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Home » क्या हर दुश्मन वाकई दुश्मन होता है? | सुपर कमांडो ध्रुव की क्लासिक कॉमिक ‘दुश्मन’ की पूरी कहानी और विश्लेषण
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क्या हर दुश्मन वाकई दुश्मन होता है? | सुपर कमांडो ध्रुव की क्लासिक कॉमिक ‘दुश्मन’ की पूरी कहानी और विश्लेषण

विदूषक की सनक, नताशा का चौंकाने वाला मोड़ और अनुपम सिन्हा की लेजेंडरी आर्ट—जानिए क्यों ‘दुश्मन’ आज भी ध्रुव फैंस की फेवरेट कॉमिक है।
ComicsBioBy ComicsBio6 February 202607 Mins Read
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Super Commando Dhruv vs Vidushak | Dushman Raj Comics Full Review & Analysis
सुपर कमांडो ध्रुव का वह मिशन जहाँ दुश्मन सिर्फ बाहर नहीं, अंदर भी छुपा है—राज कॉमिक्स की क्लासिक ‘दुश्मन’।
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‘दुश्मन’ (Dushman) राज कॉमिक्स का एक ऐसा विशेषांक है, जो सिर्फ सुपर कमांडो ध्रुव के फैंस के लिए ही नहीं, बल्कि कॉमिक्स आर्ट को पसंद करने वालों के लिए भी एक यादगार कृति है। जोली सिन्हा की दमदार कहानी और अनुपम सिन्हा के शानदार चित्रों से सजी यह कॉमिक ध्रुव और उसके सबसे खतरनाक दुश्मनों में से एक विदूषक के बीच की जबरदस्त टक्कर को दिखाती है।

कहानी का सारांश:

कहानी की शुरुआत राजनगर के एक हाई सिक्योरिटी मानसिक अस्पताल से होती है, जहाँ विदूषक जैसे खतरनाक अपराधी को बंद करके रखा गया है। विदूषक कोई आम अपराधी नहीं है; वह एक ऐसा साइकोपैथ है जिसके लिए अपराध करना किसी खेल से कम नहीं और हँसना उसकी आदत है। अपनी चालाकी और दिमागी खेलों से वह डॉक्टर चड्ढा और सुरक्षा गार्डों को धोखा देकर वहां से फरार हो जाता है। विदूषक का भाग जाना राजनगर के लिए एक बहुत बड़े खतरे का संकेत बन जाता है।

उधर राजनगर में अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है। दो माफिया गिरोह—हारून शाह और एक अज्ञात गैंग—के बीच खून-खराबे वाली गैंगवार चल रही है। सुपर कमांडो ध्रुव, जो कानून और व्यवस्था का मजबूत सहारा है, इस हालात को लेकर काफी चिंतित है। वह अपने पिता, कमिश्नर राजन, के साथ मिलकर इन अपराधों की जड़ तक पहुँचने की कोशिश करता है। इसी दौरान ध्रुव की बहन श्वेता, जो गुप्त रूप से चंडिका भी है, अपने कॉलेज के दोस्त शांतनु के अजीब व्यवहार को लेकर शक में पड़ जाती है।

कहानी में असली मोड़ तब आता है जब विदूषक को हारून शाह के पास मौजूद करोड़ों रुपये की एक कीमती पेंटिंग के बारे में पता चलता है। विदूषक उस पेंटिंग को हासिल करना चाहता है, लेकिन उसका तरीका हमेशा की तरह बेहद खतरनाक और सनकी होता है। वह हारून शाह की आलीशान नाव सी हैरियर (Sea Harrier) पर हमला कर देता है। इस हमले के दौरान ध्रुव और चंडिका दोनों ही अलग-अलग रास्तों से वहाँ पहुँचते हैं।

पूरी कॉमिक के दौरान एक सस्पेंस बना रहता है कि क्या ध्रुव को चंडिका की असली पहचान, यानी श्वेता, के बारे में पता चल पाएगा या नहीं। इसी बीच विदूषक अपनी घातक चाल चलते हुए ध्रुव को ब्लैक पियर (Black Pier) नाम की जगह पर एक कांच के गोले में फंसा देता है, जिसमें धीरे-धीरे हंसाने वाली गैस (Laughing Gas) भरी जा रही होती है। इस दौरान विदूषक का पालतू, डरावना और विशालकाय प्राणी घिघ्घा भी ध्रुव और चंडिका के लिए एक बड़ी मुसीबत बन जाता है। अंत में नताशा की एंट्री कहानी को एक नया मोड़ देती है। जो कभी ध्रुव की कट्टर दुश्मन रही है, वही यहाँ कहानी के शीर्षक ‘दुश्मन’ को एक अलग ही मतलब देती है। नताशा इस बार रक्षक की भूमिका में नजर आती है, जो श्वेता की पहचान बचाती है और ध्रुव की मदद करती है।

पात्रों का गहरा विश्लेषण

सुपर कमांडो ध्रुव: ध्रुव की सबसे बड़ी ताकत उसकी वैज्ञानिक सोच और उसकी मजबूत इच्छाशक्ति है। इस कॉमिक में भी, जब वह मौत के करीब होता है, तब भी वह घबराता नहीं है। वह अपकेंद्रित्र बल (Centrifugal Force) का इस्तेमाल कर कांच के गोले से बाहर निकलने का तरीका खोजता है। यहाँ ध्रुव सिर्फ एक हीरो नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार भाई और अपने कर्तव्य को निभाने वाला सच्चा नायक बनकर सामने आता है।

विदूषक (Raj Comics का जोकर): विदूषक का किरदार डीसी कॉमिक्स के जोकर से प्रेरित लगता जरूर है, लेकिन उसकी अपनी एक देसी पहचान है। उसके गैजेट्स—जैसे एक्सप्लोसिव रिंग्स और स्मोक बॉम्ब्स—उसे एक खतरनाक और तकनीकी रूप से मजबूत अपराधी बनाते हैं। उसकी हँसी के पीछे छिपा पागलपन पाठक के मन में डर और बेचैनी दोनों पैदा करता है।

चंडिका / श्वेता: श्वेता का चंडिका के रूप में सामने आना भारतीय कॉमिक्स में नारी शक्ति की एक मजबूत मिसाल है। इस कहानी में वह ध्रुव के साथ बराबरी से लड़ती है। उसकी खुद की तकनीक और उसका स्टार-लाइनर उसे एक आधुनिक और स्मार्ट योद्धा की पहचान देते हैं।

नताशा: इस कॉमिक की सबसे बड़ी सरप्राइज नताशा है। वह ध्रुव की पुरानी दुश्मन होने के बावजूद यहाँ एक अलग ही रूप में नजर आती है। हारून शाह के गिरोह से जुड़ी होने के बाद भी वह ध्रुव और श्वेता की मदद करती है। उसका यह दोहरा और जटिल स्वभाव कहानी को और गहराई देता है।

चित्रांकन और कला (Artwork and Illustration)

अनुपम सिन्हा को राज कॉमिक्स का लेजेंड यूँ ही नहीं कहा जाता, और दुश्मन में उनका काम इसका पूरा सबूत देता है। एक्शन सीन्स के दौरान पैनलों का लेआउट बेहद तेज और गतिशील लगता है। चाहे ध्रुव की मोटरसाइकिल की रफ्तार हो या विदूषक की सनकी चालें, हर सीन पन्नों पर ज़िंदा महसूस होता है। विदूषक के चेहरे पर छाया पागलपन और ध्रुव की जानी-पहचानी गंभीरता को अनुपम जी ने बेहद बारीकी से उकेरा है। उस दौर के हिसाब से रंगों का इस्तेमाल, खासकर रात के दृश्य और समुद्र में होने वाली लड़ाई के दौरान रोशनी और परछाइयों (Light and Shadow) का संतुलन, आज भी तारीफ के काबिल है।

पटकथा और संवाद (Script and Dialogues)

जोली सिन्हा ने इस कहानी को बेहद सस्पेंस के साथ आगे बढ़ाया है। कॉमिक्स का लगभग हर पेज एक नया सवाल खड़ा करता है, जो पाठक को आख़िरी पन्ने तक बांधे रखता है। संवादों में खास असर है। विदूषक के डायलॉग जहाँ डर पैदा करते हैं और हल्का व्यंग्य भी लिए होते हैं, वहीं ध्रुव के संवाद सोचने पर मजबूर करने वाले और प्रेरणा देने वाले हैं।

खास तौर पर, कहानी के अंत में जिस तरह से ‘दुश्मन’ शब्द का मतलब समझाया गया है, वह काफी दार्शनिक है। यहाँ यह दिखाया गया है कि कई बार एक दुश्मन भी दोस्त से ज़्यादा काम आ सकता है, और कभी-कभी जिसे हम अपना दोस्त मानते हैं, वही असल में दुश्मन बन जाता है।

कॉमिक्स के प्रमुख आकर्षण

ध्रुव द्वारा अपनी मोटरसाइकिल के पुर्जों का चतुराई से इस्तेमाल और स्केटिंग शूज की तेज़ फुर्ती हमेशा से बच्चों के लिए रोमांच का बड़ा कारण रही है, जो उसकी तकनीकी समझ और दिमागी ताकत को दिखाती है। कहानी के बीच में मौजूद रहस्यमयी पेंटिंग एक बेहतरीन मैकगफिन (MacGuffin) का उदाहरण है, जो पूरी कहानी को गति देता है और पाठक की जिज्ञासा को आख़िर तक बनाए रखता है। अंत में क्लाइमेक्स के दौरान ध्रुव और विदूषक की आमने-सामने की भिड़ंत, और उसमें नताशा का दखल, न सिर्फ नाटकीय असर को चरम पर ले जाता है, बल्कि पूरी कहानी को एक संतोषजनक और तार्किक अंत भी देता है।

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

‘दुश्मन’ जैसी कॉमिक्स ने भारतीय बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाई। यह सिर्फ एक सुपरहीरो की कहानी नहीं थी, बल्कि इसके अंदर विज्ञान, तर्क और नैतिकता के कई सबक छुपे हुए थे। ध्रुव का यह वाक्य कि “अपराध कभी नहीं जीतता” बच्चों के कोमल मन पर गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ता है।

समीक्षा (Critical Review)

अगर ध्यान से देखा जाए, तो ‘दुश्मन’ में कुछ कमियाँ भी नज़र आती हैं, जैसे विदूषक का बार-बार जेल से भाग निकलना थोड़ा अविश्वसनीय लग सकता है। लेकिन कॉमिक्स की दुनिया में सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ (Suspension of Disbelief) को मानना जरूरी होता है।

इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताकत इसकी शानदार पेसिंग (Pacing) है। कहानी कहीं भी ढीली नहीं पड़ती। हर 5–6 पन्नों के बाद ध्रुव के सामने एक नया खतरा खड़ा हो जाता है। घिघ्घा जैसा किरदार शारीरिक ताकत का प्रतीक है, जबकि विदूषक दिमागी चालाकी और मानसिक कुटिलता को दर्शाता है। इन दोनों के बीच ध्रुव का संतुलन बनाए रखना कहानी को और भी रोचक बना देता है।

निष्कर्ष:
राज कॉमिक्स की ‘दुश्मन’ एक सच्ची क्लासिक कृति है। यह उस दौर की याद दिलाती है जब कॉमिक्स की खुशबू और उनके पन्ने पलटने का रोमांच ही सब कुछ हुआ करता था। अनुपम सिन्हा और जोली सिन्हा की जोड़ी ने इस विशेषांक को एक यादगार अनुभव बना दिया है।

यह कॉमिक हमें सिखाती है कि असली ताकत सिर्फ शारीरिक बल में नहीं, बल्कि बुद्धि और सही समय पर लिए गए फैसलों में होती है। साथ ही, यह दोस्ती, दुश्मनी और पहचान की गोपनीयता जैसे जटिल रिश्तों को भी खूबसूरती से दिखाती है। अगर आप ध्रुव के फैन हैं, तो ‘दुश्मन’ आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए। और अगर आप नए पाठक हैं, तो ध्रुव की दुनिया में कदम रखने के लिए यह एक बेहतरीन शुरुआत साबित हो सकती है।

अंतिम रेटिंग: 4.5/5 ⭐

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