राज कॉमिक्स भारत में सुपरहीरो कॉमिक्स का दूसरा नाम रही है। 90 के दशक और 2000 की शुरुआत में राज कॉमिक्स ने बच्चों और किशोरों के दिलों पर जो राज किया, वैसी लोकप्रियता आज भी कम ही देखने को मिलती है। उसी सुनहरे दौर की एक बेहद बड़ी, दमदार और रोमांच से भरी कड़ी है ‘सर्वशक्तिमान’ (Sarvashaktimaan)। यह सिर्फ एक कॉमिक नहीं है, बल्कि एक पूरा मल्टीस्टारर महाविशेषांक है, जहाँ राज कॉमिक्स के लगभग सभी बड़े नायक—नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, परमाणु, डोगा, इंस्पेक्टर स्टील और शक्ति—एक साथ मिलकर पूरी दुनिया पर आए एक भयानक खतरे का सामना करते हैं। 113 पन्नों की यह विशाल कॉमिक एक बड़े स्तर की कहानी पेश करती है, जिसकी गहराई से समीक्षा करना ज़रूरी हो जाता है।
कहानी का कथानक (Plot Summary):

कहानी की शुरुआत अमेरिका के नासा (NASA) सेंटर से होती है, जहाँ मंगल ग्रह के लिए ‘स्पिरिट’ (Spirit) नाम का एक बेहद आधुनिक रोबोटिक यान भेजा जाना होता है। यह मिशन 6 जून 2003 को तय किया गया है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि क्या मंगल ग्रह पर कभी जीवन मौजूद था या नहीं। लेकिन यह वैज्ञानिक मिशन शुरू होने से पहले ही हालात अचानक बिगड़ने लगते हैं।
लॉन्च के समय आसमान में अचानक अंधेरा छा जाता है और ‘मशीनी टिड्डियों’ (Robotic Locusts) का एक बहुत बड़ा झुंड रॉकेट पर हमला कर देता है। ये टिड्डियाँ साधारण नहीं होतीं, बल्कि ये धातु तक को चट कर जाती हैं और कंप्यूटर सिस्टम को पूरी तरह तबाह कर देती हैं। यहीं से राज कॉमिक्स के ब्रह्मांड रक्षक यानी दुनिया के सुपरहीरो हरकत में आ जाते हैं।
कहानी इस मोड़ पर कई अलग-अलग दिशाओं में एक साथ आगे बढ़ती है।
परमाणु और नागराज का मोर्चा

परमाणु इन मशीनी टिड्डियों को रोकने की कोशिश में जुट जाता है, वहीं नागराज ज़मीन के नीचे फैले केबल नेटवर्क की सुरक्षा में लग जाता है। उसे ‘जावा’ (Java) नाम के एक डिजिटल और चुंबकीय वायरस से लड़ना पड़ता है। जावा कोई आम दुश्मन नहीं है, बल्कि ऐसा खतरनाक वायरस है जो कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के ज़रिये जीवित कोशिकाओं (Living Cells) को भी अपने काबू में कर सकता है।
मंगल ग्रह का रहस्य
कहानी में असली ट्विस्ट तब आता है जब यह खुलासा होता है कि कुछ मंगलवासी (Martians) सैकड़ों सालों से पृथ्वी पर इंसानों का भेष धरकर रह रहे हैं। डॉ. गद्रे और हरिहर जैसे किरदारों के ज़रिये एक गहरी और डरावनी साज़िश सामने आती है। इन मंगलवासियों का मकसद पृथ्वी पर कब्ज़ा करना है, क्योंकि उनका अपना ग्रह एक भयानक महामारी—‘सर्वशक्तिमान’—की वजह से पूरी तरह तबाह हो चुका है।
सर्वशक्तिमान का उदय

‘सर्वशक्तिमान’ कोई इंसान या साधारण विलेन नहीं है, बल्कि एक परग्रही वायरस या चेतना है, जो ऊर्जा और जीवित कोशिकाओं को सोखकर खुद को और भी विशाल बनाती जाती है। जब स्पिरिट यान मंगल से वापस लौटता है, या यूँ कहें कि उसका मलबा पृथ्वी पर गिरता है, तो वह अपने साथ इसी खतरनाक संक्रमण को भी ले आता है। यह वायरस धीरे-धीरे इंसानों और मशीनों को अपने अंदर समाहित करने लगता है और आखिरकार एक बेहद विशाल, मांसल और मशीनी राक्षस का रूप ले लेता है।
महायुद्ध
आख़िरकार हालात ऐसे बन जाते हैं कि सभी सुपरहीरो को एक साथ आकर इस महाविनाशकारी खतरे का सामना करना पड़ता है। ध्रुव की सटीक रणनीति, नागराज की जबरदस्त ताकत, परमाणु की ऊर्जा और डोगा का बेखौफ साहस—सब मिलकर एक टीम की तरह काम करते हैं, ताकि पृथ्वी को इस विनाशकारी संक्रमण और सर्वशक्तिमान के आतंक से बचाया जा सके।
पात्रों का चित्रण (Character Analysis):

नागराज: इस कॉमिक में नागराज एक सीनियर रक्षक की भूमिका में नज़र आता है। जावा के साथ उसकी टक्कर तकनीकी तौर पर काफी दिलचस्प लगती है। यहाँ नागराज सिर्फ अपनी ताकत से नहीं, बल्कि दिमाग और मानसिक मजबूती से भी लड़ता दिखाया गया है, जो उसके किरदार को और मजबूत बनाता है।
सुपर कमांडो ध्रुव: ध्रुव हमेशा की तरह टीम का असली ‘मास्टरमाइंड’ है। जब बाकी नायक अपनी-अपनी शक्तियों से मोर्चा संभाल रहे होते हैं, तब ध्रुव हालात को समझता है, विश्लेषण करता है और आगे की योजना बनाता है। खासतौर पर परमाणु और इंस्पेक्टर स्टील को सही दिशा में मदद देना उसकी रणनीतिक सोच को दिखाता है।
परमाणु: परमाणु के लिए यह कहानी किसी निजी लड़ाई से कम नहीं है। वह मशीनी टिड्डियों के असली स्रोत तक पहुँचता है और उस विशाल मशीनी दैत्य के अंदर घुसकर मुकाबला करता है। उसकी ‘परमाणु ऊर्जा’ इस पूरी कहानी के जबरदस्त एक्शन दृश्यों की जान बन जाती है।
डोगा: डोगा की मौजूदगी कहानी को और ज्यादा डार्क और ग्रिटी बना देती है। वह मुंबई के मोर्चे पर उन अपराधियों और मंगलवासियों से भिड़ता है, जो इस वैश्विक संकट का फायदा उठाकर अपना खेल खेलना चाहते हैं।

अन्य नायक: इंस्पेक्टर स्टील अपनी मशीनी ताकत के साथ और शक्ति (Shakti) अपनी दिव्य ऊर्जा के ज़रिये कहानी में अहम योगदान देते हैं और टीम को मजबूती प्रदान करते हैं।
लेखन और कला (Writing and Art):
जोली सिन्हा (Jolly Sinha) का लेखन काफी प्रभावशाली है। मल्टीस्टारर कहानी में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि हर किरदार को सही अहमियत और पर्याप्त ‘स्क्रीन टाइम’ मिले, और इस मामले में लेखक काफी हद तक सफल रहते हैं। विज्ञान-फिक्शन और फंतासी का जो मेल यहाँ देखने को मिलता है, वह पूरी कॉमिक को किसी हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फिल्म जैसा एहसास देता है।

कला पक्ष की बात करें तो अनुपम सिन्हा (Anupam Sinha) और उनकी टीम ने वाकई शानदार काम किया है। टिड्डियों के हमले, विशाल अंतरिक्ष केंद्र और ‘सर्वशक्तिमान’ के डरावने और विशाल रूप को जिस बारीकी से दिखाया गया है, वह काबिले-तारीफ है। रंगों का इस्तेमाल (सुनील पांडेय और मनीष गुप्ता द्वारा) कहानी के मूड के साथ बदलता रहता है—नासा के सीन में आधुनिक और चमकीले रंग हैं, जबकि मंगलवासियों से जुड़े दृश्यों में रहस्य और डर की झलक मिलती है।
मुख्य विषयवस्तु (Themes):
यह कहानी विज्ञान और प्रकृति के बीच के टकराव को अच्छे तरीके से सामने रखती है और यह सवाल उठाती है कि इंसान की अंतरिक्ष को जीतने की चाह कहीं अनजाने में कितने बड़े खतरे को न्योता तो नहीं दे रही। मंगलवासियों को सिर्फ खलनायक की तरह नहीं, बल्कि ‘ग्रे शेड’ में दिखाया गया है, जिससे वे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हुए थोड़े मानवीय भी लगते हैं। अंत में ‘सर्वशक्तिमान’ यह मजबूत संदेश देता है कि जब संकट पूरी दुनिया पर हो, तब आपसी मतभेद भूलकर एकजुट होना ही मानवता के बचने का एकमात्र रास्ता है।

सकारात्मक पक्ष (Pros):
कहानी कहीं भी ढीली नहीं पड़ती। हर पन्ने पर कुछ नया होता है—नया खतरा, नया मोड़ या नया खुलासा। जावा प्रोग्रामिंग, चुंबकीय तरंगें और नासा मिशन जैसे तत्वों का इस्तेमाल बच्चों और युवाओं के लिए रोचक होने के साथ-साथ ज्ञानवर्धक भी है। ‘सर्वशक्तिमान’ को एक मांसल वायरस के रूप में दिखाना अपने आप में एक नया और डर पैदा करने वाला कॉन्सेप्ट है।
नकारात्मक पक्ष (Cons):
इतने सारे नायकों की मौजूदगी के कारण कभी-कभी कुछ किरदार, जैसे शक्ति या इंस्पेक्टर स्टील, अपेक्षाकृत कम असरदार लगते हैं। वहीं कहानी का अंत थोड़ा जल्दी में सुलझता हुआ महसूस होता है, जहाँ इतना बड़ा खतरा अपेक्षाकृत कम समय में खत्म हो जाता है।
विस्तृत समीक्षा (Detailed Evaluation):

इस कॉमिक का एक और दिलचस्प पहलू इसका समयकाल है। 2003 के आसपास भारत में इंटरनेट और कंप्यूटर की समझ तेजी से बढ़ रही थी। ऐसे समय में ‘जावा’ वायरस और कोडिंग जैसे शब्द पाठकों को बेहद आधुनिक और ‘कूल’ लगते थे।
मंगल ग्रह की पृष्ठभूमि हमें उस दौर की याद दिलाती है, जब मंगल को लेकर तरह-तरह की कहानियाँ और कल्पनाएँ मशहूर थीं। लेखक ने नासा के असली मिशनों को अपनी काल्पनिक दुनिया के साथ बड़े समझदारी से जोड़ा है।
पृष्ठ 90 से 110 के बीच कहानी अपने चरम पर पहुँच जाती है। सर्वशक्तिमान इतना विशाल हो जाता है कि पूरी-पूरी इमारतें उसके सामने छोटी लगने लगती हैं। यहाँ नायकों की बेबसी को बहुत असरदार तरीके से दिखाया गया है। नागराज और स्टील का एक साथ हारना पाठकों के मन में डर बैठा देता है, जो किसी अच्छी थ्रिलर की पहचान है।
ध्रुव द्वारा परमाणु को ‘श्रिंक’ करके वायरस के अंदर भेजने का आइडिया राज कॉमिक्स की साइंस-फिक्शन सोच को साफ दिखाता है। यह कॉन्सेप्ट भले ही मार्वल के ‘एंट-मैन’ की याद दिलाए, लेकिन इसे पूरी तरह भारतीय माहौल में ढाला गया है।
निष्कर्ष:
‘सर्वशक्तिमान’ राज कॉमिक्स के इतिहास की एक यादगार और गर्व करने लायक कृति है। यह साबित करती है कि भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री भी वैश्विक स्तर की बड़ी और दमदार कहानियाँ गढ़ने में सक्षम रही है। यह सिर्फ सुपरहीरो की लड़ाई नहीं, बल्कि साहस, समझदारी और बलिदान की कहानी है।
अगर आप राज कॉमिक्स के पुराने प्रशंसक हैं, तो यह कॉमिक आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए। और अगर आप नए पाठक हैं, तो यह भारतीय सुपरहीरो की दुनिया को समझने के लिए एक बेहतरीन एंट्री पॉइंट है।
अंतिम रेटिंग: 4.5/5 ⭐
