Close Menu
  • Home
  • Comics
  • Featured
  • Hindi Comics World
  • Trending
  • Blog
  • Spotlight
  • International

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from Comics Bio about art, design and business.

What's Hot

Pralayankari Ajgar: When a Cosmic War Turns Earth into a Battlefield

10 February 2026

प्रलयंकारी अजगर: जब स्पेस, बदला और देसी डायलॉग्स ने रचा कॉमिक्स इतिहास

10 February 2026

राजनगर रणक्षेत्र: जब सुपर कमांडो ध्रुव ने मशीनों की तानाशाही को दी खुली चुनौती

10 February 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
comicsbio.comcomicsbio.com
Subscribe
  • Home
  • Comics
  • Featured
  • Hindi Comics World
  • Trending
  • Blog
  • Spotlight
  • International
comicsbio.comcomicsbio.com
Home » तिरंगा जिद्दी: 90 के दशक का वो सुपरहीरो जो भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा हुआ
Don't Miss Updated:2 February 2026

तिरंगा जिद्दी: 90 के दशक का वो सुपरहीरो जो भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा हुआ

राज कॉमिक्स की ‘जिद्दी’ कहानी बताती है कैसे अभय, यानी तिरंगा, पिता के सम्मान और इंसाफ के लिए लड़ता है।
ComicsBioBy ComicsBio2 February 2026Updated:2 February 202608 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Reddit Email
तिरंगा जिद्दी (अंक 655) – राज कॉमिक्स की देशभक्ति और इंसाफ की क्लासिक कहानी
तिरंगा जिद्दी कॉमिक समीक्षा: अभय का जन्म कैसे हुआ, पिता के बलिदान और भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी जिद का सफर।
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email


९० के दशक के भारतीय कॉमिक्स इतिहास में ‘तिरंगा’ एक ऐसा किरदार रहा है, जिसने देशभक्ति और इंसाफ को बिल्कुल नए नज़रिए से पेश किया। जहाँ नागराज के पास जबरदस्त ताक़त थी और ध्रुव के पास तेज़ दिमाग, वहीं तिरंगा की असली पहचान उसका अडिग और जिद्दी जज़्बा था। तिरंगा सीरीज़ की कॉमिक्स ‘जिद्दी’ (अंक संख्या ६५५) इसी किरदार की सोच, उसकी मानसिकता और उसके जन्म की नींव रखती है। यह कॉमिक सिर्फ़ एक सुपरहीरो की कहानी नहीं है, बल्कि एक बेटे के बदले की आग, एक ज़िम्मेदार नागरिक के फ़र्ज़ और समाज में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने की ज़िद की कहानी है। संजय गुप्ता द्वारा पेश की गई और हनीफ अजहर द्वारा लिखी गई यह कॉमिक आज भी पढ़ने वालों के रोंगटे खड़े कर देने की ताक़त रखती है।

कथानक का विस्तृत विश्लेषण (Plot Overview):

कहानी की शुरुआत बेहद तनाव और हिंसा से भरे माहौल में होती है। दिल्ली के ‘आत्माराम मेमोरियल अस्पताल’ में कुछ खूँखार अपराधी अपने शिकारी कुत्तों के साथ घुस आते हैं। उनका मकसद एक निडर पत्रकार ‘रोहन’ को मारना है, जिसने ‘कंपनी’ नाम के अंडरवर्ल्ड गिरोह के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाई थी। इसी अस्पताल के कमरा नंबर आठ में एक और शख्स ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा है—हवलदार रामनाथ, जो कहानी के नायक अभय, यानी तिरंगा, के पिता हैं।

हवलदार रामनाथ की हालत देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। उनके हाथ की उंगलियाँ काट दी गई हैं और उनकी ज़ुबान भी काट दी गई है। यह बेरहमी उन भ्रष्ट पुलिसवालों और दंगाइयों की देन है, जिन्हें रामनाथ ने रोकने की कोशिश की थी। जब अपराधी रोहन को मारने के लिए हमला करते हैं, तभी तिरंगा की एंट्री होती है। वह न सिर्फ़ रोहन की जान बचाता है, बल्कि अपने ‘अशोक चक्र’ जैसी ढाल से शिकारी कुत्तों और उनके मालिकों को ऐसी सीख सिखाता है कि वे याद रखते हैं।

कहानी का सबसे भावुक और असरदार हिस्सा वह फ्लैशबैक है, जहाँ अभय अपने पिता की इस हालत के पीछे की वजह बताता है। हवलदार रामनाथ एक बेहद ईमानदार पुलिसकर्मी थे। शहर में जब दंगे भड़के हुए थे और कई स्वार्थी लोग और भ्रष्ट अफसर चुपचाप तमाशा देख रहे थे, तब रामनाथ अकेले ही दंगाइयों के सामने खड़े हो गए। इसकी कीमत उन्हें बहुत भारी चुकानी पड़ी—अपनी उंगलियाँ और अपनी ज़ुबान देकर। अभय, जो उस वक्त एक सीधा-सादा छात्र था, यह सब अपनी आँखों से देखता है। कानून की बेबसी और अपराधियों की बेखौफ हिम्मत उसे अंदर से तोड़ देती है, लेकिन इसी टूटन से ‘तिरंगा’ का जन्म होता है।

अभय यह फैसला करता है कि वह अपने पिता की इज़्ज़त के लिए खाकी वर्दी तो पहनेगा, लेकिन इंसाफ उस तरीके से करेगा जो फाइलों में दबकर नहीं रह जाता। वह ‘तिरंगा’ बनकर सड़कों पर उतरता है और अपराध के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ता है।

कहानी का दूसरा पहलू अभय के कॉलेज जीवन को दिखाता है। बाहर की दुनिया में अभय एक सीधा-सादा, पढ़ाकू लड़का माना जाता है, जिसे लोग ‘किताबी कीड़ा’ समझते हैं। कॉलेज में ‘राजा’ नाम का एक दबंग गुंडा है, जो लड़कियों को परेशान करता है और प्रोफेसरों को धमकाता है। वह ‘शिखा’ नाम की लड़की के साथ बदतमीजी करता है। जब अभय उसे रोकने की कोशिश करता है, तो राजा उसे बुरी तरह पीट देता है। यहाँ पाठकों को अभय का जबरदस्त संयम देखने को मिलता है। वह जानता है कि वह राजा को एक पल में खत्म कर सकता है, लेकिन वह अपनी असली पहचान छुपाए रखता है। आखिरकार, जब राजा और उसके गुंडे कॉलेज लाइब्रेरी में घुसकर प्रिंसिपल को बंधक बना लेते हैं, तब अभय ‘तिरंगा’ के रूप में सामने आता है और उनका ऐसा हाल करता है जिसकी उन्होंने सपने में भी कल्पना नहीं की होती।

चरित्र चित्रण (Character Development):

तिरंगा (अभय): इस कॉमिक में तिरंगा का किरदार बेहद गहराई के साथ सामने आता है। वह सिर्फ़ एक नकाब पहनने वाला लड़ाका नहीं है, बल्कि एक ऐसे परिवार का हिस्सा है जिसने बहुत कुछ खोया है। उसका ‘जिद्दी’ स्वभाव ही उसकी सबसे बड़ी ताक़त है। चाहे सामने शिकारी कुत्ते हों या गोलियाँ, वह कभी पीछे नहीं हटता। अभय का किरदार यह साफ़ संदेश देता है कि असली वीरता ताक़त से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों से आती है।

हवलदार रामनाथ: रामनाथ ईमानदारी की उस कीमत का प्रतीक हैं, जो अक्सर सच्चे लोगों को चुकानी पड़ती है। बिना एक शब्द बोले भी उनका किरदार बहुत कुछ कह जाता है। उनकी लाचारी और चुप्पी ही अभय को तिरंगा बनने की सबसे बड़ी वजह देती है। उनका बलिदान इस पूरी कहानी की आत्मा है।

राजा (खलनायक): राजा उस घमंड और ताक़त का चेहरा है, जो पैसा और रसूख मिलने पर इंसान के सिर चढ़ जाता है। वह भले ही एक छोटा विलेन लगे, लेकिन असल में वह उस सामाजिक सड़न का प्रतिनिधि है, जिसके खिलाफ तिरंगा लड़ाई लड़ता है।

रोहन (पत्रकार): रोहन का किरदार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हिम्मत और ईमानदारी को दिखाता है। उसकी मौजूदगी यह एहसास कराती है कि समाज में आज भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो सच के लिए जान तक देने को तैयार रहते हैं।

लेखन और संवाद (Script and Dialogues):

हनीफ अजहर ने इस कॉमिक में संवादों को बेहद सटीक और असरदार बनाया है। खासतौर पर पृष्ठ १४-१५ का वह दृश्य, जहाँ अभय अपने पिता से बात करता है, जबकि वे बोलने में असमर्थ हैं, दिल को छू जाता है। अभय का यह कहना—“इन जालिमों ने आपकी जुबान काट दी है ताकि आप सच न बोल सकें, लेकिन आपकी आँखें बहुत कुछ कह रही हैं”—सीधे पाठक के दिल में उतर जाता है। यह संवाद लेखन की ऊँचाई को दिखाता है। दंगों के दृश्य और उनमें पुलिस की निष्क्रियता पर जो तीखे कटाक्ष किए गए हैं, वे आज के समय में भी उतने ही सच और प्रासंगिक लगते हैं। यही वजह है कि यह कॉमिक सिर्फ अपने दौर की नहीं, बल्कि हर दौर की कहानी लगती है।

कला और चित्रांकन (Art and Illustration):

मिलिंद और बिट्टू की ड्रॉइंग इस कॉमिक को पूरी तरह ज़िंदा कर देती है। तिरंगा की पोशाक, उसका मास्क और उसकी ढाल का डिज़ाइन बहुत दमदार और याद रह जाने वाला है। कुत्तों के साथ लड़ाई वाले सीन में इतनी गति महसूस होती है कि पन्ने चलते हुए से लगते हैं। दंगों के दृश्यों में लाल और नारंगी रंगों का इस्तेमाल उस डर और अराजकता को साफ़ दिखाता है, जो उस माहौल में फैली हुई है। वहीं कॉलेज के सीन में हल्के और सॉफ्ट रंग रखे गए हैं, जिससे सुपरहीरो वाली दुनिया और आम ज़िंदगी के बीच का फर्क साफ़ समझ आता है। ढाल के घूमने का जो ‘इफेक्ट’ दिखाया गया है, वह राज कॉमिक्स की सिग्नेचर स्टाइल को खूबसूरती से सामने लाता है।

थीम और सामाजिक संदेश (Themes and Social Message):

‘जिद्दी’ ईमानदारी की कीमत, कानून और न्याय के फर्क, युवा ताक़त और सांप्रदायिक सौहार्द जैसे गंभीर मुद्दों पर सीधा वार करती है। यह कहानी तिरंगा के ज़रिए इस सोच को चुनौती देती है कि ईमानदार होना सिर्फ़ तकलीफ देता है। कॉमिक यह साफ़ संदेश देती है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएँ, तब इंसाफ़ पाने के लिए एक ज़िद ज़रूरी हो जाती है। दंगों के मार्मिक दृश्य यह दिखाते हैं कि सांप्रदायिक हिंसा का सबसे बड़ा नुकसान हमेशा मासूम लोगों को ही होता है। साथ ही यह युवाओं को यह समझाने की कोशिश करती है कि अन्याय को चुपचाप सह लेना भी किसी अपराध से कम नहीं है।

समीक्षात्मक विश्लेषण (Critical Review):

‘जिद्दी’ तिरंगा सीरीज़ की सबसे अहम कॉमिक्स में से एक है, क्योंकि यह उसके जन्म की कहानी के सबसे क़रीब है। यह हमें दिखाती है कि तिरंगा किसी लैब में हुए प्रयोग से नहीं बना, बल्कि समाज की गंदगी, भ्रष्टाचार और दंगों की आग से निकलकर पैदा हुआ है। यही बात उसे नागराज और ध्रुव से अलग खड़ा करती है। तिरंगा एक ऐसा हीरो है जो ऊँची इमारतों से नहीं, बल्कि सड़कों से लड़ाई शुरू करता है और पूरी व्यवस्था को चुनौती देता है।

कॉमिक का शीर्षक ‘जिद्दी’ पूरी तरह सार्थक है। यह अभय की उस ज़िद को दिखाता है, जो अपने पिता के सम्मान को वापस पाने और देश को अपराध से मुक्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। कहानी की रफ्तार तेज़ है और भावनाएँ गहराई से जुड़ी हुई हैं। हालाँकि राजा वाला सब-प्लॉट थोड़ा फ़िल्मी लग सकता है, लेकिन रामनाथ और ‘कंपनी’ से जुड़ा मुख्य संघर्ष इतना मजबूत है कि वह इन छोटी कमियों को आसानी से ढँक देता है।

निष्कर्ष:

राज कॉमिक्स की ‘जिद्दी’ एक क्लासिक रचना है। यह सिर्फ़ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि पाठक को सोचने पर मजबूर भी करती है। यह हमें सिखाती है कि अगर हम सच के साथ खड़े हैं, तो हमें अपनी बात पर जिद्दी होना ही चाहिए। अगर आप ऐसी कहानी पढ़ना चाहते हैं, जिसमें इमोशन, एक्शन और देशभक्ति का सही संतुलन हो, तो ‘जिद्दी’ आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए।

यह कॉमिक तिरंगा के उस सफ़र की शुरुआत है, जो आगे चलकर ‘डंगा’, ‘कफ़न’ और ‘इंसाफ’ जैसी यादगार कहानियों में बदलता है। आज की पीढ़ी के लिए भी यह एक मिसाल है कि एक अकेला इंसान भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है, बस उसके अंदर सच्ची ‘जिद्द’ होनी चाहिए।

रेटिंग: ४.८/५

अभय का संघर्ष और सुपरहीरो की क्लासिक कहानी सभी शामिल हैं। पिता के सम्मान की रक्षा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई राज कॉमिक्स की ‘तिरंगा जिद्दी’ कॉमिक में देशभक्ति
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
ComicsBio
  • Website

Related Posts

प्रलयंकारी अजगर: जब स्पेस, बदला और देसी डायलॉग्स ने रचा कॉमिक्स इतिहास

10 February 2026 Don't Miss

राजनगर रणक्षेत्र: जब सुपर कमांडो ध्रुव ने मशीनों की तानाशाही को दी खुली चुनौती

10 February 2026 Comics

सर्वशक्तिमान (Sarvashaktimaan): जब राज कॉमिक्स के सभी सुपरहीरो एक साथ उतरे दुनिया बचाने | Mega Multistarrer Review

9 February 2026 Hindi Comics World Updated:9 February 2026
Add A Comment

Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Interesting Ways to Read Free Online Comics

2 September 2025

Deadliest Female Villains in Raj Comics: A Clash with Nagraj

11 September 2024

Kali Mirch Chacha: Master Marksman and Doga’s Mentor in Black Paper Art

11 September 2024

Read Free Online Comics: Your Ultimate Guide to Digital Comic Reading

30 August 2025
Don't Miss

Pralayankari Ajgar: When a Cosmic War Turns Earth into a Battlefield

By ComicsBio10 February 2026

“Pralayankari Ajgar” is a thrill-filled offering from Manoj Comics, which not only entertains but also…

प्रलयंकारी अजगर: जब स्पेस, बदला और देसी डायलॉग्स ने रचा कॉमिक्स इतिहास

10 February 2026

राजनगर रणक्षेत्र: जब सुपर कमांडो ध्रुव ने मशीनों की तानाशाही को दी खुली चुनौती

10 February 2026

Rajnagar Rannakshetra Review: When Raj Comics Turns Rajnagar into a Warzone of Science, Power & Humanity

10 February 2026
Stay In Touch
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from Comics Bio about art & design.

About Us
About Us

Welcome to ComicsBio, your one-stop shop for a colorful universe of cartoons, movies, anime, and feature articles!

Email Us: info@comicsbio.com

Our Picks

Pralayankari Ajgar: When a Cosmic War Turns Earth into a Battlefield

10 February 2026

प्रलयंकारी अजगर: जब स्पेस, बदला और देसी डायलॉग्स ने रचा कॉमिक्स इतिहास

10 February 2026

राजनगर रणक्षेत्र: जब सुपर कमांडो ध्रुव ने मशीनों की तानाशाही को दी खुली चुनौती

10 February 2026
Most Popular

Interesting Ways to Read Free Online Comics

2 September 2025

Deadliest Female Villains in Raj Comics: A Clash with Nagraj

11 September 2024

Kali Mirch Chacha: Master Marksman and Doga’s Mentor in Black Paper Art

11 September 2024
comicsbio.com
Facebook X (Twitter) Instagram
  • About Us
  • Terms
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • FAQ
© 2026 comicsbio

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.