राज कॉमिक्स के स्वर्ण युग की अहम कॉमिक्स ‘फ्लेमिना’ को पढ़ना और समझना सच में किसी रोमांच भरे सफर से कम नहीं है। यह सिर्फ एक सुपरहीरो की कहानी नहीं है, बल्कि यह राज कॉमिक्स के पूरे ब्रह्मांड का बड़ा संगम है, जहाँ नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, डोगा और ब्रह्मांड रक्षक एक साथ नजर आते हैं। 85 पन्नों का यह मल्टीस्टारर विशेषांक अपनी गहरी कहानी, विज्ञान और भावनाओं के मेल और लगातार आते ट्विस्ट की वजह से आज भी क्लासिक माना जाता है।
यहाँ इस कॉमिक्स को आसान और सीधी भाषा में विस्तार से समझने की कोशिश की गई है, ताकि कहानी का हर जरूरी पहलू साफ रहे और उसका असर भी कम न हो।
प्रस्तावना: राज कॉमिक्स का बड़ा संगम

‘फ्लेमिना’ उस दौर में आई थी जब राज कॉमिक्स नए-नए प्रयोग कर रहा था और अलग तरह की कहानियाँ पेश कर रहा था। कहानी जॉली सिन्हा ने लिखी और चित्र अनुपम सिन्हा ने बनाए। दोनों की जोड़ी ने मिलकर ऐसी कहानी रची जिसमें विज्ञान और फंतासी का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है। इस कॉमिक्स की खास बात इसका टाइटल किरदार ‘फ्लेमिना’ है, जो एक नई सुपरहीरोइन के रूप में सामने आती है। लेकिन कहानी सिर्फ उसके इर्द-गिर्द नहीं रुकती, बल्कि पूरी धरती को बचाने की जंग तक पहुँच जाती है।
कथानक की शुरुआत: एक वैज्ञानिक हादसा
कहानी की शुरुआत वैज्ञानिक कैलाश और उनकी बेटी शमा से होती है। कैलाश एक ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे होते हैं जो अगर सफल हो जाए तो इंसानियत के लिए बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। लेकिन जैसा अक्सर ऐसी कहानियों में होता है, एक प्रयोग के दौरान बड़ा हादसा हो जाता है। इस हादसे में कैलाश खुद ‘लावा’ बन जाते हैं, यानी एक ऐसा इंसान जो आग की तरह जलता रहता है। उनकी बेटी शमा भी इस दुर्घटना से बदल जाती है और ‘फ्लेमिना’ बन जाती है।
फ्लेमिना के पास आग को काबू में करने और उड़ने की ताकत होती है। यहाँ से कहानी में भावनाओं का पहलू भी जुड़ जाता है। एक पिता और बेटी, जो पहले आम जिंदगी जी रहे थे, अब अपनी पहचान खो चुके हैं। वे समाज से अलग हो जाते हैं और एक नई, अजीब और कठिन जिंदगी जीने को मजबूर हैं। यह हिस्सा कहानी को सिर्फ एक एक्शन कॉमिक नहीं रहने देता, बल्कि उसे भावनात्मक गहराई भी देता है।
विलेन ‘गुरू’ और ‘शिंक-रे’ का खतरा

कहानी का मुख्य विलेन ‘गुरू’ है, जो दूसरे ग्रह ‘गोचाल’ से आया है। गुरू की जाति ‘गुराची’ अपने ग्रह पर पानी खत्म होने की वजह से बर्बादी के कगार पर है। वह पृथ्वी पर सिर्फ तबाही फैलाने नहीं आता, बल्कि अपने ग्रह को बचाने के इरादे से आता है। उसकी सोच पूरी तरह गलत भी नहीं लगती, लेकिन उसका तरीका खतरनाक है।
गुरू अपने साथ एक खास तकनीक लाता है, जिसका नाम है ‘शिंक-रे’। यह ऐसी मशीन है जो किसी भी चीज या इंसान को बहुत छोटा कर सकती है, लगभग परमाणु के स्तर तक। कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब वह इस तकनीक का इस्तेमाल एक स्कूल बस पर करता है। यह दृश्य काफी चौंकाने वाला है और यहीं से असली टकराव शुरू होता है।
इसी मौके पर नागराज की एंट्री होती है। नागराज गुरू को रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें मुश्किल का सामना करना पड़ता है। जैसे ही वे गुरू को पकड़ने की कोशिश करते हैं, वह उन्हें या आसपास की चीजों को छोटा कर देता है। यह लड़ाई सीधी ताकत की नहीं, बल्कि चालाकी और तकनीक की बन जाती है।
नायकों का साथ आना: ध्रुव, डोगा और ब्रह्मांड रक्षक

‘फ्लेमिना’ की सबसे बड़ी ताकत इसका मल्टीस्टारर अंदाज है। जब नागराज अकेले गुरू को रोक नहीं पाते, तब ब्रह्मांड रक्षक टीम के स्टील और साइब्रो मैदान में आते हैं। इसके बाद सुपर कमांडो ध्रुव और डोगा भी इस मिशन में शामिल हो जाते हैं।
कहानी की खास बात यह है कि हर नायक को उसकी अपनी पहचान के साथ दिखाया गया है। नागराज अपनी सर्प शक्तियों और जबरदस्त फुर्ती के साथ लड़ते हैं। ध्रुव अपनी तेज दिमाग और वैज्ञानिक समझ से गुरू की तकनीक को समझने की कोशिश करते हैं। डोगा अपने सख्त और बेखौफ अंदाज में दुश्मनों से भिड़ते हैं। स्टील अपनी भारी तकनीक और आधुनिक हथियारों के साथ जंग में उतरते हैं।
इन सभी का एक साथ आना पाठकों के लिए किसी त्योहार जैसा है। और जब गुरू इन सबको छोटा कर देता है, तब कहानी और दिलचस्प हो जाती है। छोटे आकार में होने के बावजूद इनका हौसला जरा भी कम नहीं होता। यही बात इस हिस्से को बहुत प्रेरक बना देती है।
हिमालय का रहस्य और टीन हीरोज
कहानी का एक और हिस्सा हिमालय की वादियों में चलता है। यहाँ शमा, यानी फ्लेमिना, अपने दोस्तों विषांक और मिल्लू के साथ ट्रेकिंग पर गई होती है। इस दौरान हमें छोटा नागराज और टीन हीरोज की झलक भी मिलती है।

हिमालय की एक गुफा में गुरू ने अपना गुप्त अड्डा बना रखा है। यहीं पर शमा की असली ताकत पूरी तरह सामने आती है। गुरू को अपनी मशीन चलाने के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा चाहिए होती है। वह समझ जाता है कि फ्लेमिना की अग्नि शक्ति उसके काम आ सकती है। इसलिए वह शमा को अगवा कर लेता है और उसे एक बैटरी की तरह इस्तेमाल करना चाहता है।
यह हिस्सा कहानी का सबसे तनाव भरा भाग है। गुरू की योजना है कि वह फ्लेमिना की ऊर्जा से पृथ्वी के महासागरों को छोटा कर दे और उस पानी को अपने ग्रह पर ले जाए। यानी पूरी पृथ्वी खतरे में है। यहाँ कहानी का दांव बहुत बड़ा हो जाता है और पाठक आखिरी तक जानना चाहता है कि आगे क्या होगा।
इस तरह ‘फ्लेमिना’ सिर्फ एक सुपरहीरो कॉमिक नहीं रहती, बल्कि यह विज्ञान, भावना, रोमांच और टीमवर्क का ऐसा मेल बन जाती है, जो इसे खास बनाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह कहानी दिमाग और दिल दोनों को साथ लेकर चलती है, और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
गुरू का महाविनाशकारी प्लान
गुरू का आखिरी मकसद बेहद खतरनाक है। वह पृथ्वी के सभी महासागरों का पानी छोटा करके एक कांच के गिलास में भर लेना चाहता है, ताकि उसे अपने ग्रह पर ले जा सके। अगर यह योजना सफल हो जाती, तो धरती पर जीवन लगभग खत्म हो जाता। यहाँ से कहानी पूरी दुनिया के संकट का रूप ले लेती है।

नदियाँ सूखने लगती हैं, झरनों का बहाव रुक जाता है और लोगों में पानी के लिए अफरा-तफरी मच जाती है। इन दृश्यों को बहुत असरदार तरीके से दिखाया गया है। पढ़ते समय साफ महसूस होता है कि पानी कितना जरूरी है। कहानी सीधे-सीधे पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश भी देती है, बिना भाषण दिए।
चरमोत्कर्ष: दिमाग और ताकत की असली परीक्षा

जब सारे बड़े नायक गुरू के यान के अंदर कैद हो जाते हैं, तब हालात बहुत गंभीर हो जाते हैं। यहीं पर ध्रुव का तेज दिमाग काम आता है। वह समझ जाता है कि गुरू की मशीनें सेंट्रीफ्यूगल फोर्स और ऑक्सीडाइजेशन जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों पर चल रही हैं। यानी यह लड़ाई सिर्फ ताकत से नहीं जीती जा सकती, इसके लिए दिमाग भी चाहिए।
सबसे मजेदार और रोमांचक मोड़ तब आता है जब छोटा नागराज यानी विषांक और साइब्रो चुपके से गुरू के कंट्रोल सेंटर तक पहुँच जाते हैं। साइब्रो अपनी कंप्यूटर जानकारी का इस्तेमाल करता है और गुरू के सिस्टम में एक एंटी-प्रोग्राम डाल देता है। यह सीन साफ दिखाता है कि आज की लड़ाइयाँ सिर्फ मुक्कों और हथियारों से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और कोडिंग से भी जीती जाती हैं।
अंत में कैलाश, जिन्हें अब लावा अंकल के नाम से जाना जाता है, मैदान में आते हैं। वे अपनी तेज गर्मी का इस्तेमाल करके छोटे किए गए पानी को फिर से भाप में बदल देते हैं। इससे बादल बनते हैं और जोरदार बारिश होती है। धीरे-धीरे महासागर फिर से भरने लगते हैं। यह पल कहानी का सबसे ऊँचा और भावुक हिस्सा है, जहाँ बलिदान और विज्ञान दोनों साथ नजर आते हैं।
खलनायक का बदलता दिल: कहानी का अलग पहलू
राज कॉमिक्स की खास बात यह रही है कि उसके विलेन सिर्फ काले-सफेद नहीं होते। गुरू भी पूरी तरह बुरा नहीं है। उसकी मजबूरी को ध्रुव समझता है। आखिर में ध्रुव उसे बताता है कि उसके ग्रह पर पानी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, बल्कि बर्फ बनकर जमीन के नीचे जमा है।

ध्रुव उसे समझाता है कि वह अपनी तकनीक का इस्तेमाल उस बर्फ को पिघलाने में करे, न कि किसी और ग्रह को बर्बाद करने में। गुरू अपनी गलती मान लेता है और शांति से वापस चला जाता है। यह अंत कहानी को एक अच्छा और सिखाने वाला मोड़ देता है।
कला और चित्रांकन
इस कॉमिक्स में चित्रों का काम बहुत शानदार है। बड़े आकार के नागराज और चींटी जैसे छोटे नागराज के बीच का फर्क बहुत साफ और बारीकी से दिखाया गया है। गुरू का स्पेसशिप और उसकी मशीनें उस समय के हिसाब से काफी आधुनिक लगती हैं।
पाइपों के अंदर होने वाली लड़ाई, हिमालय की बर्फीली चोटियाँ और बारिश के दृश्य आज भी प्रभाव छोड़ते हैं। उस दौर की छपाई की सीमाओं के बावजूद रंगों का इस्तेमाल कहानी को और जीवंत बना देता है।
फ्लेमिना का किरदार: पूरी तरह चमक नहीं पाया?

कॉमिक्स का नाम ‘फ्लेमिना’ है, लेकिन कहानी के आखिरी हिस्से में वह ज्यादा समय संकट में फंसी नजर आती है। उसकी शक्तियों का इस्तेमाल जरूर होता है, लेकिन कई पाठकों को लग सकता है कि उसे खुद ज्यादा एक्शन में दिखाया जा सकता था।
फिर भी, उसकी और उसके पिता की दुखभरी कहानी इस पूरी कॉमिक को भावनात्मक मजबूती देती है। उनके रिश्ते की गहराई कहानी को सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रहने देती।
वैज्ञानिक पहलू
राज कॉमिक्स हमेशा से विज्ञान को महत्व देता रहा है। यहाँ भी शिंक-रे के पीछे का तर्क, पानी के घनत्व की बात और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग जैसे तत्व कहानी को रोचक और थोड़ा शिक्षाप्रद बना देते हैं।
ध्रुव हर कदम सोच-समझकर उठाता है और उसके फैसलों के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण होता है। यही वजह है कि यह कॉमिक सिर्फ जादू या कल्पना पर नहीं टिकी रहती, बल्कि उसमें तर्क भी नजर आता है।
आलोचनात्मक नजर से

इतने सारे नायकों को एक साथ लाना आसान नहीं होता। अक्सर कुछ किरदार पीछे छूट जाते हैं। यहाँ डोगा का रोल थोड़ा कमजोर लगता है, क्योंकि उसकी बंदूक और ताकत गुरू की हाई-टेक मशीनों के सामने ज्यादा असर नहीं दिखा पाती।
वहीं स्टील और साइब्रो जैसे टेक्निकल किरदारों को अच्छा मौका मिला है। कहानी की रफ्तार शुरू में तेज चलती है, बीच में हिमालय वाले हिस्से में थोड़ी धीमी पड़ती है, लेकिन क्लाइमेक्स आते-आते फिर से तेज हो जाती है।
निष्कर्ष
‘फ्लेमिना’ सिर्फ एक कॉमिक नहीं है, बल्कि यह उस दौर की रचनात्मक सोच का उदाहरण है जब भारतीय कॉमिक्स बड़े स्तर की कहानियाँ पेश कर रहा था। इसमें साहस है, टीमवर्क है और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा भी है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि ताकत का घमंड आखिरकार नुकसान ही करता है। चाहे समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न हो, मिलकर और समझदारी से उसका हल निकाला जा सकता है। दुश्मन को खत्म करना ही एकमात्र रास्ता नहीं होता, कभी-कभी उसकी परेशानी को समझना ज्यादा जरूरी होता है।
आज जब हम मल्टीवर्स और क्रॉसओवर फिल्मों की बात करते हैं, तब याद आता है कि ऐसे प्रयोग भारतीय कॉमिक्स में बहुत पहले हो चुके थे। 85 पन्नों की यह कहानी हर कॉमिक्स प्रेमी के कलेक्शन में खास जगह रखने लायक है। यह बच्चों को रोमांच देती है और बड़ों को सोचने पर मजबूर करती है।
