भारतीय कॉमिक्स के स्वर्णिम दौर में मनोज कॉमिक्स का अपना एक अलग और खास मुकाम रहा है। जब राज कॉमिक्स और डायमंड कॉमिक्स का ज़ोर था, उसी समय मनोज कॉमिक्स ने अपनी अलग तरह की कहानियों, रोमांचक जासूसी किस्सों और डरावनी-अलौकिक कथाओं के ज़रिए बच्चों और युवाओं के दिलों में खास जगह बना ली। आज हम मनोज कॉमिक्स की एक बेहद चर्चित और यादगार कृति “इच्छाधारी नागिन और शैतान नेवला” की विस्तार से समीक्षा करने जा रहे हैं। यह कॉमिक सिर्फ एक अलौकिक बदले की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें साइंस-फिक्शन (Sci-Fi) और जासूसी थ्रिलर (Spy Thriller) का दिलचस्प मेल भी देखने को मिलता है। इस कहानी में मनोज कॉमिक्स के मशहूर जासूस राम-रहीम (डबल सीक्रेट एजेंट 001/2) मुख्य भूमिका में नजर आते हैं।
कहानी की पृष्ठभूमि और शुरुआत:
कहानी की शुरुआत पृथ्वी से बहुत दूर, अंतरिक्ष में बसे एक काल्पनिक ग्रह ‘कोबरा बैंड’ से होती है। उस समय की कॉमिक्स के लिहाज़ से यह सोच काफी आधुनिक मानी जा सकती है, क्योंकि यहाँ नागिन और नेवले की कहानी को सिर्फ लोककथाओं तक सीमित न रखकर उसे पूरे ब्रह्मांडीय स्तर (Cosmic Level) तक ले जाया गया है। इसी ग्रह से एक बेहद खतरनाक अपराधी ‘नेवला’, वहाँ की पवित्र और शक्तिशाली ‘देवता की आँख’ नाम की जादुई मणि चुराकर पृथ्वी पर भाग आता है।

कोबरा बैंड का राजा, इस चोरी से बेहद क्रोधित होकर अपनी सबसे समझदार, चालाक और शक्तिशाली इच्छाधारी नागिन (विषकन्या) को आदेश देता है कि वह पृथ्वी पर जाकर नेवले का अंत करे और मणि को हर हाल में वापस लाए। यहीं से कहानी का मुख्य टकराव और संघर्ष शुरू होता है।
कथानक का विस्तार (Detailed Plot Analysis):
कहानी के शुरुआती पन्नों में दिखाया जाता है कि पृथ्वी पर वह मणि एक आम चोर के हाथ लग जाती है। पुलिस उस चोर का पीछा करती है, और पकड़े जाने के डर से वह मणि को एक पेड़ के खोखले हिस्से (wig) में छिपा देता है। इसी दौरान पुलिस की गोली लगने से वह चोर घायल हो जाता है, और यहीं से कहानी एक नया मोड़ लेती है।

दूसरी ओर, राम और रहीम, जो ‘बाल सीक्रेट सर्विस’ के बहादुर और होशियार एजेंट हैं, एक नए केस की तलाश में होते हैं। वे राजपुरा थाने पहुँचते हैं, जहाँ उन्हें पता चलता है कि एक चोर रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है। कहानी में रहस्य तब और गहरा हो जाता है, जब पता चलता है कि नेवला किसी परजीवी की तरह किसी भी इंसान के दिमाग पर कब्ज़ा कर सकता है, और वह मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर कामथ के शरीर को अपना ठिकाना बना लेता है।
अब प्रोफेसर कामथ के शरीर में मौजूद यह दुष्ट नेवला अपनी वैज्ञानिक ताकत का गलत इस्तेमाल करने लगता है। वह ‘मार्टिन’ नाम के व्यक्ति का एक कृत्रिम मस्तिष्क बनाने और एक बेहद खतरनाक सर्जरी करने की योजना तैयार करता है। इसी बीच, इच्छाधारी नागिन भी पृथ्वी पर पहुँच जाती है और प्रोफेसर के भेष में छिपे नेवले को पहचान लेती है।
कॉमिक के मध्य भाग में कहानी पूरी तरह से रोमांच से भर जाती है। इच्छाधारी नागिन कभी एक खूबसूरत महिला का रूप लेती है और कभी एक विशालकाय कोबरा बन जाती है। वह नेवले के साथियों, खासकर शाकाल और अन्य गुर्गों पर हमला करती है। शाकाल की मौत और फिर नागिन द्वारा उसका रूप धरकर प्रोफेसर के घर में घुसना, इस कहानी को एक क्लासिक स्पाई थ्रिलर जैसा रंग दे देता है।
राम-रहीम की भूमिका:
राम और रहीम की जोड़ी हमेशा से मनोज कॉमिक्स की जान रही है। इस कहानी में भी वे सिर्फ तमाशबीन नहीं बने रहते, बल्कि अपनी समझदारी और तर्क से हर कड़ी को जोड़ते जाते हैं। जब उन्हें कटे हुए सिर वाले व्यक्ति (मनमोहन) और प्रोफेसर कामथ की संदिग्ध हरकतों के बारे में जानकारी मिलती है, तो वे अपनी जांच को और तेज कर देते हैं। कॉमिक के पेज नंबर 18 से 23 के बीच राम-रहीम की जासूसी, उनकी रणनीति और आपसी संवाद काफी मज़ेदार और रोमांचक हैं, खासकर जब वे जंगल में मणि की तलाश के लिए घात लगाकर बैठे होते हैं।

चरित्र चित्रण (Character Analysis):
इच्छाधारी नागिन (विषकन्या): उसे एक जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ योद्धा के रूप में दिखाया गया है। वह सिर्फ बदला लेने वाली नागिन नहीं है, बल्कि अपने पूरे ग्रह और उसके अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रही है। उसके चरित्र में साहस, समझदारी और दृढ़ निश्चय साफ झलकता है।
नेवला (प्रोफेसर कामथ): यह विलेन इसलिए ज्यादा डरावना लगता है, क्योंकि वह दिखाई नहीं देता और किसी के भी दिमाग में घुस सकता है। प्रोफेसर कामथ के रूप में उसकी चालाकी, धोखेबाज़ी और पागलपन भरी वैज्ञानिक सोच उसे एक यादगार खलनायक बना देती है।
राम-रहीम: राम स्वभाव से शांत और गंभीर है, जबकि रहीम थोड़ा मज़ाकिया लेकिन बेहद फुर्तीला और चालाक है। दोनों की केमिस्ट्री और आपसी तालमेल कहानी को तेज़ रफ्तार देता है।
कला और चित्रांकन (Artwork and Illustration):

दिलीप कदम और विजय कदम द्वारा किया गया इस कॉमिक का चित्रांकन 80 और 90 के दशक की उस क्लासिक कॉमिक शैली को फिर से ज़िंदा कर देता है, जो आज भी उतनी ही प्रभावशाली लगती है। इच्छाधारी नागिन के पीले-लाल वस्त्र, उसके शरीर पर बने कोबरा के बारीक डिज़ाइन और उनका रंग संयोजन बेहद आकर्षक है। वहीं एक्शन और लड़ाई के दृश्यों में “धायं”, “कड़ाक” और “फिस्स” जैसे शब्दों का इस्तेमाल और किरदारों के भाव-भंगिमा उस दौर की कॉमिक्स की याद दिला देते हैं। खास तौर पर नागिन का अपने असली रूप में सामने आना और प्रोफेसर के पीछे नेवले की परछाईं को दिखाने वाली रहस्यमयी फ्रेमिंग, पाठकों के मन में डर और जिज्ञासा दोनों पैदा करने में पूरी तरह कामयाब रहती है।
क्लाइमेक्स और अंत (The Grand Finale):

कहानी का अंत बिल्कुल किसी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फिल्म जैसा है। जंगल के एक सुनसान इलाके में राम, रहीम, इच्छाधारी नागिन और दुष्ट प्रोफेसर (जिसके अंदर नेवला छिपा है) आमने-सामने आ जाते हैं। जैसे ही राम-रहीम को पूरी सच्चाई समझ में आती है, वे बिना देर किए नागिन का साथ देने का फैसला करते हैं।

यहीं पर ‘मणि’ को लेकर एक जबरदस्त चाल चली जाती है। प्रोफेसर को लगता है कि आखिरकार उसे वही जादुई मणि मिल गई है, जो उसे अमर बना देगी। लेकिन असल में वह मणि नहीं, बल्कि नागिन द्वारा दिया गया एक मायावी पत्थर होता है, जो दरअसल एक खतरनाक विस्फोटक जाल (Explosive Trap) है। जैसे ही नेवला उस पत्थर को निगलने की कोशिश करता है, ज़ोरदार धमाका होता है और उसका अंत हो जाता है।
अंतिम पन्ना भावनाओं और कर्तव्य दोनों का सुंदर मेल दिखाता है। नेवले का हमेशा के लिए खात्मा हो जाता है और इच्छाधारी नागिन (विषकन्या) अपनी खोई हुई मणि वापस पा लेती है। वह राम-रहीम का दिल से धन्यवाद करती है और फिर एक प्रकाश-पुंज में बदलकर अपने ग्रह ‘कोबरा बैंड’ लौट जाती है। राम और रहीम एक बार फिर साबित कर देते हैं कि वे मानवता की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
समीक्षात्मक विश्लेषण (Critical Evaluation):
सकारात्मक पक्ष:
इस कॉमिक्स की कहानी वाकई बेहद अनोखी और अलग है। नागिन और नेवले की पारंपरिक दुश्मनी को अंतरिक्ष और एलियंस के एंगल से जोड़ना उस समय के हिसाब से एक बहुत ही रचनात्मक और साहसी प्रयोग था। केवल 32–33 पन्नों की इस कहानी की गति (Pacing) इतनी सटीक रखी गई है कि कहीं भी कहानी बोझिल या धीमी नहीं लगती। हर पन्ने पर कोई न कोई नया रहस्य सामने आता है, जो पाठक को कहानी से जोड़े रखता है। संवाद भले ही छोटे हों, लेकिन उनका असर गहरा है। एक ओर इच्छाधारी नागिन की गंभीरता साफ झलकती है, तो दूसरी ओर नेवले की अट्टहास भरी धमकियाँ कहानी में डर और तनाव पैदा करती हैं।
कमजोर पक्ष:
हालाँकि कहानी की रफ्तार काफी तेज़ है, लेकिन कुछ पाठकों को इसका अंत थोड़ा अचानक लग सकता है। नेवले जैसी शक्तिशाली और खतरनाक इकाई का खात्मा केवल एक छोटे से धमाके के ज़रिए दिखाया गया है, जबकि उस दृश्य को थोड़ा और विस्तार देकर ज़्यादा प्रभावशाली बनाया जा सकता था। इसके अलावा, सह-पात्रों के इस्तेमाल में भी थोड़ी कमी महसूस होती है। इंस्पेक्टर खान और अन्य पुलिस कर्मियों को कहानी की शुरुआत में तो अच्छी अहमियत दी गई है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी क्लाइमेक्स की ओर बढ़ती है, वे लगभग गायब हो जाते हैं।
सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ:
मनोज कॉमिक्स की ऐसी कहानियाँ बच्चों और किशोरों के मन में हमेशा ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ का भरोसा मज़बूत करती रही हैं। साथ ही, राम-रहीम जैसे किरदारों के माध्यम से सांप्रदायिक सद्भाव का एक शांत और सकारात्मक संदेश भी दिया जाता है, जो आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक और ज़रूरी है।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, “इच्छाधारी नागिन और शैतान नेवला” मनोज कॉमिक्स की एक यादगार और दमदार कृति है। यह हमें उस दौर में ले जाती है, जब कल्पनाओं की कोई सीमा नहीं होती थी। यह कॉमिक सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि साहस, समझदारी और सही फैसलों के दम पर सबसे बड़े ‘शैतान’ को भी हराया जा सकता है।
अगर आप पुरानी कॉमिक्स के शौकीन हैं और भारतीय जासूसी कहानियों के साथ अलौकिक शक्तियों का रोमांच पसंद करते हैं, तो यह कॉमिक आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए।
रेटिंग: 4.5/5
लेखक के बारे में एक टिप्पणी:
इस कॉमिक्स के लेखक अजीत चटर्जी ने अपनी लेखनी से एक साधारण सी दिखने वाली कहानी को भी असाधारण बना दिया है। उनकी कल्पनाशील सोच का ही नतीजा है ‘कोबरा बैंड’ जैसे अनोखे ग्रह का निर्माण, जो आज भी पाठकों के मन में जिज्ञासा और रोमांच पैदा करता है।
