‘सूरमा’ यह कॉमिक्स राज कॉमिक्स के दो सबसे लोकप्रिय और ताक़तवर सुपरहीरो—‘महानगर के रक्षक’ नागराज और ‘परमाणु शक्ति के स्वामी’ परमाणु—की जुगलबंदी और उनके बीच पैदा हुई एक बड़ी गलतफहमी की महागाथा है। लगभग 90 पन्नों की यह कॉमिक्स सिर्फ़ एक एक्शन थ्रिलर नहीं है, बल्कि बलिदान, दोस्ती, भरोसे और खतरनाक वैज्ञानिक प्रयोगों पर आधारित एक गहरी और सोचने पर मजबूर कर देने वाली कहानी भी है।
कहानी की पृष्ठभूमि और साजिश (Plot Summary):

कहानी की शुरुआत भारत की राजधानी दिल्ली से होती है, जो पहले ही अपराध और प्रदूषण से जूझ रही है और अब रहस्यमयी बीमारियों की चपेट में भी आने लगी है। इसी माहौल में कहानी के दो मुख्य खलनायक—डॉक्टर वायरस और सर्जन (जिसे ऑपरेटर भी कहा गया है)—एक बेहद खतरनाक साजिश रचते हैं। डॉक्टर वायरस, जो जैविक हथियारों का एक्सपर्ट है, एक ऐसी ‘जीवित कोशिका’ (Living Cell) तैयार करता है जो किसी भी पूरे शहर को धीरे-धीरे निगल सकती है।
अपनी योजना को अंजाम देने के लिए वे ‘ड्रैगन फ्लाई’ नाम के एक अजीब और खतरनाक प्राणी को महानगर (राजकोट) भेजते हैं, ताकि वह नागराज के सांपों को चुरा सके। ड्रैगन फ्लाई चालाकी से नागराज को भ्रमित कर देता है और उसे यकीन दिलाता है कि इस पूरे हमले के पीछे परमाणु का हाथ है। दूसरी ओर दिल्ली में परमाणु एक दुर्घटनाग्रस्त फाइटर प्लेन को आबादी वाले इलाके पर गिरने से बचाने में लगा होता है। तभी उसका सामना ‘विखवंडी’ नाम के एक रेडियोधर्मी राक्षस से होता है, जिसे डॉक्टर वायरस ने खास तौर पर परमाणु को उलझाने के लिए भेजा था।

कहानी का सबसे रोमांचक और यादगार मोड़ तब आता है जब नागराज और परमाणु आमने-सामने आ जाते हैं। गलतफहमियों के कारण दोनों के बीच ज़बरदस्त युद्ध छिड़ जाता है। नागराज को लगता है कि परमाणु ने उसके सांपों को नुकसान पहुँचाया है और दिल्ली पर हमला किया है, जबकि परमाणु को यह विश्वास हो जाता है कि नागराज किसी वजह से अपना संतुलन खो चुका है। यही टकराव इस कॉमिक्स की आत्मा बन जाता है।
मुख्य पात्रों का विश्लेषण:
नागराज (Nagraj): इस कॉमिक्स में नागराज का एक गंभीर, भावनात्मक और बेहद इंसानी रूप देखने को मिलता है। जब उसके प्रिय सांपों—खासकर नागफनी और अन्य—को नुकसान पहुँचता है, तो वह भीतर से टूट जाता है। लेकिन नागराज की असली महानता उसके बलिदान में झलकती है। जैसे ही उसे पता चलता है कि परमाणु की जान खतरे में है, वह अपनी सूक्ष्म शक्तियों का इस्तेमाल करके परमाणु के शरीर के अंदर प्रवेश करता है और उसके रक्त संचार को ठीक करता है। अंत में मानवता को बचाने के लिए वह खुद को एंटी–वेनम बनाने की प्रक्रिया में मौत के बहुत करीब पहुँच जाता है, जो उसके चरित्र की गहराई और त्याग को साफ़ दिखाता है।

परमाणु (Parmanu): परमाणु यानी विनय, जो पेशे से एक पुलिस इंस्पेक्टर भी है, इस कहानी में कर्तव्य और ज़िम्मेदारी की मिसाल बनकर सामने आता है। वह दिल्ली को बचाने के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक देता है। विखवंडी के साथ उसका संघर्ष कहानी में विज्ञान और शक्ति के संतुलन को अच्छे से दिखाता है। प्रोफेसर वर्मा के ‘प्रो–बॉट’ के साथ उसका संवाद और अपनी बेल्ट की नई क्षमताओं—जैसे मॉलिक्यूलर कॉम्पैक्टर—का इस्तेमाल उसे एक आधुनिक और टेक्नोलॉजी-आधारित सुपरहीरो के रूप में स्थापित करता है।
खलनायक (डॉक्टर वायरस और सर्जन): डॉक्टर वायरस एक क्लासिक कॉमिक बुक विलेन है, जिसका मकसद सिर्फ़ तबाही मचाना है। वहीं सर्जन या ऑपरेटर का किरदार चिकित्सा जगत में फैले लालच और भ्रष्ट सोच को दर्शाता है। इन दोनों की जोड़ी इस कहानी को सिर्फ़ मारधाड़ तक सीमित नहीं रहने देती, बल्कि इसे एक दमदार बायोलॉजिकल थ्रिलर का रूप दे देती है।
कथानक के मुख्य आकर्षण (Highlights of the Comic):
नागराज और परमाणु के बीच की गलतफहमी और टकराव इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताक़त है। लेखक ने बहुत बारीकी से दिखाया है कि कैसे हालात और साजिशें दो अच्छे और नेक इरादों वाले लोगों को भी आमने-सामने खड़ा कर सकती हैं।
विज्ञान का इस्तेमाल हमेशा से राज कॉमिक्स की खास पहचान रहा है, और ‘सूरमा’ इसमें भी पीछे नहीं रहती। परमाणु की बेल्ट का मॉलिक्यूलर कॉम्पैक्टर, जिससे वह अमीबा जितना छोटा हो सकता है, और नागराज का अपने सांपों की सेना के ज़रिये रक्त कोशिकाओं के भीतर जाकर लड़ना—ये सब उस समय के पाठकों के लिए बेहद नया और रोमांचक अनुभव था।
विखवंडी और ड्रैगन फ्लाई जैसे नए विलेन कहानी में ताज़गी भर देते हैं। ड्रैगन फ्लाई की ऐसी लार जो किसी भी चीज़ को पिघला सकती है और विखवंडी की परमाणु ऊर्जा सोख लेने की क्षमता हमारे नायकों के लिए असली चुनौती बन जाती है और कहानी को और भी दिलचस्प बना देती है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration):
‘सूरमा’ का चित्रांकन राज कॉमिक्स के दिग्गज कलाकारों ने किया है, और यह बात हर पन्ने पर साफ़ नज़र आती है। एक्शन सीन जिस तरह से पूरे पेज पर फैलते हैं और पात्रों के चेहरे के भाव जिस तरह उभरकर आते हैं, वे कहानी को सचमुच ज़िंदा कर देते हैं। खासतौर पर नागराज के सांपों का चित्रण और परमाणु के परमाणु-ब्लास्ट वाले दृश्य काफी डिटेल और दमदार लगते हैं। दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों, जैसे इंडिया गेट, को बैकग्राउंड में दिखाकर कहानी को एक यथार्थवादी एहसास दिया गया है। 90 के दशक की कलरिंग स्टाइल आज भी पढ़ते समय पाठकों को सीधा अपने बचपन और पुरानी यादों की दुनिया में ले जाती है।
लेखन और संवाद:
संजय गुप्ता और उनकी टीम द्वारा लिखा गया यह कॉमिक्स शानदार संवादों से भरपूर है। नागराज के जोशीले और वीरतापूर्ण शब्द, और परमाणु की सोच-समझकर कही गई तार्किक बातें, कहानी की रफ्तार को बनाए रखती हैं। “परमाणु! तुमने मुझे प्रोफेसर का हमलावर कहा… यह सच नहीं है!” जैसे संवाद कहानी में तनाव और भावनात्मक गहराई दोनों बढ़ा देते हैं। पूरी कहानी तेज़ी से आगे बढ़ती है और कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि कहानी सुस्त हो रही है या खिंच रही है।
सामाजिक और नैतिक संदेश:

हालाँकि ‘सूरमा’ एक काल्पनिक सुपरहीरो कॉमिक्स है, लेकिन इसके अंदर कई गहरे और ज़रूरी संदेश छिपे हुए हैं। यह जैविक युद्ध (Biological Warfare) जैसे खतरों की ओर इशारा करती है, जो आज के दौर में भी एक बड़ी वैश्विक चिंता है। कहानी यह भी सिखाती है कि असली ताक़त एकता में होती है। जब तक नागराज और परमाणु अलग-अलग लड़ते रहे, वे कमजोर साबित हुए, लेकिन जैसे ही सच्चाई सामने आई और दोनों साथ आए, उन्होंने मिलकर दुनिया पर मंडरा रहे सबसे बड़े खतरे को टाल दिया।
नागराज का खुद को खतरे में डालकर ज़हर पीना और फिर उसी ज़हर को एंटी-वेनम में बदलना परोपकार की चरम सीमा को दिखाता है। यह खासतौर पर बच्चों को यह सीख देता है कि असली नायक वह नहीं होता जो सिर्फ़ जीतता है, बल्कि वह होता है जो दूसरों की जान बचाने के लिए हारने या अपनी जान तक देने को भी तैयार रहता है।
क्लाइमेक्स और अंत (Climax and Conclusion):

कॉमिक्स का क्लाइमेक्स बेहद रोमांचक होने के साथ-साथ भावनात्मक भी है। जब वह विशाल कोशिका (Giant Cell) पूरी दिल्ली को अपनी चपेट में लेने लगती है, तब परमाणु अपनी ‘श्रिंक’ शक्ति का इस्तेमाल करके उसके केंद्र में प्रवेश करता है। वहीं दूसरी तरफ नागराज डॉक्टर वायरस की प्रयोगशाला में पहुँचकर उसे मजबूर करता है कि वह एंटी-वेनम बनाने की पूरी विधि बताए। नागराज का खुद को खत्म करने की हद तक जाकर उस कोशिका को नष्ट करना पाठकों की आँखें नम कर देता है और कहानी को भावनात्मक ऊँचाई पर पहुँचा देता है।
अंत में वेद कालजयी जैसे रहस्यमयी और दिव्य पात्र का आगमन और नागराज को पुनर्जीवन देना कहानी को एक सुखद, उम्मीद भरे और रहस्यमयी मोड़ पर समाप्त करता है। यह अंत इस बात का संकेत देता है कि जब उद्देश्य सच्चा हो, तो अच्छाई की रक्षा के लिए दैवीय शक्तियाँ भी साथ खड़ी हो जाती हैं।
समीक्षात्मक निष्कर्ष:

‘सूरमा’ राज कॉमिक्स के खजाने का एक अनमोल रत्न है। यह एक ऐसा कम्प्लीट एंटरटेनमेंट पैकेज है जिसमें भरपूर एक्शन, सस्पेंस, विज्ञान और भावनाएँ एक साथ मिलती हैं।
सकारात्मक पक्ष:
दो बड़े और लोकप्रिय सुपरहीरो का शानदार तालमेल इस कहानी को खास बनाता है। जैविक युद्ध और वैज्ञानिक प्रयोग जैसे विषय इसे बाकी आम कॉमिक्स से अलग पहचान देते हैं। कहानी में शुरू से लेकर अंत तक सस्पेंस और ड्रामा बना रहता है, जिसे बेहतरीन आर्टवर्क और खासतौर पर विशाल कोशिका वाले दृश्यों ने और भी भव्य और रोमांचक बना दिया है।
नकारात्मक पक्ष:
कुछ जगहों पर कहानी के वैज्ञानिक तर्क थोड़े ज्यादा काल्पनिक लग सकते हैं, लेकिन कॉमिक्स की दुनिया में फिक्शन को जगह देना ज़रूरी भी होता है। वहीं कुछ पाठकों को 90 पन्नों की लंबाई थोड़ी ज़्यादा लग सकती है, लेकिन कहानी की पकड़ ऐसी है कि इसे एक ही बार में खत्म करने का मन करता है।
अंतिम निर्णय:
अगर आप भारतीय कॉमिक्स के प्रशंसक हैं या अपने बचपन की यादों को फिर से ताज़ा करना चाहते हैं, तो ‘सूरमा’ आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए। यह कॉमिक्स हमें याद दिलाती है कि क्यों नागराज और परमाणु को भारतीय सुपरहीरो जगत के मजबूत स्तंभ माना जाता है। यह कहानी सिर्फ़ दुश्मनों को हराने की नहीं, बल्कि अपनी गलतफहमियों पर जीत हासिल करके मानवता की सेवा करने की है।
आज के मार्वल और डीसी के दौर में भी ‘सूरमा’ जैसी देसी कहानियाँ अपनी मौलिकता और भारतीय माहौल की वजह से एक अलग और खास पहचान रखती हैं। यह राज कॉमिक्स के स्वर्ण युग का बेहतरीन उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बना रहेगा।
रेटिंग: 4.5/5
