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Home » Tulsi Comics ‘Yoga’ Review | 100 Yogis से जन्मा Desi Superhero
Don't Miss Updated:9 September 2025

Tulsi Comics ‘Yoga’ Review | 100 Yogis से जन्मा Desi Superhero

तुलसी कॉमिक्स का महानायक ‘योगा’ – धर्म, योग-शक्ति और देसी सुपरहीरोइज़्म का संगम
ComicsBioBy ComicsBio9 September 2025Updated:9 September 2025111 Mins Read
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योगा कॉमिक्स रिव्यू | तुलसी कॉमिक्स का सच्चा भारतीय सुपरहीरो
“100 योगियों की शक्ति से बना – तुलसी कॉमिक्स का अनोखा हीरो ‘योगा’।”
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नब्बे के दशक की भारतीय कॉमिक्स सिर्फ किरदारों की कहानियां नहीं थीं, बल्कि वो हमारे अपने देसी सुपरहीरो की पहचान थीं। जहां पश्चिमी सुपरहीरो अपनी ताकत पाने के लिए साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट्स या किसी अलौकिक घटना पर निर्भर रहते थे, वहीं भारत ने बनाया ‘योगा’—एक ऐसा हीरो जिसकी शक्ति आई हमारी सदियों पुरानी विरासत से – योग और आध्यात्म से।

आज हम तुलसी कॉमिक्स डाइजेस्ट नंबर 457 में छपी कॉमिक्स ‘योगा’ की डिटेल में चर्चा करेंगे। ये कॉमिक्स सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि उस दौर की एक सांस्कृतिक झलक है, जो दिखाती है कि भारतीय लेखक और कलाकार कैसे पश्चिमी सुपरहीरो के कॉन्सेप्ट को अपनी जड़ों से जोड़कर एक बिल्कुल नया और अलग हीरो बना पाए। इस कॉमिक्स को लिखा है मशहूर उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा ने और चित्र बनाए हैं दिग्गज कलाकार प्रताप मुल्लिक ने। इसमें ‘योगा’ की पैदाइश और उसके पहले बड़े कारनामे की कहानी सामने आती है।

कथावस्तु: धर्म और अधर्म का शाश्वत संघर्ष


कहानी की शुरुआत किसी हॉलीवुड थ्रिलर मूवी जैसी लगती है। घना जंगल, ऊपर से तूफानी रात, और उसके बीच खड़ा ‘योगीराज योग प्रशिक्षण केंद्र’ – पूरा माहौल रहस्य और डर से भरा हुआ है। कहानी का पहला ही सीन पाठक को पकड़ लेता है और छोड़ता नहीं।

इसी दौरान चार रहस्यमयी लोग, जिनकी चाल-ढाल और हाव-भाव साफ बताते हैं कि ये खतरनाक अपराधी हैं, इस केंद्र पर हमला कर देते हैं। उनका असली मकसद है यहाँ के गुरु और केंद्र के संचालक, योगीराज को या तो अगवा करना या फिर खत्म कर देना।

यहाँ लेखक वेदप्रकाश शर्मा अपनी कलम का असली जादू दिखाते हैं। वे सीधे-सीधे नायक को सामने नहीं लाते, बल्कि पहले खलनायकों को एंट्री देकर पूरी कहानी की बुनियाद मजबूत करते हैं। और ये खलनायक कोई मामूली बदमाश नहीं हैं। इनके लीडर का नाम है ‘किंग डॉन’, जो बंदूक चलाने में इतना माहिर है कि कभी निशाना चूकता ही नहीं। उसके साथ है ‘पीटर’, जो इतना ताकतवर है कि पाँच सौ पाउंड का वजन ऐसे उठा लेता है जैसे बच्चे खिलौना उठाते हैं। फिर आता है ‘टोटो’, मार्शल आर्ट्स का एक्सपर्ट, जो सिर्फ एक वार में गर्दन तोड़ सकता है। और आखिरी है ‘बिट्टा’, एक ऐसा तलवारबाज जो पलक झपकते ही किसी को टुकड़े-टुकड़े कर दे।

इन सबका परिचय उनके डायलॉग्स और एंट्री के अंदाज़ से इस तरह दिया गया है कि पाठक तुरंत समझ जाता है – ये लोग मजाक नहीं, बल्कि असली खतरा हैं।

जब ये चारों खतरनाक अपराधी योगीराज के कमरे तक पहुँचते हैं, तो सामने का नज़ारा देखकर उनके होश उड़ जाते हैं। वहाँ योगीराज, जो एक वृद्ध योगी हैं, ज़मीन पर नहीं बल्कि हवा में तैरते हुए गहरी नींद में सो रहे होते हैं। ये सीन सिर्फ खलनायकों को ही नहीं, बल्कि कॉमिक पढ़ने वाले को भी दंग कर देता है। यहीं से कहानी में पहली बार साफ झलक मिलती है कि यहाँ साधारण इंसानों से अलग, अलौकिक शक्तियों का खेल है।

अपराधियों का कॉन्फिडेंस टूटना शुरू हो जाता है। पीटर अपनी पूरी ताकत झोंककर भी योगीराज को हिला नहीं पाता। चारों मिलकर कोशिश करते हैं, पर नतीजा वही—पूरी तरह नाकाम। तब गुस्से से तिलमिलाया किंग डॉन पहले टोटो को आदेश देता है कि योगीराज की गर्दन तोड़ दे। जब वो भी कामयाब नहीं होता, तो बिट्टा को तलवार से हमला करने को कहता है। लेकिन हैरत की बात ये कि योगीराज का शरीर मानो अभेद्य किला हो। हर वार बेअसर साबित होता है, यहाँ तक कि किंग डॉन की गोलियाँ भी उनके शरीर से टकराकर ऐसे पिघल जाती हैं जैसे किसी मोम की सतह पर गिर रही हों।

अब अपराधी घबरा जाते हैं और हार मानकर भागने की कोशिश करते हैं। लेकिन योगीराज अपनी योग शक्ति से चारों को अदृश्य दीवारों में कैद कर लेते हैं। यहीं से असली कहानी शुरू होती है—क्योंकि अब एंट्री होती है हमारे नायक ‘योगा’ की।

योगीराज अपने शिष्य को बुलाते हैं और योगा का आगमन किसी देवदूत के अवतरण जैसा लगता है। उसके आते ही एक दिव्य आभा फैल जाती है। सामने खड़ा है एक मजबूत, सुडौल शरीर वाला युवक, जिसके गले में रुद्राक्ष की माला है और छाती पर चमक रहा है ‘ॐ’ का प्रतीक। उसका शांत लेकिन दृढ़ चेहरा साफ बताता है कि उसके अंदर अपार आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति छुपी है।

इसके बाद योगीराज, योगा को उसके जन्म का असली रहस्य बताते हैं। ये कॉमिक्स का सबसे भावुक और अनोखा हिस्सा है। योगीराज बताते हैं कि योगा किसी माँ की कोख से पैदा नहीं हुआ था। बल्कि उसे भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए 100 महान योगियों ने अपनी सामूहिक प्राण-ऊर्जा और योग-शक्ति को मिलाकर एक शरीर में उतारा था। इन योगियों ने अधर्म और आसुरी ताकतों से लड़ने के लिए स्वेच्छा से अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस तरह योगा बना – उन सौ योगियों का संयुक्त रूप, उनकी शक्तियों का जीता-जागता प्रतीक। यही वजह है कि उसकी उत्पत्ति उसे बाकी सभी सुपरहीरोज़ से बिल्कुल अलग और खास बनाती है।

इसके बाद कहानी आगे बढ़ती है। योगा, अपने गुरु योगीराज के आदेश पर समाज में फैले अपराध और अन्याय को मिटाने के मिशन पर निकल पड़ता है। उसका पहला सामना कुछ स्थानीय गुंडों से होता है, जो एक लड़की को परेशान कर रहे होते हैं। यहीं पर योगा अपनी असली ताकत दिखाता है—वह गोलियों के सामने अडिग खड़ा रहता है, जीप को एक हाथ से उठा लेता है और हवा में गायब होकर गुंडों को चकरा देता है। लेकिन उसका लड़ने का तरीका किसी क्रूर योद्धा जैसा नहीं है। वह अपराधियों को सिर्फ सबक सिखाता है, मारता नहीं। बल्कि उन्हें सुधारने का एक मौका भी देता है।

कहानी का क्लाइमैक्स और मजेदार हो जाता है जब योगा का सामना किंग डॉन के असली मालिक से होता है। ये मालिक है एक विदेशी जनरल, जिसने भारत में योग-शक्ति के रहस्यों को हड़पने की साजिश रची थी। उसके पास भी एक खतरनाक योद्धा है, जिसे एक तांत्रिक गुरु ने अपनी तंत्र-मंत्र की शक्तियों से बनाया है। अब शुरू होता है धर्म और अधर्म, योग-शक्ति और तंत्र-शक्ति का अंतिम युद्ध।

इस युद्ध में योगा सिर्फ अपनी ताकत नहीं, बल्कि अपनी बुद्धि और योग की सूक्ष्म शक्तियों का भी इस्तेमाल करता है—जैसे एक साथ कई शरीर धारण करना। मुकाबला लंबा और भीषण होता है, लेकिन आखिरकार योगा विजयी साबित होता है। वह विदेशी जनरल और उसके साथियों को पकड़कर कानून के हवाले कर देता है। और इसी के साथ दुनिया को मिल जाता है एक नया धर्म-रक्षक—योगा।

चरित्र-चित्रण: आध्यात्मिकता और आधुनिकता का संगम

  • योगा:
    योगा का किरदार भारतीय आध्यात्मिकता की पहचान है। वह सिर्फ ताकतवर योद्धा नहीं, बल्कि एक अनुशासित योगी भी है। उसकी शक्तियाँ – आग, पानी, हथियार और गोलियों से अभेद्य होना, एक से अनेक शरीर बना लेना, और दूसरों के सपनों में प्रवेश कर जाना – सीधी-सीधी योग की अद्भुत सिद्धियों से जुड़ी हुई हैं। उसका शांत स्वभाव, गुरु के प्रति गहरी श्रद्धा और धर्म की रक्षा का व्रत उसे आदर्श नायक बना देता है। छाती पर बना ‘ॐ’ का निशान और गले में पड़ी रुद्राक्ष की माला उसकी देसी पहचान को और मजबूत करते हैं। वह पश्चिमी कॉमिक्स के विद्रोही या दुखों से जूझते नायकों की तरह नहीं, बल्कि संतुलित और अपने मकसद पर अडिग रहने वाला हीरो है।
  • योगीराज:
    योगीराज एक परफेक्ट गुरु का रूप हैं। वे सिर्फ शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि ज्ञानी और दूरदर्शी भी हैं। वे योगा के निर्माता भी हैं, मार्गदर्शक भी और उसकी सबसे बड़ी प्रेरणा भी। कहानी की शुरुआत में ही जब वे अपनी शक्ति दिखाते हैं तो पाठक के मन में योग की असली ताकत के लिए सम्मान और जिज्ञासा दोनों पैदा होते हैं। योगीराज ही वो सूत्रधार हैं जो नायक को उसके असली मकसद से परिचित कराते हैं।
  • खलनायक:
    किंग डॉन और उसकी टीम 80s–90s के क्लासिक बदमाशों के जैसे लगते हैं, लेकिन लेखक ने उन्हें उनके अलग-अलग हुनर देकर खास बना दिया है। ये लोग कहानी की शुरुआत में योगा के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी करते हैं और उसकी शक्तियों को दिखाने का सही मंच भी देते हैं। वहीं असली खलनायक, विदेशी जनरल, कहानी में अंतर्राष्ट्रीय साज़िश का एंगल लाता है और ये भी बताता है कि भारत की आध्यात्मिक विरासत हमेशा से बाहरी ताकतों को आकर्षित करती रही है।

कला और चित्रांकन: प्रताप मुल्लिक की कूची का कमाल

इस कॉमिक्स की आत्मा भले ही इसकी कहानी हो, लेकिन इसका असली शरीर है प्रताप मुल्लिक का शानदार चित्रांकन। भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में प्रताप मुल्लिक किसी स्तंभ से कम नहीं माने जाते। ‘अमर चित्र कथा’ से लेकर ‘नागराज’ तक, उनकी बनाई तस्वीरें पीढ़ियों की यादों में बस चुकी हैं। और ‘योगा’ में उनका काम एक बार फिर उनकी बेहतरीन कला का सबूत देता है।

  • चरित्र डिजाइन:
    योगा का डिजाइन बेहद दमदार और यादगार है। उसका मजबूत और गठीला शरीर, लहराते काले बाल, कंधे पर डाली हरी चादर (केप जैसी), और कमर पर बंधा लंगोट—ये सब मिलकर उसे एक प्राचीन योद्धा जैसा रूप देते हैं। वहीं उसका आत्मविश्वास भरा चेहरा उसे एक मॉडर्न सुपरहीरो की पहचान देता है। योगीराज का चित्रण एक शांत, ज्ञानी और आध्यात्मिक गुरु की तरह किया गया है। वहीं खलनायकों के चेहरे पर उनकी क्रूरता और चालाकी साफ झलकती है।
  • एक्शन दृश्य:
    मुल्लिक साहब एक्शन सीन्स बनाने में मास्टर थे। लड़ाई के पैनल्स इतने ज़बरदस्त लगते हैं कि उनमें गति और ताकत दोनों महसूस होती है। जैसे जब योगा जीप को एक हाथ से उठाता है या जब वह अपने कई रूप बना लेता है—इन सीन में ऊर्जा साफ झलकती है। तलवारों के टकराने, गोलियों के चलने और मुक्कों के पड़ने को “धड़ाम”, “क्रैक”, “ठाँय” जैसी आवाज़ों और तेज़ रेखाओं से इतना जीवंत बनाया गया है कि लगता है सब आंखों के सामने हो रहा है।
  • पैनल लेआउट और रंग:
    कॉमिक्स का पैनल लेआउट काफी आसान और प्रभावी है, जिससे कहानी का फ्लो बिल्कुल स्मूद बना रहता है। रंगों का इस्तेमाल उस दौर की कॉमिक्स के हिसाब से बहुत बढ़िया है। रात और रहस्यमयी दृश्यों में गहरे रंगों का प्रयोग किया गया है, जबकि दिन के सीन्स में चटख और चमकीले रंग कॉमिक को और जोशीला बना देते हैं। योगा के प्रकट होने पर उसके चारों ओर बनाई गई पीली आभा उसे और भी दिव्य और खास बना देती है।

लेखन और संवाद: वेदप्रकाश शर्मा का स्पर्श
वेदप्रकाश शर्मा हिंदी थ्रिलर और जासूसी उपन्यासों के बेताज बादशाह माने जाते थे। कॉमिक्स की दुनिया में भी उनकी पकड़ उतनी ही गहरी थी। ‘योगा’ की कहानी में उनकी खास स्टाइल साफ झलकती है।

  • गति और रोमांच:
    कहानी की रफ्तार तेज़ है। पहले ही पन्ने से रहस्य और एक्शन शुरू हो जाता है और आखिरी पन्ने तक पाठक की दिलचस्पी बनी रहती है। शर्मा जी ने कहानी में कहीं भी फालतू खींचतान नहीं की, सीधे मुद्दे पर आते हैं और वहीं से पाठक को पकड़ लेते हैं।
  • संवाद:
    किरदारों के डायलॉग छोटे, सीधे और असरदार हैं। ये न सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि हर किरदार की पर्सनैलिटी भी सामने लाते हैं। खलनायकों की बातें पढ़कर उनमें घमंड और क्रूरता साफ झलकती है, वहीं योगीराज के संवाद ज्ञान और शांति से भरे लगते हैं। योगा कम बोलता है, लेकिन जब भी बोलता है, उसके शब्दों में दृढ़ता और आत्मविश्वास होता है।
  • मौलिकता:
    योगा की उत्पत्ति की कहानी लिखना शायद शर्मा जी की सबसे बड़ी क्रिएटिविटी है। उन्होंने ऐसा सुपरहीरो गढ़ा जो पूरी तरह से भारतीय है—जिसकी ताकत किसी एक्सपेरिमेंट, केमिकल या स्पेस पावर से नहीं, बल्कि अंदरूनी साधना और योग से आती है। यही बात योगा को बाकी सभी सुपरहीरोज़ से बिल्कुल अलग बनाती है।

निष्कर्ष: एक अविस्मरणीय देसी हीरो

तुलसी कॉमिक्स की ‘योगा’ सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और आधुनिक सुपरहीरो कॉन्सेप्ट का शानदार मेल है। ये उस समय की क्रिएटिविटी का सबूत है जब हमारे लेखक और कलाकार अपनी जड़ों से प्रेरणा लेकर मौलिक और मजेदार कहानियां रच रहे थे।

वेदप्रकाश शर्मा की धारदार लिखाई और प्रताप मुल्लिक की जीवंत कला मिलकर ऐसा कॉमिक्स अनुभव देती है, जो आज भी ताज़ा और दिलचस्प लगता है। योगा का किरदार हमें याद दिलाता है कि हीरो बनने के लिए हमें बाहर देखने की ज़रूरत नहीं है—हमारी अपनी संस्कृति, दर्शन और परंपरा में ही अनगिनत शक्तियाँ छुपी हैं।

भले ही आज तुलसी कॉमिक्स का प्रकाशन बंद हो चुका है और योगा जैसे किरदार नई पीढ़ी की नज़रों से ओझल हो गए हैं, लेकिन ये कॉमिक्स भारतीय कॉमिक इतिहास में हमेशा खास जगह बनाए रखेगी। पुराने पाठकों के लिए ये प्यारी याद है, और नए पाठकों के लिए मौका है यह जानने का कि हमारे देश के सुपरहीरो कितने अलग और समृद्ध थे। ‘योगा‘ सचमुच एक देसी सुपरहीरो है, जिस पर आज भी गर्व किया जा सकता है।

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