राज कॉमिक्स की ‘राजनगर रक्षक’ श्रृंखला का तीसरा भाग ‘राजनगर रीबूट’ (Rajnagar Reboot) भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में एक ऐसी कहानी है, जो विज्ञान, तकनीक और इंसानी भावनाओं के बीच चल रहे खतरनाक टकराव को खुलकर सामने रखती है। यह कॉमिक सिर्फ सुपर कमांडो ध्रुव और इंस्पेक्टर स्टील के फैंस के लिए ही नहीं, बल्कि उन पाठकों के लिए भी खास है जो आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीनों की बढ़ती ताकत को लेकर सोचते हैं।
संजय गुप्ता द्वारा प्रस्तुत और स्तुति मिश्रा द्वारा लिखी गई यह कहानी एक ऐसे भविष्य की झलक दिखाती है, जहाँ इंसान अपनी ही बनाई मशीनों का गुलाम बनने की कगार पर खड़ा है।
कथानक और भूमिका (Plot and Premise)
‘राजनगर रीबूट’ की कहानी ठीक वहीं से शुरू होती है, जहाँ ‘हाइबरनेशन’ खत्म हुई थी। पूरी श्रृंखला एक गैर-रेखीय (Non-linear) अंदाज़ में आगे बढ़ती है, जिसमें वर्तमान की तबाही और अतीत की उन घटनाओं को साथ-साथ दिखाया जाता है, जिन्होंने राजनगर को इस खौफनाक हालात तक पहुँचा दिया।

वर्तमान समय में राजनगर पूरी तरह बदल चुका है। यह अब इंसानों का शहर नहीं रहा, बल्कि मशीनों और रोबोटों के कब्जे में चला गया है, जिसे ‘हाइबरजोन’ (Hiberzone) कहा जाता है। कभी शहर का रक्षक रहा इंस्पेक्टर स्टील अब वैसा कानून का रखवाला नहीं रहा, जैसा लोग उसे जानते थे। उसके भीतर का ‘अमर’—यानी उसका इंसानी पक्ष—कहीं खो चुका है और उसका मशीनी दिमाग अब मशीनों को इंसानों से ऊपर मानने लगा है।
दूसरी ओर, अतीत की कहानी यह दिखाती है कि कैसे श्वेता (चंडिका) द्वारा बनाए गए कॉम्बैट ड्रोन्स और ‘लाइव मेटल’ तकनीक ने धीरे-धीरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा नियंत्रण जमा लिया।
कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आता है जब ध्रुव, चंडिका और ब्लैक कैट को एक ट्रक विस्फोट से बचाता है। यह दृश्य सिर्फ ध्रुव की फुर्ती और बहादुरी नहीं दिखाता, बल्कि यह भी साबित करता है कि वह तकनीक के बनाए जाल को समझने और तोड़ने की काबिलियत रखता है।
पात्रों का गहरा विश्लेषण (Deep Character Analysis)
इंस्पेक्टर स्टील: रक्षक से तानाशाह तक का सफर
इस कॉमिक का सबसे जटिल और असरदार किरदार इंस्पेक्टर स्टील है। स्टील दरअसल ‘अमर’ नाम के एक ईमानदार पुलिस अफसर के दिमाग और एक बेहद ताकतवर मशीन के शरीर का मेल है। ‘राजनगर रीबूट’ में उसका यह बदलाव साफ दिखाई देता है। अब वह यह तर्क देने लगता है कि इंसान अपनी भावनाओं की वजह से पक्षपाती और भ्रष्ट हो जाते हैं, जबकि मशीनें निष्पक्ष और बिना गलती के काम करती हैं।

स्टील और ध्रुव के बीच होने वाली बहस इस कॉमिक का दिल है। जब स्टील ध्रुव से कहता है, “कानून के सच्चे सिपाहियों की तुम्हारे जैसी हेवी फैन फॉलोइंग नहीं होती,” तो वह सिर्फ ध्रुव पर नहीं, बल्कि पूरी सुपरहीरो संस्कृति पर सवाल उठा देता है। स्टील का यह एंटी-हीरो या संभावित विलेन वाला रूप पाठकों को चौंका देता है, क्योंकि अब वह शांति बनाए रखने के बजाय हर चीज़ को अपने नियंत्रण में रखना चाहता है।
सुपर कमांडो ध्रुव: मानवता का अंतिम रक्षक
इस कहानी में ध्रुव एक रणनीतिकार और मानवता की आखिरी उम्मीद के रूप में सामने आता है। जहाँ पूरी दुनिया मशीनों के सामने झुकती जा रही है, वहीं ध्रुव अपने दिमाग, साहस और इंसानी मूल्यों के सहारे खड़ा रहता है। मशीनों को लेकर उसका शक सही साबित होता है, जब वह देखता है कि सुरक्षा के नाम पर बनाई गई तकनीक ही अब विनाश का कारण बन चुकी है।
चंडिका (श्वेता) और ब्लैक कैट के प्रति उसकी जिम्मेदारी, और उसका एक-नारी व्रत वाला स्वभाव, उसे सिर्फ ताकतवर नहीं बल्कि नैतिक रूप से भी एक आदर्श नायक बनाए रखता है।
नताशा और ब्लैक कैट: वफादारी और द्वंद्व
ग्रैंडमास्टर रोबो की बेटी नताशा और ध्रुव की पुरानी साथी ब्लैक कैट (रिचा) की भूमिकाएँ इस भाग में और गहरी हो जाती हैं। नताशा का एक ओर रोबो आर्मी की तरफ झुकाव और दूसरी ओर ध्रुव के लिए उसकी चिंता उसके किरदार को ग्रे शेड में खड़ा कर देती है।
वहीं ब्लैक कैट का बेखौफ एक्शन और उसकी साहसी सोच कहानी में लगातार रोमांच बनाए रखती है। ध्रुव को बचाने के लिए उसका समर्पण और रोबोटिक गुर्गों—जैसे रोबोटिक टेडी बियर—से उसकी भिड़ंत पढ़ने में बेहद मज़ेदार और थ्रिलिंग लगती है।
लेखन और संवाद (Script and Dialogues)

स्तुति मिश्रा का लेखन इस श्रृंखला में सचमुच असर छोड़ता है। उन्होंने विज्ञान और तकनीक से जुड़े शब्दों (जैसे AI, एनालिटिकल वेपन्स, DNA मैचिंग) का खुलकर इस्तेमाल किया है, जिससे कहानी का माहौल किसी ‘साइबर-पंक’ (Cyberpunk) फिल्म जैसा महसूस होता है। हाँ, कुछ पाठकों को यह अंदाज़ थोड़ा ज़्यादा समझाने वाला या जरूरत से ज्यादा तकनीकी लग सकता है, लेकिन राजनगर जैसी हाई-टेक और भविष्य की दुनिया के लिए यह तरीका काफी हद तक सही बैठता है। यह सब मिलकर उस शहर के डरावने और मशीनों से भरे माहौल को मजबूत करता है।
संवादों की बात करें तो यहाँ गंभीरता साफ झलकती है। ध्रुव और स्टील के बीच होने वाली तकरार सिर्फ दो किरदारों की बहस नहीं है, बल्कि दो बिल्कुल अलग सोच और विचारधाराओं की टक्कर है। स्टील का यह कहना कि “मशीनें इंसानों की मानसिकता को अपने कंट्रोल में ले लेती हैं,” आज के दौर में हमारी इंटरनेट और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता को बहुत सटीक तरीके से दिखाता है। ये संवाद कहानी को सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रखते, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करते हैं।
कला और चित्रांकन (Art and Graphics)
हेमंत कुमार और सुशांत पंडा का आर्टवर्क राज कॉमिक्स की पारंपरिक शान को पूरी तरह बरकरार रखता है। कॉमिक्स में इस्तेमाल किए गए रंग बहुत गहरे और जीवंत हैं, जो हर सीन को ज़िंदा सा बना देते हैं। खासकर ‘हाइबरजोन’ के अंधेरे, नीले और बैंगनी रंगों वाले दृश्य एक उदास लेकिन भविष्यवादी माहौल रचते हैं, जो कहानी के मूड के साथ पूरी तरह मेल खाते हैं।

पात्रों के चेहरे के हाव-भाव भी कहानी की भावना को अच्छे से दिखाते हैं—स्टील की आँखों में जलती हुई लाल रोशनी उसकी बेरहमी और पागलपन को दर्शाती है, वहीं ध्रुव के चेहरे की गंभीरता उसके भीतर चल रहे संघर्ष को सामने लाती है। धमाकों और एक्शन सीन वाले पैनल बड़े और डिटेल में बनाए गए हैं, जिससे पाठक खुद को कहानी के बीचों-बीच महसूस करता है। हालाँकि, कुछ जगहों पर ध्रुव और दूसरे किरदारों के चेहरे की बनावट में हल्की असंगति (Consistency) नज़र आती है, जिसे कुछ समीक्षकों ने भी महसूस किया है।
प्रमुख थीम: इंसान बनाम मशीन (The Core Theme)

‘राजनगर रीबूट’ का सबसे बड़ा संदेश यही है कि तकनीक कभी भी इंसानी सोच और विवेक की जगह नहीं ले सकती। डॉ. अनीस रज़ा और श्वेता ने जिस ‘सुरक्षा कवच’ की कल्पना की थी, वही धीरे-धीरे एक ‘पिंजरा’ बन जाता है। कहानी साफ तौर पर यह चेतावनी देती है कि अगर हम अपनी सुरक्षा और फैसलों की पूरी जिम्मेदारी मशीनों और एल्गोरिदम को सौंप देंगे, तो हम अपनी आज़ादी खो बैठेंगे। स्टील का ‘रीबूट’ होना असल में कानून और इंसानियत के बीच बने संतुलन के टूटने का प्रतीक है।
समीक्षात्मक मूल्यांकन (Critical Evaluation)

खूबियाँ:
राज कॉमिक्स की इस कहानी में इंस्पेक्टर स्टील जैसे पुराने और जाने-पहचाने हीरो को लगभग खलनायक जैसी भूमिका में देखना पाठकों के लिए एक साहसी और नया अनुभव है। यह पारंपरिक सुपरहीरो कहानियों की सीमाओं को तोड़ता है और कुछ अलग दिखाने की कोशिश करता है। कहानी की गैर-रेखीय शैली, जिसमें अतीत और वर्तमान साथ-साथ चलते हैं, अंत तक सस्पेंस बनाए रखती है और पाठक को कहानी से जुड़े रहने पर मजबूर करती है। इसके अलावा, एक काल्पनिक दुनिया के ज़रिये आज के समय में AI और मशीनों के बढ़ते असर पर किया गया सामाजिक कटाक्ष इस कॉमिक्स को और भी गंभीर और सोचने लायक बनाता है।
कमियाँ:
कहानी की जटिलता उन पाठकों के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है, जो ‘हाइबरनेशन’ या ‘राजनगर रक्षक’ के पुराने भागों से परिचित नहीं हैं। ऐसे पाठकों को किरदारों के बैकग्राउंड और पिछली घटनाओं को समझने में थोड़ा समय लग सकता है। इसके साथ ही, कहानी की गति (Pacing) भी कुछ जगहों पर धीमी महसूस होती है, जहाँ बहुत ज्यादा तकनीकी बातें और संवाद मूल रोमांच की रफ्तार को कम कर देते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
कुल मिलाकर, ‘राजनगर रीबूट’ सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं, बल्कि एक चेतावनी की तरह सामने आती है। यह राज कॉमिक्स की उन कहानियों में से है, जो सुपरहीरो के पारंपरिक ढांचे से बाहर निकलकर कुछ नया और अलग करने की कोशिश करती हैं। ध्रुव की समझदारी और स्टील का ताकत के नशे में डूबा पागलपन मिलकर एक जबरदस्त ड्रामा रचते हैं। अगर आप राजनगर के विनाश और उसके ‘पुनर्जन्म’ की इस रोमांचक कहानी का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो यह कॉमिक्स आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए।
यह भाग कहानी को एक ऐसे ‘क्लिफहैंगर’ (Cliffhanger) पर छोड़ता है, जहाँ ‘राजनगर रीलोडेड’ (Rajnagar Reloaded) का इंतज़ार अपने आप ही शुरू हो जाता है। राजनगर का भविष्य क्या होगा? क्या ध्रुव मशीनों के इस साम्राज्य को जड़ से उखाड़ पाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले भागों में छिपे हैं, लेकिन ‘रीबूट’ ने उस बड़े महासंग्राम की नींव बहुत मज़बूती से रख दी है।
रेटिंग: 4/5
