल चल रहा है। इसलिए उसने अपने रोबोट विशेषज्ञ मित्र विक्रम से रिकॉर्ड समय में अपना एक हमशक्ल रोबोट बनवाया और खुद छिपकर उड़नतश्तरी में घुस गया।

• अंतिम प्रहार (ब्रेन फीवर वायरस): नटालिया गुस्से में अपने कंप्यूटर के ‘ब्रेन एजीटेटर’ की मदद से ध्रुव के दिमाग के ‘डर’ वाले हिस्से को भड़काती है। ध्रुव बिना सोचे-समझे अपने ‘रिफ्लेक्स एक्शन’ का इस्तेमाल करता है और कंप्यूटर स्क्रीन तोड़ देता है। इसके बाद नटालिया अपने अधूरे ब्रेन सिस्टम में शतबुद्धि का ताजा दिमाग काटकर फिट कर देती है और ध्रुव पर मेंटल ब्लास्ट करने लगती है।
ध्रुव को याद आता है कि यह दिमागी सिस्टम सिर्फ जीवित खून की मदद से काम करता है। वह तुरंत अपनी बेल्ट से श्वेता का वही ब्लड सैंपल निकालता है, जिसमें मेनिन्जाइटिस (ब्रेन फीवर) के खतरनाक वायरस मौजूद थे, और उसे सीधे नटालिया के ब्लड टैंक में फेंक देता है। इंसानी शरीर की तरह इस मशीन में कोई रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) नहीं थी। वायरस कुछ ही पलों में पूरे सिस्टम के दिमागों में फैल जाते हैं और सूजन की वजह से नटालिया का पूरा ‘ब्रेन सिस्टम’ न्यूरॉन्स फटने से तबाह हो जाता है।
उपसंहार
नटालिया पूरी तरह पागल हो जाती है और खुद का सिर काटने पर उतारू हो जाती है, जिसके बाद उसे पागलखाने भेज दिया जाता है। अंत में कमिश्नर राजन ध्रुव से कहते हैं कि श्वेता के ब्लड सैंपल ने आज उसकी जान बचा ली। यह सुनकर श्वेता (चंडिका) अनजाने में बोल पड़ती है, “ऐसा पहली बार हुआ है कि मैंने घर पर रहकर भैया को बचा लिया!”
ध्रुव के चौंकने पर वह तुरंत बात संभाल लेती है और कहती है कि चंडिका होना उसका सबसे बड़ा राज है।
