मनोज कॉमिक्स ने हमें कई यादगार सुपरहीरो दिए हैं, और उनमें से एक खास नाम है ‘टोटान’ (Totan)। टोटान सिर्फ अपनी ताकत के लिए नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और दिव्य शक्तियों के अनोखे कॉम्बिनेशन के लिए जाना जाता है। प्रस्तुत कॉमिक्स ‘टोटान और लावासुर’ इस सीरीज़ की एक बेहद रोमांचक कड़ी है, जिसमें विज्ञान, फैंटेसी और पौराणिक सोच का जबरदस्त मेल देखने को मिलता है। लेखक महेंद्र जैन और कलाकार ए.एम.जी. (A.M.G.) की यह कहानी पाठकों को ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहाँ समुद्र के नीचे छिपे राक्षस और हिमालय के योगी एक ही कहानी का हिस्सा बन जाते हैं।
कहानी का सारांश (Plot Overview):

कहानी की शुरुआत दिल्ली की ‘अमर कॉलोनी’ की एक डरावनी रात से होती है। अचानक आसमान में एक अजीब सी उड़नतश्तरी दिखाई देती है, और उसमें से ‘तेजाबा’ नाम का एक भयानक दानव निकल आता है। तेजाबा, जो लावासुर का सेनापति है, अपनी आँखों से तेजाबी किरणें निकालकर लोगों को मारने लगता है। वह भारत सरकार को धमकी देता है कि अगर दो दिनों के अंदर उसे सारा सोना नहीं दिया गया, तो वह पूरे देश को तबाह कर देगा।
सरकार उसकी बात नहीं मानती और वायुसेना के विमान उस पर हमला करते हैं, लेकिन तेजाबा अपनी फूँक से ही विमानों को उड़ा देता है। जब हर तरफ डर और निराशा फैल जाती है, तब हमारे हीरो टोटान की एंट्री होती है। टोटान अपनी लेजर किरणों और खास जूतों (वैक्यूम शूज) की मदद से तेजाबा से भिड़ जाता है। इसी दौरान हिमालय में तपस्या कर रहे बाबा महंतनाथ को भगवान शिव का आदेश मिलता है कि वे टोटान की मदद करें। बाबा महंतनाथ अपनी शक्तियों से टोटान को दिव्य शक्तियाँ देते हैं, जैसे ‘अग्निचक्र’ और दुश्मनों के चेहरे पर ‘A’ का निशान बनाने वाली शक्ति।

आखिरकार टोटान तेजाबा को पकड़कर पुलिस के हवाले कर देता है। यहीं से कहानी में असली विलेन ‘लावासुर’ की एंट्री होती है, जो हिंद महासागर के नीचे बसी ‘लवानगरी’ का राजा है। लवानगरी का इतिहास रामायण काल से जोड़ा गया है—कहानी के अनुसार, जब हनुमान जी ने लंका जलाई थी, तो वहाँ का सोना पिघलकर समुद्र में गिर गया था, और वही सोना लावासुर और उसकी प्रजा का भोजन बन गया। लावासुर अपने साथी (सम्मोहिनी, मायाविनी और केंकड़ा) को टोटान को खत्म करने और सोना हासिल करने के लिए भेजता है। आगे कहानी में धोखा, सम्मोहन, अपहरण और आखिर में अच्छाई की जीत का पूरा रोमांच देखने को मिलता है।
चरित्र चित्रण (Character Analysis):
टोटान (मुकुंद): टोटान का असली नाम मुकुंद है। वह प्रोफेसर रमाकांत की तकनीक और बाबा महंतनाथ के आशीर्वाद का मिला-जुला रूप है। उसकी आँखों से निकलने वाली लेजर किरणें और उड़ने की शक्ति उसे एक खतरनाक योद्धा बनाती हैं। इस कॉमिक्स में वह सिर्फ ताकतवर नहीं, बल्कि काफी स्मार्ट भी दिखाया गया है। वह दुश्मनों को पकड़ने के लिए खुद सम्मोहित होने का नाटक भी करता है, जो उसके रणनीतिक दिमाग को दिखाता है।

लावासुर (मुख्य खलनायक): लावासुर एक बहुत अलग तरह का विलेन है। उसकी पूरी दुनिया सोने के इर्द-गिर्द घूमती है। वह सिर्फ सोना खाता और पीता है। उसका लुक और लवानगरी का डिज़ाइन काफी भव्य और डरावना दिखाया गया है। वह सत्ता का भूखा और बेरहम शासक है, जो अपने मकसद के लिए कुछ भी कर सकता है।
तेजाबा, सम्मोहिनी और मायाविनी: ये तीनों सहायक विलेन कहानी को और दिलचस्प बनाते हैं। तेजाबा की तेजाबी किरणें, सम्मोहिनी की सम्मोहन शक्ति और मायाविनी का जादुई जाल टोटान के लिए बड़ी चुनौती बनते हैं। खासकर मायाविनी का लुक (खोपड़ी जैसा चेहरा और हरे बाल) काफी डरावना और यादगार बनाया गया है।
बरखा (रिपोर्टर): बरखा एक बहादुर रिपोर्टर है और कमिश्नर सिन्हा की बेटी भी। वह कहानी में इंसानी भावना और जिज्ञासा का तत्व जोड़ती है। लेकिन उसकी ज्यादा उत्सुकता उसे तेजाबा के जाल में फंसा देती है, जिससे कहानी में क्लासिक ‘संकट में फँसी लड़की’ वाला मोमेंट आ जाता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration):

ए.एम.जी. (A.M.G.) का आर्टवर्क 90 के दशक की कॉमिक्स की पहचान है। पात्रों के शरीर और मसल्स पर काफी ध्यान दिया गया है। लावासुर का विशाल शरीर और टोटान का नीला-पीला सूट देखने में बहुत आकर्षक लगता है। बैकग्राउंड में दिल्ली की इमारतों से लेकर समुद्र के नीचे की लवानगरी के महलों तक का डिटेल्ड चित्रण किया गया है। लड़ाई के सीन में ‘धड़ाम’, ‘खचाक’ और ‘आsss’ जैसे साउंड इफेक्ट्स कहानी को और मजेदार बनाते हैं। रंग काफी चमकीले और भड़कीले हैं, जो उस दौर की प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी और बच्चों की पसंद के हिसाब से बिल्कुल फिट बैठते हैं।
पौराणिक और वैज्ञानिक संगम:

इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी खासियत इसका कथानक है। एक तरफ प्रोफेसर रमाकांत की लैब, उनकी वैक्यूम टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक प्रयोग हैं, तो दूसरी तरफ त्रेतायुग की ‘लंका दहन’ वाली घटना को लावासुर की उत्पत्ति से जोड़ा गया है। यह लेखक की कल्पनाशीलता और सोच को साफ दिखाता है। इस तरह की कहानी भारतीय पाठकों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक शानदार प्रयास थी। वहीं हिमालय के योगी बाबा महंतनाथ का दखल कहानी में एक अलग ही आध्यात्मिक गहराई जोड़ता है, जो आमतौर पर पश्चिमी सुपरहीरो कॉमिक्स में देखने को नहीं मिलती।
सकारात्मक पक्ष (Strengths):
कहानी की रफ्तार इतनी तेज है कि कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती और हर पेज पर कुछ न कुछ नया होता रहता है, जिससे पाठक की उत्सुकता बनी रहती है। टोटान की नई शक्तियों—जैसे अग्निचक्र और दुश्मनों के चेहरे पर ‘A’ का निशान—का परिचय बहुत ही रोमांचक तरीके से कराया गया है। एक ही कहानी में पाँच अलग-अलग तरह के खलनायकों से टकराना टोटान के कौशल और ताकत को शानदार ढंग से सामने लाता है। अंत में टोटान द्वारा बच्चों को दिया गया संदेश कि “मानवता की रक्षा के लिए मेरा जन्म हुआ है” कहानी को एक मजबूत सकारात्मक और सामाजिक संदेश देता है।

नकारात्मक पक्ष (Weaknesses):
कुछ जगहों पर कहानी में तर्क की कमी थोड़ी खटकती है, जैसे बरखा का अकेले जेल जाकर तेजाबा का इंटरव्यू लेना और अनजाने में उसे आज़ाद कर देना, जो थोड़ा बचकाना लगता है। इसके अलावा, सम्मोहिनी और मायाविनी जैसी शक्तिशाली महिला विलेन्स होने के बावजूद मुख्य महिला पात्र बरखा को आखिर में बचाए जाने की ज़रूरत पड़ती है, जिससे उसका किरदार कमजोर महसूस होता है। साथ ही लावासुर का अचानक गायब हो जाना और लवानगरी का इतनी आसानी से खत्म हो जाना क्लाइमेक्स को थोड़ा जल्दी समेटा हुआ सा बना देता है, जहाँ और विस्तार की गुंजाइश थी।
विस्तृत विश्लेषण और समीक्षा:

‘टोटान और लावासुर’ सिर्फ एक एक्शन कॉमिक्स नहीं है, बल्कि यह उस दौर की कल्पनाशील सोच का प्रतीक है, जब भारतीय सुपरहीरो अपनी अलग पहचान बना रहे थे। टोटान का किरदार कहीं न कहीं सुपरमैन और थॉर जैसी ताकतों की याद दिलाता है, लेकिन उसकी जड़ें पूरी तरह भारतीय संस्कृति में धंसी हुई हैं।
बाबा महंतनाथ द्वारा दी गई ‘A’ के निशान वाली शक्ति काफी दिलचस्प है। यह ‘जोरो’ (Zorro) की याद दिलाती है, लेकिन यहाँ इसे एक श्राप या चेतावनी की तरह दिखाया गया है, जो अपराधी को हमेशा उसकी गलती की याद दिलाती रहती है। यह शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और मनोवैज्ञानिक लड़ाई का बेहतरीन तरीका है।
लावासुर का ‘लवानगरी’ साम्राज्य भी बहुत कल्पनाशील तरीके से गढ़ा गया है। समुद्र के भीतर पिघला हुआ सोना पीना और सोने की ईंटें खाना लालच की चरम सीमा को दर्शाता है। लेखक महेंद्र जैन यहाँ यह साफ संदेश देते हैं कि जरूरत से ज्यादा लालच और शक्ति का नशा आखिरकार विनाश की ओर ही ले जाता है। लावासुर के पास सब कुछ था, फिर भी वह भारत के सोने पर कब्ज़ा करना चाहता था, और इसी लालच ने उसके पूरे साम्राज्य को तबाह कर दिया।
कॉमिक्स का क्लाइमेक्स काफी धमाकेदार है। टोटान द्वारा मायाविनी का वध और तेजाबा को मार गिराना पाठकों को पूरी संतुष्टि देता है। अग्निचक्र का प्रयोग ‘सुदर्शन चक्र’ की याद दिलाता है, जो भारतीय पाठकों के लिए एक जाना-पहचाना और भावनात्मक प्रतीक है। बरखा को बचाना और अंत में टोटान का दिल्ली लौटना कहानी को एक सुखद और संतोषजनक अंत देता है।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, ‘टोटान और लावासुर’ मनोज कॉमिक्स के खजाने का एक अनमोल रत्न है। आज के पाठकों को इसकी शैली भले ही थोड़ी पुरानी लगे, लेकिन इसकी मौलिकता और रोमांच आज भी उतने ही प्रभावी हैं। यह कॉमिक्स हमें याद दिलाती है कि भारतीय लेखकों के पास भी विश्व स्तर की कहानियाँ रचने की पूरी क्षमता थी। अगर आप 90 के दशक की यादें ताज़ा करना चाहते हैं या एक शानदार देसी सुपरहीरो एडवेंचर पढ़ना चाहते हैं, तो यह कॉमिक्स जरूर पढ़नी चाहिए।
टोटान का चरित्र हमें साहस, त्याग और तकनीकी ज्ञान के महत्व का एहसास कराता है। मनोज कॉमिक्स ने इस कहानी के ज़रिये बच्चों को एक ऐसा नायक दिया, जो मुश्किल समय में उनके रक्षक की तरह खड़ा हो सके। ‘टोटान और लावासुर’ आज भी भारतीय कॉमिक्स प्रेमियों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए है।
रेटिंग: 4.5/5
