राज कॉमिक्स की ‘नागायण’ श्रृंखला भारतीय कॉमिक्स की दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी, सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे सफल सीरीज मानी जाती है। संजय गुप्ता की सोच और अनुपम सिन्हा की शानदार कला व लेखनी से सजी यह सीरीज रामायण के पौराणिक ढांचे को भविष्य की तकनीक, साइंस फिक्शन और सुपरहीरो फैंटेसी के साथ इस तरह जोड़ती है कि पाठक देखते ही रह जाता है।
‘वरण काण्ड’, ‘ग्रहण काण्ड’ और ‘हरण काण्ड’ की जबरदस्त सफलता के बाद इसका चौथा भाग ‘शरण काण्ड’ कहानी को उस मुकाम पर ले जाता है, जहाँ नायक अपनी हदों से आगे जाकर लड़ते हैं और विलेन अपनी बेरहमी की सारी सीमाएँ तोड़ देते हैं।
कथानक की विस्तृत रूपरेखा: खोई हुई उम्मीद और नया संघर्ष

‘शरण काण्ड’ की कहानी ठीक वहीं से शुरू होती है जहाँ ‘हरण काण्ड’ खत्म हुआ था—विसर्पी के अपहरण से। जैसे रामायण में माता सीता के अपहरण के बाद श्रीराम बेचैन हो जाते हैं, वैसे ही यहाँ नागराज भी अपनी पत्नी और अपनी नाग-शक्ति की जड़, विसर्पी को खोकर गहरे दुख और गुस्से में डूबा हुआ है।
अध्याय 1: विसर्पी की तलाश
कहानी के शुरुआती पन्नों में नागराज और ध्रुव उस जगह पहुँचते हैं जहाँ ‘बाधाबंध’ तिलिस्म टूटा था। वहीं उन्हें फ्लेमिना (नागजाति की एक सदस्य) घायल हालत में मिलती है। नागराज अपनी ‘सर्प-इंद्रियों’ से विसर्पी से जुड़ने की कोशिश करता है, लेकिन क्रूरपाशा यानी नागपाशा अपनी ‘ब्लैक पावर्स’ से उस संपर्क को बार-बार तोड़ देता है। इस पूरे हिस्से में ध्रुव एक बार फिर अपनी समझदारी और दिमागी ताकत से सामने आता है। वह अपने ‘स्निफर’ ड्रोन की मदद से क्रूरपाशा के यान की गंध और उसकी ऊर्जा के निशानों का पीछा करता है।
अध्याय 2: शिखांगी का साहस और बलिदान
इस भाग में बाबा गोरखनाथ अपनी शक्तियों से ‘शिखांगी’ को नागराज और ध्रुव की मदद के लिए भेजते हैं। शिखांगी एक बाज जैसी अलौकिक शक्ति रखने वाली योद्धा है। उसका सीधा सामना क्रूरपाशा के ‘गादड़ यान’ से होता है। यहाँ दिखाई गई लड़ाई बेहद रोमांचक है। शिखांगी अपनी बाज जैसी तेज़ नजरों से उस यान को ढूंढ निकालती है, जिसे आधुनिक विज्ञान, यानी धंजय का देव विज्ञान तक नहीं पकड़ पा रहा था। लेकिन क्रूरपाशा अपनी नई काली शक्तियों और ‘विशालकाय गोरिल्ला’ के ज़रिए शिखांगी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर देता है।

अध्याय 3: महानगर और टूटता परिवार
कहानी का एक और मोर्चा ‘अंडरग्राउंड मेगासिटी’ यानी महानगर में चलता है। यहाँ सुपर कमांडो ध्रुव की निजी ज़िंदगी पूरी तरह बिखर चुकी है। उसकी पत्नी नताशा, नगीना के जाल में फँसकर अपने बेटे ऋषि की कस्टडी लेकर ग्रैंड मास्टर रोबो के पास चली जाती है। उधर भारती, जो नागराज की पहली पत्नी है, कानून का सहारा लेकर नागराज को वापस शहर लाने की कोशिश करती है, लेकिन दादा वेदाचार्य की भविष्यवाणियाँ और उनका ‘अशुभ’ वाला डर इस रास्ते में बड़ी रुकावट बन जाता है।
अध्याय 4: मिशन अलंध्या और यतियों का हमला
विसर्पी का पीछा करते हुए नागराज एक ‘cave system’ यानी गुफाओं की पूरी श्रृंखला में प्रवेश करता है। यहाँ उसका सामना यतियों की एक पूरी सेना से होता है। ये कोई साधारण वन-मानव नहीं हैं, बल्कि ‘ब्लैक पावर्स’ से लैस खतरनाक योद्धा हैं, जो ‘अलंध्या’ यानी क्रूरपाशा के नए साम्राज्य की रक्षा कर रहे हैं। इस लड़ाई में नागराज को अपनी शारीरिक ताकत के साथ-साथ ‘प्रणोदास्त्र’ जैसे शक्तिशाली दिव्य हथियारों का भी सहारा लेना पड़ता है।
अध्याय 5: ब्लैक नागराज और चरम बिंदु
कॉमिक का सबसे बड़ा झटका आखिरी अध्याय में मिलता है। ‘डार्क वुड’ के जंगलों में नागराज एक मायावी जाल में फँस जाता है। यहाँ काली शक्तियों से बने ‘ब्लैक फ्रूट्स’ उसके शरीर पर गिरते हैं। इन फलों का रस उसके रोम-छिद्रों में जाकर उसकी नाग-शक्तियों को काली शक्तियों में बदलने लगता है। आखिरी पन्नों में क्रूरपाशा और नगीना खुशी से झूम उठते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्होंने नागराज को ‘ब्लैक नागराज’ में बदलकर अपना गुलाम बना लिया है।

पात्रों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Character Arc)
नागराज: एक टूटा हुआ नायक?
‘शरण काण्ड’ में नागराज का किरदार बेहद जटिल रूप में सामने आता है। वह अपनी मर्यादा और अपने गुस्से के बीच फँसा हुआ है। विसर्पी का अपहरण सिर्फ एक निजी नुकसान नहीं है, बल्कि उसके आत्म-सम्मान पर भी गहरी चोट है। जब यति उसे ताना मारते हैं कि वह अपनी पत्नी की रक्षा नहीं कर सका, तो नागराज का दर्द पाठकों के दिल को छू जाता है। अंत में उसका ‘ब्लैक नागराज’ में बदलना इस सीरीज का सबसे अंधेरा और अनिश्चित मोड़ बन जाता है।
सुपर कमांडो ध्रुव: त्याग और रणनीति का मेल
इस भाग में ध्रुव एक सच्चे मित्र, लगभग हनुमान जी जैसी भूमिका निभाता है। उसका अपना परिवार बिखर चुका है, पत्नी उसे छोड़ चुकी है और बेटा रोबो के पास है, फिर भी वह नागराज का साथ नहीं छोड़ता। उसका ‘स्निफर’ ड्रोन और ‘ब्लैक बिल्डर’ जैसी शक्तियों से भिड़ना दिखाता है कि वह विज्ञान और हिम्मत के दम पर नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकता है।
विसर्पी: कैद में भी साहसी
विसर्पी इस हिस्से में क्रूरपाशा की कैद में है, लेकिन वह कमजोर या बेबस नहीं दिखाई देती। वह बार-बार क्रूरपाशा को याद दिलाती है कि उसका अंत करीब है। वह उसे ठुकराती है और अपनी गरिमा बनाए रखती है। विसर्पी और क्रूरपाशा के बीच के संवाद, जैसे—“तू मुझे ब्रह्मांड की महारानी बनाएगा? मैं तुझे नर्क का राजा बनाऊंगी!”—कहानी में जबरदस्त जोश भर देते हैं।

क्रूरपाशा और नगीना: बुराई की जोड़ी
क्रूरपाशा अब सिर्फ नागपाशा नहीं रह गया है, बल्कि वह खुद को ईश्वर समझने वाला एक घमंडी और भ्रमित सम्राट बन चुका है। दूसरी ओर नगीना असली चालाक दिमाग है। उसे पता है कि क्रूरपाशा को कब बहकाना है और कब उसे अपनी उँगलियों पर नचाना है। महानगर की शांति भंग करने के लिए रोबो और नताशा का इस्तेमाल करना उसकी सबसे बड़ी चालों में से एक है।
नताशा और ग्रैंड मास्टर रोबो:
यहाँ नताशा का किरदार थोड़ा नकारात्मक और मजबूर दिखाई देता है। वह अपनी माँ वाली भावना और रोबो के साथ अपने पुराने रिश्ते के बीच उलझी हुई है। वहीं रोबो का शहर की हवा और पानी की सप्लाई बंद कर लोगों को मारने की धमकी देना, उसकी पुरानी क्रूरता को एक बार फिर सामने ले आता है।
कला और चित्रांकन: अनुपम सिन्हा की जादुई दुनिया
अनुपम सिन्हा को भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री के सर्वश्रेष्ठ चित्रकारों में क्यों गिना जाता है, इसका सबसे बड़ा सबूत ‘शरण काण्ड’ का हर पन्ना है। इस कॉमिक में उनकी कला ने दृश्य प्रस्तुति के नए स्तर तय किए हैं। ‘ऊर्जास्त्रों’ और ‘दिव्यास्त्रों’ से निकलने वाली जादुई रोशनी और बिजली के सिनेमैटिक इफेक्ट्स के ज़रिए उन्होंने ‘ब्लैक बिल्डर’ जैसे ऊर्जा-दैत्यों को बेहद प्रभावशाली बना दिया है।
सिन्हा साहब की सबसे बड़ी ताकत पात्रों के गहरे भावों को उकेरने में दिखाई देती है। विसर्पी के अपहरण के बाद नागराज की टूटन और बेबसी, और दूसरी ओर क्रूरपाशा की डरावनी मुस्कान—ये सब बिना किसी संवाद के भी बहुत कुछ कह जाती हैं। उनकी डायनेमिक पैनलिंग शैली, जिसमें पात्र पैनल की सीमाएँ लांघते हुए एक फ्रेम से दूसरे में जाते हैं, शिखांगी और गादड़ यान के बीच हवा में होने वाली लड़ाई जैसे दृश्यों में कहानी की रफ्तार को चरम पर पहुँचा देती है।
इस शानदार कला को सुनील पाण्डेय का रंग संयोजन और भी प्रभावशाली बना देता है। अलंध्या की गुफाओं में गहरे नीले और बैंगनी रंग काली शक्तियों के डर को जीवंत कर देते हैं, जबकि बाहरी दृश्यों में प्राकृतिक रंगों का संतुलन कहानी के मूड को पूरी तरह संभाले रखता है।

तकनीकी और दार्शनिक पहलू (Sci-Fi vs. Mysticism)
‘नागायण’ सीरीज की सबसे बड़ी खूबी ‘मंत्र’ और ‘यंत्र’ का संतुलित मेल है, जो कहानी को सिर्फ एक फैंटेसी न बनाकर एक गहरे सामाजिक विमर्श में बदल देता है। पन्ना संख्या 46 पर यतियों द्वारा ग्लोबल वार्मिंग और बर्फ पिघलने का ज़िक्र लेखक की पर्यावरण के प्रति जागरूक सोच को दिखाता है, जिससे कहानी में यथार्थ का एक गंभीर पहलू जुड़ जाता है।
इसी तरह ध्रुव और नताशा के ज़रिए दिखाई गई ‘कानून बनाम नैतिकता’ की लड़ाई एक कड़वी सच्चाई सामने रखती है कि कैसे नगीना जैसे लोग कानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर न्याय को कुचल सकते हैं। इसी कारण ध्रुव को अपने ही बेटे से दूर होना पड़ता है। कहानी का सबसे ज़बरदस्त मोड़ ‘ब्लैक नागराज’ का जन्म है, जो यह गहरा संदेश देता है कि सबसे महान नायक भी अगर गुस्से और हालात के वश में आ जाए, तो वह अपने आदर्शों से भटक कर पतन की राह पकड़ सकता है।
समीक्षा: सबल और निर्बल पक्ष
सबल पक्ष (Strengths):
हर अध्याय ऐसे मोड़ पर खत्म होता है कि पाठक अपने आप अगला पन्ना पलटने को मजबूर हो जाता है। एक ही समय में तीन-चार अलग-अलग कहानियों—नागराज का संघर्ष, ध्रुव की रणनीति, महानगर का संकट और विसर्पी की कैद—को बिना उलझाए आगे बढ़ाना लेखक की बड़ी खूबी है। यहाँ सिर्फ हाथ-पैर की लड़ाई नहीं है, बल्कि हवाई युद्ध, जादुई अस्त्र और तकनीकी हथियारों का शानदार मेल देखने को मिलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि सुपरहीरो यहाँ सिर्फ लड़ते नहीं हैं, बल्कि रोते हैं, डरते हैं और गलतियाँ भी करते हैं।
निर्बल पक्ष (Weaknesses):
जो नए पाठक पहले के तीन भाग नहीं पढ़ चुके हैं, उनके लिए इस कहानी को पूरी तरह समझ पाना काफी मुश्किल हो सकता है।
पात्रों की संख्या इतनी ज़्यादा है कि कई बार मुख्य पात्रों, खासकर नागराज और ध्रुव, का स्क्रीन-टाइम थोड़ा कम लगता है।
पाठकों पर प्रभाव और भविष्य की उम्मीदें

‘शरण काण्ड’ पाठकों को भावनाओं के एक ज़बरदस्त रोलर-कोस्टर पर बैठा देता है। अंत में नागराज की भयावह हालत और विसर्पी का टूटकर रोना किसी भी प्रशंसक का दिल तोड़ सकता है। यह भाग साफ साबित करता है कि ‘नागायण’ सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की एक गहरी कहानी है।
अब पूरी जिम्मेदारी सुपर कमांडो ध्रुव और बाबा गोरखनाथ पर आ जाती है कि वे नागराज को काली शक्तियों से कैसे मुक्त कराते हैं और विसर्पी को वापस लाते हैं। आख़िर में दिया गया संकेत—“गाथा जारी है—दहन काण्ड में!”—पाठकों का उत्साह चरम पर पहुँचा देता है।
अंतिम निष्कर्ष और रेटिंग
‘नागायण: शरण काण्ड’ राज कॉमिक्स की एक ऐसी उपलब्धि है, जिस पर गर्व किया जा सकता है। यह हमें सिखाती है कि जब चारों ओर अंधेरा और काली शक्तियाँ हावी हों, तब एक सच्चे मित्र की वफादारी और नायक का दृढ़ संकल्प ही दुनिया को बचा सकता है। यह कॉमिक वीरता, प्रेम, साज़िश और बलिदान का एक बेहतरीन मिश्रण है।
अगर आप भारतीय सुपरहीरो कहानियों को गंभीरता से लेते हैं, तो ‘नागायण’ सीरीज और खास तौर पर ‘शरण काण्ड’ आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए। यह सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि बड़ों के लिए भी एक दमदार ‘सोप ओपेरा’ और ‘एक्शन थ्रिलर’ का मेल है।
अंतिम रेटिंग: 4.9/5
