राज कॉमिक्स की ‘नागायण’ श्रृंखला सिर्फ एक कहानी नहीं थी, बल्कि यह भारतीय कॉमिक्स उद्योग के इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे महत्वाकांक्षी कोशिशों में से एक थी। साल 2007 में ‘वरण काण्ड’ से शुरू हुआ यह सफर 2009 में ‘इति काण्ड’ के साथ अपने भावुक और यादगार अंत तक पहुँचा। संजय गुप्ता की परिकल्पना और अनुपम सिन्हा की लेखनी व शानदार चित्रांकन से सजी यह 128 पृष्ठों की भव्य कॉमिक्स, भारतीय सुपरहीरो—नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव—के जीवन का अब तक का सबसे बड़ा मील का पत्थर मानी जाती है। ‘इति’ शब्द का मतलब भले ही ‘समाप्ति’ हो, लेकिन यह अंत दरअसल एक नए भविष्य की शुरुआत भी था।
यह समीक्षा इस महागाथा के अंतिम भाग का बेहद गहराई से विश्लेषण करती है, जहाँ युद्ध के नतीजे, पात्रों के बलिदान और इस पूरी श्रृंखला द्वारा छोड़ी गई विरासत पर विस्तार से चर्चा की गई है।
कथानक की विस्तृत रूपरेखा (The Epic Conclusion)

‘इति काण्ड’ की कहानी ठीक वहीं से शुरू होती है, जहाँ ‘समर काण्ड’ खत्म हुआ था—ध्रुव की वीरगति (दिखावटी मृत्यु) और नागराज का गहरा विलाप। पूरी कहानी को सात बड़े अध्यायों में बाँटा गया है, जो पाठकों को भावनाओं और रोमांच से भरे एक जबरदस्त सफर पर ले जाते हैं।
अध्याय 1: महाबली (The Almighty)
कहानी की शुरुआत अलंध्या में हो रहे भयानक युद्ध से होती है। क्रूरपाशा (नागपाशा) को पूरा यकीन है कि उसने ध्रुव को मार डाला है। दूसरी तरफ नागराज शोक और गुस्से की आग में जल रहा है। इसी बीच यह बड़ा रहस्य सामने आता है कि ध्रुव असल में मरा नहीं था, बल्कि उसने विषांक के साथ मिलकर क्रूरपाशा को धोखा देने की एक चाल चली थी। यह अध्याय साफ दिखाता है कि ध्रुव की बुद्धि, नागराज की ताकत जितनी ही अहम है।
अध्याय 2: मृत्यु शीघ्र (The Rapid Death)
अपनी हार से बौखलाया क्रूरपाशा ‘ब्लैक पावर्स’ की पूरी सेना को मैदान में उतार देता है। यहाँ नागराज और ध्रुव की सेना—जिसमें यति और नाग योद्धा शामिल हैं—के बीच जबरदस्त टक्कर होती है। अनुपम सिन्हा ने जिस तरह से इस युद्ध को चित्रों में उतारा है, वह सीधे ‘महाभारत’ के कुरुक्षेत्र की याद दिला देता है।

अध्याय 3: घात–प्रतिघात (The Counter-Attack)
महानगर के भीतर एक अलग ही जंग चल रही है। ‘ममी’ यानी श्वेता की यादें धीरे-धीरे लौटने लगती हैं। ग्रैंड मास्टर रोबो और नताशा के बीच का संघर्ष अपने चरम पर पहुँच जाता है। ध्रुव का बेटा ऋषि और नागराज का जैविक पुत्र जलज, अपनी कम उम्र के बावजूद युद्ध की रणनीतियों में अहम भूमिका निभाते हैं। यहाँ ‘ब्लैक टर्मिनेटर्स’ और ‘रोबो फोर्सेज’ की लड़ाई आधुनिक तकनीक का शानदार नमूना पेश करती है।
अध्याय 4: जिगांलू और यतिराज का सत्य
यतिराज जिंगालू, जो पूरी सीरीज में एक बेहद अहम कड़ी रहे हैं, अब अपने अतीत का सामना करते हैं। हलाहल कुंड में गिरने के बाद उनकी याददाश्त चली गई थी, लेकिन रानी यति की ‘मृत्युंजय साधना’ उन्हें फिर से सच से रू-बरू कराती है। यह अध्याय साफ करता है कि यति और नाग कभी भी एक-दूसरे के दुश्मन नहीं थे, बल्कि काली शक्तियों ने उन्हें आपस में लड़ने पर मजबूर किया था।
अध्याय 5: प्रतिज्ञा और बलिदान
यह पूरी कॉमिक्स का सबसे भावुक और दिल छू लेने वाला हिस्सा है। भारती, जो नागराज की पहली पत्नी थी, ‘साकार-आकार’ रूप में नागराज को बचाने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देती है। नागराज के लिए भारती का प्रेम पूरी तरह निस्वार्थ था। वह जानती थी कि नागराज का दिल विसर्पी के पास है, फिर भी उसने अपने पति के धर्म और दुनिया की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी। भारती के अंतिम शब्द पढ़कर पाठकों की आँखें अपने-आप नम हो जाती हैं।
अध्याय 6: निर्णय (The Decision)
क्रूरपाशा के तीन रूप—क्रूरपाशा, भीरुपाशा और सुप्तपाशा—के बीच का अंदरूनी संघर्ष सामने आता है। भीरुपाशा, जो डर का प्रतीक है, और सुप्तपाशा, जो आलस्य का प्रतीक है, आखिरकार क्रूरपाशा की ताकत को ही कमजोर कर देते हैं। यह अध्याय यह संदेश देता है कि बुराई अक्सर अपने ही अंदर छिपे दोषों से खत्म होती है। नागराज अपने ‘घूर्णास्त्र’ और ‘परमनाशक अस्त्र’ की मदद से काली शक्तियों के केंद्र को नष्ट कर देता है।

अध्याय 7: आयाम और इति (The Final Dimension)
अंतिम अध्याय में महाकाल छिद्र और बाबा गोरखनाथ आमने-सामने होते हैं। यहीं यह बड़ा खुलासा होता है कि ‘अजनबी’ (Stranger), जो अब तक नागराज की मदद कर रहा था, असल में महाकाल छिद्र की ही एक चाल था, ताकि वह ‘अमृत’ और ‘काली शक्ति’ दोनों पर कब्ज़ा कर सके। आखिरकार नागराज और ध्रुव की पुण्य आत्माओं की संयुक्त शक्ति बुराई के इस केंद्र को जड़ से उखाड़ फेंकती है।
पात्रों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Character Deep Dive)
नागराज: मर्यादा का चरम
पूरी ‘नागायण’ सीरीज में नागराज को लगभग एक ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में पेश किया गया है। ‘इति काण्ड’ में हमें उसका वह रूप देखने को मिलता है, जहाँ वह अपनी दोनों पत्नियों—भारती और विसर्पी—के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाता है। भारती के बलिदान पर उसका टूटकर रोना यह साफ दिखाता है कि नागराज कोई पत्थर दिल योद्धा नहीं, बल्कि भावनाओं से भरा एक संवेदनशील इंसान भी है। उसका ‘ब्लैक नागराज’ से दोबारा ‘श्वेत नागराज’ बनना सिर्फ रूपांतरण नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है।
सुपर कमांडो ध्रुव: बुद्धिमत्ता का अमरत्व
ध्रुव इस पूरी सीरीज में यह साबित कर देता है कि एक साधारण इंसान भी अपनी बुद्धि, साहस और धैर्य के दम पर देवताओं और दानवों के युद्ध की दिशा बदल सकता है। अपनी बहन श्वेता को ममी के रूप में वापस पाना, और नताशा के साथ अपने रिश्ते की कड़वाहट को सहते हुए भी ध्रुव कभी डगमगाता नहीं है। वह हर हाल में स्थिर रहता है। यही कारण है कि इस पूरी गाथा में ध्रुव असली रणनीतिकार, यानी ‘कृष्ण’ की भूमिका निभाता हुआ नजर आता है।

भारती: एक महान बलिदान
भारती ‘नागायण’ की सबसे दुखद, लेकिन सबसे महान नायिका है। उसने ऐसे विवाह को निभाया जो भले ही सिर्फ कानूनी था, लेकिन उसका समर्पण पूरी तरह सच्चा और निस्वार्थ था। ‘साकार-आकार’ के रूप में उसका विलीन होना यह सिखाता है कि प्रेम केवल पाने का नाम नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद को खो देने का भी नाम है। अगर भारती न होती, तो नागराज की यह जीत कभी पूरी नहीं हो पाती।
विसर्पी: शक्ति और धैर्य
विसर्पी ने पूरी सीरीज में एक बंदी राजकुमारी और एक योद्धा रानी—दोनों भूमिकाएँ बखूबी निभाईं। नागराज पर उसका अटूट विश्वास ही उसे क्रूरपाशा की भयानक यातनाएँ सहने की ताकत देता है। अंत में नागराज और विसर्पी का मिलन जरूर सुखद है, लेकिन भारती की यादें विसर्पी के मन में हमेशा एक टीस बनकर मौजूद रहेंगी।
क्रूरपाशा और नगीना: पतन की कहानी
नागपाशा यानी क्रूरपाशा का पतन उसकी खुद की असीम महत्त्वाकांक्षाओं की वजह से होता है। नगीना का विसर्पी की माँ, यानी विषप्रिया के रूप में सामने आना, इस कहानी का एक जबरदस्त ‘प्लॉट ट्विस्ट’ है। यहाँ बुराई का बुराई से टकराना इस पूरी सीरीज को और भी मजबूत और प्रभावशाली बना देता है।
कला और चित्रांकन: अनुपम सिन्हा का मास्टरपीस

‘इति काण्ड’ में अनुपम सिन्हा का आर्टवर्क अपने शिखर पर दिखाई देता है। उनकी कल्पनाशीलता अलंध्या के अलग-अलग आयामों, उड़ते यानों और हजारों योद्धाओं के चित्रण में एक भव्यता भर देती है। इस कॉमिक के पन्नों का लेआउट पारंपरिक सीमाओं को तोड़ता है, जहाँ पैनल एक-दूसरे में इस तरह घुलते-मिलते हैं कि कहानी की रफ्तार और रोमांच कहीं भी थमता नहीं है।
खास तौर पर भारती के बलिदान वाले दृश्यों में पात्रों के चेहरे के भाव इतने सजीव और भावुक हैं कि वे किसी फिल्मी सीन की तरह आँखों के सामने जीवंत हो उठते हैं। इसके साथ ही सुनील कुमार पाण्डेय और उनकी टीम का रंग संयोजन ‘डार्क वर्ल्ड’ और ‘श्वेत शक्तियों’ के बीच का फर्क इतनी खूबसूरती से दिखाता है कि यह पूरी कॉमिक एक अविस्मरणीय दृश्य अनुभव बन जाती है।
पौराणिक और आधुनिक संगम (Thematic Excellence)
‘नागायण’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आधुनिक भविष्यवादी सोच (2025 AD) को ‘रामायण’ के पौराणिक तत्वों के साथ बेहद शानदार तरीके से जोड़ा गया है। यह पाठकों को उनकी जड़ों से जोड़ते हुए आगे की सोच भी देता है।
अलंध्या तक पहुँचने के लिए नागों द्वारा बनाया गया ‘सर्प-सेतु’, क्रूरपाशा के दरबार में विषांक का अंगद की तरह अपने कदम जमाना, और ध्रुव के मरणासन्न होने पर जिंगालू द्वारा यति-विज्ञान रूपी ‘संजीवनी’ लाना—ये सभी प्रसंग सीधे-सीधे रामायण की याद दिलाते हैं।
इसी तरह, भीरुपाशा का नागराज की मदद करना विभीषण के चरित्र की झलक देता है। ये सभी तत्व मिलकर ‘नागायण’ को सिर्फ एक कॉमिक नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक और रचनात्मक कृति बना देते हैं।
सामाजिक और दार्शनिक संदेश

‘इति काण्ड’ हमें गहरे जीवन मूल्यों से रूबरू कराता है। यह सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, सत्य का रास्ता कभी हारता नहीं है और अंत में जीत हमेशा न्याय की ही होती है।
नागराज और ध्रुव की अटूट दोस्ती यह संदेश देती है कि सच्चा मित्र वही होता है जो मुश्किल समय में सिर्फ साथ ही नहीं खड़ा रहता, बल्कि आपकी कमियों को अपनी ताकत से पूरा भी करता है।
भारती जैसे पात्रों का बलिदान यह याद दिलाता है कि बड़े उद्देश्यों को हासिल करने के लिए अक्सर निजी नुकसान सहने पड़ते हैं। वहीं अंत में ऋषि और जलज को एक साथ खड़ा दिखाना इस बात का प्रतीक है कि भले ही नायक समय के साथ विदा हो जाएँ, लेकिन नायकत्व की मशाल कभी बुझती नहीं और अगली पीढ़ी उसे आगे बढ़ाने के लिए हमेशा तैयार रहती है।
निष्कर्ष और अंतिम रेटिंग

‘नागायण: इति काण्ड’ सिर्फ एक कॉमिक बुक नहीं, बल्कि एक पूरा अनुभव है। यह भारतीय सुपरहीरो कहानियों का शिखर है। यह हमें गर्व महसूस कराती है कि हमारे पास नागराज और ध्रुव जैसे नायक हैं, और संजय गुप्ता व अनुपम सिन्हा जैसे रचनाकार हैं।
यह श्रृंखला हमें सिखाती है कि ‘राम राज्य’—यानी शांति और न्याय का युग—केवल एक पौराणिक कल्पना नहीं, बल्कि एक ऐसा लक्ष्य है जिसे हम अपनी बुद्धि, एकता और नैतिकता से हासिल कर सकते हैं। ‘इति काण्ड’ का अंत जितना भव्य है, उतना ही भावुक भी।
सकारात्मक पक्ष (Pros):
अतुलनीय सस्पेंस और रहस्यों का खुलासा। विश्व-स्तरीय चित्रांकन और रंगों का शानदार प्रयोग। पात्रों का गहरा भावनात्मक विकास। रामायण और आधुनिक विज्ञान का बेहतरीन मेल।
नकारात्मक पक्ष (Cons):
अत्यधिक पात्रों की वजह से नए पाठकों के लिए कहानी थोड़ी जटिल हो सकती है, हालांकि श्रृंखला के इस अंतिम चरण में यह लगभग अपरिहार्य था।
अंतिम निर्णय:
अगर आपने ‘नागायण’ नहीं पढ़ी है, तो आपने भारतीय साहित्य का एक अनमोल रत्न मिस कर दिया है। यह हर उम्र के पाठकों के लिए एक जरूरी कृति है। यह साबित करती है कि राज कॉमिक्स सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो एक मजबूत, भावनात्मक और गहरी कहानी चाहता है।
अंतिम रेटिंग: 5/5 (मास्टरपीस – कालजयी रचना)
