आज हम मनोज कॉमिक्स की एक बेहद चर्चित और दमदार कृति ‘इन्द्र और शैंगो’ की विस्तार से बात करेंगे। यह कॉमिक सिर्फ सुपरहीरो एक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें देशभक्ति, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और विज्ञान के गलत इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दों को भी कहानी के साथ जोड़ा गया है।
कहानी की रूपरेखा (Plot Summary):

कहानी की शुरुआत दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से होती है, जहाँ 15 अगस्त के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे होते हैं। लाखों लोग इस खास पल को देखने के लिए मौजूद रहते हैं। तभी अचानक आसमान में एक अजीब-सा हेलीकॉप्टर दिखाई देता है। सुरक्षा बल कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हेलीकॉप्टर से भीड़ पर मिसाइलें दाग दी जाती हैं। यह हमला पूरी तरह से सोची-समझी आतंकी साजिश होती है, जिसका मकसद भारत की शान और जनता का हौसला तोड़ना होता है।
इसी दौरान चांदी जैसी चमकदार देह वाला महामानव इन्द्र मैदान में उतरता है। अपनी जबरदस्त रफ्तार और ताकत से वह हवा में ही मिसाइलों को नष्ट कर देता है। लेकिन खतरा यहीं खत्म नहीं होता। एक मिसाइल शहर के एक व्यस्त फ्लाईओवर से टकरा जाती है, जिससे पुल टूटने लगता है और सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। यहीं इन्द्र का मानवीय और रक्षक रूप सामने आता है। वह अपनी पीठ पर पूरे पुल का वजन उठा लेता है और आंखों से निकलने वाली लेजर किरणों से लोहे के गार्डरों को जोड़ देता है, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल जाती है।
इसके बाद कहानी हमें इस हमले के पीछे के असली दिमाग तक ले जाती है— डॉ. शैंगो। शैंगो एक सनकी वैज्ञानिक है, जिसने कभी इन्द्र को खुद बनाया था, लेकिन अब वही उसे खत्म करना चाहता है। वह इन्द्र को नष्ट करने के लिए ‘जोंटी’ नाम का एक ताकतवर रोबोट भेजता है, जिसे इन्द्र काफी संघर्ष के बाद ध्वस्त कर देता है।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह साफ हो जाता है कि मामला सिर्फ शैंगो और इन्द्र की निजी दुश्मनी तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी संगठन की बड़ी साजिश छिपी है। ‘डेथ किंग’ नाम का खतरनाक अपराधी दुनिया के कई कुख्यात माफियाओं को एक साथ जोड़ चुका है। इसमें दुबई का मिस्टर जालिम, जापान का मिस्टर कुंग-फू, इजराइल का मिस्टर काबरा और सिंगापुर की मिस डेथ जैसे नाम शामिल हैं। इन सबका एक ही मकसद है—दुनिया पर कब्जा करना, और उनके रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट है इन्द्र।

इन्द्र को फंसाने के लिए ‘डेथ स्क्वाड’ भेजा जाता है, जिसमें माकेनो, जांगा और एक अन्य योद्धा शामिल होते हैं। लगातार लड़ाइयों और थकान के कारण इन्द्र आखिरकार हार जाता है और पकड़ लिया जाता है। उसे एक गुप्त द्वीप पर ले जाया जाता है, जहाँ डेथ किंग का अड्डा होता है। इसी दौरान कहानी में इन्द्र के दोस्त प्रोफेसर विशाल की एंट्री होती है, जो न सिर्फ एक वैज्ञानिक हैं, बल्कि भारतीय सेना के साथ मिलकर खुद सुपरहीरो की वेशभूषा में मिशन पर निकलते हैं।
अंतिम टकराव में इन्द्र अपनी कैद तोड़कर बाहर आता है और गैलेक्सी, एंजेल और बारूद जैसे खतरनाक दुश्मनों से भिड़ता है। क्लाइमेक्स बेहद हिंसक और रोमांच से भरा हुआ है, जहाँ इन्द्र गैलेक्सी जैसे विलेन को दो टुकड़ों में काट देता है। आखिरकार भारतीय सेना और प्रोफेसर विशाल की मदद से उस आतंकी अड्डे को पूरी तरह तबाह कर दिया जाता है। हालांकि डेथ किंग और उसके कुछ साथी भाग निकलते हैं, जिससे आगे की कहानियों के लिए रास्ता खुला रह जाता है।
पात्र चित्रण (Character Analysis):

इन्द्र: इन्द्र इस कॉमिक का सबसे बड़ा आकर्षण है। वह एक साइबोर्ग सुपरहीरो है, जिसकी त्वचा धातु की बनी है। वह उड़ सकता है, बेहद भारी वजन उठा सकता है और उसकी आंखों से खतरनाक लेजर निकलती हैं। लेकिन उसे सिर्फ एक मशीन की तरह नहीं दिखाया गया है। वह एक संवेदनशील रक्षक भी है, जो आम लोगों की जान बचाने के लिए खुद को खतरे में डाल देता है।
डॉ. शैंगो: शैंगो एक क्लासिक मैड साइंटिस्ट है। इन्द्र के निर्माता होने के नाते उसका रिश्ता पिता जैसा होना चाहिए था, लेकिन उसका अहंकार और पागलपन उसे विलेन बना देता है। अंत में उसका मानसिक संतुलन खो देना उसके पतन को साफ दिखाता है।
प्रोफेसर विशाल: विशाल इन्द्र के लिए एक मार्गदर्शक और मददगार की भूमिका निभाते हैं। जब इन्द्र मुश्किल में होता है, तब विशाल अपनी समझ और साहस से हालात संभालते हैं। उनकी पीली-नीली सुपरहीरो ड्रेस कॉमिक में उन्हें अलग पहचान देती है।
डेथ किंग और आतंकी सिंडिकेट: इस कॉमिक की खास बात इसके विलेन हैं। अलग-अलग देशों के माफियाओं को एक साथ दिखाने से कहानी का स्तर अंतरराष्ट्रीय हो जाता है। गैलेक्सी और एंजेल जैसे किरदार इन्द्र को सीधी शारीरिक चुनौती देते हैं।
कला और चित्रांकन (Artwork and Illustration):

‘इन्द्र और शैंगो’ का चित्रांकन चव्हाण द्वारा किया गया है और यह पूरी तरह 90 के दशक की शैली को दर्शाता है। चित्र बेहद जीवंत और रंगीन हैं, खासकर एक्शन सीन काफी प्रभावशाली लगते हैं। जब इन्द्र फ्लाईओवर को थामता है, वह पैनल खास तौर पर याद रह जाता है। इन्द्र की चमकती चांदी जैसी बॉडी और विलेन की अजीब वेशभूषाएं पाठकों को एक अलग काल्पनिक दुनिया में ले जाती हैं। डेथ किंग के दरबार और अलग-अलग माफियाओं के लुक पर साफ मेहनत दिखाई देती है। भले ही आज के डिजिटल जमाने में रंगों का यह चटकीला अंदाज़ थोड़ा पुराना लगे, लेकिन इसमें एक खास तरह की नॉस्टेल्जिया और 90s वाली फील जरूर मौजूद है।
लेखन और संवाद (Writing and Dialogues):

कहानी नाज़रा खान द्वारा लिखी गई है और इसके संवाद काफी नाटकीय और असरदार हैं। शुरुआत से ही देशभक्ति का रंग पाठक को कहानी से जोड़ लेता है। इन्द्र के संवाद भले ही छोटे हों, लेकिन उनमें दम है। जब वह कहता है कि वह आतंकवादियों को चैन से नहीं बैठने देगा, तो उसकी दृढ़ इच्छा और नायक वाला तेवर साफ नजर आता है। वहीं दूसरी ओर, विलेन आपस में जो बातें करते हैं, उनसे उनके खतरनाक और निर्दयी इरादे खुलकर सामने आते हैं। हाँ, कुछ जगहों पर संवाद थोड़े लंबे जरूर लग सकते हैं, लेकिन वे कहानी को गहराई देने का काम करते हैं और इसलिए जरूरी भी हैं।
थीम्स और संदेश (Themes and Symbols):

इस कॉमिक का एक बड़ा विषय विज्ञान का दुरुपयोग है, जिसे डॉ. शैंगो के किरदार के जरिए दिखाया गया है। जब विज्ञान के साथ नैतिकता नहीं होती, तो वह विनाश का रास्ता बन जाता है। इन्द्र उसी विज्ञान की एक ऐसी रचना है, जो भलाई के लिए इस्तेमाल हो रही है, जबकि शैंगो के बाकी आविष्कार तबाही फैलाने के लिए बने हैं। इसके साथ ही यह कहानी उस दौर में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और अलग-अलग देशों के अपराधियों के आपसी गठजोड़ को एक वैश्विक खतरे के रूप में दिखाती है। खास बात यह है कि यहाँ सिर्फ सुपरहीरो को ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना और उसके साहस को भी पूरा सम्मान दिया गया है। अंत में सेना का दखल यह संदेश देता है कि बुराई को खत्म करने के लिए सुपरहीरो और सरकारी तंत्र, दोनों का साथ जरूरी है।
समीक्षात्मक विश्लेषण (Critical Evaluation):

सकारात्मक पक्ष:
कहानी की रफ्तार काफी तेज है, जिससे कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती। इन्द्र के चरित्र का विकास और उसकी ताकतों का प्रदर्शन बहुत अच्छे ढंग से किया गया है। ढेर सारे विलेन पूरी कहानी में रोमांच बनाए रखते हैं और फ्लाईओवर को बचाने वाला सीन तो भारतीय कॉमिक्स के सबसे यादगार दृश्यों में गिना जा सकता है।
नकारात्मक पक्ष:
कहानी में भौतिकी के नियमों को काफी हद तक नजरअंदाज किया गया है, जो सुपरहीरो कॉमिक्स में आम बात है, लेकिन कुछ मौकों पर यह थोड़ा अटपटा लगता है। इतने सारे विलेन होने के बावजूद कई दुश्मन बहुत जल्दी हार जाते हैं, जबकि उन्हें थोड़ा और समय मिलना चाहिए था। इसके अलावा कहानी का अंत थोड़ा जल्दबाजी में निपटाया गया लगता है, जहाँ ज्यादातर विलेन या तो हार मान लेते हैं या भाग खड़े होते हैं।
निष्कर्ष:
‘इन्द्र और शैंगो’ सिर्फ एक कॉमिक नहीं है, बल्कि उस दौर की याद दिलाने वाली कृति है, जब बच्चे टीवी छोड़कर इन पन्नों में अपनी अलग दुनिया तलाशते थे। यह साहस, तकनीक और न्याय की जीत की कहानी है। मनोज कॉमिक्स ने इसके जरिए एक ऐसे नायक को पेश किया है, जो भारतीय मिट्टी से जुड़ा है, लेकिन जिसकी लड़ाई पूरी दुनिया के स्तर पर है।
अगर आप भारतीय कॉमिक्स के शौकीन हैं या अपनी पुरानी यादों को ताज़ा करना चाहते हैं, तो ‘इन्द्र और शैंगो’ वाकई एक मस्ट-रीड कॉमिक है। यह कहानी सिखाती है कि चाहे बुराई कितनी भी संगठित क्यों न हो, मजबूत इरादों वाला नायक उसे हरा सकता है। इन्द्र का यह सफर रोमांचक होने के साथ-साथ प्रेरणा देने वाला भी है।
रेटिंग: 4/5 ⭐
