‘वरण काण्ड‘, ‘ग्रहण काण्ड‘, ‘हरण काण्ड‘ और ‘शरण काण्ड‘ के बाद, इस श्रृंखला का पाँचवाँ भाग ‘दहन काण्ड’ पाठकों के सामने ऐसा दृश्य रखता है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने पहले नहीं की थी। यह कहानी का वह अहम मोड़ है, जहाँ नायक और खलनायक के बीच की साफ़ रेखा धीरे-धीरे धुंधली होने लगती है। यहाँ लड़ाई सिर्फ बाहर की नहीं है, बल्कि यह विचारों, भावनाओं और अस्तित्व से जुड़ी गहरी जंग बन जाती है।
कथानक की विस्तृत रूपरेखा (Detailed Plot Analysis)
‘दहन काण्ड’ की कहानी ठीक वहीं से आगे बढ़ती है, जहाँ ‘शरण काण्ड’ का अंत एक डरावने सस्पेंस के साथ हुआ था—नागराज का ‘ब्लैक नागराज’ में बदल जाना। पूरी कहानी को पाँच मुख्य अध्यायों में बाँटा गया है, और हर अध्याय इतनी तेजी से आगे बढ़ता है कि पाठक को एक पल के लिए भी आराम करने का मौका नहीं मिलता।
अध्याय 1: नाग शक्ति (The Serpent Power)

कहानी की शुरुआत अलंध्या से होती है, जो क्रूरपाशा के साम्राज्य के पास स्थित है। यहाँ युवराज विषांक अपनी नाग सेना के साथ विसर्पी को छुड़ाने के लिए पहुँचता है। दूसरी ओर, क्रूरपाशा उसे अपमानित करने और तोड़ने के लिए ‘ब्लैक हॉक’ यानी काले गरुड़ की शक्तियों का सहारा लेता है। इस अध्याय में साफ़ दिखाया गया है कि नाग जाति और गरुड़ जाति की सदियों पुरानी दुश्मनी अब ‘ब्लैक पावर्स’ के जुड़ने से और भी खतरनाक हो गई है। विषांक की बहादुरी और क्रूरपाशा के घमंड के बीच चल रहा यह टकराव पाठकों को रोमांच से भर देता है।
अध्याय 2: ब्लैक नागराज (The Fall of a Hero)
यह इस कॉमिक्स का सबसे अहम और सबसे अंधकारमय अध्याय है। डार्क वुड के घने जंगलों में नागराज अब पूरी तरह से ‘ब्लैक पावर्स’ के कब्जे में आ चुका है। उसका शरीर काले रंग में बदल चुका है और उसकी आँखों में अब करुणा नहीं, बल्कि क्रूरता झलकती है। वह अब मानवता का रक्षक नहीं रहा, बल्कि क्रूरपाशा का सबसे ताकतवर योद्धा बन गया है। दूर से बाबा गोरखनाथ और धनंजय इस विनाश को देखते हैं, लेकिन वे भी खुद को असहाय महसूस करते हैं। नागराज का अपने ही गुरु ‘द्रोण’ (बायो-रोबोट) से आमना-सामना होना एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य बन जाता है। द्रोण उसे ‘मृत्यु-ऊर्जा’ से रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन ब्लैक नागराज की शक्तियाँ अब दिव्य अस्त्रों से भी आगे निकल चुकी हैं।

अध्याय 3: जेनरेशन नेक्स्ट (The Personal Conflict)
उधर महानगर यानी Underground City के भीतर, सुपर कमांडो ध्रुव की निजी ज़िंदगी पूरी तरह बिखर चुकी है। नताशा और ग्रैंड मास्टर रोबो शहर की हवा और पानी की सप्लाई रोक देते हैं, ताकि वे अपने शासन की नींव मजबूत कर सकें। ध्रुव का बेटा ऋषि अपनी ही माँ नताशा के पास कैद है। इसी बीच ‘ब्लैक कैट’ यानी रिचा की एंट्री होती है, जो नताशा के चंगुल से ऋषि को बचाने की कोशिश करती है। यह अध्याय दिखाता है कि चाहे सुपरहीरो कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह अपने परिवार, रिश्तों और वफादारी के बीच किस तरह टूटता और जूझता है।
अध्याय 4: मेरा पुत्र विषांक (The Biological Secret)
इस अध्याय में कहानी का एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला रहस्य सामने आता है। क्रूरपाशा और गुरुदेव के बीच हुए संवाद से पता चलता है कि विषांक का जन्म सामान्य तरीके से नहीं हुआ था। उसे एक कृत्रिम गर्भाशय (Artificial Womb) में नागपाशा की कोशिकाओं और नागद्वीप के मृत राजा मणिराज की भस्म को मिलाकर बनाया गया था। इस तरह विषांक आधा मणिराज का पुत्र है और आधा नागपाशा का। यह खुलासा कहानी के भावनात्मक स्तर को पूरी तरह हिला देता है और विषांक के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर देता है।

अध्याय 5: छल (The Grand Deception)
अंतिम अध्याय ‘छल’ पूरी तरह से नगीना की चालों और साज़िशों पर टिका हुआ है। वह ‘साकार-आकार’ नाम की मायावी शक्ति के रूप में नागराज के सामने आती है। नागराज, जो अब ब्लैक नागराज बन चुका है, उसे पहचान नहीं पाता। नगीना उसे और गहरे अंधकार में धकेलने के लिए अपनी चालें चलती रहती है। इसी दौरान ध्रुव को यह सच्चाई पता चलती है कि जिस ‘ब्लैक बिल्डर’ दैत्य से वह अब तक लड़ रहा था, वह असल में काली शक्तियों द्वारा रचा गया एक भ्रम और जाल था।
पात्रों का गहन विश्लेषण (Character Deep Dive)
नागराज: मर्यादा पुरुषोत्तम से ‘ब्लैक नागराज’ तक
इस भाग में नागराज का चित्रण पूरी तरह एक त्रासदी की तरह सामने आता है। जो नायक पूरी दुनिया को बचाने के लिए निकला था, वही अब बुराई का हथियार बन चुका है। उसकी वह चीख— “जय सम्राट क्रूरपाशा!”— किसी भी नागराज प्रशंसक का दिल तोड़ सकती है। अनुपम सिन्हा ने नागराज के अंदर चल रहे मानसिक संघर्ष को उसके चेहरे के भावों और शरीर की बनावट के ज़रिए बेहद प्रभावी ढंग से दिखाया है।

सुपर कमांडो ध्रुव: वफादारी की परीक्षा
ध्रुव इस पूरी श्रृंखला का असली ‘रणनीतिकार’ बनकर उभरता है। भले ही उसका सबसे करीबी मित्र नागराज बदल चुका हो, लेकिन ध्रुव का विश्वास अब भी अडिग है। वह एक साथ दो मोर्चों पर लड़ रहा है—एक तरफ नागराज को बचाने की कोशिश और दूसरी तरफ अपने परिवार, यानी नताशा और ऋषि, को संभालने की जद्दोजहद। ध्रुव और रिचा के बीच का तालमेल, साथ ही ध्रुव द्वारा ‘स्निफर’ ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल, उसे आधुनिक दौर का एक मजबूत सुपरहीरो साबित करता है।
क्रूरपाशा और नगीना: बुराई का गठबंधन

क्रूरपाशा अब सिर्फ नागपाशा तक सीमित नहीं रहा। वह अब एक ऐसे राक्षस में बदल चुका है, जो पूरे ब्रह्मांड का स्वामी बनने के सपने देखता है। वहीं नगीना अब भी पर्दे के पीछे रहकर खेल खेल रही है। उसका ‘गीना’ और ‘साकार-आकार’ जैसे अलग-अलग रूप धारण करना यह साफ़ दिखाता है कि वह इस पूरी महागाथा की सबसे चालाक और खतरनाक विलन है।
विषांक और रानी यति:
विषांक का चरित्र बहादुरी और गहरे दुख का अनोखा मेल है। वह अपनी माँ विसर्पी को बचाने के लिए अपनी जान तक दाँव पर लगा देता है, लेकिन अंत में उसे यह सच्चाई पता चलती है कि उसका पूरा अस्तित्व ही एक प्रयोग का नतीजा है। रानी यति और जिंगालू की मौत का बदला लेने की उनकी तड़प यति सेना को एक नया मकसद और नई दिशा देती है।
कला और चित्रांकन: अनुपम सिन्हा की मास्टरक्लास (Artistic Excellence)

‘दहन काण्ड’ का चित्रांकन भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री की एक बेहतरीन मिसाल है, जहाँ अनुपम सिन्हा की ड्रॉइंग और सुनील कुमार का रंग संयोजन मिलकर पाठकों को एक दमदार और जीवंत अनुभव देते हैं। ब्लैक नागराज का नया रूप—उसका काला पड़ता शरीर, उभरी हुई नसें और आँखों में जलती लाल चमक—उसे सिर्फ डरावना ही नहीं, बल्कि बेहद प्रभावशाली भी बनाती है। यही रूप द्रोण के साथ उसके महायुद्ध और ध्रुव के ‘ब्लैक बिल्डर’ के साथ होने वाली तेज़ और ऊर्जा से भरी लड़ाइयों में जान डाल देता है। इस कॉमिक्स की असली ताकत इसके इमोशनल पैनलिंग में भी दिखाई देती है, जैसे वह दृश्य जहाँ नताशा को ऋषि में ध्रुव की झलक दिखती है या फिर नागराज की अंदरूनी पीड़ा, जो बिना किसी संवाद के ही पाठकों के दिल को छू जाती है। इसके साथ ही, काली शक्तियों को दिखाने के लिए बैंगनी और हरे रंगों का इस्तेमाल और दहन की आग के लिए नारंगी-लाल रंगों का कंट्रास्ट पूरे माहौल में एक गहरा तनाव पैदा करता है, जो इस अंक को दृश्य रूप से लंबे समय तक यादगार बना देता है।
तकनीकी और वैज्ञानिक पहलू (Science vs. Myth)

‘नागायण’ सीरीज की सबसे बड़ी खासियत प्राचीन मंत्रों और आधुनिक विज्ञान का अनोखा मेल है, जो इसे एक अलग ही तरह का ‘साइंटिफिक थ्रिलर’ बना देता है। एक तरफ ध्रुव द्वारा रिचा की बीमारी के इलाज में इस्तेमाल किए गए DNA एनालाइजर और बायो-स्कैन जैसे उपकरण कहानी को तर्क और विज्ञान से जोड़ते हैं, वहीं विषांक के जन्म का वैज्ञानिक आधार, यानी Artificial Womb, इसे और भी विश्वसनीय बनाता है। दूसरी ओर, नागराज के दिव्य अस्त्रों और क्रूरपाशा की ‘ब्लैक कोकून’ मृत्यु-ऊर्जा के बीच का टकराव कहानी को एक भव्य महाकाव्य जैसा रूप दे देता है। इसके अलावा, कॉमिक्स के बैकग्राउंड में 2025 की दुनिया का चित्रण—जहाँ ग्लोबल वार्मिंग के कारण इंसानों को भूमिगत मेगासिटीज में रहना पड़ रहा है—पर्यावरण विनाश की एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आता है। यही वजह है कि यह कहानी सिर्फ एक सुपरहीरो एडवेंचर न रहकर सामाजिक मुद्दों से भी गहराई से जुड़ जाती है।
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संदेश (Social & Psychological Depth)

यह कॉमिक्स केवल एक सुपरहीरो कहानी बनकर नहीं रुकती, बल्कि कई गहरे सामाजिक और दार्शनिक सवाल भी उठाती है। यहाँ नायक की मजबूरी और उसकी कमजोरियों को साफ़ तौर पर दिखाया गया है, जहाँ यह सवाल सामने आता है कि क्या कोई महान नायक भी हालात के दबाव में अपनी नैतिकता खोकर बुराई की राह पर चल सकता है। साथ ही, ध्रुव और नताशा के तलाक और उनके बेटे की कस्टडी को लेकर चल रहा संघर्ष यह बताता है कि असाधारण शक्तियों के बावजूद एक सुपरहीरो का निजी जीवन भी एक आम इंसान की तरह उलझनों और भावनात्मक टूटन से भरा हो सकता है। अंत में, विषांक का अपने अस्तित्व के सच से सामना—कि वह वैज्ञानिक तरीके से बनाया गया एक ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ है—उस गहरे अस्तित्व संकट (Existential Crisis) को दिखाता है, जो किसी भी इंसान को मानसिक रूप से तोड़ सकता है।
समीक्षा: सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष

सकारात्मक पक्ष (Pros):
‘नागायण’ सीरीज का जबरदस्त सस्पेंस और इसका विशाल कैनवास इसे भारतीय कॉमिक्स इतिहास की ऊँचाइयों तक ले जाता है। हर अध्याय ऐसे मोड़ पर खत्म होता है कि पाठक अगले भाग का इंतज़ार किए बिना रह ही नहीं पाता। लेखक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक साथ चार-पाँच जटिल कहानियाँ—जैसे विषांक का युद्ध, नागराज का पतन, ध्रुव का पारिवारिक संघर्ष और नगीना की खतरनाक चालें—समानांतर चलते हुए भी कहानी कभी भटकती नहीं है। इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसका डार्क और गंभीर टोन है, जो परिपक्व पाठकों को नागराज की अब तक की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण यात्रा पर ले जाता है, जहाँ चमक-धमक से ज़्यादा अंधकार, पीड़ा और कड़वे सच सामने आते हैं।
नकारात्मक पक्ष (Cons):
‘नागायण’ सीरीज की जटिलता और इसकी लंबी कहानी कुछ पाठकों के लिए चुनौती बन सकती है। अगर किसी ने पहले के चार भाग नहीं पढ़े हैं, तो उसके लिए ‘दहन काण्ड’ को पूरी तरह समझ पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, आठ भागों में फैली यह सीरीज धैर्य की परीक्षा ज़रूर लेती है, हालाँकि इसका रोमांच अंत तक पाठकों को बाँधे रखता है।
भविष्य की उम्मीदें

‘दहन काण्ड’ ने अपने समय में पाठकों के बीच जबरदस्त हलचल मचा दी थी। नागराज को खलनायक के रूप में देखना किसी झटके से कम नहीं था। कहानी के अंत में जब विषांक क्रूरपाशा को मार गिराने का दावा करता है और नागराज की हालत अनिश्चित बनी रहती है, तो पाठकों का उत्साह अगले भाग ‘रण काण्ड’ के लिए चरम पर पहुँच जाता है।
संपादक संजय गुप्ता ने ‘ग्रीन पेज’ में बिल्कुल सही कहा है कि यह सीरीज राज कॉमिक्स के लिए एक सच्चा ‘जुनून’ है। साथ ही, इसमें दी गई ‘प्रेम-बला’, ‘वफादार’ और ‘फास्ट फॉरवर्ड’ जैसी दूसरी कॉमिक्स के विज्ञापनों ने भी उस दौर में प्रशंसकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया था।
अंतिम निष्कर्ष और रेटिंग
‘नागायण: दहन काण्ड’ राज कॉमिक्स की उन उपलब्धियों में से एक है, जिन पर नाज़ किया जा सकता है। यह साफ़ साबित करता है कि भारतीय सुपरहीरो कहानियाँ किसी भी मार्वल या डीसी यूनिवर्स से कम नहीं हैं। यह त्याग, वीरता और नायक के पतन की एक ऐसी यादगार गाथा है, जो सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो जाए, सच और दोस्ती—खासतौर पर ध्रुव की वफादारी—हमेशा कोई न कोई रास्ता खोज ही लेती है।
अगर आप भारतीय कॉमिक्स के प्रशंसक हैं और आपने अब तक ‘नागायण’ नहीं पढ़ी है, तो यकीन मानिए आप कॉमिक्स इतिहास के एक बेहद खास अध्याय से वंचित हैं।
अंतिम रेटिंग: 4/5 (Masterpiece)
