राज कॉमिक्स ने अपनी ‘आखरी’ श्रृंखला के जरिए भारतीय सुपरहीरो कहानियों में एक नया कीर्तिमान बनाया। यह सफर ‘आखरी रक्षक’ से शुरू हुआ और आठवें और आखिरी अंक ‘ब्रह्मांड संहिता’ (The Universal Code) तक पहुँचा। यह अंक सिर्फ कहानी का अंत नहीं, बल्कि बलिदान, कर्तव्य, विज्ञान और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत मेल भी दिखाता है। जहाँ पूरी दुनिया ‘ट्रांसफ्यूजन’ की वजह से अलग-अलग ग्रहों पर बिखर चुकी थी, वहीं यह अंक उन बिखरे हुए हिस्सों को जोड़कर ब्रह्मांड का संतुलन वापस लाने की कहानी बताता है।
कथानक का विस्तार: अंतिम संघर्ष

कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ ‘ब्रह्मांड विस्मरण’ खत्म हुई थी। ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली नायक ‘परमाणु’ (विनय) अब दुश्मन का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। ‘विकृत’ (सी-थ्रू और प्रोफेसर इब्रित विकराल का मिला-जुला रूप) ने परमाणु के शरीर और उसकी असीमित ‘ब्रह्म-कण’ ऊर्जा पर कब्जा कर लिया है।
अंतरिक्ष में महायुद्ध: शक्ति बनाम विकृत
अंक के पहले पन्ने ही एक महासंग्राम दिखाते हैं। देवी ‘शक्ति’ और ‘विकृत’ (परमाणु के शरीर में) के बीच भीषण युद्ध होता है। लेखक ने ‘शक्ति’ के महाकाली रूप और विकृत की आसुरी शक्तियों के टकराव को बहुत ही रोचक और दमदार ढंग से दिखाया है। ध्रुव और नागराज इस युद्ध को देखते हैं और समझते हैं कि विकृत को सीधे हराना मुश्किल है क्योंकि वह परमाणु के शरीर को ढाल बना रहा है।

ध्रुव की रणनीति और ‘निंजा देव किरिशी’ का प्रवेश
सुपर कमांडो ध्रुव, अपनी बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध, यहाँ बड़ा कदम उठाता है। वह जानता है कि विकृत को शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से हराना होगा। अपनी मानसिक तरंगों के जरिए वह ‘निंजा देव किरिशी’ (Ninja Dev Kirishi) को बुलाता है। किरिशी, जो अंतरिक्ष के निर्वात में बेहोश था, ध्रुव के संपर्क से जाग जाता है।
ध्रुव किरिशी को बताता है कि वह अपनी योगिक शक्तियों (Yogic Powers) का इस्तेमाल करके परमाणु के शरीर में विकृत के मानसिक रूप को उलझा दे। यह हिस्सा कहानी में ‘योग’ और ‘विज्ञान’ के अद्भुत संगम को दिखाता है।
‘कारा’ का रहस्य: कृतिका की सच्चाई
पूरी श्रृंखला में ‘कारा’ (Kara) एक रहस्य बनी रही। इस अंक में पता चलता है कि असली कारा पहले ही मर चुकी थी। वर्तमान में जो कारा नायकों की मदद कर रही थी, वह असल में प्रोफेसर विकराल की असिस्टेंट कृतिका थी। मरने से पहले असली कारा ने अपनी यादें और ज्ञान एक ब्रेसलेट के जरिए कृतिका को दे दिया था।
यह खुलासा कहानी को भावनात्मक मजबूती देता है। कृतिका, जो सामान्य इंसान थी, अब कारा की यादों के प्रभाव में ब्रह्मांडीय योद्धा की तरह काम करती है। वह कोलाइडर मशीन की सेटिंग्स को ‘रिवर्स’ (उल्टा) करने में नायकों की मदद करती है।
अन्य ग्रहों का मोर्चा: डोगा, स्टील और तिरंगा

मुख्य नायक अंतरिक्ष में लड़ रहे हैं, वहीं ‘मैक्ट्रियाम’ और ‘हेज्ट्रो’ जैसे ग्रहों पर डोगा, इंस्पेक्टर स्टील, तिरंगा और अन्य ब्रह्मांड रक्षक (परशुराम, चेकर, गगन, अडिग) लड़ाई कर रहे हैं।
डोगा: यहाँ डोगा की ‘जिद’ और ‘जुनून’ को नई परिभाषा दी गई है। वह मशीनी हमलावरों से लड़ते हुए कहता है कि “ताकत शारीरिक बल से नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति से आती है।”
मिस्टर रसायन: पिछले अंक में शहीद हुए मिस्टर रसायन का प्रभाव अभी भी दिखता है। नायक उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर लड़ाई जारी रखते हैं।
तिरंगा और कफन: हेज्ट्रो ग्रह पर तिरंगा की बहादुरी देखकर परग्रहियों को यह महसूस होता है कि “पृथ्वीवासी तकनीक में पीछे हो सकते हैं, लेकिन उनके पास ‘इंसानियत’ का जो हथियार है, वह पूरे ब्रह्मांड में किसी के पास नहीं।”
चरमोत्कर्ष (Climax): परमाणु का अंतिम बलिदान

कहानी का सबसे भावुक और निर्णायक हिस्सा तब आता है जब ध्रुव और नागराज समझते हैं कि ‘ट्रांसफ्यूजन’ की प्रक्रिया पूरी तरह रोकने के लिए परमाणु को कोलाइडर मशीन में जाना होगा। अब परमाणु का शरीर पूरी तरह ‘ब्रह्म-कण’ का रिएक्टर बन चुका है।
विकृत के कब्जे से मुक्त होने के बाद परमाणु (विनय) को अपनी नियति समझ आती है। उसे पता है कि अगर वह पृथ्वी पर रहा, तो उसकी ऊर्जा पूरी धरती को तबाह कर देगी। ध्रुव और नागराज उसे रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन परमाणु मुस्कुराते हुए कहता है—
“निश्चित मौत को भी मुस्कुराकर चैलेंज करने की ताकत केवल एक इंसान के पास थी, शायद इसलिए लोग उसे वंडरमैन कहते थे।”
परमाणु अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों की ओर उड़ जाता है। वह अपनी प्रेमिका शीना को मानसिक संदेश भेजता है और फिर एक भीषण विस्फोट के साथ खुद को समाप्त कर देता है। यह दृश्य राज कॉमिक्स के इतिहास का सबसे दुखद और गौरवान्वित करने वाला पल है। एक नायक ने अपनी पूरी सभ्यता को बचाने के लिए खुद को बलिदान कर दिया।
अंत: मानवता की वापसी और ‘सर्वनायक‘ की झलक

परमाणु के विस्फोट के साथ ही ब्रह्मांडीय असंतुलन समाप्त हो जाता है। सभी पृथ्वीवासी अपने-अपने घर लौट जाते हैं। दिल्ली, राजनगर और मुंबई की सड़कों पर फिर से जीवन लौट आता है। लेकिन इस जीत की कीमत बहुत बड़ी थी—परमाणु की शहादत।
कॉमिक्स के आखिरी पन्ने पर ‘तिलिरमदेव’ और कुछ अन्य रहस्यमयी पात्र नजर आते हैं, जो यह संकेत देते हैं कि यह अंत नहीं, बल्कि ‘सर्वनायक’ (Sarvanayak) गाथा की एक नई शुरुआत है।
कला और चित्रांकन (Visual Masterpiece)

हेमंत कुमार और सुशांत पंडा का आर्टवर्क ‘ब्रह्मांड संहिता’ को महाकाव्य जैसा अनुभव देता है। ग्रहों के बीच युद्ध, लेजर किरणें और परमाणु का चमकता शरीर बहुत ही विस्तार से दिखाया गया है।
परमाणु का शीना से अंतिम विदा लेना और ध्रुव-नागराज की आँखों में छिपी बेचैनी को कलाकारों ने बहुत ही गहराई से उकेरा है। परमाणु के शरीर पर विकृत का कब्जा होने के बाद उसका ‘हाफ-फेस’ लुक डरावना और प्रभावशाली दिखता है।
भक्त रंजन का रंग संयोजन भी शानदार है। विस्फोटों की नारंगी और पीली चमक के बीच नायकों के नीले और हरे कपड़े एक सुंदर कंट्रास्ट बनाते हैं।
पात्र विश्लेषण: नायकों की त्रिमूर्ति
परमाणु: पूरी श्रृंखला का केंद्रीय नायक। एक साधारण वैज्ञानिक से ब्रह्मांडीय शहीद बनने का उसका सफर बहुत प्रभावशाली है। उसकी शहादत ने उसे राज कॉमिक्स के ‘इमोर्टल’ नायकों में खड़ा कर दिया।
सुपर कमांडो ध्रुव: ध्रुव ने फिर साबित किया कि क्यों उसे ‘कैप्टन’ कहा जाता है। बिना महाशक्ति के, उसकी रणनीति ने ब्रह्मांड के सबसे बड़े खतरे को मात दी।
नागराज: नागराज की गंभीरता और नेतृत्व क्षमता इस अंक में उभरकर आती है। वह परमाणु के बलिदान को समझते हुए भी उसे रोक नहीं पाता, क्योंकि उसका पहला धर्म ‘मानवता की रक्षा’ है।
समीक्षात्मक मूल्यांकन

सकारात्मक पक्ष (Pros):
कहानी के सभी रहस्यों जैसे कारा, ब्रह्म-कण और विकृत को साफ-साफ समझाया गया है। डोगा, स्टील और तिरंगा जैसे नायकों को उचित सम्मान और भूमिका दी गई है। परमाणु का बलिदान पाठकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ता है।
नकारात्मक पक्ष (Cons):
अंतिम पन्नों पर दार्शनिक और वैज्ञानिक चर्चाएँ थोड़ी लंबी हैं, जो कुछ पाठकों को भारी लग सकती हैं। परमाणु के कट्टर प्रशंसकों के लिए उसका अंत पचाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन कहानी के लिहाज से यह जरूरी था।
निष्कर्ष: राज कॉमिक्स की एक अमर कृति
‘ब्रह्मांड संहिता’ सिर्फ समापन अंक नहीं है, बल्कि राज कॉमिक्स की रचनात्मक क्षमता का सबूत है। ‘आखरी’ श्रृंखला ने भारतीय कॉमिक्स को उस ऊँचाई पर पहुँचाया, जहाँ वह किसी भी वैश्विक फ्रेंचाइजी को टक्कर दे सकती है। यह श्रृंखला सिखाती है कि चाहे संकट ब्रह्मांडीय हो या व्यक्तिगत, अंत में ‘एकता’ और ‘बलिदान’ ही संसार को बचाते हैं।
नितिन मिश्रा, स्तुति मिश्रा और पूरी आर्ट टीम को इस मास्टरपीस के लिए बधाई। यह श्रृंखला आने वाली पीढ़ियों के लिए मानक (Benchmark) बनी रहेगी।
अंतिम रेटिंग: 5/5
