भारतीय कॉमिक्स जगत में ‘एंथोनी’ एक ऐसा किरदार है जिसने हमेशा से पाठकों के दिलों में एक अलग ही जगह बनाई है। एक मुर्दा जो सिर्फ अपनी बेटी के लिए जिंदा होकर वापस आता है—ये आइडिया अपने आप में ही बहुत अनोखा और दिल छू लेने वाला है। ‘बेरहम’ एंथोनी सीरीज की उन पुरानी क्लासिक कहानियों में से है, जो हॉरर, सस्पेंस और थोड़ी-सी जासूसी का शानदार मिक्स पेश करती है। इस कॉमिक की कहानी स्कूल के बच्चों की रहस्यमयी मौतों और एक चित्रकार की कला के आस-पास घूमती है। ‘बेरहम’ नाम कहानी के विलेन की सोच को बिल्कुल सही तरीके से बताता है, जो अपने मतलब के लिए मासूम बच्चों की जान लेने में भी हिचकता नहीं है।
कहानी का सार (विस्तृत विश्लेषण)
कहानी की शुरुआत एक खुशी भरे लेकिन थोड़ा-सा रहस्यमयी माहौल से होती है। एक स्कूल में ‘जॉन’ नाम का एक ड्राइंग टीचर है, जिसे बच्चों के चेहरे बनाना बहुत पसंद है। उसका मानना है कि बच्चों की मासूमियत ही उसकी कला का सबसे अच्छा विषय है। कहानी का पहला बड़ा ट्विस्ट तब आता है, जब जॉन अपनी एक छात्रा ‘मिली’ का चित्र बना रहा होता है। मिली बिल्कुल ठीक-ठाक बच्ची है, लेकिन जैसे ही उसका चित्र पूरा होता है, पानी पीने के बाद अचानक उसकी मौत हो जाती है।

यहाँ लेखक तरुण कुमार वाही ने सस्पेंस को बहुत मज़ेदार तरीके से बढ़ाया है। मिली की मौत पहली नज़र में सामान्य नहीं लगती। डॉक्टर जॉनी (जो एंथोनी कॉमिक्स के नियमित किरदार हैं) जब मिली की जांच करते हैं, तो वे चौंक जाते हैं। मिली के शरीर में ठंडक की जगह गर्मी बनी रहती है, और खून का बहाव (Blood Circulation) भी नहीं रुकता—जबकि उसका दिल धड़कना बंद हो चुका होता है। ये मेडिकल साइंस के हिसाब से बिल्कुल नामुमकिन था। मिली की मौत उसकी सबसे अच्छी दोस्त और एंथोनी की बेटी ‘मारिया’ को अंदर तक डरा देती है।
यहीं से एंथोनी की शानदार एंट्री होती है। कब्रिस्तान में उसके पिता प्रिंस (कौआ) उसे बताते हैं कि मारिया मुश्किल में है। एंथोनी का कब्र से बाहर आना और अपनी बेटी को दिलासा देना, इस सीरीज का सबसे भावुक हिस्सा है। वह मारिया से वादा करता है कि वह इस रहस्य को जरूर सुलझाएगा।

कहानी आगे बढ़ती है और शक की सुई सीधे चित्रकार जॉन की तरफ घूमने लगती है। मिली की मौत के बाद भी जॉन उसका चित्र अपने पास रखता है और उसकी तस्वीर पर माला भी चढ़ाता है, जिसे बाकी बच्चे अपशकुन समझते हैं। इसके बाद जॉन एक और बच्चे ‘जेम्स’ की ड्रॉइंग उसके जन्मदिन पर बनाने का फैसला करता है। जैसे ही चित्र पूरा होता है, उसी वक्त जेम्स भी पार्टी के दौरान केक काटते हुए अचानक मर जाता है। जेम्स की मौत भी बिल्कुल मिली जैसी होती है—शरीर का गर्म रहना और मौत की कोई साफ वजह न मिलना।
डॉक्टर जॉनी और जेम्स के पिता (मिस्टर विलियम) की बहस साइंस बनाम भावनाओं वाला तनाव दिखाती है। डॉक्टर जॉनी पूरी घटना को मेडिकल मिस्ट्री मानते हुए पोस्टमार्टम करना चाहते हैं, जबकि पिता इस बात को भावनात्मक नजर से देखते हैं।
कहानी का असली तनाव तब शुरू होता है, जब एंथोनी खुद जांच में उतरता है। उसे पता चलता है कि इन बच्चों की मौत का सीधा कनेक्शन उन पेंटिंग्स से है। जिस भी बच्चे का चित्र पूरा होता है, उसकी मौत हो जाती है। डर तब बढ़ जाता है, जब अगला नंबर खुद एंथोनी की बेटी ‘मारिया’ का आता है। जॉन उसके चित्र पर काम कर रहा होता है और मारिया की हालत खराब होने लगती है। एंथोनी समय पर पहुंच जाता है और पूरा सच सामने आता है।

कहानी के अंत में पता चलता है कि असली खलनायक जॉन नहीं, बल्कि स्कूल का योगा टीचर ‘जनार्दन’ है। जनार्दन एक तांत्रिक के कहने में आकर अपनी संतान पाने के लिए 11 बच्चों की बलि देना चाहता था। उसने तांत्रिक से मिले अभिमंत्रित (जादुई/शापित) रंगों को चोरी-छिपे जॉन के रंगों से बदल दिया था। जैसे ही उन शापित रंगों से किसी की तस्वीर पूरी होती, उस बच्चे की जान उसी तस्वीर में कैद हो जाती।
पात्र विश्लेषण
एंथोनी:
एंथोनी इस कॉमिक में एक पिता और एक रक्षक दोनों भूमिकाओं में दिखता है। उसकी सबसे बड़ी खासियत उसका “द्वंद्व” है—वह एक लाश है, लेकिन उसके अंदर आम इंसानों से भी ज़्यादा भावनाएं हैं। मारिया के लिए उसका प्यार ही उसे कब्र से बाहर आने पर मजबूर करता है। इस कहानी में एंथोनी अपनी कमजोरियों के बावजूद (जैसे दिन में ज्यादा देर न रुक पाना या पानी से डरना) मारिया को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है। खासतौर पर, जब उसे पता चलता है कि पानी से रंग धोए जा सकते हैं और इससे बच्चों की जान बच सकती है, तो वह पानी का इस्तेमाल करने से भी नहीं घबराता—भले ही पानी उसका सबसे बड़ा दुश्मन हो और उसके शरीर को नुकसान पहुंचाता हो। यही बात उसे असली ‘सुपरहीरो’ बना देती है।
मारिया:
मारिया कहानी का असली दिल है। वह एक मासूम बच्ची है, जो अपनी सहेली की मौत से टूट जाती है। उसका भरोसा कि “पापा आएंगे और सब ठीक कर देंगे” ही एंथोनी के जिंदा होने का आधार है। मारिया का किरदार पढ़ने वालों को कहानी से भावनात्मक रूप से जोड़े रखता है।

डॉक्टर जॉनी:
डॉक्टर जॉनी कहानी में तर्क और विज्ञान का चेहरा हैं। वह लगातार परेशान रहते हैं क्योंकि जो भी घटनाएं हो रही हैं, वे विज्ञान के बिल्कुल खिलाफ जाती हैं। उनका किरदार कहानी को एक भरोसेमंद और असली एहसास देता है, जिससे कहानी सिर्फ जादू-टोने वाली नहीं लगती, बल्कि एक मेडिकल रहस्य जैसी महसूस होती है।
चित्रकार जॉन:
लेखक ने जॉन को एक “रेड हेरिंग” की तरह इस्तेमाल किया है—यानी कहानी इस तरह लिखी गई है कि पाठक को लगता रहे कि जॉन ही असली विलेन है। उसका अलग-सा व्यवहार, बच्चों की मौत के बाद भी पेंटिंग बनाते रहना और जल्दी भावुक हो जाना उसे और संदिग्ध बना देता है। लेकिन आखिर में पता चलता है कि वह भी एक बेबस इंसान था, जिसकी कला और भावनाओं का गलत फायदा उठाया गया।
जनार्दन (खलनायक):
जनार्दन कहानी का असली छिपा खलनायक है। बाहर से वह एक योगा टीचर है, जिस पर हर कोई भरोसा करता है, लेकिन अंदर से वह अंधविश्वास और स्वार्थ में डूबा हुआ है। अपना बच्चा पाने के लिए दूसरों के बच्चों की बलि देने की उसकी सोच उसे ‘बेरहम’ नाम का असली हकदार बनाती है। उसका किरदार यह दिखाता है कि अंधविश्वास इंसान को कितना खतरनाक बना सकता है।
चित्रांकन और कला (Artwork Analysis)

विवेक मोहन की परिकल्पना और तैसीफ का चित्रांकन इस कॉमिक को 90 के दशक की राज कॉमिक्स वाली पहचान देता है। हॉरर सीन में एंथोनी हमेशा की तरह डरावना और दमदार लगता है—उसकी नीली-ग्रे त्वचा, बिखरे लंबे बाल और फटी-सी आंखें उसे एक असली ‘अनडेड’ जैसा बनाती हैं। इमोशनल सीन भी बढ़िया बने हैं—चाहे मारिया का रोना हो या जॉन का अपनी पेंटिंग देखकर भावुक होना, चेहरे के हाव-भाव बहुत साफ और असरदार दिखते हैं।
रंगों का इस्तेमाल भी कहानी के मूड के हिसाब से किया गया है—कब्रिस्तान के दृश्य गहरे और उदास रंगों में हैं, जबकि स्कूल के दृश्य थोड़े हल्के और चमकीले दिखते हैं। जब “शापित रंगों” की बात आती है, तो आर्टिस्ट ने रंगों और शेडिंग के जरिए खतरे का एहसास बढ़िया तरीके से करवाया है। एक्शन सीन में एंथोनी और जनार्दन की लड़ाई, और एंथोनी का आसमान से झपटकर आना—ये सब काफी तेज और जोश से भरे हुए बनाए गए हैं।
कथा–प्रवाह और लेखन (Storytelling and Writing)
तरुण कुमार वाही को सस्पेंस लिखने में महारत थी, और ‘बेरहम’ इसकी बेहतरीन मिसाल है। कहानी की रफ्तार कहीं भी धीमी नहीं लगती। मिली की मौत कहानी की शुरुआत में ही हो जाती है, जिससे पढ़ने वाला तुरंत कहानी में खो जाता है। इसके बाद घटनाएं इतनी तेजी से होती हैं कि कॉमिक को छोड़ना मुश्किल हो जाता है।
संवाद भी बहुत सटीक हैं—एंथोनी के संवादों में गहराई और वजन है, जैसे—“इंसान जब तक अपने स्वार्थ की जमीन पर खड़ा रहेगा, अपराध खत्म नहीं होंगे।” वहीं बच्चों के संवाद उनकी मासूमियत और सादगी दिखाते हैं।
लेखक ने अंत तक ये राज़ छुपाए रखा कि बच्चे आखिर मर कैसे रहे हैं—क्या यह कोई बीमारी है, जहर है या फिर जादू? और जब बाद में पता चलता है कि असली कारण “पेंटिंग के रंग” हैं, तो भले थोड़ा फिल्मी लगे, लेकिन एंथोनी की सुपरनैचुरल दुनिया में यह बिल्कुल फिट बैठता है। इसी वजह से कहानी का सस्पेंस आखिर तक मज़ेदार बना रहता है।
मुख्य विषय और सामाजिक संदेश (Themes)

भले ही ‘बेरहम’ एक सुपरहीरो/हॉरर कॉमिक है, लेकिन इसके भीतर कई गहरे सामाजिक और इंसानी संदेश छिपे हुए हैं। कहानी में अंधविश्वास की खतरनाक सच्चाई दिखाई गई है, जहाँ जनार्दन—जो एक पढ़ा-लिखा योगा टीचर है—अंधविश्वास में फँसकर इतना अंधा हो जाता है कि बच्चों की हत्या तक कर देता है। यह दिखाता है कि अंधविश्वास किस तरह इंसान की सोच और समझ दोनों को बिगाड़ सकता है। दूसरी तरफ, एंथोनी बार-बार अपनी कब्र से सिर्फ अपनी बेटी के लिए बाहर आता है—यह उसके निस्वार्थ और मजबूत पिता-प्यार का प्रतीक है। पूरे किस्से में मासूमियत और क्रूरता का टकराव चलता रहता है, जहाँ “बेरहम” नाम बच्चों की मासूम दुनिया के ठीक उलट खड़ा है। एक तरफ छोटे बच्चे हैं जो किसी बुराई को समझते भी नहीं, और दूसरी तरफ एक ऐसा इंसान है जो अपनी चाहत पूरी करने के लिए उन्हीं मासूम जानों को मिटा रहा है।
समीक्षात्मक दृष्टिकोण (Critical Review)
सकारात्मक पक्ष:
कहानी का आइडिया (पेंटिंग बनते ही जान जाना) उस दौर के हिसाब से काफी हटकर और डर पैदा करने वाला कॉन्सेप्ट था। इसमें हल्का-सा ‘द पिक्चर ऑफ डोरियन ग्रे’ जैसा फील आता है, लेकिन इसे भारतीय माहौल और तांत्रिक तत्वों के साथ बहुत अच्छे से पेश किया गया है।
सस्पेंस भी शानदार तरीके से गढ़ा गया है—पहले जॉन पर शक करवाना और फिर अचानक असली कातिल को सामने लाकर चौंका देना एक मजबूत ट्विस्ट था।
अंत में एंथोनी का पानी से पेंटिंग धो देना यह बताता है कि हर समस्या सिर्फ ताकत से हल नहीं होती, समझ और सूझबूझ की भी जरूरत होती है। साथ ही पानी से डरने के बावजूद एंथोनी का पानी का इस्तेमाल करना उसके किरदार को और मजबूत और भावुक बना देता है।
नकारात्मक पक्ष:
विज्ञान और जादू का मिश्रण कभी-कभी थोड़ा अजीब लग सकता है। डॉक्टर जॉनी लगातार मेडिकल वजह ढूंढते रहते हैं (जैसे फ्रिज के कंप्रेसर वाला उदाहरण), लेकिन आखिर में कारण जादू निकलना विज्ञान पसंद पाठकों को थोड़ा असंतुलित लग सकता है—ऐसा लगता है जैसे मेडिकल साइंस पूरी तरह हार गया।
जनार्दन का मकसद (संतान पाने के लिए बच्चों की बलि देना) थोड़ा पुराना-सा लगता है, क्योंकि 80-90 के दौर की कई कहानियों में ऐसे तांत्रिकों के यही लक्ष्य होते थे।
कला के मामले में, कुछ जगह बैकग्राउंड उतने डिटेल्ड नहीं दिखते, हालांकि इससे मुख्य कहानी और सस्पेंस पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ता।
निष्कर्ष
‘बेरहम’ एंथोनी सीरीज की एक ऐसी कॉमिक है जिसे हर फैन को पढ़ना चाहिए। यह सिर्फ डर और एक्शन वाली कहानी नहीं है, बल्कि इसमें एक बढ़िया डिटेक्टिव स्टाइल मिस्ट्री भी है। एंथोनी इस कहानी में एक “साइलेंट गार्जियन” की तरह उभर कर आता है—कम बोलने वाला, लेकिन हमेशा सही समय पर सही काम करने वाला।
यह कॉमिक हमें याद दिलाती है कि एंथोनी राज कॉमिक्स के सबसे मजबूत और भावुक कैरेक्टर्स में से एक क्यों है। वह सुपरमैन की तरह अजेय नहीं है—उसके अपने डर हैं, उसकी अपनी कमजोरियां हैं (कब्र, रात, पानी, प्रिंस)—लेकिन न्याय के लिए उसका जुनून और अपनी बेटी के लिए उसका प्यार उसे एक बहुत बड़ा हीरो बना देता है।
अंतिम निर्णय:
अगर आप 90’s की भारतीय कॉमिक्स के फैन हैं, या फिर हॉरर-मिस्ट्री जॉनर पसंद करते हैं, तो ‘बेरहम’ आपको जरूर पसंद आएगी। इसमें इमोशन है, डर है, रहस्य है और आखिर में अच्छाई की जीत भी—भले ही थोड़े डरावने अंदाज़ में क्यों न हो। तरुण कुमार वाही की दमदार लिखावट और विवेक मोहन की सोच इसे एक यादगार अनुभव बना देती है।
रेटिंग: 4/5 स्टार्स।

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