यह कॉमिक ‘डोगा हिंदू है’ सीरीज का पांचवां और आखिरी भाग है, जो उन सारे सवालों के जवाब देता है जो पिछले चार अंकों—’डोगा हिंदू है‘, ‘अपना भाई डोगा‘, ‘डोगा हाय-हाय‘ और ‘रो पड़ा डोगा‘—में उठे थे। ये सवाल नायकत्व, राजनीति और सांप्रदायिकता से जुड़े थे।
संजय गुप्ता द्वारा लिखित और तरुण कुमार वाही द्वारा रचित यह अंक सिर्फ एक सुपरहीरो की जीत की कहानी नहीं है, बल्कि यह मुंबई शहर की आत्मा के फिर से जागने की कहानी भी है। पिछले अंकों में हमने देखा कि ‘ब्लडमैन’ और ‘कॉर्नेल जैडी’ जैसे खलनायक डोगा को तोड़ने और उसे सांप्रदायिक रंग देने की साजिश कर रहे थे। ‘डोगा का कर्फ्यू’ इस बेबसी के खत्म होने और न्याय के नए, सख्त रूप के उदय का गवाह है।
यह अंक तब आया जब पाठकों में डोगा के चरित्र को लेकर काफी उत्सुकता थी। क्या डोगा अपनी बेगुनाही साबित करेगा? क्या मुंबई की जनता फिर से अपने रक्षक पर भरोसा करेगी? इन सब सवालों का जवाब इस कॉमिक में है।
कथानक का विस्तार: रक्षक की वापसी
कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ सूरज (डोगा) अपनी चोटों और मानसिक दर्द से उबरकर फिर से अपनी वर्दी पहनता है। मुंबई सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलस रही है। सरकार और पुलिस का कर्फ्यू फेल हो चुका है क्योंकि दंगाई और अपराधी कानून से नहीं डरते। ऐसे में डोगा अपनी शर्तों पर नया कर्फ्यू लागू करता है—’डोगा का कर्फ्यू’।

डोगा का साफ संदेश है— “जो भी हथियार लेकर सड़कों पर निकलेगा, वह डोगा की गोली का शिकार होगा।” वह धर्म नहीं देखता, केवल अपराध को रोकता है। कहानी में कई ऐसे दृश्य हैं जहाँ वह हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के अपराधियों को कठोरता से दंडित करता है, यह दिखाते हुए कि अपराध का कोई मजहब नहीं होता।
खलनायक जैडी और ब्लडमैन ने डोगा की ताकत, यानी उसकी ‘कुत्ता फौज’ को खत्म करने की कोशिश की थी। इस अंक में डोगा अपने वफादार साथियों को दुश्मनों की कैद से छुड़ाता है और उन्हें शहर में शांति बनाए रखने के लिए भेजता है।
मार्मिक दृश्य: मानवता की रक्षा

कॉमिक के बीच में कुछ ऐसे दृश्य हैं जो दिल को छू लेते हैं। एक दृश्य में डोगा कर्फ्यू के बीच एक मासूम बच्चे को दंगों की आग से बचाता है। बच्चा अनाथ हो चुका है क्योंकि उसके माता-पिता दंगों में मारे गए। डोगा उसे अनाथालय पहुंचाता है। यहाँ डोगा की आँखों का लाल रंग क्रोध के साथ करुणा को भी दर्शाता है। लेखक दिखाते हैं कि डोगा का गुस्सा अपराधियों के लिए है, लेकिन उसका दिल निर्दोष लोगों के लिए धड़कता है।
साजिश का पर्दाफाश: पुलिस और सच्चाई की जीत

इंस्पेक्टर खोंपड़ और खुरदुरा, जो पिछले अंक में साजिशकर्ताओं द्वारा पकड़े गए थे, इस अंक में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ‘स्लो-मोशन’ वीडियो के जरिए दिखाया कि डोगा के गले में ‘ओम’ का लॉकेट एक औरत ने जबरदस्ती पहनाया था ताकि उसे हिंदू कट्टर दिखाया जा सके।
जब यह सच मीडिया पर आता है, तो मुंबई की जनता की आँखों से नफरत का पर्दा हट जाता है। यह दृश्य मीडिया की ताकत और सच्चाई की जीत का प्रतीक है। लोग समझते हैं कि उन्होंने अपने ही हीरो के साथ कितनी बड़ी गलती की थी।
न्याय का अनोखा तरीका: ‘ब्लड बैंक‘ और डोगा
इस अंक का सबसे अलग और असरदार हिस्सा है जहाँ डोगा उन लोगों को पकड़ता है जो दंगों का फायदा उठाकर ‘खून का काला बाजार’ चला रहे थे। ब्लडमैन का पूरा काम ही लोगों के खून पर टिका था।
डोगा अपराधियों को अस्पताल ले जाता है और उन्हें अपनी बंदूक की नोक पर ‘रक्तदान’ करने के लिए मजबूर करता है। वह कहता है— “मुंबई ने डोगा से खून माँगा था, डोगा खून देगा।” वह इन गुंडों और हिस्ट्रीशीटरों का खून निकालकर उन अस्पतालों में पहुँचाता है जहाँ दंगों के घायल जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। यह न्याय का एक शानदार उदाहरण है।
खलनायक का अंत: जैसे को तैसा
ब्लडमैन, जो लोगों के खून का सौदागर था, उसका अंत भी बहुत ही प्रतीकात्मक है। डोगा उसे गोलियों से नहीं मारता, बल्कि उसी के ‘खून के धंधे’ की सजा देता है। वह उसे इतनी चोटें पहुँचाता है कि उसका शरीर धीरे-धीरे खून की कमी से मरने लगता है। यह दृश्य डोगा के न्याय की सोच को मजबूत करता है— “कानून अपराधी को सजा देता है, डोगा उसे खत्म करता है।”
चरित्र विश्लेषण: एक परिपक्व नायक

सूरज/डोगा: इस अंक में डोगा पहले से ज्यादा परिपक्व और शांत दिखाई देता है। वह अब केवल ‘हड्डियाँ तोड़ने’ वाला हीरो नहीं है, बल्कि एक रणनीतिकार है जो समाज की समस्याओं को समझता है। उसका ‘कर्फ्यू’ ताकत दिखाने के लिए नहीं, बल्कि शांति बनाने के लिए है।
अदरक चाचा और मोनिका: इनका साथ सूरज के लिए मानसिक सहारा है। मोनिका का प्यार और अदरक चाचा का मार्गदर्शन उसे भटकने नहीं देता।
लोमड़ी (Loamdi): लोमड़ी इस पूरी सीरीज में डोगा की गुप्त ताकत रही है। उसका रहस्यमय आना और डोगा की मदद करना कहानी में रोमांच बनाए रखता है।
सांप्रदायिकता पर प्रहार: एक सामाजिक आईना
यह कॉमिक शृंखला भारतीय समाज के एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दे ‘सांप्रदायिकता’ पर सीधा प्रहार करती है। यह दिखाती है कि कैसे कुछ स्वार्थी लोग (जैसे ब्लडमैन) अपने फायदे के लिए धर्म का इस्तेमाल करके आम लोगों को लड़वाते हैं। डोगा का यह कहना— “मुंबई का कोई धर्म नहीं है, मुंबई का धर्म केवल इंसानियत है,” आज के समय में भी उतना ही सटीक और महत्वपूर्ण है।
कला और दृश्य प्रस्तुति (Art and Panels)

‘स्टूडियो इमेजेज’ और जगदीश कुमार का चित्रांकन इस अंक को बहुत शानदार बनाता है।
डोगा का टैंक पर चढ़ना या आग की लपटों के बीच से गुजरना, हर पैनल में ऐसा लगता है जैसे कोई फिल्म देख रहे हों।
डोगा के मुखौटे के पीछे उसकी आँखों का चित्रण उसके अलग-अलग भाव—क्रोध, दुख और संकल्प—को बखूबी दिखाता है। रात के दृश्यों में गहरा नीला और दंगों के दृश्यों में चमकदार लाल रंग का इस्तेमाल कहानी में तनाव और डर का एहसास बढ़ाता है।
संवाद और पटकथा

तरुण कुमार वाही के संवाद इस अंक की जान हैं। उनके संवाद छोटे हैं, लेकिन बहुत असरदार हैं। खासकर वह भाषण जिसमें डोगा जनता से रक्तदान की अपील करता है और अपराधियों को चेतावनी देता है, वह पाठकों को झकझोर देता है। कहानी की गति बहुत तेज है और पढ़ते समय एक पल भी बोरियत नहीं होती।
सीरीज का समापन: ‘डोगा हिंदू है’ का निष्कर्ष
सीरीज के अंत में साफ हो जाता है कि डोगा न हिंदू है, न मुसलमान। वह सिर्फ एक ‘रक्षक’ है। संजय गुप्ता ने ग्रीन पेज (Green Page) के जरिए एक सुंदर संदेश दिया है— “रक्त का रंग लाल होता है, और वह लाल रंग हर इंसान में एक ही है।” यह सीरीज डोगा को भारतीय कॉमिक्स के सबसे खास और ऊँचे नायक के रूप में स्थापित करती है।
समीक्षा का निष्कर्ष: क्यों पढ़ें ‘डोगा का कर्फ्यू’?
यह कॉमिक सिर्फ एक्शन पसंद करने वालों के लिए नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो समाज, कानून और नैतिकता के बीच के संघर्ष को समझना चाहते हैं। यह हमें सिखाती है कि:
सत्य को दबाया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता। एक अकेला व्यक्ति भी बदलाव ला सकता है अगर उसका संकल्प मजबूत हो। नफरत का जवाब नफरत नहीं, बल्कि न्याय और निस्वार्थ सेवा है।
अंतिम विचार
‘डोगा का कर्फ्यू’ राज कॉमिक्स की एक शानदार उपलब्धि है। यह कहानी पढ़ने के बाद भी लंबे समय तक मन में रह जाती है और सोचने पर मजबूर करती है। डोगा की महानता इस बात में है कि वह अपने अपमान को भूलकर फिर से जनता की मदद करने निकल पड़ता है, जिसने उसे पहले चोट पहुंचाई थी।
रेटिंग: 5/5
