भारतीय कॉमिक्स के इतिहास में ‘अंगारा’ का स्थान बहुत खास है। जहाँ राज कॉमिक्स के नागराज या सुपर कमांडो ध्रुव अपनी शहरी ताकतों के लिए जाने जाते थे, वहीं अंगारा ‘प्रकृति के रक्षक’ और ‘पशु साम्राज्य के मसीहा’ के रूप में सामने आया। अंगारा कोई साधारण इंसान नहीं है; उसका शरीर महान सर्जन डॉ. कुणाल ने अलग-अलग जानवरों के सबसे अच्छे अंगों को मिलाकर बनाया है—लोमड़ी का दिमाग, गिद्ध की आँखें, गेंडे की खाल, हाथी की ताकत, शेर का दिल और गोरिल्ले का शरीर। यह समीक्षा इसी अनोखे किरदार के एक रोमांचक अंक ‘ग्रेट अंगारा’ पर आधारित है।
कहानी का सारांश: मौत की अफवाह और बदले की आग

कॉमिक्स की शुरुआत एक बहुत दुखद और चौंकाने वाली खबर से होती है—अंगारा द्वीप के जानवरों को पता चलता है कि उनका देवता, उनका रक्षक ‘अंगारा’ मारा जा चुका है। यह खबर पूरे द्वीप में हलचल मचा देती है। बंदरों का राजा और अंगारा का करीबी दोस्त ‘अंगद’ (जो यहाँ अंगारा द्वीप का राष्ट्रपति है) इस बात पर यकीन नहीं कर पाता, लेकिन चालाक पक्षी ‘आबू’ (जासूस) पक्का करता है कि अंगारा को ‘बुलडॉग’ नाम के एक खतरनाक शैतान ने मार दिया है।
बुलडॉग एक ऐसा खलनायक है जिसका चेहरा सूअर (या बुलडॉग जैसा) है और वह बलारा देश की राजकुमारी को कैद करके वहाँ का शासक बन बैठा है। वह सिर्फ एक तानाशाह ही नहीं, बल्कि ‘इब्लीस’ (शैतानी देवता) का पुजारी भी है। वह नरभक्षी है और जानवरों को इंसानी मांस खिलाकर उन्हें अपना गुलाम बना लेता है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब अंगारा द्वीप के जानवर अपने स्वामी की मौत का बदला लेने के लिए बलारा देश पर हमला करने की योजना बनाते हैं। इसी बीच, अंगारा एक ‘प्रेतात्मा’ (Ghost) के रूप में बुलडॉग के महल में दिखने लगता है। वह बुलडॉग को मानसिक रूप से डराता है और उसे अपनी ताकत का एहसास कराता है। बुलडॉग डरकर दूसरे ग्रह ‘लूरा’ (या स्पार्टा) के एक बौने योद्धा ‘चाली’ (Charlie) की मदद लेता है। चाली एक चालाक और ताकतवर किरदार है जो अंगारा को पकड़ने के लिए पृथ्वी पर आता है।
आखिर में यह सच सामने आता है कि अंगारा मरा नहीं था, बल्कि वह अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल करके अदृश्य होकर हमला कर रहा था। वह अपने दोस्त पक्षी ‘जटायु’ के साथ मिलकर बुलडॉग के शक्ति स्रोत—’शैतान ड्रैगन’—को खत्म करता है और राजकुमारी बलारा को आजाद कराता है।
पात्रों का विश्लेषण

अंगारा: इस अंक में अंगारा की समझदारी और उसकी ‘छापामार युद्ध’ (Guerrilla Warfare) कला का बेहतरीन इस्तेमाल दिखाया गया है। वह सीधा हमला करने के बजाय दुश्मन के मन में डर पैदा करता है। उसकी सोच यहाँ भी दिखती है जब वह बताता है कि वह राजकुमारी को बचाने के लिए ‘भूत’ बनने का नाटक कर रहा था ताकि बुलडॉग की ताकत का राज जान सके।
बुलडॉग: वह एक क्लासिक खलनायक है। उसका किरदार ऐसा है कि उससे नफरत होने लगती है—वह इंसानों का खून पीता है और शैतानी ड्रैगन की पूजा करता है। उसकी कमजोरी उसका अंधविश्वास और मौत का डर है।
चार्लीअंगारा और हवा का बेटा Comics Review – तुलसी कॉमिक्स की वो लड़ाई जो सब भूल गए! (Charlie): यह इस कॉमिक्स का सबसे दिलचस्प किरदार है। वह न पूरी तरह हीरो है और न ही पूरी तरह विलेन। वह अपने फायदे के लिए काम करता है। लूरा ग्रह से आने के कारण उसके पास उड़ने और ऊर्जा जमा करने की तकनीक है। उसकी बात करने का तरीका मजाकिया और तंज भरा है।
पशु सेना (अंगद, आबू, जटायु): ये किरदार दिखाते हैं कि अंगारा के लिए जानवरों की वफादारी कितनी गहरी है। जटायु का किरदार हिम्मत की मिसाल है, जो ड्रैगन जैसे ताकतवर जीव से लड़ने में भी नहीं डरता।
लेखन और पटकथा (परशुराम शर्मा)

परशुराम शर्मा की लिखावट में फंतासी (Fantasy) और विज्ञान (Science Fiction) का शानदार मेल देखने को मिलता है। एक तरफ डॉ. कुणाल का प्रयोग और दूसरे ग्रह (लूरा) की बातें कहानी को विज्ञान की ओर ले जाती हैं, तो दूसरी तरफ ‘इब्लीस’ की पूजा और ‘ड्रैगन’ का होना इसे फंतासी का टच देता है। संवाद छोटे, सीधे और असरदार हैं। कहानी की रफ्तार तेज रहती है, जो पाठक को लगातार जोड़े रखती है। खासकर ‘भूत’ वाले सीन में रहस्य और रोमांच का अच्छा संतुलन बनाया गया है।
चित्रांकन और कला (प्रदीप सांठे)

प्रदीप सांठे का आर्टवर्क उस समय की याद दिलाता है जब कॉमिक्स में हाथ से बने चित्रों का अलग ही महत्व था। जानवरों के हाव-भाव, खासकर हाथी और शेर की बॉडी बहुत दमदार लगती है। बुलडॉग के महल और शैतान ड्रैगन की गुफा वाले सीन में रंगों का चुनाव (डार्क शेड्स) कहानी के माहौल के हिसाब से बिल्कुल फिट बैठता है। अंगारा की मांसपेशियों को जिस तरह दिखाया गया है, वह उसे सच में एक ‘सुपर सोल्जर’ जैसा लुक देता है। हाँ, कुछ पैनलों में बैकग्राउंड थोड़ा खाली लगता है, लेकिन इससे मुख्य किरदारों पर फोकस बना रहता है, इसलिए यह ठीक लगता है।
समीक्षात्मक टिप्पणी: खूबियां और कमियां

अंगारा जैसा अनोखा और ‘बायो-इंजीनियर्ड’ हीरो विश्व कॉमिक्स में भी कम ही देखने को मिलता है, जो इसे और ज्यादा दिलचस्प बनाता है। इस कहानी की सबसे बड़ी खासियत इसका रोमांचक क्लाइमेक्स है, जहाँ ड्रैगन के साथ लड़ाई और चाली की चालाकियाँ इसे एक साधारण ‘बदले की कहानी’ से ऊपर ले जाती हैं; साथ ही इसके विजुअल और एक्शन सीन चित्रों के जरिए बहुत असरदार तरीके से दिखाए गए हैं। अगर कमियों की बात करें तो कुछ जगहों पर कहानी ज्यादा नाटकीय लगती है, जहाँ बुलडॉग का व्यवहार थोड़ा बचकाना लगता है, जिससे उसका डर थोड़ा कम हो जाता है; वहीं चाली की ऊर्जा और अंगारा की शक्तियों के बीच कुछ तकनीकी गड़बड़ियां और वैज्ञानिक तर्क थोड़े कमजोर लगते हैं, जो उस समय की फंतासी कॉमिक्स में आम बात थी।
निष्कर्ष
‘ग्रेट अंगारा’ सिर्फ बच्चों के लिए एक मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह साहस, एकता और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की सीख भी देता है। तुलसी कॉमिक्स ने अंगारा के जरिए एक ऐसा देसी सुपरहीरो दिया है जो अपनी जमीन और जंगल से जुड़ा हुआ है।
यह कॉमिक्स कलेक्शन में रखने लायक है क्योंकि यह उस दौर की याद दिलाती है जब भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री अपने चरम पर थी। अगर आपको क्लासिक भारतीय कॉमिक्स पसंद हैं और रोमांच के साथ जानवरों की वफादारी वाली कहानियां अच्छी लगती हैं, तो यह अंक आपके लिए एक शानदार अनुभव होगा। अंगारा की दहाड़ और उसकी समझदारी आज भी उतनी ही दमदार लगती है जितनी पहले थी।
रेटिंग: 4.5/5
