राज कॉमिक्स के स्वर्ण युग में कई ऐसे प्रयोग किए गए जिन्होंने भारतीय कॉमिक्स जगत को एक नई ऊंचाई दी। इन्हीं प्रयोगों में से एक था ‘क्रॉसओवर’ (Crossover), जहाँ दो अलग-अलग विधाओं या युगों के नायकों को एक साथ लाया जाता था। ‘भूत भविष्य’ इसी श्रृंखला की एक बेहद रोमांचक और अहम कड़ी है। यह कॉमिक्स प्राचीन युग के महान योद्धा ‘भोकाल’ और भविष्य के टेक्नोलॉजी से लैस महामानव ‘इंस्पेक्टर स्टील’ के टकराव और मिलन की कहानी पेश करती है। ७६ पृष्ठों की यह कॉमिक्स सिर्फ एक्शन से भरी नहीं है, बल्कि इसमें समय यात्रा (Time Travel), ज्योतिष और मानवीय भावनाओं का शानदार मिश्रण देखने को मिलता है।
काल कुंडली की दुविधा और योजना:

कहानी की शुरुआत विकास नगर के पास स्थित एक रहस्यमयी जंगल से होती है, जहाँ महान ज्योतिषी और तांत्रिक ‘काल कुंडली’ अपने जीवन की सबसे बड़ी पहेली सुलझाने में जुटा हुआ है। काल कुंडली को एक श्राप मिला है कि उसकी मौत भोकाल के हाथों ही होगी। लेकिन ज्योतिष की गणना कहती है कि भोकाल को मार पाना नामुमकिन है। अपनी इसी उलझन को दूर करने के लिए वह ‘प्रश्न यक्ष’ का आह्वान करता है। प्रश्न यक्ष उसे बताता है कि भोकाल को वर्तमान का कोई भी योद्धा नहीं मार सकता; उसे सिर्फ भविष्य का ऐसा योद्धा मार सकता है जो तकनीक और ताकत में उससे आगे हो। यहीं से कहानी की नींव ‘भूत’ (प्राचीन काल) और ‘भविष्य’ (आधुनिक काल) के जुड़ाव पर टिक जाती है।
महानगर राजनगर और इंस्पेक्टर स्टील:

कहानी का दूसरा सिरा भविष्य के शहर राजनगर में खुलता है। यहाँ हम देखते हैं कि इंस्पेक्टर स्टील, जो एक साइबरनेटिक सुपर-कॉप है, अपराधियों के लिए काल बना हुआ है। वह अपनी ‘मेगागन’ और एडवांस सेंसरों की मदद से ‘काजार’ नाम के एक चालाक अपराधी को पकड़ लेता है। काजार ने डॉ. अनीस की ‘टाइम मशीन’ की मुख्य चिप चुरा ली थी। इंस्पेक्टर स्टील का यह रूप उसे एक कर्तव्यनिष्ठ मशीन जैसा दिखाता है, लेकिन उसके भीतर एक इंसान (अमर) का दिमाग काम करता है, जो उसे भावनाओं से जोड़े रखता है।
समय यात्रा और दुर्घटना:
डॉ. अनीस, जो स्टील के निर्माता और दोस्त हैं, अपनी टाइम मशीन का परीक्षण करना चाहते हैं। वे स्टील को टेस्ट के तौर पर अतीत में भेजने का फैसला करते हैं। लेकिन यहीं कहानी में बड़ा मोड़ आता है—चिप में काजार द्वारा की गई छेड़छाड़ के कारण टाइम मशीन में जोरदार विस्फोट हो जाता है। इंस्पेक्टर स्टील अतीत के विकास नगर में तो पहुँच जाता है, लेकिन वह अपनी याददाश्त खो देता है और मशीन भी बुरी तरह खराब हो जाती है।
महाबली भोकाल बनाम इंस्पेक्टर स्टील:

जब स्टील विकास नगर की धरती पर कदम रखता है, तो वहाँ के सैनिक उसे एक ‘अजीब राक्षस’ समझकर हमला कर देते हैं। स्टील के लिए वे सब अनजान दुश्मन हैं। यहीं पर महाबली भोकाल की एंट्री होती है। दो जबरदस्त शक्तियों के बीच होने वाला यह मुकाबला कॉमिक्स का सबसे बड़ा आकर्षण बन जाता है। एक तरफ भोकाल की तलवार की ‘ज्वाला शक्ति’ है, तो दूसरी तरफ स्टील की ‘मेगागन’ और ‘मिसाइल-प्रूफ’ बॉडी। लेखक हनीफ अजहर ने इस लड़ाई को बहुत संतुलित तरीके से दिखाया है। दोनों नायक अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन गलतफहमी उन्हें आमने-सामने खड़ा कर देती है।
काल कुंडली का षड्यंत्र और ‘जुड़वां ग्रह योग’:

काल कुंडली इस मौके का पूरा फायदा उठाता है। वह याददाश्त खो चुके स्टील को यकीन दिला देता है कि वही उसका मालिक है और भोकाल एक पापी और अत्याचारी राजा है। कहानी को और पेचीदा बनाने के लिए काल कुंडली ‘जुड़वां ग्रह योग’ का इस्तेमाल करके भोकाल का एक ‘प्रतिरूप’ (Clone) तैयार कर देता है। यह नकली भोकाल मासूम जनता पर जुल्म ढाता है, जिससे स्टील की नजरों में असली भोकाल एक खलनायक बन जाता है। यह मनोवैज्ञानिक चाल कहानी को और ज्यादा गहराई देती है।
अंतिम संघर्ष और सच्चाई का उद्घाटन:

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, स्टील और असली भोकाल के बीच आखिरी और जबरदस्त मुकाबला शुरू हो जाता है। स्टील अपनी ‘एक्सट्रीम हीट बीम’ का इस्तेमाल करता है, जिससे भोकाल की ढाल और तलवार तक पिघलने लगती हैं। माहौल पूरी तरह तनाव से भर जाता है। लेकिन तभी भविष्य में मौजूद डॉ. अनीस स्टील के दिमाग की फ्रीक्वेंसी पकड़ने में सफल हो जाते हैं। दूसरी ओर, लगातार लड़ाई के कारण स्टील की बैटरी खत्म होने लगती है और वह कमजोर पड़कर गिरने लगता है। इसी नाजुक पल में भोकाल को एहसास होता है कि यह ‘लौह पुरुष’ असल में बुरा नहीं है, बल्कि किसी बड़ी साजिश का शिकार बना हुआ है।
अंत और विदाई:

भोकाल, स्टील की पीठ के पीछे लगे पावर यूनिट को पहचान लेता है और उसे रिचार्ज करने में मदद करता है (जैसा कि स्टील अपनी आखिरी ताकत जुटाकर उसे इशारा करता है)। याददाश्त वापस आते ही स्टील को पूरी सच्चाई समझ में आ जाती है। वह तुरंत काल कुंडली को गिरफ्तार कर लेता है। अंत में डॉ. अनीस अपनी तकनीकी समझ से स्टील को वापस भविष्य में खींचने में कामयाब हो जाते हैं। भोकाल और स्टील के बीच की वह आखिरी विदाई और आपसी सम्मान पाठक के दिल में गहरी छाप छोड़ जाता है।
पात्रों का विश्लेषण:

भोकाल: इस कॉमिक्स में भोकाल हमेशा की तरह एक न्यायप्रिय और ताकतवर योद्धा के रूप में नजर आता है। उसकी असली महानता तब सामने आती है जब वह अपने कट्टर दुश्मन (स्टील, जिसे वह तब तक दुश्मन ही समझ रहा था) की जान बचाने का फैसला करता है। उसकी ‘ज्वाला शक्ति’ और ‘महागुरु’ के प्रति उसकी निष्ठा उसे एक दिव्य नायक का दर्जा देती है।
इंस्पेक्टर स्टील: स्टील का किरदार पूरी तरह तकनीक और तर्क पर आधारित है। उसका भ्रमित होना और फिर सच्चाई को स्वीकार करना उसके भीतर मौजूद इंसानी दिमाग की ताकत को दिखाता है। उसके आधुनिक हथियारों का प्राचीन काल में इस्तेमाल कहानी को और भी दिलचस्प बना देता है।
काल कुंडली: वह एक चालाक और खतरनाक खलनायक है। वह ताकत से ज्यादा अपनी बुद्धि और तंत्र-मंत्र का इस्तेमाल करता है। अपनी मौत के डर ने ही उसे इतना बड़ा खेल खेलने पर मजबूर किया, जो उसे एक दिलचस्प ‘ग्रे शेड’ वाला विलेन बनाता है।
डॉ. अनीस: वे विज्ञान के उस जिद्दी और सकारात्मक पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं जो आखिरी पल तक हार नहीं मानता। स्टील के लिए उनकी चिंता एक पिता जैसी महसूस होती है, जो कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ती है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration):

राज कॉमिक्स की पहचान हमेशा से उसके जीवंत चित्र रहे हैं और इस कॉमिक्स में भी ‘विन्द’ और उनकी टीम ने शानदार काम किया है। प्राचीन विकास नगर के महल, जंगल और भविष्य के राजनगर की हाई-टेक इमारतों के बीच का फर्क बहुत साफ और असरदार तरीके से दिखाया गया है। लड़ाई वाले दृश्यों में गति साफ महसूस होती है। ‘मेगागन’ से निकलती किरणें और भोकाल की तलवार से निकलती आग रंगों के जरिए बेहद खूबसूरती से उभारी गई हैं। इसके अलावा इंस्पेक्टर स्टील का आधुनिक कवच और काल कुंडली का पारंपरिक पहनावा दो अलग ध्रुवों जैसा लगता है, जो कहानी के ‘भूत-भविष्य’ वाले थीम को पूरी तरह मजबूत करता है।
थीम और संदेश:
यह कॉमिक्स कई गहरे विचारों को छूती है। विज्ञान बनाम चमत्कार के जरिए यह सवाल उठाया गया है कि क्या भविष्य की मशीनें अतीत के तंत्र-मंत्र को हरा सकती हैं। आखिर में कहानी यह साफ कर देती है कि सबसे बड़ी ताकत हमेशा सत्य और नैतिकता ही होती है। साथ ही, गलतफहमी के खतरनाक नतीजे भी दिखाए गए हैं—कैसे एक झूठ दो महान नायकों को आमने-सामने ला सकता है। समय की अटलता भी काल कुंडली की कहानी से साबित होती है; अपनी मौत टालने के लिए उसने जो रास्ता चुना, वही उसे उसके अंत तक ले गया।
समीक्षात्मक टिप्पणी:

‘भूत भविष्य’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी पेसिंग (गति) है। कहानी कहीं भी बोर नहीं करती और लगातार आगे बढ़ती रहती है। हाँ, टाइम ट्रैवल के लॉजिक में थोड़ी सिनेमैटिक छूट ली गई है (जैसे भोकाल का अचानक बैटरी सिस्टम समझ जाना), लेकिन फंतासी कॉमिक्स के हिसाब से यह आसानी से स्वीकार की जा सकती है। संवाद काफी दमदार हैं, खासकर वे पल जब भोकाल और स्टील एक-दूसरे की ताकत को सम्मान देते हैं।
इस कॉमिक्स का शीर्षक ‘भूत भविष्य’ बिल्कुल सटीक बैठता है। यह सिर्फ दो अलग समय की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि समय और तकनीक भले बदल जाएँ, लेकिन वीरता और न्याय के सिद्धांत हमेशा एक जैसे रहते हैं।
निष्कर्ष:
अगर आप राज कॉमिक्स के फैन हैं, तो ‘भूत भविष्य’ आपके कलेक्शन में जरूर होनी चाहिए। यह भोकाल की तलवार की चमक और इंस्पेक्टर स्टील की मशीन की खनक का ऐसा जबरदस्त मेल है जो आपको शुरुआत से अंत तक बांधे रखता है। यह कॉमिक्स एक बार फिर याद दिलाती है कि क्यों राज कॉमिक्स को भारतीय कॉमिक्स का सम्राट कहा जाता था। ७६ पृष्ठों का यह सफर रोमांच, रहस्य और भावनाओं की एक बेहतरीन यात्रा बन जाता है।
