राधा कॉमिक्स के सबसे लोकप्रिय पात्रों में से एक, ‘शक्ति पुत्र’ (Shaktiputra), भारतीय कॉमिक्स के उन चुनिंदा नायकों में से है जिसने विज्ञान-कल्पना (Sci-Fi) और सुपरहीरो शैली के बीच की दूरी को कम किया। “शक्ति पुत्र का अपहरण” सिर्फ एक रोमांचक कहानी नहीं है, बल्कि उस समय के पाठकों के लिए अंतरिक्ष, एलियंस और हाई-टेक तकनीक की दुनिया में कदम रखने जैसा था। वत्सला कौशिक की लेखनी और द्रोणा फीचर्स की कला ने इसे अपने पहले भाग “यंत्र दानव का आतंक” से भी बेहतर बनाया है।
कथानक का विस्तृत विश्लेषण (Plot Analysis)

वैश्विक संकट और रहस्यमयी अपहरण:
कहानी की शुरुआत एक गंभीर स्थिति से होती है। दुनिया के कई मशहूर वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी अचानक गायब होने लगते हैं। भारत के जाने-माने वैज्ञानिक आशुतोष मुखर्जी का अपहरण कहानी में नवीनतम मोड़ लाता है। पुलिस मुख्यालय में एक आपातकालीन बैठक होती है, जहाँ आई.जी. रावत, एस.पी. राणा और इंस्पेक्टर खान जैसे अधिकारी इस घटना पर चर्चा करते हैं। लेखक ने बहुत ही स्मार्ट तरीके से कहानी में ‘सस्पेंस’ पैदा किया है। इंस्पेक्टर खान का यह मानना कि अपहरणों के पीछे किसी दूसरे ग्रह की सभ्यता हो सकती है, कहानी को जासूसी (Detective) से विज्ञान-कल्पना (Sci-Fi) की ओर ले जाता है।
नायक की प्रविष्टि और स्वयं का अपहरण:
शक्ति पुत्र (विक्रम), जो भारतीय गुप्तचर विभाग का हिस्सा है, इस मामले की जांच शुरू करता है। उसे लगता है कि यह सिर्फ अपराधियों का काम नहीं है। एक शाम वह अपनी कार से लौट रहा होता है, तभी आसमान से एक रहस्यमयी किरण (Vanishing Ray) उसकी कार पर गिरती है और वह कार समेत गायब हो जाता है। यह दृश्य कॉमिक्स का सबसे रोमांचक हिस्सा है, जो पाठकों को सीधे कहानी के केंद्र में खींच लेता है।
ग्रह ‘फ्लोजीस्तीन’ और सम्राट जैड:
शक्ति पुत्र जब होश में आता है, तो वह खुद को एंड्रोमेडा आकाशगंगा के दूरस्थ ग्रह ‘फ्लोजीस्तीन’ पर पाता है। यहाँ उसकी मुलाकात ‘सम्राट जैड’ (Samrat Zaid) से होती है। कहानी का यह हिस्सा दार्शनिक मोड़ लेता है। सम्राट जैड बताते हैं कि वे बुद्धिजीवियों के दिमाग इसलिए चुरा रहे हैं ताकि उनकी सभ्यता ब्रह्मांड में सबसे उन्नत बनी रहे। वे इसे ‘अपहरण’ नहीं बल्कि ‘प्रतिभाओं का आदान-प्रदान’ कहते हैं।

वैचारिक युद्ध और रेशम के कीड़े का उदाहरण:
एक दिलचस्प संवाद में सम्राट जैड शक्ति पुत्र को समझाते हैं कि जैसे मनुष्य रेशम के कीड़ों से रेशम और मधुमक्खियों से शहद लेते हैं, वैसे ही वे उन्नत प्राणी होने के कारण मानव मस्तिष्क का उपयोग कर सकते हैं। शक्ति पुत्र इस तर्क का विरोध करता है, जो मानवता के आत्म-सम्मान और अधिकार को दर्शाता है।
चरमोत्कर्ष (The Climax) और ‘सिबॉर्ग’ का खुलासा:
शक्ति पुत्र को प्रयोगशाला में ले जाया जाता है ताकि उसका मस्तिष्क भी निकाला जा सके। लेकिन यहाँ बड़ा ट्विस्ट आता है। फ्लोजीस्तीन के वैज्ञानिक और उनका सुपर कंप्यूटर शक्ति पुत्र के मस्तिष्क का पता नहीं लगा पाते। शक्ति पुत्र खुलासा करता है कि वह पूरी तरह मानव नहीं है, बल्कि एक ‘अर्ध-मानव, अर्ध-रोबोट’ (Cyborg) है। उसका मस्तिष्क उसके सिर में नहीं बल्कि शरीर के एक अलग हिस्से (बगल) में सुरक्षित है। यह तकनीकी मोड़ दुश्मनों को चौंकाता है और कहानी को एक विजयी अंत की ओर ले जाता है।
संधि और मित्रता:
शक्ति पुत्र अपनी बुद्धि और ताकत से सम्राट जैड को प्रभावित करता है। वह उनके हथियारों को नष्ट करने की धमकी देता है, लेकिन अंत में शांति दूत की भूमिका निभाता है। सम्राट जैड उसकी वीरता से प्रभावित होकर न केवल उसे आज़ाद करते हैं, बल्कि सभी अगवा किए गए बुद्धिजीवियों और गायब किए गए अमेरिकी शहर ‘एडसन सिटी’ को भी पृथ्वी पर वापस भेजने का वादा करते हैं।
पात्र चित्रण (Characterization):

शक्ति पुत्र: वह आदर्श नायक है। शक्ति के साथ-साथ कूटनीति में भी माहिर है। मुश्किल हालात में धैर्य रखना और शांत रहना उसे महान सुपरहीरो बनाता है। हरा सूट और काला मास्क उसके आकर्षण को बढ़ाते हैं।
सम्राट जैड: वह क्लासिक विलेन नहीं है। अपनी सभ्यता के प्रति वफादार है, पर नैतिकता की कमी है। हालांकि, तर्क सुनने और सच्चाई मानने की क्षमता उसे ‘ग्रे शेड’ वाला पात्र बनाती है।
सहायक पात्र: आई.जी. रावत और कमिश्नर देशपांडे जैसे पात्र कहानी को यथार्थ का आधार देते हैं और पाठकों का जुड़ाव बढ़ाते हैं।
कला और चित्रांकन (Art and Presentation):
द्रोणा फीचर्स ने ‘विनाश’ के ज़रिए भारतीय कॉमिक्स में स्पेस-पल्प शैली को नई ऊँचाई दी। फ्लोजीस्तीन ग्रह की विशाल इमारतें, विचित्र वाहन और एलियंस के पहनावे ने उस समय के बच्चों के लिए अंतरिक्ष रोमांच को घर-घर पहुंचा दिया। कहानी का पैनल लेआउट इतना सहज है कि पाठक बिना भटकाव के एक ग्रह से दूसरे ग्रह की यात्रा करता है। चमकीले रंग, विशेषकर लेजर और अंतरिक्ष यानों के लिए, साइंस-फिक्शन का मज़ा बढ़ाते हैं। साथ ही, ‘बड़ाम’ और ‘जजज…’ जैसे साउंड इफेक्ट्स एक्शन दृश्यों को ऑडियो-विजुअल अनुभव में बदल देते हैं।
थीम और संदेश (Themes and Message):

‘शक्ति पुत्र’ की कहानी सिर्फ एक सुपरहीरो कॉमिक नहीं है, बल्कि दार्शनिक गाथा भी है। “ज्ञान ही शक्ति है” का संदेश यह बताता है कि असली संपदा भौतिक नहीं, बल्कि मस्तिष्क और विवेक है। शक्तिशाली और कमजोर सभ्यताओं के बीच संघर्ष से यह नैतिकता और अधिकार के सवाल उठाती है। सम्राट जैड और शक्ति पुत्र का शांतिपूर्ण समाधान यह सिखाता है कि युद्ध केवल विनाश लाता है, जबकि संवाद ही स्थायी समाधान का रास्ता है।
समीक्षात्मक मूल्यांकन (Critical Evaluation):
खूबियाँ:
‘स्पेस ऑपेरा’ शैली बहुत प्रभावशाली है। सिबॉर्ग होने का खुलासा बड़ा सरप्राइज है और पिछले भाग से जुड़ाव दिखाता है। विलेन का बदलाव कहानी को सकारात्मक अंत देता है।

कमियाँ:
कुछ संवाद थोड़े लंबे और व्याख्यात्मक लग सकते हैं। अमेरिकी शहर ‘एडसन सिटी’ का उप-कथानक मुख्य कहानी में थोड़ा अचानक आता है।
निष्कर्ष (Conclusion):
“शक्ति पुत्र का अपहरण” राधा कॉमिक्स की कालजयी कृति है। यह हमें उस युग की याद दिलाती है जब कॉमिक्स सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि कल्पनाशीलता बढ़ाने का माध्यम थीं। शक्ति पुत्र दिखाता है कि वीरता सिर्फ मांसपेशियों में नहीं, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता में है।
यह कॉमिक्स आज भी उतनी ही प्रासंगिक है क्योंकि यह विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और मानव मूल्यों को बढ़ावा देती है। अगर आप भारतीय कॉमिक्स के ‘स्वर्ण युग’ का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह कहानी जरूर पढ़ें। शक्ति पुत्र का यह कारनामा न सिर्फ रोमांचक है, बल्कि पाठकों को ब्रह्मांड की अनंत संभावनाओं के बारे में सोचने पर मजबूर करता है।
कुल रेटिंग: ४.८/५
