भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में ‘ओरिजिन स्टोरी’ (उत्पत्ति कथा) के बाद अक्सर नायक के पहले बड़े मिशन की बारी आती है। “सुपर पावर विक्रांत और कालतंत्र का पुजारी” भी ऐसी ही कहानी है, जहाँ हम विक्रांत को एक नए और अनाड़ी लड़के से एक मजबूत और समझदार हीरो बनते देखते हैं। पहले भाग में जहाँ भावनाएँ और विश्वासघात ज्यादा थे, वहीं इस हिस्से में रोमांच, जादुई लड़ाई और शक्तियों का दमदार प्रदर्शन देखने को मिलता है। लेखक बादल शर्मा और संपादक देवकी नंदन शर्मा ने इस अंक को एक अलग ही स्तर पर पहुँचा दिया है।
कथानक का विस्तार: प्रतिशोध से न्याय तक का सफर

कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ पिछला भाग खत्म हुआ था। विक्रांत अपने पिता के हत्यारे और विश्वासघाती चाचा कृपाशंकर की तलाश में है। कृपाशंकर अब सिर्फ एक अपराधी नहीं रहा, बल्कि जादुई शक्तियों और ‘मुद्रक’ (अंगूठी का जिन्न) का मालिक बन चुका है। वह दिल्ली के शोर-शराबे से दूर असम के घने और डरावने जंगलों में छिप गया है।
विक्रांत अपनी जादुई अंगूठी की मदद से उसका पीछा करता है और उसे पता चलता है कि कृपाशंकर असम के एक पुराने और खंडहरनुमा किले में ‘कालतंत्र’ की साधना कर रहा है। उसका लालच अब सिर्फ धन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह ‘अजेय शक्ति’ पाना चाहता है, जिसके लिए वह किसी भी निर्दोष की बलि देने को तैयार है।
गायत्री मंत्र बनाम राक्षसी शक्तियां
युद्ध की शुरुआत तब होती है जब कृपाशंकर अपनी तांत्रिक शक्तियों से ‘शेरधड़ा’ नाम का एक भयानक राक्षस बुलाता है। यहाँ कहानी का सबसे मजबूत पक्ष सामने आता है—विक्रांत की शक्ति। वह केवल तलवार का इस्तेमाल नहीं करता, बल्कि गायत्री मंत्र के उच्चारण से अपनी ऊर्जा को केंद्रित करता है। यह दृश्य साफ दिखाता है कि विक्रांत की असली ताकत उसके हथियारों में नहीं, बल्कि उसके चरित्र की पवित्रता और सच्चाई में है।
जब देवराज इंद्र ने ली परीक्षा: ‘दिव्य नायक’ का उदय

कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब युद्ध के दौरान विक्रांत एक जलकुंड में गिर जाता है। वहाँ उसका सामना ‘जलाकु’ नाम के एक जल-राक्षस से होता है। लेकिन यह सिर्फ एक लड़ाई नहीं थी। असल में जलाकु, स्वयं देवराज इंद्र थे, जो विक्रांत की वीरता और उसकी इंसानियत की परीक्षा ले रहे थे।
विक्रांत की बहादुरी और निस्वार्थ भाव को देखकर इंद्र खुश होते हैं और उसे एक ऐसा वरदान देते हैं जो उसे साधारण सुपरहीरो से ऊपर उठाकर एक ‘दिव्य नायक’ बना देता है। अब जल, अग्नि और वायु विक्रांत को कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकते।
क्लाइमेक्स: पाप का अंत और हृदय परिवर्तन
कहानी के अंत में कृपाशंकर एक निर्दोष किसान की बलि देने वाला होता है, तभी विक्रांत वहाँ पहुँचता है। वह न केवल किसान को बचाता है, बल्कि कृपाशंकर के सबसे शक्तिशाली मोहरे ‘मुद्रक’ का वध कर देता है। जब कृपाशंकर भागने की कोशिश करता है, तब पाठक विक्रांत की एक और अद्भुत शक्ति देखते हैं—वह एक विशालकाय हाथी का रूप धारण कर उसे कुचल देता है।

मरते समय कृपाशंकर को अपनी गलतियों का एहसास होता है। भारतीय कहानियों की यही खूबसूरती यहाँ भी दिखती है, जहाँ मरते हुए विलेन को भी पछतावे के जरिए सुधार का एक मौका दिया जाता है।
चरित्र और कला पक्ष (Art & Illustrations)
इस अंक में विक्रांत पहले से ज्यादा आत्मविश्वासी और संतुलित नजर आता है। अब वह सिर्फ एक दुखी बेटा नहीं रह गया, बल्कि धर्म और न्याय का रक्षक बनकर सामने आता है। उसके फैसलों में परिपक्वता दिखती है और लड़ाई के दौरान उसका शांत लेकिन मजबूत रवैया उसे एक सच्चे नायक के रूप में स्थापित करता है।

केमियो आर्ट्स (Cameo Arts) की कला ने असम के घने जंगलों और तांत्रिक माहौल को बहुत प्रभावशाली तरीके से जीवंत किया है। हर पैनल में रहस्य और डर का माहौल साफ महसूस होता है। पीली और सफेद रोशनी का इस्तेमाल—खासकर जब इंद्र प्रकट होते हैं या विक्रांत की तलवार से ऊर्जा निकलती है—दृश्यों को और भी जादुई बना देता है। इससे कहानी सिर्फ पढ़ने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पाठक उसे महसूस भी करता है।
बादल शर्मा के संवादों में भी काफी दम है। “मैं तेरी मौत हूँ कृपाशंकर! मैंने कहा था कि मैं तुझे पाताल में भी जिंदा नहीं छोड़ूँगा” जैसे डायलॉग्स कहानी में जोश भर देते हैं और विक्रांत के चरित्र को और मजबूत बनाते हैं। ऐसे संवाद कॉमिक्स को यादगार बना देते हैं।
समीक्षात्मक टिप्पणी: एक क्लासिक अनुभव

“सुपर पावर विक्रांत और कालतंत्र का पुजारी” एक्शन और इमोशन का शानदार मिश्रण है। कहानी में लगातार रोमांच बना रहता है और पाठक अंत तक जुड़ा रहता है। हालाँकि, कुछ पाठकों को लग सकता है कि मुद्रक जैसे शक्तिशाली पात्र का अंत थोड़ा जल्दी कर दिया गया, लेकिन कहानी की तेज गति इस कमी को ज्यादा महसूस नहीं होने देती।
यह कॉमिक्स यह भी दिखाती है कि एक भारतीय सुपरहीरो सिर्फ अपनी वेशभूषा या शक्तियों से महान नहीं बनता, बल्कि अपने संस्कारों, सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक शक्ति से अलग पहचान बनाता है। यही बात विक्रांत को बाकी सुपरहीरोज़ से अलग बनाती है।
निष्कर्ष:
अगर आप रोमांच के साथ भारतीय संस्कृति और पौराणिक तत्वों का बेहतरीन मेल देखना चाहते हैं, तो यह अंक आपके संग्रह में जरूर होना चाहिए। विक्रांत की यह प्रतिज्ञा कि वह हमेशा मानवता की रक्षा करेगा, पाठकों को उसके आने वाले और भी बड़े और रोमांचक कारनामों के लिए उत्साहित कर देती है।
