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Home » आख़िरी श्रृंखला: ‘ब्रह्मांड विखंडन’ – जब राज कॉमिक्स का पूरा ब्रह्मांड टूटने लगा
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आख़िरी श्रृंखला: ‘ब्रह्मांड विखंडन’ – जब राज कॉमिक्स का पूरा ब्रह्मांड टूटने लगा

नागराज का विखंडन, ध्रुव का तर्क, तिरंगा की जंग और ब्रह्मांडीय शक्तियों का सबसे खतरनाक खेल
ComicsBioBy ComicsBio24 January 202607 Mins Read
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आख़िरी श्रृंखला: ब्रह्मांड विखंडन | Raj Comics की सबसे भव्य कॉस्मिक कहानी
राज कॉमिक्स की आख़िरी श्रृंखला का छठा अध्याय ‘ब्रह्मांड विखंडन’, जहाँ नागराज, ध्रुव और तिरंगा एक टूटते हुए ब्रह्मांड के बीच खड़े हैं।
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भारतीय कॉमिक्स के इतिहास में ‘आखरी’ श्रृंखला को वही जगह मिलती है, जो वैश्विक स्तर पर मार्वल की ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ को हासिल है। यह श्रृंखला सिर्फ सुपरहीरोज़ की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज कॉमिक्स के विशाल यूनिवर्स को एक साथ जोड़ने की एक बड़ी और महत्त्वाकांक्षी कहानी है। इस श्रृंखला के पांचवें भाग ‘अदृश्य षड्यंत्र’ ने कहानी को उस मोड़ पर छोड़ दिया था, जहाँ तबाही की शुरुआत हो चुकी थी। छठा भाग ‘ब्रह्मांड विखंडन’ (Universal Fragmentation) उसी तबाही के असर, नायकों के बिखरने और ब्रह्मांडीय शक्तियों के खतरनाक खेल को पूरी गहराई के साथ सामने लाता है।

कथानक का विस्तृत विश्लेषण: यादों का बोझ और वर्तमान का संकट

इस कॉमिक की कहानी एक जटिल भूलभुलैया जैसी है, जो एक साथ कई समय-रेखाओं और कई ग्रहों पर चलती है। लेखक नितिन मिश्रा ने यहाँ एक ‘मल्टी-लीनियर’ कहानी रची है, जहाँ हर मोड़ पर नए सवाल और नए रहस्य सामने आते हैं।

नागराज का विखंडन: एक नायक की आहुति
कहानी के शुरुआती पन्ने हमें उस भयावह युद्ध की याद दिलाते हैं, जो नागराज और ‘विकृत’ (सी-थ्रू/प्रोफेसर इब्रित विकराल) के बीच अंतरिक्ष के खाली निर्वात में हुआ था। विकृत, जो ‘ब्रह्म-कण’ (Divine Particle) की असीम शक्ति से पागल हो चुका था, नागराज के लिए एक लगभग अजेय दुश्मन बन गया था।

यहीं एक बेहद रोचक वैज्ञानिक रहस्य सामने आता है। नागराज बताता है कि जब विकृत ने उस पर अंतिम वार किया, तो उसके शरीर के ‘इच्छाधारी कण’ पूरे ब्रह्मांड में बिखर गए। तादम ग्यादु का चित्रांकन इस दृश्य को एक साथ डरावना और भव्य बना देता है। नागराज के कण अनगिनत आकाशगंगाओं में फैल जाते हैं। लेकिन तभी एक चमत्कार होता है—वह ‘गुरुत्वाकर्षण’ (Gravity), जो आमतौर पर हर चीज को अपनी ओर खींचता है, उसने सिर्फ नागराज के कणों को वापस खींचा। नागराज का यह कहना कि “वह कोई साधारण गुरुत्वाकर्षण नहीं था,” कहानी में एक बहुत बड़ी पहेली खड़ी कर देता है।

दिव्य परिषद और ध्रुव का तर्क
कहानी का दूसरा अहम हिस्सा ‘दिव्य परिषद’ (Divine Council) के सामने सुपर कमांडो ध्रुव की पेशी से जुड़ा है। यहीं कहानी एक गहरा दार्शनिक मोड़ लेती है। दिव्य परिषद मनुष्यों को पूरे ब्रह्मांड के लिए खतरा मानती है। इस हिस्से में ध्रुव की तेज बुद्धि और तार्किक सोच खुलकर सामने आती है।

दिव्य परिषद एक बहुत पुराना रहस्य उजागर करती है—‘असुरों’ की कहानी। वे बताते हैं कि द्वापर युग के बाद असुरों का अंत तो हो गया था, लेकिन उनकी आत्माओं का पुनर्जन्म बंद नहीं हुआ। अब वे असुर मानव रूप में जन्म ले रहे हैं, जैसे प्रोफेसर इब्रित विकराल। असुरों की वही पुरानी आदत—असीम शक्ति पाने की लालसा—ने ब्रह्म-कण की ‘कूट कुंजी’ (Code Key) को तोड़ दिया। ध्रुव यहाँ मानवता का पक्ष मजबूती से रखता है, लेकिन परिषद का फैसला बेहद कठोर होता है। उनका मानना है कि मानव जाति ने ब्रह्मांड की संरचना, यानी Brahm-Tattva, के साथ खतरनाक खिलवाड़ किया है।

तिरंगा और कफन: हेज्ट्रो ग्रह का संघर्ष
इस कॉमिक का एक और बेहद रोमांचक पहलू ‘तिरंगा’ (Tiranga) का संघर्ष है। हेज्ट्रो ग्रह पर, जो पृथ्वी से लाखों प्रकाश वर्ष दूर है, तिरंगा अकेले ही हजारों परग्रही सैनिकों से लड़ रहा है। जब उसकी हार लगभग तय लगने लगती है, तभी ‘कफन’ (Kaffan) की एंट्री होती है।

तिरंगा और कफन की यह जोड़ी राज कॉमिक्स के ‘स्ट्रीट-लेवल’ नायकों को सीधे ‘कॉस्मिक-लेवल’ पर पहुँचा देती है। तिरंगा की देशभक्ति और कफन की न्याय के प्रति निष्ठा का मेल यहाँ बेहद प्रभावशाली लगता है। हेज्ट्रो ग्रह के शासक पृथ्वीवासियों को महज ‘कीटाणु’ समझते हैं और उनका पूरी तरह सफाया करना चाहते हैं। इसी दौरान ‘वज्र’ ग्रह के योद्धाओं और हेज्ट्रो के बीच की पुरानी दुश्मनी भी सामने आती है।

पृथ्वी पर ‘पापा फेरी’ (एंथोनी) और प्रिंस
पृथ्वी अब एक उजड़ा हुआ कब्रिस्तान बन चुकी है, जहाँ जॉम्बीज और रक्तपिपासुओं (Vampires) का राज है। यहाँ एंथोनी और प्रिंस का एक्शन कहानी में जबरदस्त हॉरर का तड़का लगाता है। एंथोनी को यहाँ “पापा फेरी” कहा गया है—एक ऐसा खौफनाक किरदार, जो पापियों को भयानक सज़ाएं देता है। एंथोनी द्वारा एक रक्तपिपासु की आत्मा को उसके शरीर से अलग कर ‘ठंडी आग’ में तड़पाने का दृश्य रोंगटे खड़े कर देता है। यह हिस्सा साफ दिखाता है कि पृथ्वी की हालत कितनी भयावह हो चुकी है।

भेड़िया, शक्ति और वनपुत्र: आदिमानवों का ग्रह
कहानी की एक समानांतर धारा हमें एक ऐसे ग्रह पर ले जाती है, जहाँ भेड़िया, शक्ति और वनपुत्र आदिमानवों से संघर्ष कर रहे हैं। यहीं ध्रुव का आगमन होता है, संभवतः दिव्य परिषद के आदेश पर। अपनी तार्किक सोच से ध्रुव जल्दी समझ जाता है कि ये आदिमानव किसी ‘काले साये’ (Black Shadow) के नियंत्रण में हैं।

यहाँ ‘ओवर शैडो’ (Over-Shadow) की अवधारणा सामने आती है। यह काला साया आदिमानवों के शरीर को ‘होस्ट’ (Host) बनाकर उन्हें अपने काबू में रखता है। ध्रुव, शक्ति की ऊष्मा का इस्तेमाल करके उस साये को वाष्प में बदलने की योजना बनाता है। इस हिस्से में ‘अडिग’ और ‘गगन’ जैसे पात्रों का पराक्रम भी देखने को मिलता है, जो अब साधारण इंसान नहीं, बल्कि देव-शक्तियों से लैस योद्धा बन चुके हैं।

कला और चित्रांकन (Art Review)

तादम ग्यादु का चित्रांकन इस कॉमिक को सच में एक ‘विजुअल ट्रीट’ बना देता है। नागराज के कणों का बिखरना और उसका विखंडन जिस बारीकी से दिखाया गया है, वह देखने लायक है। एंथोनी का डरावना चेहरा, तिरंगा का लहूलुहान रूप और दिव्य परिषद के सदस्यों की भव्य आकृतियाँ बहुत खूबसूरती से उकेरी गई हैं। एक्शन सीक्वेंस के दौरान पैनलिंग इतनी गतिशील है कि पढ़ते समय फिल्म देखने जैसा एहसास होता है। विनोद कुमार की स्याही और बसंत पंडा व नीरू की रंग-सज्जा ने आर्टवर्क को और निखार दिया है। खासकर अंतरिक्ष के दृश्यों में बैंगनी और काले रंगों का इस्तेमाल ब्रह्मांड की अनंतता और रहस्य को शानदार तरीके से दर्शाता है।

पात्र विश्लेषण: नायकत्व की नई परिभाषा

सुपर कमांडो ध्रुव:
इस भाग में ध्रुव एक योद्धा से ज्यादा एक ‘डिप्लोमैट’ (Diplomat) के रूप में सामने आता है। वह सिर्फ लड़ाई नहीं कर रहा, बल्कि ब्रह्मांडीय शक्तियों के सामने खड़े होकर मानवता का पक्ष भी मजबूती से रख रहा है।

नागराज:
नागराज का किरदार यहाँ एक ‘शहीद’ और ‘मसीहा’ के बीच झूलता हुआ नजर आता है। उसका विखंडन और फिर से अस्तित्व में आना उसे लगभग ईश्वरीय स्तर पर पहुँचा देता है।

तिरंगा:
तिरंगा का संघर्ष इस कॉमिक का सबसे प्रेरणादायक पहलू है। अपनी धरती से हजारों प्रकाश वर्ष दूर, एक अनजाने ग्रह पर आखिरी सांस तक लड़ने का उसका जज्बा उसे एक सच्चा महानायक बनाता है।

खलनायक (विकृत/सी-थ्रू):
सी-थ्रू का विक्षिप्त रूप और उसकी कभी न खत्म होने वाली शक्ति-लालसा उसे राज कॉमिक्स के सबसे डरावने खलनायकों में सबसे ऊपर खड़ा कर देती है।

लेखन और संवाद (Writing & Dialogue)

नितिन मिश्रा ने इस अंक में एक बेहद जटिल कथानक को संभाला है। एक ही कॉमिक में इतने सारे पात्रों और अलग-अलग लोकेशनों को संतुलित रखना आसान नहीं होता, लेकिन वे इसमें काफी हद तक सफल रहे हैं। संवाद प्रभावशाली हैं और कहानी को मजबूती देते हैं। खासकर दिव्य परिषद और ध्रुव के बीच का संवाद—
“तुम मानवों में न सामर्थ्य है और न अधिकार”
ब्रह्मांडीय अहंकार और शक्ति के घमंड को बेहद असरदार ढंग से सामने रखता है।

समीक्षात्मक मूल्यांकन: खूबियाँ और सीमाएं

सकारात्मक पक्ष:
यह कॉमिक राज कॉमिक्स के स्केल को एक बिल्कुल नए स्तर पर ले जाती है। ‘ब्रह्म तत्व’ और ‘असुरों’ का आपसी जुड़ाव कहानी में नई ऊर्जा भर देता है। पृथ्वी हो, अंतरिक्ष हो, हेज्ट्रो ग्रह हो या आदिमानवों की दुनिया—हर मोर्चे पर एक्शन का स्तर बेहद ऊँचा और प्रभावशाली है।

नकारात्मक पक्ष:
नए पाठकों के लिए इतने सारे पात्रों और ग्रहों के नाम याद रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। साथ ही कहानी का बार-बार अतीत और वर्तमान में आना-जाना कहीं-कहीं प्रवाह को तोड़ता हुआ भी महसूस होता है।

निष्कर्ष: ‘ब्रह्मांड विखंडन’ – एक निर्णायक मोड़

‘ब्रह्मांड विखंडन’ आखिरी श्रृंखला का वह अहम केंद्र बिंदु है, जहाँ से कहानी सीधे ‘विस्मरण’ (Oblivion) की ओर बढ़ती है। यह कॉमिक हमें यह समझाती है कि जब ब्रह्मांड की नींव हिलने लगती है, तब नायक सिर्फ अपनी ताकत से नहीं, बल्कि आपसी एकता से ही उसे बचा सकते हैं।

कॉमिक का अंत एक बड़े धमाके के साथ होता है—‘चीता’, ‘परशुराम’ और कई अन्य योद्धाओं का एक साथ नजर आना साफ इशारा करता है कि अब पूरी ‘ब्रह्मांड रक्षक’ सेना एकजुट होने जा रही है। अगला भाग ‘ब्रह्मांड विस्मरण’ (Universal Oblivion) इस महागाथा का सबसे विशाल और निर्णायक अध्याय साबित होने वाला है।

अंतिम रेटिंग: 4.9/5

जिसमें नागराज का विखंडन तिरंगा और कफन का हेज्ट्रो ग्रह पर संघर्ष और ब्रह्म-कण से जुड़ा असुरों का रहस्य सामने आता है। राज कॉमिक्स की आख़िरी श्रृंखला का ब्रह्मांड विखंडन अंक सुपर कमांडो ध्रुव की दिव्य परिषद में बहस
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