80 के दशक के आख़िरी सालों में, जब भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री अपनी पहचान बनाने के लिए जूझ रही थी, उसी दौर में राज कॉमिक्स ने एक ऐसे किरदार को पेश किया जिसने न सिर्फ बच्चों की कल्पना की दुनिया को नया रंग दिया, बल्कि भारतीय पल्प फिक्शन और सुपरहीरो शैली को भी एक बिल्कुल नई दिशा दिखा दी। वह किरदार था नागराज। नागराज की पहली कॉमिक्स सिर्फ एक कहानी भर नहीं थी, बल्कि एक बड़े और विशाल सुपरहीरो यूनिवर्स की नींव थी। परशुराम शर्मा द्वारा लिखी गई और दिग्गज चित्रकार प्रताप मुल्लिक द्वारा बनाई गई यह कॉमिक आज भी एक कल्ट क्लासिक मानी जाती है।
कथानक का विस्तार (Plot Summary)
कहानी की शुरुआत बर्मा (आज का म्यांमार) की राजधानी रंगून से होती है, जहाँ दुनिया भर के खतरनाक आतंकवादी संगठनों के सरगना एक गुप्त बैठक के लिए इकट्ठा होते हैं। इस बैठक का आयोजन करता है प्रोफेसर नागमणि, जो एक बेहद चालाक और महत्त्वाकांक्षी वैज्ञानिक है। नागमणि इन अपराधियों के सामने अपने सबसे खतरनाक आविष्कार को दिखाना चाहता है—एक ऐसा हथियार जो मांस और हड्डियों से बना है, लेकिन किसी भी आधुनिक मशीन से कहीं ज़्यादा घातक है। यही हथियार है नागराज।

नागराज को एक ऐसे इंसान के रूप में दिखाया जाता है जिसके शरीर के अंदर सूक्ष्म सांप (Microscopic snakes) रहते हैं। अपने दावों को साबित करने के लिए नागमणि दुनिया के चार सबसे बेहतरीन निशानेबाज़ों—जानू, यूसुफ बिन अली खान, डॉन और हुड—को बुलाता है। ये सभी नागराज पर गोलियां चलाते हैं, लेकिन नागराज की फुर्ती और उसके शरीर से निकलने वाले सांप पलक झपकते ही उन्हें हरा देते हैं। इसके बाद नागराज अपनी हैरान कर देने वाली उपचार शक्ति (Healing power) दिखाता है, जहाँ उसके शरीर के सांप उसके घावों को तुरंत भर देते हैं।
इसके बाद प्रोफेसर नागमणि नागराज को दुनिया के सबसे ऊँचे दामों पर बेचने के लिए नीलामी शुरू करता है। आख़िरकार “मिस्टर बुलडॉग” नाम का एक अपराधी एक लाख डॉलर की बोली लगाकर नागराज को एक मिशन के लिए किराए पर ले लेता है। यह मिशन है—असम के घने जंगलों में बसे एक कबीले के प्राचीन मंदिर से एक बेहद कीमती मूर्ति चुराना।

यहीं से कहानी एक नया मोड़ लेती है। नागराज, जो अब तक नागमणि के ब्रेन कंट्रोल में एक गुलाम की तरह काम कर रहा था, मंदिर तक पहुँचता है। वह वहाँ मौजूद रक्षक सांपों और कबीले के योद्धाओं से लड़ता है और मूर्ति चुराने में सफल भी हो जाता है। लेकिन उसकी राह में सबसे बड़ी रुकावट बनकर सामने आते हैं महात्मा गोरखनाथ। बाबा गोरखनाथ एक सिद्ध पुरुष हैं, जिनके पास गहरी आध्यात्मिक शक्तियाँ हैं और साथ ही उनके पास एक खास काला नेवला (शिकांगी) भी है, जो नागराज के सांपों का सबसे बड़ा दुश्मन है।
बाबा गोरखनाथ अपनी शक्तियों से नागराज को रोक लेते हैं और उसे सम्मोहन की अवस्था में ले जाकर उसके अतीत से रू-बरू कराते हैं। यहीं पाठक को नागराज की असली उत्पत्ति, यानी उसकी Origin Story, पता चलती है।
नागराज की उत्पत्ति: विज्ञान और तंत्र का संगम

बाबा गोरखनाथ के ज़रिए हमें यह पता चलता है कि नागराज कोई मशीन नहीं है, बल्कि वह एक दैवीय संयोग और नागमणि की बेरहमी का नतीजा है। कई साल पहले, एक इच्छाधारी नाग ने अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए नागमणि को एक नवजात शिशु सौंपा था। उस नाग ने अपनी देह त्याग दी और नागमणि को निर्देश दिया कि वह उसकी भस्म और विष का इस्तेमाल करके इस बच्चे को अपार शक्तियों से भर दे।
नागमणि ने उस बच्चे, यानी नागराज, पर पूरे 20 वर्षों तक अमानवीय प्रयोग किए। उसे हज़ारों ज़हरीले सांपों से कटवाया गया, उसके खून को ज़हर में बदला गया और आखिर में उसके दिमाग में एक माइक्रो-चिप (कैप्सूल) लगा दी गई, ताकि वह हमेशा नागमणि के नियंत्रण में बना रहे।
बाबा गोरखनाथ अपनी योगिक शक्तियों से उस चिप को नष्ट कर देते हैं, जिससे नागराज नागमणि के मानसिक नियंत्रण से आज़ाद हो जाता है। जब नागराज को होश आता है, तो उसे अपनी अब तक की गई गलतियों का एहसास होता है। वह मानवता की रक्षा करने का संकल्प लेता है और यहीं से उसका सफर बदल जाता है। अब वह “आतंकवाद का मसीहा” नहीं, बल्कि “आतंकवाद का विनाशक” बन जाता है।
चरित्र चित्रण (Character Analysis)

नागराज: पहली कॉमिक्स में नागराज का चरित्र काफ़ी जटिल नजर आता है। शुरुआत में वह एक तरह के एंटी-हीरो जैसा लगता है, जो बिना किसी भावना के हत्याएँ करता है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वह एक न्याय के लिए लड़ने वाले नायक के रूप में उभरता है। उसकी वेशभूषा—पीले और काले सांपों के पैटर्न वाली स्किन-टाइट ड्रेस—उस दौर के हिसाब से बेहद नई और क्रांतिकारी थी, जो उसे बाकी सभी किरदारों से अलग पहचान देती है।
प्रोफेसर नागमणि: वह भारतीय कॉमिक्स के सबसे नफरत किए जाने वाले खलनायकों में से एक बनकर सामने आता है। उसका लालच और अपने ही ‘बेटे’ (पालक पुत्र) को गुलाम बनाकर रखने की सोच उसे एक बेहद खतरनाक और असरदार विलेन बनाती है।
बाबा गोरखनाथ: वह इस कहानी के मेंटोर यानी गुरु की भूमिका में हैं। उनका चरित्र यह साफ संदेश देता है कि विज्ञान चाहे जितना भी आगे बढ़ जाए, अंत में उसे अध्यात्म और प्रकृति की शक्तियों के सामने झुकना ही पड़ता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration Review)

प्रताप मुल्लिक का काम इस कॉमिक्स की असली जान है। उनके बनाए हुए नागराज के चित्र मांसपेशियों की बनावट (Anatomy) और एक्शन की गतिशीलता का शानदार उदाहरण हैं। कॉमिक्स के पैनल लेआउट में जिस तरह नागराज के शरीर से सांपों को बाहर निकलते हुए दिखाया गया है, वह आज भी पाठकों के मन में सिहरन पैदा कर देता है। रंगों का चुनाव—खासतौर पर नागराज का हरा और पीला शेड तथा बाबा गोरखनाथ के केसरिया वस्त्र—दृश्यों को जीवंत बना देता है। जंगलों के दृश्य और मंदिर की वास्तुकला में की गई बारीकियाँ उस दौर की दूसरी कॉमिक्स में बहुत कम देखने को मिलती हैं।
थीम और संदेश

यह कॉमिक्स सिर्फ भारतीय सुपरहीरो शैली के गोल्डन एज की नींव नहीं रखती, बल्कि इसके भीतर गहरे दार्शनिक संदेश भी छिपे हैं। नागमणि के किरदार के जरिए यह दिखाया गया है कि अगर विज्ञान के साथ नैतिकता न हो, तो वह कितना विनाशकारी बन सकता है। वहीं नागराज की यात्रा नियति और कर्म के सिद्धांत को सामने रखती है, जहाँ वह अपनी मानसिक गुलामी की बेड़ियाँ तोड़कर आखिरकार अधर्म से धर्म के रास्ते पर लौट आता है। आज के समय में इसकी तेज़ रफ्तार कहानी और शरीर के अंदर सांपों के रहने जैसे वैज्ञानिक तर्क भले ही थोड़े काल्पनिक लगें, लेकिन सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ के नजरिए से देखें तो यह एक कालजयी मास्टरपीस है, जो मुक्ति और आत्म-बोध के संघर्ष को बेहद प्रभावी ढंग से दिखाती है।
खूबियाँ:
यह कॉमिक्स एक मजबूत और बिल्कुल अलग तरह की ओरिजिन स्टोरी पेश करती है। इसमें भारतीय पौराणिक कथाओं में सांपों के महत्व और आधुनिक विज्ञान का अनोखा मेल देखने को मिलता है। शानदार विजुअल आर्टवर्क के साथ आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दे को पृष्ठभूमि में रखकर यह कहानी ऐसे नायक का निर्माण करती है, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाता है। नागराज का चरित्र यह सिखाता है कि कोई भी नायक अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भी दुनिया की बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकता है, और यही बात उसे एक साधारण काल्पनिक पात्र से ऊपर उठाकर एक सांस्कृतिक प्रतीक बना देती है।

कमियां:
शुरुआती पन्नों में नागराज को जरूरत से ज्यादा क्रूर दिखाया गया है, जो बच्चों के लिए थोड़ा असहज हो सकता है। वहीं अंत में बाबा गोरखनाथ द्वारा नागराज का हृदय परिवर्तन कुछ जल्दी-जल्दी होता हुआ सा महसूस होता है।
निष्कर्ष: एक अमर नायक का जन्म
राज कॉमिक्स की ‘नागराज’ की यह पहली कड़ी भारतीय पॉप-कल्चर का एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। इसने न केवल नागराज को एक ब्रांड के रूप में स्थापित किया, बल्कि भारतीय बच्चों को सुपरमैन और बैटमैन के मुकाबले अपना एक स्वदेशी नायक भी दिया। 31 पन्नों की यह यात्रा पाठकों को रोमांच, रहस्य और दर्शन के ऐसे सफर पर ले जाती है, जो 30–40 साल बाद भी उतना ही ताज़ा लगता है।
अगर आप भारतीय कॉमिक्स के प्रशंसक हैं, तो यह कहानी आपके लिए ‘गीता’ या ‘बाइबिल’ जैसी अहमियत रखती है। यह हमें सिखाती है कि हमारी शक्तियाँ हमें महान नहीं बनातीं, बल्कि हमारे चुनाव (Choice) हमें नायक बनाते हैं। नागराज ने मानवता की रक्षा का जो सफर असम के जंगलों से शुरू किया था, वह आज भी करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में ज़िंदा है।
रेटिंग: 4.5/5
