‘विनाश’ मनोज कॉमिक्स के बैनर तले प्रकाशित एक ऐसा किरदार है, जिसने पाठकों को अंतरिक्ष के रहस्यों और अलौकिक शक्तियों की एक नई दुनिया से मिलवाया। महेन्द्र जैन की कहानी और चन्दू स्टूडियो की चित्रकारी ने इसे और भी मज़ेदार बना दिया। यह कॉमिक्स “अल्फा का बेटा” सीरीज की शुरुआत है।
कहानी का विस्तृत कथानक (Plot Analysis)
कहानी दो अलग-अलग जगहों से शुरू होती है, जो आखिर में एक बिंदु पर मिल जाती हैं। एक तरफ सुदूर अंतरिक्ष में अल्फा और बीटा ग्रहों का भीषण संघर्ष है। बीटा ग्रह के क्रूर शासक ‘बीताराज’ और उसका सेनापति ‘स्काईरोब’, जो एक विशाल रोबोटिक योद्धा है, अपनी ‘डेंजर फौज’ के साथ अल्फा ग्रह को तहस-नहस कर देते हैं। अल्फा ग्रह के मार्गदर्शक ‘गुरू गामा’ अपने सबसे भरोसेमंद योद्धा ‘इलेक्ट्रॉन’ को एक खास मिशन पर भेजते हैं—उस महान रक्षक को खोजने के लिए जिसे बरसों पहले सुरक्षा की दृष्टि से पृथ्वी पर भेजा गया था।

दूसरी तरफ, पृथ्वी पर मुंबई के पास ‘किलर हाउस’ की कहानी चलती है। यहाँ मिसाइल सेंटर के मैनेजर मिस्टर आनंद अपने परिवार—पत्नी नीलम और बेटे विजय—के साथ रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय अपराधी ‘सी-हॉर्स’ और ‘किरमर’ मिसाइल के राज जानने के लिए आनंद के परिवार पर हमला करते हैं।
कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब किलर हाउस में एक भयानक धमाका होता है। विजय, जो बचपन से ही आग से आकर्षित रहता था, उस विस्फोट की ऊर्जा को सोख लेता है। वह मरता नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली और विशालकाय सुपरहीरो ‘विनाश’ के रूप में जन्म लेता है। उसी समय इलेक्ट्रॉन अपने ‘कॉमेट’ यान के साथ दुर्घटनाग्रस्त होता है। यहीं विजय को पता चलता है कि वह साधारण इंसान नहीं, बल्कि अल्फा ग्रह का राजकुमार और ‘अल्फा का बेटा’ है।
पात्रों का चरित्र चित्रण (Character Sketches)

पात्रों का चित्रण भी बहुत दिलचस्प है। विनाश का चरित्र विकसित होते हुए दिखता है—एक छोटा बच्चा, जो अपनी माँ की बीमारी से दुखी है, अचानक ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति बन जाता है। उसका रूप रौद्र है, लेकिन दिल दयालु है। आग से उसे अद्भुत शक्ति मिलती है, जो उसे ‘ह्यूमन टॉर्च’ जैसी विशिष्टता देती है।
गुरू गामा एक अनुभवी और दार्शनिक मार्गदर्शक हैं, जिनका प्रभाव ‘स्टार वार्स’ के ओबी-वान केनोबी या ‘सुपरमैन’ के जो-एल जैसा लगता है। इलेक्ट्रॉन वफादारी का प्रतीक है, जो घायल होने के बावजूद विनाश को उसकी नियति तक पहुँचाने के लिए संघर्ष करता रहता है। विलेनों में सी-हॉर्स इंसानी और जमीनी क्रूरता का प्रतीक है, जबकि स्काईरोब ठंडी और गणनात्मक मशीनी ताकत को दर्शाता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration)

कला और संवाद की बात करें तो चन्दू स्टूडियो का चित्रांकन उस समय के हिसाब से काफी प्रभावशाली है। अंतरिक्ष यानों, विदेशी ग्रहों की इमारतों और युद्ध के दृश्यों को बहुत विस्तार से दिखाया गया है। विनाश का डिजाइन—लाल सूट, नीली लेगिंग और सीने पर ‘V’ का प्रतीक—क्लासिक सुपरहीरो लुक देता है। संवादों में नाटकीयता अधिक है, जो उस समय की भारतीय फिल्मों और कॉमिक्स की पहचान थी। “विधाता के कहर से डर कमीने!” या “पाप की लंका को राख करने विनाश आ गया है” जैसे संवाद पाठकों में जोश भरते थे।
विदेशी कॉमिक्स से प्रेरणा या नकल?

जब हम ‘विनाश’ को ध्यान से देखते हैं, तो इसमें Marvel और DC जैसी पश्चिमी कॉमिक्स के कुछ तत्व नजर आते हैं। लेकिन इसे सीधे तौर पर नकल कहना गलत होगा। उस समय के भारतीय लेखक विदेशी किरदारों से प्रेरणा जरूर लेते थे।
विनाश की मूल कहानी बताती है कि वह एक बाहरी ग्रह का राजकुमार है जिसे बचाने के लिए पृथ्वी पर भेजा गया। यह बिलकुल DC के सुपरमैन (Kal-El) की याद दिलाता है। जिस तरह जो-एल ने काल-एल को पृथ्वी भेजा, वैसे ही गुरू गामा ने विनाश को भेजा।
विनाश की शक्तियाँ आग और ऊष्मा पर आधारित हैं। वह आग में नहाकर शक्तिशाली बन जाता है। यह मार्वल के ‘फैंटास्टिक फोर’ के ह्यूमन टॉर्च से थोड़ी बहुत प्रेरणा जैसी लगती है। लेकिन विनाश का व्यक्तित्व और उसका भारी भरकम शरीर इसे अलग बनाता है।
विनाश का लाल-नीला कॉस्ट्यूम और भारी कद शाज़म (Shazam) और मार्वल के ‘क्वासॉर’ जैसा लगता है। सीने पर ‘V’ का प्रतीक सुपरमैन के ‘S’ जैसा लगता है, लेकिन भारतीय अंदाज में।
‘स्काईरोब’ जैसे रोबोटिक विलेन उस समय के जापानी मेका एनिमेशन और ट्रांसफॉर्मर्स से प्रेरित लगते हैं।
तो निष्कर्ष यह है कि ‘विनाश’ पूरी तरह से नकल नहीं है, बल्कि यह एक ‘भारतीय रूपांतरण’ है। लेखक ने विदेशी कॉन्सेप्ट्स में भारतीय भावनाएं, माँ का प्यार, पिता का बलिदान और नियति (Destiny) जैसे तत्व जोड़कर इसे भारतीय पाठकों के लिए खास बना दिया।
समीक्षा का निष्कर्ष

सकारात्मक पक्ष:
‘विनाश’ की कहानी इतनी रोमांचक है कि पाठक अंतरिक्ष की गहराइयों से लेकर पृथ्वी के ‘किलर हाउस’ तक के सफर में खुद को डूबा पाते हैं। सबसे खास बात इसका इमोशनल कनेक्ट है—विजय का अपनी माँ से निस्वार्थ प्रेम और उनकी आंखों की रोशनी जाने पर उसका दुख कहानी में मानवीय संवेदनाएं भर देता है। साथ ही, अल्फा, बीटा और खोखो जैसे ग्रहों की कल्पना ने बच्चों के लिए जादुई दुनिया बना दी थी, जो आज भी विज्ञान-कथा प्रेमियों को पसंद आती है।
नकारात्मक पक्ष:
‘विनाश’ जैसी 90 के दशक की स्पेस-फैंटेसी कॉमिक्स में वैज्ञानिक तर्क की कमी थी। जैसे आग से असीमित शक्ति पाना या बिना ऑक्सीजन और स्पेस-सूट के अंतरिक्ष में उड़ना, यह आज के तार्किक पाठकों को अजीब लगेगा। साथ ही, कहानी में हिंसा का स्तर भी काफी ऊँचा है। उदाहरण के लिए, सी-हॉर्स द्वारा विजय की माँ की आंखों पर वार करना उस समय की बाल-कॉमिक्स के हिसाब से क्रूर था और कहानी के डार्क टोन को दिखाता है।
अंतिम राय:
‘विनाश’ उन कम कहानियों में से है जिसने भारतीय सुपरहीरो की परिभाषा को बढ़ाया। अगर आप 90 के दशक की नॉस्टैल्जिया महसूस करना चाहते हैं और ऐसी कहानी पढ़ना चाहते हैं जिसमें ब्रह्मांडीय युद्ध और मानवीय संवेदनाएं दोनों हों, तो ‘विनाश’ पढ़ना जरूरी है। यह सिर्फ सुपरहीरो की उत्पत्ति की कहानी नहीं है, बल्कि बुराई के खिलाफ एक कभी न खत्म होने वाले युद्ध का शंखनाद है।
