‘हंटर शार्क फोर्स’ एक यादगार कॉमिक है। इसके संपादक विवेक मोहन और लेखक–चित्रकार की टीम ने मिलकर एक ऐसी दुनिया रची है, जो जितनी कल्पनात्मक है उतनी ही भावनात्मक रूप से झकझोर देने वाली भी है।
एक वैज्ञानिक का सपना और भ्रष्ट तंत्र

कहानी की शुरुआत डॉ. हरबंस खुराना से होती है, जो कृषि अनुसंधान विभाग में काम करने वाले एक बेहद ईमानदार और समर्पित वैज्ञानिक हैं। डॉ. खुराना का सपना है कि वे ‘जेनेटिक म्यूटेशन’ (आनुवंशिक बदलाव) के ज़रिये ऐसे पेड़ और फल तैयार करें जो कुतुब मीनार जितने ऊँचे हों और जिनसे पूरे देश की लकड़ी और खाने की ज़रूरतें पूरी हो सकें।
यहाँ लेखक हमारे सिस्टम की कमियों और राजनीति पर सीधा वार करते हैं। डॉ. खुराना जैसे काबिल वैज्ञानिक को रिसर्च से हटाकर रिकॉर्ड विभाग में डाल दिया जाता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि वह भ्रष्ट अफसरों की हाँ में हाँ नहीं मिला पाते। आत्मसम्मानी डॉ. खुराना हार मानने के बजाय नौकरी से इस्तीफा दे देते हैं और अपनी सारी जमा-पूंजी लगाकर महरौली में एक छोटा सा फार्म खरीदते हैं, जहाँ वे अपनी एक निजी प्रयोगशाला (प्राइवेट लैब) शुरू करते हैं।
वफादार साथी और विश्वासघात की परछाईं
डॉ. खुराना इस सफर में अकेले नहीं हैं। उनके साथ उनकी वफादार कुतिया ‘लाइका’ और उनकी पालतू बिल्ली ‘मैटी’ है, जिसे वे मज़ाक में अपनी प्राइवेट सेक्रेटरी भी कहते हैं। कहानी तब नया मोड़ लेती है जब मिस्टर सपोला (एम.एल. सपोला) नाम का एक आदमी उनके रिसर्च को फंड देने का प्रस्ताव लेकर आता है। पैसों की तंगी से जूझ रहे डॉ. खुराना भावनाओं में आकर उससे समझौता कर लेते हैं।

सपोला अपने दो आदमी, माइकल और रंगनाथ, को डॉ. खुराना का सहायक बनाकर फार्म पर भेज देता है। इसी दौरान लाइका छह बच्चों को और मैटी तीन बच्चों को जन्म देती है। पूरा फार्म खुशियों से भर जाता है, लेकिन यह खुशी ज़्यादा देर टिकने वाली नहीं होती।
त्रासदी का तांडव: रूह कंपा देने वाला दृश्य
जल्द ही डॉ. खुराना को पता चलता है कि माइकल और रंगनाथ उनकी लैब में चोरी-छिपे कोकीन जैसे नशीले पदार्थ बनाने के लिए पौधे उगा रहे हैं। तब उन्हें एहसास होता है कि सपोला असल में एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग स्मगलर है। जब डॉ. खुराना इसका विरोध करते हैं और पुलिस को फोन करने की कोशिश करते हैं, तब सपोला की गैंग का असली, खौफनाक चेहरा सामने आता है।
कॉमिक का यह हिस्सा बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला है। सपोला का गुंडा ‘भुच्चा’ न सिर्फ डॉ. खुराना की बेरहमी से हत्या करता है, बल्कि लाइका और मैटी के नन्हे-नन्हे बच्चों को अपने जूतों तले कुचल देता है। अपने मालिक को बचाने की कोशिश में लाइका शहीद हो जाती है। किसी तरह मैटी और लाइका के दो बच्चे—एक पिल्ला और एक बिल्ली का बच्चा—ज़िंदा बच पाते हैं। सपोला गैंग पूरे फार्म पर कब्ज़ा कर लेती है और सभी लाशों को वहीं दफना देती है।
म्यूटेशन: जब प्रकृति ने बदला लिया

अब अकेली बची मैटी पूरी तरह टूट चुकी होती है। इसी दौरान वह डॉ. खुराना की अधूरी रिसर्च और एक दुर्लभ पौधे के संपर्क में आती है, जिसे खुराना बरमूडा ट्रायंगल के उस इलाके से लाए थे जहाँ शार्क मछलियाँ पाई जाती हैं। उस पौधे और उससे बनी दवाइयों का असर मैटी और उन दो अनाथ बच्चों पर पड़ता है।
यहीं से कहानी में साइंस फिक्शन का असली रंग भरना शुरू होता है। रातों-रात तीनों के शरीर में बदलाव आने लगते हैं। वे इंसानों की तरह बोलने और सोचने लगते हैं। उनके सिर पर शार्क मछली जैसी एक ‘फिन’ निकल आती है, जो उनकी ताकत की निशानी बन जाती है। मैटी समझ जाती है कि अगर ज़िंदा रहना है तो यहाँ से भागना होगा। वह खंडहरों के नीचे एक गुप्त ठिकाना तैयार करती है।
हंटर शार्क फोर्स का जन्म और प्रशिक्षण
मैटी अब अपना नाम ‘माताहारी’ रख लेती है। वह उन दोनों बच्चों का नाम ‘टाइगर’ और ‘चीता’ रखती है। टाइगर, जो लाइका का बेटा है, बेहद ताकतवर होता है और बॉक्सिंग में माहिर बनता है, जबकि चीता, जो मैटी का बेटा है, बिजली जैसी फुर्ती और मार्शल आर्ट्स में कमाल हासिल करता है।
माताहारी उन्हें एक कमांडो ट्रेनिंग रेंज के पास रखकर ट्रेनिंग दिलाती है। वह दूरबीन से असली कमांडो की ट्रेनिंग देखती है और वही अभ्यास अपने बच्चों से करवाती है। करीब डेढ़ साल की कड़ी मेहनत के बाद वे खतरनाक कमांडो बन जाते हैं। इसी दौरान उन्हें आतंकवादियों का एक पुराना हथियारों का जखीरा मिलता है, जिसमें स्टेनगन, हैंड ग्रेनेड और कई आधुनिक हथियार होते हैं।
मिशन प्रतिशोध: सपोला गैंग का अंत

जब टाइगर और चीता पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, तब माताहारी उन्हें डॉ. खुराना और बाकी परिवार के साथ हुई सच्चाई बताती है। बदले की आग उन्हें ‘हंटर शार्क फोर्स’ में बदल देती है।
क्लाइमेक्स में वे सपोला के फार्म हाउस पर हमला करते हैं, जहाँ उसकी गैंग जश्न मना रही होती है। टाइगर और चीता की लड़ाई देखने लायक है। वे अंधेरे का फायदा उठाकर एक-एक कर पहरेदारों को खत्म करते हैं। माइकल और रंगनाथ को बोरी में बंद कर नदी में बहा दिया जाता है, जिसे ‘हरिद्वार भेजना’ कहा जाता है।
जब सपोला और भुच्चा के सामने ये अजीब से जानवर-जैसे इंसान आते हैं, तो दोनों की हालत खराब हो जाती है। टाइगर भुच्चा को उसके किए हुए गुनाह याद दिलाता है, और चीता अपनी रफ्तार से सबको पस्त कर देता है। आखिरकार, सपोला और भुच्चा को उनके कर्मों की सज़ा मिलती है। भुच्चा का अंत उसी तरह होता है जैसे उसने मासूमों के साथ किया था।
कला और चित्रांकन का विश्लेषण

दिलीप चौबे का चित्रांकन इस कॉमिक की सबसे बड़ी ताकत है। 90 के दशक के हिसाब से पात्रों के हाव-भाव, खासकर माताहारी की आँखों में बदले और ममता का मेल, बहुत शानदार तरीके से दिखाया गया है। भुच्चा का डरावना चेहरा और सपोला की चालाक शक्ल उनके किरदारों को साफ़ बयान करती है। हिंसा के दृश्य काफी ग्राफिक रखे गए हैं, जो उस दौर की कॉमिक्स में आम बात थी।
रंगों का इस्तेमाल भी काफी जीवंत है। लैब और कमांडो ट्रेनिंग वाले सीन में बारीक डिटेल्स देखने को मिलती हैं। खासतौर पर टाइगर और चीता के फाइट सीन में बनी रेखाएँ गति और एक्शन का जबरदस्त एहसास देती हैं।
मुख्य पात्रों का मूल्यांकन

डॉ. हरबंस खुराना एक ऐसे आदर्श वैज्ञानिक का प्रतीक हैं, जो सिस्टम की भेंट चढ़ जाता है।
माताहारी (मैटी) इस कहानी की असली हीरो है। वह सिर्फ एक बिल्ली नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सोच रखने वाली माँ है, जिसका सफर बेहद प्रेरणादायक है।
टाइगर और चीता मासूमियत और अपार शक्ति का अनोखा मेल हैं। अपनी माँ और अपने मकसद के प्रति उनकी निष्ठा सराहनीय है।
सपोला और भुच्चा पूरी तरह बुराई के प्रतीक हैं। उनका अंत पाठक को संतोष देता है।
समीक्षात्मक निष्कर्ष
‘हंटर शार्क फोर्स’ सिर्फ एक एक्शन कॉमिक नहीं है, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ प्रकृति के विद्रोह की कहानी है। जब इंसानियत और कानून दोनों कमजोर पड़ जाते हैं, तब प्रकृति अपने तरीके से न्याय करती है—यही इसका संदेश है।
कुल मिलाकर, ‘हंटर शार्क फोर्स’ किंग कॉमिक्स की उन चुनिंदा रचनाओं में से है, जिसे आज भी कॉमिक्स प्रेमी बड़े प्यार से याद करते हैं। प्रतिशोध, बलिदान और न्याय की यह कहानी दिल को छू जाती है। अगर आपको क्लासिक भारतीय कॉमिक्स और रिवेंज ड्रामा पसंद है, तो यह कॉमिक आपके लिए किसी मास्टरपीस से कम नहीं है।
