तुलसी कॉमिक्स की कालजयी कृति “बाज़ और बाज़” (Baaz Aur Baaz) पर यह विस्तृत समीक्षा, पिछले अंक ‘बाज़ का आतंक’ के बाद की कहानी को एक बिल्कुल नए और कहीं ज़्यादा बड़े स्तर पर ले जाती है। यह कॉमिक अपने नाम के साथ पूरी तरह इंसाफ करती है और पाठकों को उस टकराव तक पहुँचाती है, जहाँ एक ही नाम और एक जैसी ताक़तों वाले दो किरदार आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं।
प्रस्तावना: महासंग्राम की बुनियाद

तुलसी कॉमिक्स की बाज़ सीरीज़ की यह दूसरी और बेहद अहम कड़ी है। पिछले अंक में हमने देखा था कि कैसे एक प्रोफेशनल हत्यारे ‘देव’ को भूतों की दुनिया में ले जाकर ‘बाज़’ की ताक़तें दी जाती हैं। इस अंक (संख्या 484) में कहानी वहीं से आगे बढ़ती है और धीरे-धीरे एक ऐसे बड़े राज़ से पर्दा उठता है, जो देव (मुख्य नायक) और उस दुनिया के असली वारिस ‘राजकुमार बाज़’ के बीच टकराव की असली वजह बनता है। विकास-पंकज का दमदार चित्रांकन और परशुराम शर्मा का संतुलित लेखन मिलकर इस कॉमिक को एक ज़बरदस्त थ्रिलर का रूप देते हैं।
कथानक का विस्तृत विश्लेषण (Story Summary)
कहानी की शुरुआत ठीक वहीं से होती है, जहाँ पिछला अंक खत्म हुआ था। भूतों की दुनिया के महाराज अपने खोए हुए बेटे राजकुमार बाज़ की याद में बेहद टूटे हुए और परेशान हैं। उन्हें इस बात का गहरा मलाल है कि एक आम इंसान, यानी देव, उनके बेटे का हमशक्ल होने का फायदा उठाकर उनकी दुनिया से जादुई पोशाक और शक्तियाँ लेकर भाग गया।

महाराज अपने सबसे खतरनाक और माहिर योद्धा ‘गुरु शैतान’ (Master Satan) को बुलाते हैं। शैतान का लुक और उसका अंदाज़ उसे तुरंत यादगार बना देता है—लंबी चोटी, चेहरे पर क्रूरता और जबरदस्त शक्तियाँ। महाराज उसे हुक्म देते हैं कि वह मानव लोक में जाकर उस धोखेबाज़ देव को मारे और जादुई पोशाक वापस लेकर आए। यहीं शैतान साफ-साफ कह देता है कि जब तक वह पोशाक देव के पास है, उसे मारना लगभग नामुमकिन है, क्योंकि वही पोशाक उसे हर हमले से बचाती है।
मानव लोक में, देव यानी बाज़, खान बहादुर और सामरा की लाशों को ठिकाने लगाने के लिए उन्हें कब्रिस्तान ले जाता है। वह उन्हें ईसाई रीति-रिवाज से दफनाता है, ताकि किसी को कोई शक न हो। इसी कब्रिस्तान में गुरु शैतान की एंट्री होती है। यह पूरा सीन और दोनों के बीच होने वाली भिड़ंत कॉमिक के सबसे रोमांचक हिस्सों में से एक बन जाती है। शैतान अपनी अदृश्य होने की ताक़त और जादुई ‘बाज़ चक्र’ का इस्तेमाल करता है। देव पहली बार किसी ऐसे दुश्मन से लड़ रहा होता है, जो उसका गुरु भी है।

लड़ाई के दौरान देव समझ जाता है कि वह शैतान को सीधे-सीधे हरा नहीं सकता। ऐसे में वह ताक़त नहीं, दिमाग का इस्तेमाल करता है और शैतान के सामने एक सौदा रखता है। देव उसे बताता है कि वह जानता है कि असली राजकुमार बाज़ कहाँ छिपा हुआ है। वह ‘ईगल इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन’ के ठिकाने ‘आइजन फोर्ट’ की जानकारी देता है। देव और शैतान के बीच बना यह अस्थायी गठबंधन कहानी को बिल्कुल नई दिशा में ले जाता है।
कहानी का सबसे बड़ा झटका तब लगता है, जब देव उस इंसान से मिलता है, जिसे वह अपना हमशक्ल समझकर मारने आया था। वह कोई और नहीं, बल्कि भूतों की दुनिया का असली राजकुमार बाज़ ही होता है। यहीं एक भावनात्मक फ्लैशबैक सामने आता है। राजकुमार बाज़ अपनी पहले से तय और बंधी-बंधाई ज़िंदगी से ऊब चुका था। उसे कोमला नाम की एक अप्सरा से प्यार हो जाता है, लेकिन उसके पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ होते हैं। अपने प्यार के लिए वह अपनी दुनिया छोड़ देता है और मानव लोक में आकर ‘सुप्रीमो’ (Supremo) बन जाता है। यहीं से वह ब्लैक टाइगर संगठन की नींव रखता है।
राजकुमार बाज़ के पास एक जादुई अंगूठी होती है, जिसकी मदद से वह देव के शरीर से बाज़ की पोशाक उतार देता है। देव पूरी तरह बेबस हो जाता है। राजकुमार उसे बताता है कि मानव दुनिया में आकर उसने देखा कि यहाँ हर इंसान स्वार्थ और लालच में डूबा हुआ है, इसलिए उसने अपराध की दुनिया पर राज करना ही अपनी किस्मत मान लिया।

लेकिन देव हार मानने वालों में से नहीं है। वह गुरु शैतान की मदद से एक चाल चलता है। वह ‘मस्कर’ नाम की एक जादुई विद्या का इस्तेमाल करता है, जिससे उसकी साँसें रुक जाती हैं और वह अपनी मौत का नाटक करता है। राजकुमार उसे सच में मरा हुआ मानकर ताबूत में बंद करवा देता है। जैसे ही ताबूत सुप्रीमो के मुख्य अड्डे पर पहुँचता है, देव को होश आ जाता है। आख़िरी हिस्से में देव और राजकुमार यानी सुप्रीमो के बीच हेलीकॉप्टर में आसमान के ऊपर ज़बरदस्त जंग होती है। देव अपने गुरु से सीखे ‘बाज़ चक्र’ का इस्तेमाल करता है और आखिरकार बुराई बन चुके राजकुमार बाज़ का अंत कर देता है।
पात्रों का गहन विश्लेषण
देव (बाज़): इस अंक में देव का किरदार पहले से कहीं ज़्यादा समझदार और परिपक्व नज़र आता है। वह सिर्फ ताक़त के भरोसे नहीं चलता, बल्कि हालात को समझकर दिमाग से फैसले लेता है। गुरु शैतान के साथ समझौता करना दिखाता है कि वह जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि सोच-समझकर कदम उठाता है।
गुरु शैतान: वह ऐसा खलनायक है जो अपने राजा के लिए पूरी तरह वफादार है, लेकिन साथ ही बेहद डरावना भी। उसका व्यक्तित्व खौफ पैदा करता है और उसकी लड़ने की शैली, खासकर चक्र का इस्तेमाल, उसे इस कॉमिक का सबसे यादगार किरदार बना देता है।

राजकुमार बाज़ (सुप्रीमो): वह इस कहानी का असली एंटी-हीरो है। उसकी प्रेम कहानी पाठक के मन में उसके लिए हमदर्दी पैदा करती है, लेकिन मानव लोक में फैलाया गया उसका आतंक उसे एक निर्दयी अपराधी बना देता है। उसका किरदार यह दिखाता है कि अगर ताक़त गलत हाथों में चली जाए, तो एक अच्छा इंसान भी धीरे-धीरे राक्षस बन सकता है।
कला और चित्रांकन (Artistic Review)
विकास-पंकज की जोड़ी ने इस अंक में अपनी कला का पूरा जादू दिखाया है। हवा में उड़ते हेलीकॉप्टर से लटककर होने वाली लड़ाई और कब्रिस्तान की धुंधली रोशनी में दिखाई गई भिड़ंत बेहद जानदार लगती है। कहानी के भावनात्मक पलों में देव की पोशाक उतरने के बाद उसके चेहरे पर दिखने वाली बेबसी और सुप्रीमो के चेहरे पर झलकता घमंड बहुत बारीकी से उभारा गया है। रंगों का चुनाव भी बिल्कुल सटीक है। भूतों की दुनिया के लिए गहरे और रहस्यमय रंग, और मानव लोक के लिए अलग-अलग टोन इस्तेमाल करके दोनों दुनियाओं का फर्क साफ महसूस कराया गया है।
संवाद और पटकथा (Dialogues and Screenplay)
कॉमिक के संवाद दमदार और असर छोड़ने वाले हैं। जब देव कहता है, “मेरे लिए धड़कन या नब्ज बंद करना मामूली बात है,” तो उसकी जादुई ट्रेनिंग और आत्मविश्वास साफ झलकता है। पटकथा इतनी तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ती है कि कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती। एक राज़ खुलता है और तुरंत दूसरा सामने आ जाता है। ‘सलाम टापू’ और ‘आइजन फोर्ट’ जैसे लोकेशन कहानी को इंटरनेशनल जासूसी थ्रिलर जैसा फील देते हैं।
समीक्षात्मक टिप्पणी: अच्छाइयाँ और कमियाँ

अच्छाइयाँ:
विकास-पंकज की यह रचना कई गहरी परतों वाली कहानी पेश करती है, जो इसे सिर्फ एक एक्शन कॉमिक नहीं रहने देती। इसमें प्यार, विद्रोह और पहचान जैसे गंभीर विषय भी शामिल हैं। नायक के साथ-साथ खलनायक के बैकग्राउंड पर भी पूरा ध्यान दिया गया है, जिससे हर किरदार मजबूत लगता है। जादुई अंगूठी, चक्र और अदृश्य होने जैसी शक्तियाँ पाठक की कल्पना को उड़ान देती हैं और अंत तक रोमांच बनाए रखती हैं।
कमियाँ:
कोमला का किरदार नाम और चर्चा में तो खूब आता है, लेकिन कहानी में उसकी सीधी भूमिका थोड़ी सीमित रहती है। अगर उसका रोल थोड़ा और सक्रिय होता, तो भावनात्मक असर और गहरा हो सकता था। इसके अलावा ‘मस्कर विद्या’ जैसी कुछ जादुई शक्तियों को थोड़ा और साफ तरीके से समझाया जा सकता था, ताकि नए पाठक बिना उलझे कहानी से जुड़ सकें।
निष्कर्ष (Final Verdict)
“बाज़ और बाज़” तुलसी कॉमिक्स के इतिहास की एक यादगार और शानदार कृति है। यह कहानी सिखाती है कि सिर्फ ताक़त ही किसी इंसान को महान नहीं बनाती, बल्कि उसका चरित्र और उसके इरादे उसकी असली पहचान होते हैं। देव का एक किराए के हत्यारे से बदलकर न्याय के रक्षक बनना इस कॉमिक की सबसे प्रेरणादायक यात्रा है।
यह कॉमिक 90 के दशक के उस सुनहरे दौर की याद दिलाती है, जब बच्चों की दुनिया टीवी से ज़्यादा इन रंगीन पन्नों में बसती थी। अगर आपको सस्पेंस, सुपरहीरो एक्शन और जादुई रोमांच पसंद है, तो “बाज़ और बाज़” आपकी कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए। इसका अंत पाठक को अगले भाग “बाज़ का हमला” के लिए उत्सुक छोड़ देता है और सीरीज़ की निरंतरता को मजबूती देता है।
कुल मूल्यांकन: 4.8/5

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