‘टोटान और तूफान की देवी’ इस श्रृंखला की एक ऐसी कड़ी है जो सिर्फ रोमांच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पाठकों को पृथ्वी से बहुत दूर, सुदूर अंतरिक्ष और अनजाने ग्रहों की एक जबरदस्त यात्रा पर ले जाती है। महेंद्र जैन की प्रभावशाली लेखनी और ए.एम.जी. (A.M.G.) के शानदार चित्रांकन ने मिलकर इस कॉमिक्स को एक विजुअल ट्रीट और यादगार अनुभव बना दिया है।
कथानक का विस्तार (Plot Breakdown):
कहानी की शुरुआत पृथ्वी से करोड़ों मील दूर अंतरिक्ष में बसे ‘ओनाड़ा ग्रह’ (Planet Onada) से होती है। ओनाड़ा विज्ञान और तकनीक के मामले में पृथ्वी से कहीं आगे है, लेकिन इस ग्रह पर राज करने वाली साम्राज्ञी ‘चंडिका’ (Chandika) बेहद महत्वाकांक्षी, घमंडी और क्रूर शासक है। उसे ‘तूफान की देवी’ कहा जाता है, क्योंकि उसके पास मौसम और तूफानों को नियंत्रित करने वाली अद्भुत वैज्ञानिक और जादुई शक्तियाँ हैं।

चंडिका का सपना है पूरे ब्रह्मांड पर राज करना। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए वह सबसे पहले ‘क्रोमा ग्रह’ (Planet Kroma) पर हमला करती है। लेकिन यहाँ उसकी उम्मीदों को झटका लगता है, क्योंकि क्रोमा के सम्राट ‘क्रोम’ की सेना ओनाड़ा की फौज पर भारी पड़ती है और चंडिका को हार का सामना करना पड़ता है। यह हार और अपमान चंडिका के अहंकार को बुरी तरह चोट पहुँचाता है। गुस्से और बदले की आग में जलती हुई चंडिका एक खतरनाक योजना बनाती है।
अपनी ‘खोजबीन मशीन’ की मदद से वह पूरे ब्रह्मांड के तीन सबसे शक्तिशाली योद्धाओं को ढूँढ निकालती है, ताकि वे उसकी सेना का नेतृत्व कर सकें और उसे अजेय बना दें।
ये तीन योद्धा हैं:
गोरिल (Gorill), जो शाजल ग्रह का सबसे ताकतवर प्राणी है और अपनी जबरदस्त शक्ति से पहाड़ों तक को हिला सकता है।
रोस्टा (Roasta), जो न्यूज ग्रह का एक भयानक योद्धा है और अपने दुश्मन के शरीर से चुंबक की तरह खून खींच लेने की क्षमता रखता है।
और टोटान (Totan), पृथ्वी का रक्षक, जिसके पास वैज्ञानिक और दिव्य शक्तियों का अनोखा संगम है।
चंडिका चालाकी और धोखे से पहले गोरिल और फिर रोस्टा को अपने काबू में कर लेती है। इसके बाद उसकी नजर पृथ्वी के महान रक्षक टोटान पर पड़ती है। इसी दौरान प्रोफेसर रमाकांत और टोटान अंतरिक्ष में चंडिका के विशाल यान को देखते हैं। खतरे को भांपते हुए टोटान उसे रोकने के लिए तुरंत अंतरिक्ष की ओर उड़ जाता है।
अंतरिक्ष में टोटान और चंडिका के बीच एक जबरदस्त और भयानक युद्ध छिड़ जाता है। चंडिका अपने ‘तूफानी जाल’ और आग की लपटों जैसे खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल करती है। अपनी चालबाजी और धूर्तता से वह टोटान को भी अपने जाल में फँसा लेती है।

इसके बाद चंडिका गोरिल, रोस्टा और टोटान — तीनों के मस्तिष्क में ‘ब्रेन कंट्रोलर चिप’ फिट कर देती है, जिससे वे उसके गुलाम बन जाते हैं। अब इन तीनों महाशक्तिशाली योद्धाओं के साथ वह दोबारा क्रोमा ग्रह पर हमला करती है। इस बार युद्ध पहले से कहीं ज्यादा भयावह हो जाता है। टोटान, गोरिल और रोस्टा मिलकर क्रोमा की सेना को गाजर-मूली की तरह काटने लगते हैं। सम्राट क्रोम खुद को पूरी तरह बेबस महसूस करने लगते हैं।
युद्ध के दौरान टोटान का सामना ‘अग्निमुख’ (Agnimmukh) जैसे आग उगलने वाले खतरनाक जीवों और ‘गजसिंह’ (Gajasimha) जैसे विशालकाय हाथी-शेर संकर प्राणियों से होता है। टोटान अपनी समझदारी, ताकत और लेजर किरणों की मदद से एक-एक कर सभी को परास्त कर देता है। चंडिका को पूरा यकीन हो जाता है कि अब उसकी जीत तय है और सम्राट क्रोम उसके सामने घुटने टेकने ही वाले हैं।
लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट तब आता है जब टोटान अचानक चंडिका पर ही हमला कर देता है। यहीं पर बड़ा खुलासा होता है कि टोटान कभी चंडिका का गुलाम बना ही नहीं था। अपनी दिव्य शक्तियों और बाबा महंतनाथ के आशीर्वाद से उसने चंडिका के ‘ब्रेन कंट्रोलर’ को पहले ही निष्क्रिय कर दिया था। वह तो सिर्फ दुश्मन की पूरी योजना जानने के लिए यह नाटक कर रहा था।
अंततः टोटान गोरिल और रोस्टा दोनों को भी आज़ाद करा देता है। अपनी हार सामने देखकर चंडिका आख़िरी दांव खेलती है और एक खतरनाक ‘तूफानी चक्रव्यूह’ (Wall of Swords) बना देती है, जिससे बाहर निकलना नामुमकिन सा लगता है। इसी दौरान हिमालय में तपस्या कर रहे योगी ‘बाबा महंतनाथ’ की आवाज़ टोटान को सुनाई देती है, जो उसे ‘अग्निचक्र’ का प्रयोग करने की सलाह देते हैं। अग्निचक्र की शक्ति से टोटान चंडिका के तिलिस्म को तोड़ देता है और ओनाड़ा ग्रह पर चल रहे अत्याचार का अंत कर देता है। चंडिका को उसके कर्मों की सज़ा मिलती है और पूरे ब्रह्मांड में एक बार फिर शांति स्थापित हो जाती है।
चरित्र चित्रण और विश्लेषण (Character Analysis):
टोटान (मुकुंद):
इस कॉमिक्स में टोटान की सबसे बड़ी ताकत उसकी बुद्धिमत्ता बनकर सामने आती है। वह सिर्फ़ मांसपेशियों पर भरोसा करने वाला हीरो नहीं है, बल्कि हालात को समझने और सही वक्त पर सही चाल चलने वाला एक बेहतरीन रणनीतिकार भी है। चंडिका जैसी चालाक और शातिर विलेन को उसी के जाल में फँसाकर हराना यह साबित करता है कि टोटान का किरदार दिमाग और ताकत का शानदार मेल है।

चंडिका (तूफान की देवी):
चंडिका एक बेहद प्रभावशाली और यादगार खलनायिका है। उसका लुक—हरे बाल, माथे पर क्रॉस का निशान और गले में हड्डियों की माला—उसे रहस्यमय और डरावना बनाता है। वह उन गिने-चुने विलेन में से है जिनके पास विज्ञान और जादू दोनों की ताकत है। लेकिन उसकी असीम महत्वाकांक्षा और घमंड ही आखिरकार उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाते हैं।
गोरिल और रोस्टा:
ये दोनों किरदार कहानी में अलग-अलग तरह का रोमांच जोड़ते हैं। गोरिल की जानवरों जैसी बेकाबू ताकत और रोस्टा की ‘खून चूसने’ वाली डरावनी शक्ति युद्ध के दृश्यों को और ज्यादा खौफनाक और रोमांचक बना देती है। भले ही वे चंडिका के मोहरे बनकर सामने आते हैं, लेकिन इनके डिज़ाइन और कॉन्सेप्ट काफी रचनात्मक और प्रभावशाली हैं।
सम्राट क्रोम:
क्रोम को एक न्यायप्रिय और साहसी शासक के रूप में दिखाया गया है, जो अपनी प्रजा की रक्षा के लिए आख़िरी दम तक लड़ने को तैयार रहता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration):
‘टोटान और तूफान की देवी’ का आर्टवर्क ए.एम.जी. (A.M.G.) ने तैयार किया है, जो उस दौर के सबसे शानदार कलाकारों में गिने जाते थे। ओनाड़ा और क्रोमा ग्रहों की वास्तुकला, वहाँ की मशीनों और तकनीक का डिज़ाइन बेहद उन्नत और कल्पनाशील नजर आता है। इसके साथ ही लाल, नीले और पीले जैसे भड़कीले रंग अंतरिक्ष की लड़ाइयों और जादुई किरणों को ज़िंदा कर देते हैं। युद्ध के दौरान पैनलों का विभाजन और एक्शन का फ्लो काफी सटीक है, जहाँ ‘भड़ाम’, ‘खचाक’ और ‘आsss’ जैसे साउंड इफेक्ट्स पढ़ते समय रोमांच को कई गुना बढ़ा देते हैं।
समीक्षा और आलोचनात्मक दृष्टिकोण:
यह कॉमिक्स मनोज कॉमिक्स के उस सुनहरे दौर की याद दिलाती है, जब कहानियाँ सिर्फ़ पृथ्वी तक सीमित नहीं हुआ करती थीं। ‘स्पेस ओपेरा’ शैली में रची गई यह कहानी भारतीय पाठकों के लिए उस समय एक बिल्कुल नया और ताज़ा अनुभव थी।

सकारात्मक पक्ष:
कहानी की तेज़ रफ्तार इसे कहीं भी उबाऊ नहीं होने देती और हर पेज पर कुछ नया घटता रहता है, जिससे पाठक अंत तक बँधा रहता है। टोटान का जानबूझकर ‘गुलाम’ बनने का नाटक करना एक शानदार ट्विस्ट साबित होता है, जो क्लाइमेक्स को और भी मज़ेदार बना देता है। इसके अलावा यह कॉमिक्स सिर्फ़ अच्छाई की जीत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ‘मस्तिष्क नियंत्रण’ और ‘तकनीकी युद्ध’ जैसे आधुनिक विषयों को भी असरदार तरीके से सामने रखती है।
कमजोर पक्ष:
गोरिल और रोस्टा का कम उपयोग कहानी की एक छोटी-सी कमी महसूस होती है। इन्हें हासिल करने में चंडिका को काफी मेहनत करनी पड़ी थी, लेकिन अंत में इनका रोल अपेक्षा से थोड़ा कम रह जाता है।
पौराणिक और वैज्ञानिक तत्वों का मेल कुछ पाठकों को अटपटा लग सकता है, खासकर अंतरिक्ष युद्ध में बाबा महंतनाथ का हस्तक्षेप। हालाँकि यह उस दौर की मनोज कॉमिक्स की पहचान भी थी, जहाँ विज्ञान को धर्म और अध्यात्म से जोड़कर दिखाया जाता था।
सांस्कृतिक प्रभाव:
टोटान का किरदार उन बच्चों के लिए प्रेरणा बना जो विज्ञान और सुपरहीरो दोनों में दिलचस्पी रखते थे। मनोज कॉमिक्स ने यह संदेश दिया कि भारतीय सुपरहीरो सिर्फ़ दिल्ली या मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड की रक्षा करने की क्षमता रखते हैं। उस समय इस कॉमिक्स की कीमत सिर्फ़ 4.00 रुपये (कुछ संस्करणों में 7.00 रुपये) थी, जिससे यह लगभग हर बच्चे की पहुँच में थी।
निष्कर्ष:
‘टोटान और तूफान की देवी’ मनोज कॉमिक्स की एक ऐसी विरासत है जिसे हर कॉमिक्स प्रेमी को कम से कम एक बार जरूर पढ़ना चाहिए। यह कहानी हमें एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहाँ कल्पना की कोई सीमा नहीं है। टोटान का साहस, चंडिका का अहंकार और अंतरिक्ष में होने वाले भीषण युद्ध इसे एक यादगार अनुभव बना देते हैं। आज भी यह कॉमिक्स ‘विंटेज कॉमिक्स’ की श्रेणी में अपनी खास जगह बनाए हुए है।
अंतिम पृष्ठ पर ‘पाँच हत्यारे’ (आक्रोश सीरीज) का विज्ञापन पाठकों की उत्सुकता को और बढ़ा देता है, जो मनोज कॉिक्स की शानदार मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा था। अगर आप 90 के दशक के उस जादुई बचपन को दोबारा महसूस करना चाहते हैं, तो टोटान की यह अंतरिक्ष यात्रा आपके लिए ही है।
